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एक खतरनाक कॉकटेल है विचारों के साथ मिश्रित खबरें : CJI एनवी रमना
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना ने बुधवार को कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र सिर्फ निडर और स्वतंत्र प्रेस के साथ ही फल-फूल सकता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) एनवी रमना ने बुधवार को कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र सिर्फ निडर और स्वतंत्र प्रेस के साथ ही फल-फूल सकता है। विचारों के साथ मिश्रित खबरें एक खतरनाक कॉकटेल है। सीजेआई ने पत्रकारों को समाचार में वैचारिक पूर्वाग्रहों की प्रवृत्ति के खिलाफ आगाह भी किया। साथ ही सलाह दी कि तथ्यात्मक रिपोर्टों को व्याख्याओं और विचारों से अलग रखना चाहिए।
मुंबई प्रेस क्लब के रेड इंक्स अवॉर्ड में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये दिये संबोधन में सीजेआई ने कहा, आजकल की रिपोर्टिंग में वैचारिक पुट अधिक होता है। खबरों में पक्षपात दिखाई देता है। खबरों का विचारों से यह मिश्रण बेहद खतरनाक है।
सीजेआई ने विजेताओं को बधाई देते हुए कहा, एक मजबूत लोकतंत्र के लिए पत्रकारिता और सच्ची रिपोर्ट जरूरी है। समाचारों को एक निश्चित रंग देने के लिए तथ्यों की चेरी लगाना अफसोसजनक है। उन्होंने कहा, लोकतंत्र के लिए संघर्षपूर्ण राजनीति और प्रतिस्पर्धी पत्रकारिता के कॉकटेल से अधिक घातक कुछ नहीं हो सकता। सीजेआई ने कहा, अपने आप को किसी विचारधारा या राज्य द्वारा सह देना आपदा का एक नुस्खा है।
उन्होंने कहा, पत्रकार एक मायने में न्यायाधीशों की तरह होते हैं। आप जिस विचारधारा को मानते हैं और जिस विश्वास को आप प्रिय मानते हैं, उसके बावजूद आपको उनसे प्रभावित हुए बिना अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। आपको पूरी और सटीक तस्वीर देने के लिए केवल तथ्यों की रिपोर्ट करनी चाहिए।
सीजेआई ने अदालत के फैसलों की चर्चा और व्याख्या की बढ़ती प्रवृत्ति के बारे में भी बात की। विशेष रूप उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी, न्यायपालिका पर हमले, दूसरों के बीच में दखल देना जैसे मुद्दे को उठाया और कहा कि प्रेस को न्यायपालिका में विश्वास दिखाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया ने रिपोर्टिंग को बदल दिया है और समाचार प्रवाह आसानी से सुलभ है, लेकिन चिंताजनक बात यह है कि गलत खबरें भी तेजी से बढ़ रही हैं और एक बार प्रकाशित होने के बाद इसे वापस लेना मुश्किल होता है।
उन्होंने कहा, टीआरपी की दौड़ में खबरें दिखाने से पहले सत्यापन के महत्वपूर्ण पत्रकारिता सिद्धांत का पालन नहीं किया जा रहा है। इससे गलत रिपोर्टिंग होती है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विपरीत, ‘यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जवाबदेह ठहराना लगभग असंभव है, भले ही वे सबसे अपमानजनक और मानहानिकारक सामग्री की मेजबानी करते हों। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के जरिए ऐसी खबरें चंद सेकंड में ही बहुत तेजी से फैल जाती हैं।
CJI ने मीडिया से इस तरह के ‘खतरे’ के निपटने के लिए स्वैच्छिक समाधान के साथ आगे आने को कहा।
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