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DNPA कॉन्क्लेव 2026: ग्लोबल लीडर्स ने AI के असर व डिजिटल न्यूज के भविष्य पर की चर्चा
डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में मीडिया, टेक्नोलॉजी और पॉलिसी से जुड़े बड़े लीडर्स ने हिस्सा लिया और तेजी से बदलते डिजिटल दौर में पत्रकारिता के भविष्य पर खुलकर चर्चा की।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 hour ago
डिजिटल न्यूज़ पब्लिशर्स एसोसिएशन (DNPA) कॉन्क्लेव 2026 में मीडिया, टेक्नोलॉजी और पॉलिसी से जुड़े बड़े लीडर्स ने हिस्सा लिया और तेजी से बदलते डिजिटल दौर में पत्रकारिता के भविष्य पर खुलकर चर्चा की। इस साल कॉन्क्लेव की थीम थी- “Rewriting the Playbook for a Resilient Digital Future” यानी मजबूत डिजिटल भविष्य के लिए नए नियम तय करना। पूरे कार्यक्रम में भरोसा, इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रेगुलेशन और टिकाऊ ग्रोथ जैसे मुद्दों पर गंभीर मंथन हुआ। इसे भारत के डिजिटल न्यूज़ इकोसिस्टम के लिए एक अहम मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।
कार्यक्रम की शुरुआत सुनील कांत मुंजल, चेयरमैन, Hero Enterprises के कीनोट संबोधन से हुई। उन्होंने बताया कि डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क के लिए लंबी अवधि का निवेश अभी भी सीमित क्यों है। उनके मुताबिक यह सेक्टर भले ही नया हो, लेकिन सूचना के प्रसार में इसकी भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि किसी भी मीडिया संस्थान के लिए दर्शकों का भरोसा जीतना सबसे जरूरी है, क्योंकि यही उसकी लंबी उम्र की कुंजी है। निवेशकों के नजरिए से उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या डिजिटल न्यूज़ कंपनियां अब भी सिर्फ विज्ञापन पर ज्यादा निर्भर हैं या फिर सब्सक्रिप्शन और इवेंट जैसे दूसरे विकल्पों पर भी काम कर रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 20 सालों में निवेशकों का नजरिया काफी बदला है और अब वे टिकाऊ और बड़े स्तर पर बढ़ सकने वाले बिजनेस मॉडल को ज्यादा महत्व देते हैं।
पहले पैनल डिस्कशन का विषय था- “From reach to results, influence vs performance: Where does digital news fit in the new media equation?” इस चर्चा में अश्विन पद्मनाभन (डब्ल्यूपीपी मीडिया), कार्तिक शर्मा (ओमनीकॉम मीडिया ग्रुप इंडिया), विनोद ठडानी (डेंट्सू मीडिया और आईप्रॉस्पेक्ट) और संतोष पी कुमार (इन्नोसीन इंडिया) शामिल हुए। चर्चा का संचालन हेमंत जैन (लोकमत मीडिया ग्रुप) ने किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इंडस्ट्री किसी नजरिए, प्रोडक्ट या मापन (मेजरमेंट) की समस्या से जूझ रही है?
कार्तिक शर्मा ने कहा कि मीडिया मापने के तरीके को और सटीक बनाने की जरूरत है, क्योंकि अभी भी कई क्लाइंट सिर्फ ‘इंप्रेशन’ के आधार पर मीडिया खरीदते हैं। उनका सुझाव था कि अब तय टारगेट रीच जैसे स्पष्ट मानकों की ओर बढ़ना चाहिए, ताकि बेहतर नतीजे मिल सकें। वहीं विनोद ठडानी ने कहा कि “परफॉर्मेंस” का मतलब हर पब्लिशर और हर संदर्भ में अलग-अलग होता है, इसलिए एक समान परिभाषा तय करना अभी भी चुनौती है।
दूसरे पैनल की थीम थी- “The new economics of content in the AI age” इसमें एआई के दौर में कंटेंट की कमाई और विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इस सत्र में तोषित पाणिग्रही (टोलबिट), गौथमैन रगोथमन (सप्तऋषि), मार्कस पुसैट (मैग्नाइट), एरॉन रिग्बी (टैबूला) और भारत गुप्ता (टूबी एंड पूर्व सीईओ, जागरण न्यू मीडिया) शामिल हुए। इस चर्चा का संचालन पुनीत जैन, सीईओ, एचटी डिजिटल ने किया।
पैनलिस्ट्स ने माना कि AI पारंपरिक मॉडल को जरूर बदल रहा है, लेकिन इसके साथ नए मौके भी पैदा हो रहे हैं। AI कंटेंट बनाने और उसे लोगों तक पहुंचाने के तरीके को फिर से परिभाषित कर सकता है। जब यह सवाल पूछा गया कि क्या AI के जरिए अगले 12 महीनों में बड़ी कमाई संभव है, तो गौथमैन रगोथमन ने कहा कि एक साल का समय ठोस अनुमान लगाने के लिए कम हो सकता है। वहीं भारत गुप्ता ने कहा कि अब इकोसिस्टम सिर्फ कंटेंट खोजने और पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि कमाई के तरीके ज्यादा जटिल हो गए हैं। ऐसे में पब्लिशर्स को बदलते डिजिटल माहौल के हिसाब से अपनी रणनीति और प्रोडक्शन मॉडल में बदलाव करना होगा।
कुल मिलाकर, DNPA कॉन्क्लेव 2026 ने साफ संकेत दिया कि डिजिटल पत्रकारिता के सामने चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन अगर भरोसा, टेक्नोलॉजी और टिकाऊ बिजनेस मॉडल पर सही तरीके से काम किया जाए, तो इसका भविष्य मजबूत हो सकता है।
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