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आगरा की ऐतिहासिक श्रीरामबरात की ऑनलाइन कवरेज में हिन्दुस्तान ने मारी बाजी

 आगरा में भव्य रामलीला का आयोजन 30 दिन तक चलता है। प्रभु राम की बारात और जनकपुरी इस आयोजन को भव्यता और दिव्यता प्रदान करते हैं। इस दौरान पांच दिनों तक शहर इस महोत्सव में रम जाता है। इसमें कई करोड़ रुपये का खर्च होता है। उत्तर भारत की सबसे प्रमुख रामबारात के नाम से ख्यात आगरा की श्रीराम बारात को उत्तर प्रदेश की सबसे ब

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

 आगरा में भव्य रामलीला का आयोजन 30 दिन तक चलता है। प्रभु राम की बारात और जनकपुरी इस आयोजन को भव्यता और दिव्यता प्रदान करते हैं। इस दौरान पांच दिनों तक शहर इस महोत्सव में रम जाता है। इसमें कई करोड़ रुपये का खर्च होता है। उत्तर भारत की सबसे प्रमुख रामबारात के नाम से ख्यात आगरा की श्रीराम बारात को उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी राम बारात का खिताब भी मिल चुका है।

वैसे तो इस आयोजन की कवरेज आगरा के सभी अखबारों ने की पर हिन्दुस्तान ने इस कवरेज को ऑनलाइन भी अपने पाठकों को उपलब्ध कराया। आगरा के तमाम वॉट्सऐप ग्रुप्स पर हिन्दुस्तान की श्रीरामबरात की रिपोर्टिंग और फोटो गैलरी लगातार फॉरवर्ड होती रही। आगरा के स्थानीय संपादक अजय शुक्ला ने प्रिंट और ऑनलाइन के इंटिग्रेशन को जो अमली जामा पहनाया, ये उसी का सुखद परिणाम रहा। 

नीचे पढ़िए हिन्दुस्तान की कवरेज और देखिए फोटोगैलरी...

फोटोगैलरी: आगरा की रामबरात के नजारे

सोमवार से यह आयोजन शुरू हो चुका है और सोमवार शाम चली राम बारात लगातार चलते हुए मंगलवार दोपहर जनकपुरी पहुंच गई है। राम बारात में राम और उनके भाइयों को पहले हाथी पर लाया जाता था, लेकिन कुछ साल पहले से रथ का इस्तेमाल किया जाने लगा है। जनकपुरी की मेजबानी शहर के एक क्षेत्र को दी जाती है, उस जगह पर राजा जनक के लिए विशाल महल बनता है। तीन दिन तक वह क्षेत्र 'जनकपुरी' कहलाता है। इस दौरान पूरे इलाके की भव्य सजावट की जाती है, जिसे देखने के लिए रोजाना लाखों लोग आते हैं।

मर्यादा पुरुषोत्तम राम का स्वरूप दुनिया भर में आज भी प्रासंगिक है। उनके जैसा शिष्य, पुत्र, भाई, एक पत्नीव्रता पति, मित्र और अनेक मानवीय रिश्तों को पूरी गरिमा के साथ निभाने वाला कोई दूसरा चरित्र दुनिया के किसी और धर्म अथवा आख्यान में नही मिलता। दुनिया तमाम देशों में भी रामलीला होती है। इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर जैसे मुस्लिम धर्म प्रधान देशों में भी रामलीलाएं सभ्यता और संस्कृति का पर्याय बनी हुई हैं। राम के चरित्र के प्रति आस्था भारतीय जनमानस में गहरे तक बैठी हुई है।

रामलीला की एक विशेषता यह भी होती है कि इनमें कथानक और भाव तो रामायण के ही होते हैं किन्तु बोली, भाषा, पहनावा और अन्य क्रियाकलापों पर विभिन्न क्षेत्रों में उनकी स्पष्ट सांस्कृतिक छाप होती है।  किवदंति है कि त्रेता युग में श्री रामचंद्र जी के वनगमनोपरांत अयोध्यावासियों ने चौदह वर्ष की वियोगावधि राम की बाल लीलाओं का अभिनय कर बिताई थी। तभी से इस परंपरा का प्रचलन हुआ। जनश्रुति यह भी है कि रामलीला की अभिनय परंपरा के प्रतिष्ठापक गोस्वामी तुलसीदास हैं, इन्होंने हिंदी में जन मनोरंजनकारी नाटकों का अभाव पाकर इसका श्रीगणेश किया। इनकी प्रेरणा से अयोध्या और काशी के तुलसी घाट पर प्रथम बार रामलीला हुई थी।

रामकथा में अंतर्निहित उद्देश्य किसी धर्म विशेष के आख्यान न होकर सारी दुनिया को बुराई पर अच्छाई की जीत का सन्देश देने वाला सनातन सत्य है और रामलीला का मंचन उसका मान्य और परम्परागत प्रतीक। रामायण और रामलीला आगे भी सदियों तक मानवीय मूल्यों की रक्षा करने वाले लोगों के प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

रामलीला महोत्सव की ये हैं खासियतें

इस बार जनकपुरी महोत्सव मनाने का मौका बल्केश्वर क्षेत्र को मिल रहा है। सभी जोरशोर से जुटे हुए हैं। सीता-राम के विवाह को यादगार बनाने के लिए जनक महल को व्हाइट हाउस की तरह डिजाइन किया गया है। साथ ही अलग-अलग तरह की रंग-बिरंगी लाइटों से इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाए गए हैं। आयोजकों ने कोलकाता से कुशल कारीगरों की टीम बुलाकर जनक महल का निर्माण कराया है। खास बात ये है कि एक सैकड़ा से अधिक कारीगरों की टीम में 30 फीसदी मुस्लिम हैं।

-जनक महल के निर्माण में करीब आठ हजार बांस-बल्लियों का इस्तेमाल किया गया है। मुख्य द्वार से मंच तक की दूरी करीब 40 फुट होगी, जबकि अंदर ये दूरी 230 फुट होगी। वहीं, इस भव्य महल की ऊंचाई करीब 150 फीट, लंबाई 350 फीट और चौड़ाई 75 फीट से ज्यादा आंकी जा रही है।

-जनकपुरी महोत्सव के आयोजकों के मुताबिक, इस बार सबसे बेहतरीन और भव्य महल बनाया गया है। जनकपुरी का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। आगरा के ग्राउंड पर रामलीला का मंचन सदियों से होता आया है। रामलीला के मंचन में सीता माता और भगवान राम के विवाह के बाद मनकामेश्वर मंदिर से राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुध्न को हाथी-घोड़ों पर बैठाकर भव्य बारात निकाली जाती है। बारात के साथ बैंड-बाजा, तरह-तरह की झांकियां और लाखों लोगों की भीड़ होती है।

-इस पूरे मंचन में क्षेत्र के ही लोगों को में से किसी को जनक और दशरथ का रोल निभाने का मौका मिलता है। इसके लिए बोली भी लगती है। इन पैसों का इस्तेमाल जनकपुरी बनाने में किया जाता है। यही नहीं, जिस क्षेत्र में महोत्सव का आयोजन किया जाता है, वहां प्रशासन द्वारा विकास कार्य भी कराया जाता है।

इस तरह हो रहे हैं भव्य आयोजन

-उत्तर भारत की ऐतिहासिक रामबारात में प्राचीन मन:कामेश्वर महादेव मंदिर की बारहदरी से शृंगार के बाद दूल्हा बने श्रीराम, भ्राता लखन, भरत और शत्रुघ्न को आरती के बाद रथों पर विराजमान किया गया। सिर पर रत्न जड़ित मुकुट, सूर्य जैसा तेज, अधरों पर मनमोहक मुस्कान के लिए चारों भाइयों के दर्शन कर बारात में शामिल श्रद्धालु निहाल हो गए। पूरे यात्रा मार्ग में कई जगह-जगह पुष्प वर्षा और आरती कर बारात का स्वागत किया गया।

-सोमवार को श्रीराम की बारात शाम करीब पांच बजे रावतपाड़ा प्रारंभ हुई। बारात में सबसे आगे रघुवंश की ध्वज पताका लिए अश्वारोही चल रहे थे। इसके बाद विघ्न विनाशक श्री गणेश जी की सवारी थी। इनके पीछे धार्मिक और सामाजिक संदेश देती हुई करीब 120 झांकियां चल रही थीं।

-करतब दिखाते अखाड़े और शहर के करीब 11 बैंड बारात में मधुर धुन बिखेर रहे थे। रात करीब साढ़े आठ बजे प्रभु राम और उनके तीनों भाइयों को शृंगार के बाद बारहदरी में लाया गया। यहां चारों स्वरूपों की आरती जिलाधिकारी गौरव दयाल, एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह, रक्षा संपदा अधिकारी अमित कुमार मिश्रा ने की। आरती के बाद चारों स्वरूप दिव्य रथों पर विराजमान हुए। इस तरह वर यात्रा जनकपुरी के लिए रवाना हुई।

-राम बारात में इस बार हनुमान की मंडली का भी रोड शो हुआ। बाल हनुमान, किशोर हनुमान, युवा हनुमान और वृद्ध हनुमान गदा लिए नाचते हुए चल रहे थे। हनुमान के स्वरूपों के बड़े जत्थे को देखकर हर कोई आनंदित था। इसके साथ ही शिव-पार्वती की झांकी थी, जहां एक वाहन पर शिव और पार्वती नृत्य करते हुए चल रहे थे तो नीचे शिव के गण, भूत, पलीत भंग के नशे में मदमस्त नाच रहे थे।

-बृज की लीलाओं का प्रदर्शन भी बारात में हुआ। इसमें कलाकार बरसाने की होली, मयूर नृत्य करते चल रहे थे। होली खेलन आयो श्याम… बरसाने में आए जइयो बुलाई गई राधा प्यारी… आदि गीतों पर नृत्य कर रहे थे। हमेशा की तरह ढोल की थाप पर तलवारबाजी करते हुए अखाड़े भी चल रहे थे। इसके अलावा यमुना बचाओ, बेटी बचाओ का संदेश देते हुई भी कई झांकियां शामिल थीं।

-शृंगार प्रभारी रवि गोस्वामी व मुकेश अग्रवाल के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम और उनके भाई रत्न जड़ित मुकुट धारण कराए गए। राम के मुकुट में सूर्यवंश का प्रतीक सूर्य जगमगा रहा था। मुकुटों में इलेक्ट्रिक वर्क किया गया था। लक्ष्मण शेषावतार होने के कारण उनके मुकुट पर शेषनाग विराजमान थे। भ्राता भरत तथा भ्राता शत्रुघ्न जी के मुकुटों में कमल अपनी अनोखी आभा लिए थे। चारों मुकुटों में हीरा, पन्ना, मोती, माणिक आदि रत्न जड़े थे। राजघरानों से आई कलंगी लगाई गई थीं।

-राम बारात अपने परंपरागत मार्ग रावतपाड़ा से प्रारंभ होकर, जौहरी बाजार, दरेसी, कचहरी घाट, बेलनगंज, पथवारी, धूलियागंज, घटिया, फुलट्टी, फव्वारा होते हुए पुन: रावतपाड़ा से 27 सितंबर की सुबह जनकपुरी बने बल्केश्वर पहुंची।

(साभार: livehindustan.com)

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