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अगर जिन्ना होते तो पाक को देख क्या करते, बताया डॉ. वैदिक ने...
डॉ. वेदप्रताप वैदिक वरिष्ठ पत्रकार ।। जिन्ना होते तो अपना माथा कूट लेते पाकिस्तान की कितनी दुर्दशा है? अगर मुहम्मद अली जिन्ना स
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
डॉ. वेदप्रताप वैदिक
वरिष्ठ पत्रकार ।।
जिन्ना होते तो अपना माथा कूट लेते
पाकिस्तान की कितनी दुर्दशा है? अगर मुहम्मद अली जिन्ना स्वर्ग से या वे जहां भी हो, वहां से यह हाल देख रहे हो तो वे क्या कहेंगे? वे अपना माथा कूट लेंगे। वे खुद से पूछेंगे कि क्या मैंने पाकिस्तान इसीलिए बनाया था? इस हफ्ते आतंकियों के हमले में लगभग सौ लोग मारे गए और सैकड़ों जख्मी हो गए। पंजाब और सिंध के धार्मिक स्थलों पर इकट्ठे हुए ये लोग कौन थे? क्या ये लोग हिंदू थे, सिख थे, ईसाई थे, यहूदी थे? नहीं। ये लोग मुसलमान थे। क्या ये लोग अफगान या भारतीय थे? नहीं। ये लोग पाकिस्तानी थे।
याने पाकिस्तान अपना ही विनाश करने पर तुला हुआ है। वह अफगानिस्तान और भारत के विरुद्ध जितनी आतंकी कार्रवाई करता है, उससे कहीं ज्यादा वह खुद के खिलाफ कर रहा है। पाकिस्तान के हुक्मरानों ने इन आतंकी कार्रवाईयों की शुरुआत भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ की थी लेकिन अब मियां की जूती मियां के सिर ही पड़ रही है। आतंक की कमान अब पाक हुक्मरानों के भी हाथ से बाहर निकली जा रही है। अब अरब देशों के आतंकी संगठन आईएसआईएस ने पाकिस्तान में अपनी जड़ें फैला ली हैं।
दूसरे शब्दों में पाकिस्तान में अराजकता का फैलाव हो रहा है। सीआईए के पाकिस्तान में प्रमुख रहे अफसर केविन हलबर्ट ने कहा है कि पाकिस्तान दुनिया के लिए सबसे खतरनाक देश बन गया है। पश्चिमी महाशक्तियों ने अरबों रु. पाकिस्तान में झोंक दिया लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है। मास्को में अभी-अभी हुए छह राष्ट्रीय सम्मेलन में अफगान हालात पर सभी राष्ट्रों ने चिंता व्यक्त की लेकिन रुस, चीन, ईरान और पाकिस्तान ने आतंक के बुनियादी मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने सिर्फ सीरिया, इराक आदि से आ रहे इस्लामी राज्य (आईएसआईएस) के खतरे पर विचार किया। उन्हें सिर्फ अपनी पड़ी हुई है।
उन्होंने पाकिस्तान को यह सलाह क्यों नहीं दी कि वह आतंकवाद और हिंसा को जड़-मूल से खत्म करे। वह अच्छे आतंकवादी और बुरे आतंकवादी का भेद भी खत्म् करे। अब पेरिस में अगले हफ्ते होने वाले आतंकविरोधी सम्मेलन में पाकिस्तान के विरुद्ध वित्तीय प्रतिबंध लगाने की मांग भी उठेगी। आतंक और हिंसा जब तक पाकिस्तान की नीति बनी रहेगी, तब तक अफगानिस्तान और कश्मीर में शांति नहीं हो सकती।
अपने दाएं और बाएं आग की भट्ठियां भभकाकर पाकिस्तान खुद चैन की नींद कैसे सो सकता है? जहां तक भारत का सवाल है, वह इतना बड़ा और इतना ताकतवर है कि वह एक नहीं, एक साथ कई कश्मीरों के साथ भी दनदनाता रह सकता है लेकिन डर यही है कि कहीं पाकिस्तान भी अफगानिस्तान नहीं बन जाए।
(साभार: नया इंडिया)
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