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AI से होने वाले नुकसान पर सरकार सख्त, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा जरूरी: अश्विनी वैष्णव
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना-प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा सरकार की बड़ी प्राथमिकता बन गई है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 2 hours ago
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा सरकार की बड़ी प्राथमिकता बन गई है। सरकार सोशल मीडिया और AI से बनने वाले कंटेंट से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए नए कदमों पर विचार कर रही है।
लोकसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा और महिलाओं को भ्रामक विज्ञापनों से बचाना बेहद जरूरी है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चाहे AI से बना कंटेंट हो या सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया कोई भी मैटेरियल, उससे समाज को नुकसान न पहुंचे।
मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर सरकार के भीतर चर्चा चल रही है और ज्यादातर लोगों की राय है कि ऑनलाइन सुरक्षा के लिए और कड़े कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने संचार और आईटी पर संसदीय स्थायी समिति के काम की भी सराहना की। इस समिति की अगुवाई बीजेपी सांसद Nishikant Dubey कर रहे हैं और समिति ने ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अध्ययन किया है।
दुनिया के कई देशों में सोशल मीडिया के बच्चों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसी वजह से कुछ देशों ने किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने या कड़े नियम लागू करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
वहीं संसद में एक लिखित जवाब में इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार की नीतियों का मकसद इंटरनेट को खुला, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है, खासकर बच्चों के लिए।
सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून जैसे Information Technology Act और Digital Personal Data Protection Act, 2023 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी या नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट को रोकने की जिम्मेदारी तय करते हैं। अगर ऐसे कंटेंट की सूचना मिलती है तो प्लेटफॉर्म को कुछ ही घंटों के भीतर उसे हटाना होता है।
इसके अलावा डेटा सुरक्षा कानून के तहत बच्चों के डेटा को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। किसी नाबालिग का डेटा इस्तेमाल करने से पहले प्लेटफॉर्म को माता-पिता की मंजूरी लेना जरूरी है। बच्चों को टार्गेट कर ट्रैकिंग, व्यवहार की निगरानी या टार्गेटेड विज्ञापन दिखाने पर भी रोक है।
सरकार ने यह भी कहा कि तकनीक के जरिए महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध, जैसे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन उत्पीड़न और डीपफेक तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। फरवरी 2026 में आईटी नियमों में किए गए बदलावों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऐसे तकनीकी उपाय करने होंगे, जिससे गैरकानूनी AI कंटेंट बनने और फैलने से रोका जा सके।
नए नियमों के मुताबिक अगर अदालत या सरकार की ओर से नोटिस मिलता है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी कंटेंट तीन घंटे के भीतर हटाना होगा।
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