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ओम पुरी को उनकी बुरी फिल्मों के जरिए याद किया पत्रकार विवेक कुमार ने...

विवेक कुमार पत्रकार, स्क्रिप्टराइटर, नाटककार, निर्देशक ओम पुरी चले गए. अपने घर में मरे पड़े मिले. नितांत अकेले. इतना खरा आदमी था कि मौत में बीमारी या दर्द की मिलावट नहीं की. ऐसे आदमी को कैसे याद किया जा सकता है, शायद उनकी बुरी फिल्में देख कर.ओम पुरी एक भरोसे का नाम थे. भरोसा कि बदशक्ल इंसान पर्दे पर अच्छा लग सकता

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

विवेक कुमार पत्रकार, स्क्रिप्टराइटर, नाटककार, निर्देशक ओम पुरी चले गए. अपने घर में मरे पड़े मिले. नितांत अकेले. इतना खरा आदमी था कि मौत में बीमारी या दर्द की मिलावट नहीं की. ऐसे आदमी को कैसे याद किया जा सकता है, शायद उनकी बुरी फिल्में देख कर.ओम पुरी एक भरोसे का नाम थे. भरोसा कि बदशक्ल इंसान पर्दे पर अच्छा लग सकता है. भरोसा कि एक्टिंग का शक्ल से कोई लेना देना नहीं. और भरोसा कि काम आता हो तो आप किसी को भी जुकाम कर सकते हैं. हिंदी सिनेमा की अच्छी फिल्में उंगलियों पर गिनी जा सकती हैं और अच्छे एक्टर नाखूनों पर. दोनों में ओम पुरी किसी को भी लाजवाब कर सकने की कूवत रखते हैं. इसकी वजह शायद वह ईमानदारी थी, जो उन्हें खरा बनाती थी. नेकी से भरा इंसान ही अनेकी हो सकता है. अनेकी यानी नेकी पर अ नहीं, अनेकी यानी अनेक पर ई. ओम पुरी ने एक्टिंग में नए एक्सप्रेशन गढ़े हैं. उनकी याद में हम इतना तो कर ही सकते हैं कि भाषा में नए एक्सप्रेशन गढ़ने की हिम्मत कर सकें. यही शायद उनको सही श्रद्धांजलि भी होगी. इंसान बस उतना ही होता है, जितना वह छोड़कर जाता है. और ओम पुरी यह हिम्मत छोड़ कर गए हैं. हिम्मत जिसे दिल्ली के एनएसडी में मुंबई जाने का सपना पाल रहे बे-मसल्स (अंग्रेजी वाले) और बे-बाप (इंडस्ट्री वाले) लड़कों में देख सकते हैं, जो कहते हैं कि काम आता हो तो आप स्टार बन सकते हैं. हिम्मत जिसे आप पुणे में एफटीआईआई के एक्टिंग कोर्स में तैयार हो रहे लड़कों में देख सकते हैं कि बकवास काम भी करेंगे तो ऐसा करेंगे कि याद रहे. ओमपुरी को याद करना चाहें तो आप उनकी अच्छी फिल्मों को याद न करें, उनकी बुरी फिल्मों को याद करें. इसलिए कि वह बुरी फिल्मों में भी ऐसा काम कर गए हैं जिसे आप याद कर सकते हैं. और ऐसा नहीं है कि उन्होंने बुरी फिल्में कम की हैं. वैसे ही की हैं जैसे दूसरे लोग करते हैं. बस फर्क इतना है कि बुरा काम भी ईमानदारी से किया. और जब किसी ने पूछा कि ये क्या बकवास काम करते रहते हैं आप, तो उन्होंने साफ कहा कि भाई घर भी तो चलाना है. सही बात है. सिर्फ अच्छा काम करके आप घर नहीं चला सकते. हां, बुरा काम करते हुए भी यादगार बन सकते हैं. और याद तो जाने के बाद ही किया जाता है. तभी तो ओम पुरी अपने घर में अकेले ही मरे पाए गए. उनकी एक फिल्म है जिसका अभी सिर्फ ऐलान हुआ था. फिल्म का नाम है देखा जाएगा. ये फिल्म तो अब नहीं आएगी, लेकिन ओम पुरी, आपको हमेशा देखा जाएगा. साभार: http://www.dw.com/


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