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कई चैनल कानून की धाराओं का उल्लंघन करते दिखे, बोले वरिष्ठ पत्रकार अनंत विजय

‘किसी भी तरह का भड़काऊ बयान, आपत्तिजनक कटेंट, या फिर असंसदीय भाषा के प्रसारण की जिम्मेदारी चैनलों की भी होती है। स्वामी ओम के मामले में कई चैनल इस कानून की धाराओं का उल्लंघन करते दिखे।’ हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है टीवी पत्रकार अनंत विजय का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं-

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

‘किसी भी तरह का भड़काऊ बयान, आपत्तिजनक कटेंट, या फिर असंसदीय भाषा के प्रसारण की जिम्मेदारी चैनलों की भी होती है। स्वामी ओम के मामले में कई चैनल इस कानून की धाराओं का उल्लंघन करते दिखे।’ हिंदी दैनिक हिन्दुस्तान में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है टीवी पत्रकार अनंत विजय का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं-

एक बाबा की टीआरपी और नतमस्तक चैनल

इन दिनों खबरिया चैनलों पर साधु की वेश-भूषा में एक शख्स कई राजनीतिक दावे कर रहा है। इंदिरा गांधी से नजदीकी और चंद्रशेखर व नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में अपनी भूमिका का बखान कर रहा है। वह यहीं तक नहीं रुकता, उसका दावा है कि उसने सलमान खान को थप्पड़ मारा है और बॉलिवुड से लेकर हॉलिवुड तक की कई अभिनेत्रियां उसकी शिष्या हैं।

यह साधुनुमा शख्सियत हैं स्वयंभू बाबा ओम, जिनका असली नाम विनोदानंद झा है। इस शख्स पर साइकिल चोरी से लेकर विस्फोटक रखने तक के मामले में टाडा जैसे केस दिल्ली के विभिन्न थानों में दर्ज हैं। फिर क्या वजह है कि एक आरोपी को नेशनल न्यूज चैनलों पर इतनी तवज्जो मिल रही है? टीवी सीरियल बिग बॉस में उन्होंने जिस तरह का उधम मचाया, उसने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। बाद में शर्तों को तोड़ने के आरोप में उन्हें बिग बॉस के घर से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद बाबा में टीआरपी की संभावनाएं देखते हुए बड़े-बड़े चैनलों के संपादक तक उसका इंटरव्यू करने कूद पड़े।

ओम को स्टूडियो में बुलाकर पूरे देश को घंटों तक उनकी बकवास सुनाई गई। इन शो के दौरान उनका बड़बोलापन बढ़ता चला गया। एक शो के दौरान दर्शकों में बैठी एक महिला को बेहद असंसदीय शब्द कहने से भीड़ और मेहमान, दोनों भड़क गए और जमकर लात-जूते चले। बावजूद इसके शो चलता रहा, ओम दावे करते रहे।

वैसे यह बाबा पिछले साल एक न्यूज चैनल के स्टूडियो में हुए थप्पड़ कांड से चर्चित हुए थे। उसके पहले भी वह एक न्यूज चैनल के दफ्तर में पिटते-पिटते बचे थे। महिला को थप्पड़ मारने के बाद पुलिस के डर से स्टूडियो से यह कहते हुए रफू-चक्कर हो गए थे कि उनकी मुलायम सिंह यादव से बात हो गई है। उस केस का क्या हुआ पता नहीं है, लेकिन ओम का हौसला उसके बाद बुलंद हो गया। बाबा का उद्भव न्यूज चैनलों की भीड़ भरी दुनिया में उस वक्त हुआ, जब डिबेट शो के दौरान चीखने-चिल्लाने का युग शुरू हुआ।

बेसिर-पैर की बातें करने वाले लोग न्यूज चैनलों के प्रड्यूसर्स की पसंद बनने लगे। खुद को धर्म का रक्षक घोषित करने वाले ओम का मकसद सिर्फ स्टूडियो में हंगामा करना और विरोधियों को बोलने न देना होता था। उस वक्त उनकी मांग इतनी ज्यादा थी कि उसके टाइम स्लॉट बुक घंटे के हिसाब से बुक हुआ करते थे। थप्पड़ कांड के बाद ओम की मांग कम होने लगी थी, पर बिग बॉस के सीजन दस ने इस बाबा को नया जीवन दे दिया। हिंदू बाबा के नाम से खुद को प्रचारित करने वाले ओम हंसी का पात्र बनते चले गए। खबरिया चैनलों की बहस में एक अहमकनुमा जोकर तो चाहिए ही होता है।

कई वैसे लोग भी, जो इस तरह के बाबा, भूत-प्रेत आदि को टीवी पर दिखाए जाने के खिलाफ होते थे, संपादक बनते ही इनकी शरण में जाते दिखने लगते हैं। ओम के कारनामों के दौरान और बाद में इस तरह की बातें सुनाई देती हैं कि फलां चैनल का इनके बयानों से कोई लेना-देना नहीं है या फिर चैनल उनकी बातों व क्रिया-कलापों से इत्तफाक नहीं रखता है। इस तरह के डिस्क्लेमर बोले जाने चाहिए, ताकि दर्शकों को जागरूक किया जा सके, लेकिन केबल ऐंड टेलिविजन ऐक्ट कहता है कि ब्रॉडकास्टर यानी चैनल की भी उतनी ही जिम्मेदारी होती है, जितना बोलने वाले की।

किसी भी तरह का भड़काऊ बयान, आपत्तिजनक कटेंट, या फिर असंसदीय भाषा के प्रसारण की जिम्मेदारी चैनलों की भी होती है। ओम के मामले में कई चैनल इस कानून की धाराओं का उल्लंघन करते दिखे। अब अगर सरकार उनको नोटिस देती है, तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले का शोर मचने लगेगा। जरूरत जिम्मेदारी समझने की है।

दूसरी तरफ, जिस तरह से हिंदू धर्मगुरु होने का दावा करने वाला यह शख्स ओछी हरकतें कर रहा है, उसके बारे में संत समाज को भी सोचना चाहिए। क्या कोई वेश-भूषा से साधु होता है या फिर आचरण-व्यवहार से? ओम को अंतरराष्ट्रीय मीडिया हिंदू गॉडमैन लिख रहे हैं, जिससे पूरी दुनिया में हिंदी संतों की छवि खराब हो रही है। संतों की प्रतिनिधि सभा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को ओम की हरकतों का संज्ञान लेना चाहिए और उन पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

(साभार: हिन्दुस्तान)

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