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अब चैनलों से वॉर रूम हट गए हैं, कमांडर एंकरों के शो खत्म हो गए, पर अब आगे क्या दिखाएंगे?
‘सवाल है आगे यदि आतंकी हमला हुआ, पाकिस्तान ने कुछ किया तब क्या टीवी चैनलों के वॉर रूम से फिर वैसे ही घटनाओं का खुलासा होगा जैसे अभी हुआ?’ हिंदी दैनिक अखबार ‘नया इंडिया’ में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार और संपादक हरिशंकर व्यास का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
‘सवाल है आगे यदि आतंकी हमला हुआ, पाकिस्तान ने कुछ किया तब क्या टीवी चैनलों के वॉर रूम से फिर वैसे ही घटनाओं का खुलासा होगा जैसे अभी हुआ?’ हिंदी दैनिक अखबार ‘नया इंडिया’ में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार और संपादक हरिशंकर व्यास का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं...
ब्रीफिंग वाले वॉर रूम!
यों अब टीवी चैनलों से वॉर रूम हट गए हैं। एंकरों के वे शो खत्म हो गए हैं कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अपने सैनिकों ने कहां-कहां जा कर, रात के अंधेरे में कैसे जा कर क्या–क्या किया! सचमुच 40 साल की अपनी पत्रकारिता में पहली बार टीवी चैनलों के स्टूडियों में वॉर रूम, या पत्रकारों के फोन के जरिए सीमा पार बातचीत करके पाकिस्तान की पोल खुलवाती जो दास्तां सुनी है वैसा कुछ पहले कभी नहीं हुआ। ऐसा हुआ न कारगिल के वक्त की याददाश्त में ध्यान आ रहा है और न पुराने युद्ध के रिकार्ड में उल्लेख है। भारत के आम दर्शक को टीवी चैनलों के वॉर रूम और कमांडर एंकरों के जरिए आपरेशनल गतिविधियों का जो खुलासा हुआ है वह कमाल का है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी सर्वदलीय बैठक को या संसदीय कमेटियों को सरकार की तरफ से ऐसे ब्रीफ नहीं किया जैसे टीवी चैनलों के जरिए देश की जनता को हुआ है। जाहिर है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल का मीडिया प्रबंधन और उनकी ब्रीफिंग ने भारत के शौर्य को जन-जन के बीच में पहुंचा दिया है।
सवाल है आगे यदि आतंकी हमला हुआ, पाकिस्तान ने कुछ किया तब क्या टीवी चैनलों के वॉर रूम से फिर वैसे ही घटनाओं का खुलासा होगा जैसे अभी हुआ? जब टीवी चैनल, मीडिया के जरिए वॉर रूम, आंखों-देखी बातों, पीओके के पाकिस्तानी अफसरों से टेलिफोन बात जैसे खुलासे एक बार शुरू हो गए हैं तो जब उरी या पठानकोट जैसी घटनाएं आगे होंगी तब टीवी चैनल क्या दिखाएंगे?
हां, यह संकट आने वाला है। अभी संसदीय कमेटियों में जैसे सवाल हुए हैं, संसद में आगे जो सवाल होंगे उन सबके साथ आगे की आतंकी घटनाओं पर विरोधी सरकार को बुरी तरह घेरेंगे। यह खबर दबी है कि गृह मंत्रालय की संसदीय समिति में पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम और सांसदों ने सेना की छावनियों पर आतंकी हमले से जाहिर खुफियाई असफलता के सवाल पूछे तो गृह सचिव बगलें झांकते मिले। गृह मंत्रालय की संसदीय समिति में कई सांसदों ने सवाल पूछे। सरकार की तरफ से कहा गया कि ये सवाल रक्षा मंत्रालय के क्षेत्र के हैं। इस पर सदस्यों का कहना था- आतंकियों का भारत की सीमा में घुस आना, सेना के संवेदनशील इलाके पर हमला बोलना खुफियाई असफलता का प्रमाण है और खुफिया विषय गृह मंत्रालय के दायरे में जब है तो सदस्यों का सवाल पूछना सही है।
ऐसे आगे कितनी जवाबदेही बनेगी, कल्पना की जा सकती है।
(साभार: नया इंडिया)
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