होम / विचार मंच / ईरान युद्ध को जीत कर भी हारेंगे अमेरिका और इजराइल: पंकज शर्मा

ईरान युद्ध को जीत कर भी हारेंगे अमेरिका और इजराइल: पंकज शर्मा

डोनाल्ड ट्रंप बाहर से जितने आक्रामक दिख रहे हैं, उतना ही भीतर से दबाव में भी नजर आते हैं। इसी का संकेत तब मिला जब उन्होंने ओवल ऑफिस में कुछ पादरियों को बुलाकर प्रार्थना करवाई।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 3 hours ago

पंकज शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार।

ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच चल रहा युद्ध केवल सैन्य टकराव नहीं है, बल्कि वैश्विक राजनीति, नैतिकता और शक्ति संतुलन की भी बड़ी परीक्षा बन गया है। युद्ध तीन हफ्ते चले या तीन महीने, लेकिन इसका असर आने वाले वर्षों तक दुनिया की राजनीति पर दिखाई देगा। इस संघर्ष का परिणाम कुछ भी हो, एक बात लगभग तय मानी जा रही है कि अगर ईरान पराजित भी होता है तो वह हार कर भी नैतिक रूप से जीत जाएगा। वहीं अमेरिका और इज़राइल अगर सैन्य रूप से सफल भी हो जाएं, तो उनकी जीत भी कई मायनों में हार जैसी ही साबित हो सकती है।

ट्रंप की आक्रामकता और अंदरूनी असुरक्षा

दुनिया को हमेशा अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने वाला अमेरिका इस बार ईरान से टकराव के बाद असहज स्थिति में दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बाहर से जितने आक्रामक दिख रहे हैं, उतना ही भीतर से दबाव में भी नजर आते हैं। इसी का संकेत तब मिला जब उन्होंने ओवल ऑफिस में कुछ पादरियों को बुलाकर प्रार्थना करवाई। दक्षिण फ्लोरिडा के क्राइस्ट फैलोशिप चर्च के संस्थापक पादरी टॉम मुलिन्स के नेतृत्व में पादरियों ने ट्रंप और अमेरिकी सेना के लिए विशेष प्रार्थना की। यह दृश्य अपने आप में इस बात का संकेत देता है कि ईरान के साथ टकराव ने अमेरिकी नेतृत्व को मानसिक रूप से भी असहज कर दिया है।

दरअसल अमेरिकी प्रशासन ने शायद यह अनुमान नहीं लगाया था कि ईरान इतनी तीव्र और प्रभावी प्रतिक्रिया देगा। युद्ध की शुरुआत के बाद ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इज़राइली हितों को कड़ी चुनौती दी। इससे यह भी स्पष्ट हो गया कि मध्य पूर्व की जटिल राजनीति में अमेरिका का आकलन हमेशा सही नहीं होता। कई विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप ने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में यह संघर्ष स्वीकार किया और अब इसके परिणामों को लेकर अमेरिकी राजनीति में भी आलोचना बढ़ रही है।

वैश्विक प्रतिक्रिया और नैतिक प्रश्न

ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर दुनिया भर में मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, लेकिन कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस युद्ध की आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र सहित अनेक मंचों पर यह सवाल उठाया गया है कि क्या किसी संप्रभु देश पर इस प्रकार हमला करना अंतरराष्ट्रीय नियमों और नैतिकता के अनुरूप है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ ऐसे देश भी इस कार्रवाई से असहज दिखाई दिए, जिन्हें आमतौर पर अमेरिका के करीबी सहयोगी माना जाता है।

युद्ध के दौरान कई घटनाएं ऐसी भी हुईं, जिन्होंने वैश्विक कूटनीति के मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उदाहरण के तौर पर ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर हमले और सैन्य टकराव की घटनाओं ने यह बहस तेज कर दी कि क्या अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता और नियमों का स्थान कमजोर होता जा रहा है। इसी संदर्भ में यह भी चर्चा हो रही है कि दुनिया के कई देश अपने रणनीतिक हितों के कारण खुलकर प्रतिक्रिया देने से बचते रहे।

भारत और वैश्विक नैतिकता की कसौटी

ईरान युद्ध ने केवल अमेरिका और इज़राइल की रणनीति पर ही नहीं, बल्कि अन्य देशों की विदेश नीति पर भी सवाल खड़े किए हैं। भारत जैसे देशों के सामने भी यह चुनौती है कि वे वैश्विक राजनीति में अपने सिद्धांतों और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन कैसे बनाए रखें। भारत की सभ्यता और राजनीतिक परंपरा हमेशा शांति, न्याय और संवाद के मूल्यों से जुड़ी रही है। गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी की विरासत वाला यह देश अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है।

ऐसे समय में यह प्रश्न और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि क्या बड़े देशों के दबाव या रणनीतिक समीकरणों के कारण नैतिक दृष्टिकोण को नजरअंदाज किया जा सकता है। प्रेमचंद की कहानी ‘पंच परमेश्वर’ का वह प्रसिद्ध प्रश्न- “क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहोगे?”आज भी उतना ही प्रासंगिक लगता है। यह सवाल केवल नेताओं के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और मीडिया के लिए भी है।

ईरान युद्ध का अंतिम परिणाम चाहे जो भी हो, लेकिन इस संघर्ष ने दुनिया को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शक्ति और नैतिकता के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। आने वाले वर्षों में लोग इस युद्ध को केवल एक सैन्य टकराव के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति के एक ऐसे मोड़ के रूप में याद करेंगे जिसने वैश्विक व्यवस्था की सीमाओं और विरोधाभासों को उजागर कर दिया।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


टैग्स
सम्बंधित खबरें

खुद को नया रूप देकर आगे बढ़ेगा इंडियन न्यूज इकोसिस्टम, भविष्य रहेगा मजबूत: हर्ष भंडारी

भारतीय न्यूज इकोसिस्टम में इस हफ्ते चार हफ्तों के लिए TRP को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसके बाद कई मीडिया वॉचर्स ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

6 minutes ago

ChatGPT को टक्कर देने वाला Claude क्या है? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

Anthropic कंपनी ने Claude AI बनाया है। उसका दावा है कि अमेरिकी सरकार AI का ‘दुरुपयोग’ करना चाहती थी। सरकार Claude का इस्तेमाल दो कामों के लिए करना चाहती थी।

3 hours ago

राहुल गांधी की सिनेमा की बचकानी समझ: अनंत विजय

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में यह कोई नई प्रवृत्ति है? क्या भारतीय सिनेमा और वेब सीरीज में राजनीतिक विचारों और वैचारिक संदेशों का इस्तेमाल पहले नहीं होता था?

3 hours ago

बिहार में नई राजनीति की असली परीक्षा: आलोक मेहता

आर्थिक स्तर पर कई गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा शराबबंदी की नीति का भविष्य और राज्य की आर्थिक प्रगति की गति को बनाए रखना होगा।

3 hours ago

बिहार में नीतीश युग का अंत हुआ: रजत शर्मा

ऐसी असमानता राजनीति में कम देखने को मिलती है। इसीलिए नीतीश कुमार का पटना से दिल्ली जाना बिहार में एक बड़ी शून्यता पैदा करेगा। उनकी जगह लेना किसी के लिए भी बड़ी चुनौती होगी।

2 days ago


बड़ी खबरें

‘समाचार4मीडिया 40 अंडर 40’: विजेताओं के चयन के लिए जूरी मीट 14 मार्च को

एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) समूह की हिंदी वेबसाइट 'समाचार4मीडिया' पत्रकारिता जगत से जुड़े 40 प्रतिभाशाली युवाओं ‘40 अंडर 40’ की लिस्ट एक बार फिर तैयार करने जा रही है।

2 hours ago

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर वेबिनार: मीडिया में AI के सही उपयोग पर विशेषज्ञों की चर्चा

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष वेबिनार में मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई।

26 minutes ago

सन टीवी नेटवर्क का बड़ा फैसला, शेयरधारकों के लिए इंटरिम डिविडेंड का किया ऐलान

मीडिया कंपनी सन टीवी नेटवर्क ने अपने शेयरधारकों के लिए इंटरिम डिविडेंड (लाभांश) देने का ऐलान किया है।

2 days ago

पीएम 9 मार्च को पोस्ट बजट वेबिनार को करेंगे संबोधित, AVGC-क्रिएटर इकोनॉमी पर होगी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 मार्च को बजट के बाद आयोजित एक खास वेबिनार को संबोधित करेंगे।

2 days ago

जर्मन मीडिया कंपनी Axel Springer खरीदेगी 'टेलीग्राफ मीडिया ग्रुप', £575 मिलियन में हुई डील

जर्मनी की बड़ी मीडिया कंपनी एक्सल स्प्रिंगर (Axel Springer) ने ब्रिटेन के मशहूर अखबार समूह Telegraph Media Group (TMG) को खरीदने का समझौता कर लिया है।

2 days ago