होम / विचार मंच / वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक ने बताया, मुसलमानों में भिखारी ज्यादा क्यों...

वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक ने बताया, मुसलमानों में भिखारी ज्यादा क्यों...

‘इस्लाम भारत में आया जरूर लेकिन वह भी जातिवाद का शिकार हो गया। मेहनतकश लोगों की जैसे हिंदुओं में कोई इज्जत और लजजत नहीं है, वैसे ही मुसलमानों में भी नहीं है। जो मुसलमान संपन्न हैं, सुशिक्षित हैं और शक्तिशाली हैं, उनका अलग वर्ग बन गया है।’ हिंदी दैनिक अखबार नया इंडिया में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रका

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

‘इस्लाम भारत में आया जरूर लेकिन वह भी जातिवाद का शिकार हो गया। मेहनतकश लोगों की जैसे हिंदुओं में कोई इज्जत और लजजत नहीं है, वैसे ही मुसलमानों में भी नहीं है। जो मुसलमान संपन्न हैं, सुशिक्षित हैं और शक्तिशाली हैं, उनका अलग वर्ग बन गया है।’ हिंदी दैनिक अखबार नया इंडिया में छपे अपने आलेख के जरिए ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वैदिक का। उनका पूरा आलेख आप यहां पढ़ सकते हैं:

मुसलमानों में भिखारी ज्यादा क्यों?

भारत की कुल जनसंख्या में मुसलमान 14.23 प्रतिशत हैं लेकिन देश के भिखारियों की कुल आबादी में उनकी संख्या 25 प्रतिशत है। याने लगभग दुगुनी है। देश में भिखारियों की संख्या 3 लाख 70 हजार है। उसमें मुसलमान भिखारी 92,760 हैं। हिंदू भिखारियों की संख्या 2 लाख 68 हजार है। ईसाई, बौद्ध, सिख और जैन लोगों में भी भिखारी है लेकिन उनकी संख्या कुछ हजार या कुछ सौ तक ही सीमित है।

अब यहां प्रश्न यह है कि क्या ये लोग मुसलमान होने के कारण भिखारी हैं? यह प्रश्न ही अपने आप में गलत है, क्योंकि भिखारी कौन नहीं है? हिंदू भी हैं, ईसाई भी हैं, बौद्ध भी हैं, सिख भी हैं। जिसका पेट नहीं भरेगा, वह क्या करेगा? या तो डाका डालेगा, चोरी करेगा या भीख मांगेगा। भीख मांगना सबसे अधिक आसान है। हांलाकि भीख मांगना भी कानूनी अपराध है। भीख मांगनेवाले को पुलिस पकड़ सकती है। उसे दो-तीन साल की सजा भी हो सकती है लेकिन भीख मांगने की अपनी-अपनी अदा होती है। वह अदा आपको सजा नहीं, सम्मान भी दिलाती है। नेतागण, साधु-संत, मदारी आदि ने भीख मांगने को एक ललित कला का रुप दे दिया है। भिक्षां देहि! चंदा दो!! दान दो!!! जकात दो!!! लेकिन हम जिन भिखारियों की यहां बात कर रहे हैं, वे दूसरों की दया पर, रहमो-करम पर जिंदा रहनेवाले लोग हैं। इस तरह के लोग सभी धर्मों और जातियों में पाए जाते हैं। इस पर मुसलमानों का एकाधिकार नहीं है।

तो फिर मुसलमानों में ही भिखारी इतने ज्यादा क्यों है? इसका मुख्य कारण उनकी सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि है। वे लोग मुसलमान बनने के पहले क्या थे? हजार या पांच सौ साल पहले जब वे हिंदू थे, तब भी वे प्रायः गरीब थे, ग्रामीण थे, मेहनतकश थे, मजदूर थे। वे मुश्किल से गुजर-बसर करते थे। मुसलमान बनने पर भी उनकी हालत वही रही बल्कि बदतर हो गई। इस्लाम भारत में आया जरूर लेकिन वह भी जातिवाद का शिकार हो गया। मेहनतकश लोगों की जैसे हिंदुओं में कोई इज्जत और लजजत नहीं है, वैसे ही मुसलमानों में भी नहीं है। जो मुसलमान संपन्न हैं, सुशिक्षित हैं और शक्तिशाली हैं, उनका अलग वर्ग बन गया है। वे इन विपन्न, अशिक्षित और कमजोर मुसलमानों से रोटी-बेटी का रिश्ता रखने में काफी झिझकते हैं। यह वर्ग-भेद अब मुस्लिम देशों में भी फैलता जा रहा है। आर्थिक और सामाजिक सच्चाइयां मजहबी आदर्शों पर भारी पड़ रही हैं।

(साभार: नया इंडिया)

समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।


टैग्स
सम्बंधित खबरें

'जब स्कोरबोर्ड से आगे निकलकर खेल सिखाता है जिंदगी की बड़ी सीख'

जब भारत एक और शानदार टी20 वर्ल्ड कप जीत का जश्न मना रहा है, तो स्वाभाविक है कि सबसे ज्यादा चर्चा मैच, ट्रॉफी और खिलाड़ियों की हो रही है।

9 hours ago

क्या दुनिया वैसी नहीं रहेगी जैसी हम जानते हैं?

मैं जब विज्ञापन इंडस्ट्री में चल रहे बड़े बदलावों की खबरें देख रहा था, तो मेरे मन में एक सवाल आया कि इन बदलावों से क्लाइंट्स को आखिर क्या फायदा होगा।

1 day ago

खुद को नया रूप देकर आगे बढ़ेगा इंडियन न्यूज इकोसिस्टम, भविष्य रहेगा मजबूत: हर्ष भंडारी

भारतीय न्यूज इकोसिस्टम में इस हफ्ते चार हफ्तों के लिए TRP को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसके बाद कई मीडिया वॉचर्स ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

1 day ago

ChatGPT को टक्कर देने वाला Claude क्या है? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

Anthropic कंपनी ने Claude AI बनाया है। उसका दावा है कि अमेरिकी सरकार AI का ‘दुरुपयोग’ करना चाहती थी। सरकार Claude का इस्तेमाल दो कामों के लिए करना चाहती थी।

1 day ago

राहुल गांधी की सिनेमा की बचकानी समझ: अनंत विजय

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में यह कोई नई प्रवृत्ति है? क्या भारतीय सिनेमा और वेब सीरीज में राजनीतिक विचारों और वैचारिक संदेशों का इस्तेमाल पहले नहीं होता था?

1 day ago


बड़ी खबरें

सरकार की फैक्ट चेक यूनिट पर रोक, AIM ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

AIM भी उन याचिकाकर्ताओं में शामिल था, जिन्होंने इस फैक्ट चेक यूनिट की संवैधानिक वैधता को अदालत में चुनौती दी थी।

1 hour ago

एक बार फिर धूम मचाने आया Laqshya Pitch Best CMO अवॉर्ड्स, 12 मार्च को होगा इवेंट

एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप Laqshya Pitch Best CMO Awards एक बार फिर आयोजित करने जा रहा हैं।

8 hours ago

ESOP स्कीम के तहत 'बालाजी टेलीफिल्म्स' ने एम्प्लॉयीज को यूं बनाया अपना हिस्सेदार

बालाजी टेलीफिल्म्स लिमिटेड ने अपने एम्प्लॉयीज को ESOP (एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन प्लान) के तहत 51,997 इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं।

10 hours ago

वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी में नीरज झा को मिली ये बड़ी जिम्मेदारी

नीरज झा पिछले 6 साल से ज्यादा समय से वॉर्नर ब्रदर्स डिस्कवरी से जुड़े हुए हैं। इस प्रमोशन से पहले वह कंपनी में कंटेंट, प्रोग्रामिंग और एक्विजिशन के डायरेक्टर के पद पर काम कर रहे थे।

10 hours ago

‘TV9’ में इस बड़े पद से अलग हुए प्रसन्ना राघव, जल्द शुरू करेंगे नई पारी

10 मार्च इस संस्थान मैं उनका आखिरी कार्यदिवस है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, वह जल्द ही एक बार फिर ‘जी मीडिया’ (Zee Media) में लीडरशिप भूमिका में नजर आ सकते हैं।

5 hours ago