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सरकार की फैक्ट चेक यूनिट पर रोक, AIM ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
AIM भी उन याचिकाकर्ताओं में शामिल था, जिन्होंने इस फैक्ट चेक यूनिट की संवैधानिक वैधता को अदालत में चुनौती दी थी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 hour ago
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन (AIM) ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें सरकार की प्रस्तावित फैक्ट चेक यूनिट (FCU) से जुड़े प्रावधान को असंवैधानिक बताया गया था।
AIM भी उन याचिकाकर्ताओं में शामिल था, जिन्होंने इस फैक्ट चेक यूनिट की संवैधानिक वैधता को अदालत में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाई कोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई है, यानी जब तक मामले की आगे सुनवाई नहीं होती, तब तक केंद्र सरकार इस फैक्ट चेक यूनिट को लागू नहीं कर पाएगी।
दरअसल, आईटी नियमों में किए गए संशोधन के तहत सरकार को यह अधिकार देने का प्रस्ताव था कि वह अपने कामकाज से जुड़ी किसी भी जानकारी को “फेक”, “गलत” या “भ्रामक” घोषित कर सके। अगर सरकार की फैक्ट चेक यूनिट किसी कंटेंट को ऐसा बताती, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म को उसे हटाना पड़ सकता था। ऐसा न करने पर प्लेटफॉर्म को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा भी खत्म हो सकती थी।
मीडिया और सिविल सोसाइटी के कई संगठनों ने इस प्रावधान को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि इससे सरकार को बहुत ज्यादा ताकत मिल जाती और वह खुद ही अपने बारे में आने वाली खबरों को सही या गलत घोषित कर सकती थी।
AIM के प्रेसिडेंट और इंडिया टुडे ग्रुप में पब्लिशिंग के सीईओ मनोज शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला प्रेस की आजादी और लोकतांत्रिक बहस की रक्षा के लिए एक अहम कदम है।
वहीं AIM के पूर्व अध्यक्ष और ‘द कारवां’ मैगजीन के संपादक अनंत नाथ ने कहा कि अगर सरकार को यह अधिकार मिल जाता कि वह खुद से जुड़ी खबरों को “फेक” या “भ्रामक” घोषित कर दे, तो इससे पत्रकारिता पर बहुत बुरा असर पड़ सकता था।
इस मामले में AIM की ओर से वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने पैरवी की। उनके साथ वकील अपार गुप्ता और वृंदा भंडारी भी जुड़े थे। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने भी इस मामले में सहयोग किया।
क्या है पूरा मामला
साल 2023 में सरकार ने आईटी नियमों में संशोधन करते हुए एक प्रावधान जोड़ा था, जिसके तहत केंद्र सरकार अपनी फैक्ट चेक यूनिट बना सकती थी। इस यूनिट को यह अधिकार होता कि वह सरकार से जुड़ी जानकारी को फेक, गलत या भ्रामक घोषित कर सके।
इसी प्रावधान के खिलाफ AIM, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा और कई पत्रकारों व सामाजिक संगठनों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला
मार्च 2024 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में इस प्रावधान को रद्द कर दिया था। अदालत ने कहा था कि यह नियम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनुचित और असंगत रोक लगाता है और इसमें पर्याप्त सुरक्षा उपाय भी नहीं हैं।
अदालत ने यह भी कहा था कि अगर सरकार को खुद से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री को “फेक” या “भ्रामक” बताने का अधिकार दिया जाता है, तो इससे पत्रकारिता और सार्वजनिक चर्चा पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
प्रेस की आजादी के लिए प्रतिबद्धता
AIM का कहना है कि गलत जानकारी से लड़ना जरूर जरूरी है, लेकिन इसके लिए जो भी व्यवस्था बनाई जाए वह स्वतंत्र, पारदर्शी और संविधान के अनुरूप होनी चाहिए।
संस्था ने कहा कि देशभर के मैगजीन पब्लिशर्स संपादकीय ईमानदारी और तथ्य आधारित पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। साथ ही मीडिया की स्वतंत्रता को बनाए रखना भी लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन (AIM) भारत में मैगजीन पब्लिशर्स का प्रमुख उद्योग संगठन है, जो इस क्षेत्र के विकास, संपादकीय मानकों को मजबूत करने और स्वतंत्र व स्वस्थ मीडिया वातावरण के लिए काम करता है।
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