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HC से राहत के बाद भी गिरफ्तारी के लिए अमन चोपड़ा के घर पहुंची पुलिस, जानें पूरा मामला
न्यूज18 के पत्रकार अमन चोपड़ा को राजस्थान हाई कोर्ट से शनिवार को राहत मिल गई और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
न्यूज18 के पत्रकार अमन चोपड़ा को राजस्थान हाई कोर्ट से शनिवार को राहत मिल गई और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई। बावजूद इसके राजस्थान पुलिस चोपड़ा के नोएडा स्थित उनके आवास पर उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची, जहां से उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा, जिसके बाद दो राज्यों की पुलिस में टकराव की खबरें सामने आयीं।
दरअसल हुआ यूं कि राजस्थान हाई कोर्ट ने शनिवार को बूंदी और अलवर जिलों में दर्ज दो मामलों (अलवर के कोतवाली थाने में दर्ज FIR संख्या 372/2022 व बूंदी के सदर थाने में दर्ज FIR संख्या 200/2022) में ये आदेश दिया कि पत्रकार अमन चोपड़ा के खिलाफ अलवर में मंदिरों के विध्वंस पर उनके शो के मामले में उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। वहीं डूंगरपुर के बिछवाड़ा में दर्ज मामले (एफआईआर संख्या 147/2022) को लेकर पेश विविध आपराधिक याचिका 482 पर सुनवाई एक सप्ताह बाद होनी है।
एक तरफ जहां उच्च न्यायालय ने अपने आदेश से अमन चोपड़ा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, तो वहीं शनिवार को डूंगरपुर और नोएडा पुलिस में भी उस समय भिड़ंत हो गई, जब राजस्थान की पुलिस टीवी पत्रकार अमन चोपड़ा को गिरफ्तार करने पहुंची।
डूंगरपुर एसपी सुधीर जोशी ने मीडिया को बताया कि नोएडा पुलिस ने दूसरी बार पत्रकार अमन चोपड़ा को हिरासत में लेने से रोका है। डूंगरपुर एसपी का कहना है कि पिछली बार की तरह इस बार भी नोएडा पुलिस ने उनकी टीम को एक ओर ले जाकर कुछ जानकारी लेने को कहा और काफी देर तक इंतजार करवाया और तब तक आरोपी वहां से निकल चुका था। हमारी टीम चोपड़ा के घर पर पहुंची तो वहां ताला लगा मिला।
सुधीर जोशी ने मीडिया को बताया कि हमारी टीम नोएडा में डेरा डाले हुए है और अमन चोपड़ा का पता लगाने के लिये सभी संभावित स्थानों की तलाश कर रही है।
दूसरी तरफ, सेंट्रल नोएडा के ACP-2 योगेंद्र सिंह ने कहा कि राजस्थान पुलिस की टीम शनिवार दोपहर 3 बजे अमन चोपड़ा के लिए गैर जमानती वारंट लेकर आई थी। हमने दो पुलिसकर्मी उनके साथ भेजे लेकिन, अमन चोपड़ा के घर पर ताला लगा हुआ था। पुलिस ने उनके घर के बाहर नोटिस चस्पा कर दिया और लौट आई। राजस्थान पुलिस द्वारा लगाए जा रहे आरोप गलत हैं।
वहीं अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) जीएस राठौर ने जानकारी दी कि चोपड़ा ने राजस्थान हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर उनके खिलाफ दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग की थी, जिनमें से अदालत ने अलवर और बूंदी में एफआईआर के संबंध में गिरफ्तारी के खिलाफ रोक लगाते हुए स्टे लगा दिया, लेकिन डूंगरपुर में दर्ज मामले में अदालत ने रोक नहीं लगाई, जिसके बाद पुलिस उन्हें फिर गिरफ्तार करने पहुंची थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चोपड़ा के खिलाफ पिछले महीने राजस्थान के अलवर में एक मंदिर के विध्वंस के बाद उनके टीवी शो के कंटेंट को लेकर तीन एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसमें पहला मामला 23 अप्रैल को डूंगरपुर के बिछवाड़ा में, दूसरा उसी दिन बूंदी में और तीसरा मामला 24 अप्रैल को अलवर में दर्ज किया गया था।
चोपड़ा के खिलाफ दर्ज मामलों के मुताबिक, उन्होंने अपने एक शो में कथित तौर पर दावा किया था कि जहांगीरपुरी केस का बदला लेने के लिए अलवर में एक सदियों पुराने मंदिर को विध्वंस किया गया था।
चोपड़ा के खिलाफ आईपीसी की धारा 124-ए (देशद्रोह), 295 ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से काम करना), 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था जिसकी डूंगरपुर कोतवाली थाना के एसएचओ जांच कर रहे हैं।
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