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PMAR 2026: चुनौतियों के बीच 2025 में प्रिंट विज्ञापन खर्च में बढ़त
पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) 2026 के मुताबिक 2025 में प्रिंट विज्ञापन ने सकारात्मक और वास्तविक ग्रोथ दर्ज की, हालांकि इस माध्यम पर संरचनात्मक दबाव बने रहे।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 18 hours ago
पिच मैडिसन ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट (PMAR) 2026 के मुताबिक 2025 में प्रिंट विज्ञापन ने सकारात्मक और वास्तविक ग्रोथ दर्ज की, हालांकि इस माध्यम पर संरचनात्मक दबाव बने रहे। कुल प्रिंट ADEX 2024 के 20,272 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 20,866 करोड़ रुपये हो गया, यानी 3% की बढ़ोतरी। साल दर साल इसमें 594 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।
हालांकि, कुल ADEX (विज्ञापन खर्च) में प्रिंट की हिस्सेदारी 19% से घटकर 18% रह गई। यानी एक प्रतिशत अंक की गिरावट, जो दिखाती है कि बाजार तेजी से डिजिटल की तरफ झुक रहा है और प्रिंट की हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम हो रही है।
वॉल्यूम ग्रोथ लगभग स्थिर रही। प्रिंट वॉल्यूम 333 मिलियन कॉलम सेंटीमीटर से बढ़कर 336 मिलियन कॉलम सेंटीमीटर हुआ, यानी करीब 1% की बढ़त। रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 2% की यील्ड ग्रोथ रही, जिसका मतलब है कि कमाई में बढ़ोतरी ज्यादा स्पेस बिकने से नहीं, बल्कि बेहतर कीमत और प्रीमियम इन्वेंट्री से हुई।
PMAR 2026 यह भी बताता है कि AdEx की परिभाषा में बदलाव आया है। पुरानी परिभाषा के तहत ट्रेडिशनल मीडिया की हिस्सेदारी 54% और डिजिटल की 46% है। नई परिभाषा में ट्रेडिशनल 40% और डिजिटल 60% हो गया है। इससे साफ है कि मीडिया मिक्स में बड़ा ढांचा बदलाव चल रहा है।
साल की ग्रोथ में चौथी तिमाही यानी Q4 की बड़ी भूमिका रही। Q4 में प्रिंट रेवेन्यू 2024 के 6,184 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 6,524 करोड़ रुपये हो गया, यानी 5% की ग्रोथ। सालाना कमाई का 31% हिस्सा इसी तिमाही से आया। त्योहारों और इवेंट आधारित विज्ञापन के साथ सरकारी खर्च बढ़ने से इस तिमाही में यील्ड मजबूत रही।
Q3 में 3% की बढ़ोतरी के साथ रेवेन्यू 5,120 करोड़ रुपये रहा, जहां फेस्टिव सीजन की तैयारी का असर दिखा। Q2 में 1% की हल्की बढ़त के साथ रेवेन्यू 4,258 करोड़ रुपये रहा। Q1 में भी 1% की मामूली बढ़ोतरी के साथ 4,965 करोड़ रुपये का आंकड़ा रहा, जो साल की धीमी शुरुआत दिखाता है। कुल 594 करोड़ रुपये की सालाना बढ़ोतरी में बड़ा योगदान Q4 का रहा। सतर्क मांग के माहौल में पब्लिशर्स ने मेट्रो और प्रमुख राज्य राजधानियों में बेहतर प्राइसिंग, पोजिशनिंग और पैकेज्ड सॉल्यूशंस के जरिए कमाई बचाए रखी।
ऊपर से देखने पर भले स्पेस लगभग स्थिर रहा हो, लेकिन असली कहानी बेहतर कमाई की है। 2025 में प्रिंट का प्रदर्शन स्थिर स्पेस और बेहतर मॉनेटाइजेशन पर टिका रहा। विज्ञापनदाताओं ने ज्यादा कॉलम सेंटीमीटर लेने की बजाय कम लेकिन ज्यादा प्रभावशाली प्लेसमेंट चुने, जैसे फ्रंट पेज, जैकेट, हाई-इम्पैक्ट यूनिट और क्यूरेटेड पैकेज।
रिपोर्ट इसे एक साफ बदलाव मानती है—जहां प्रिंट अब बार-बार दिखने वाला माध्यम नहीं, बल्कि हाई-अटेंशन और हाई-ट्रस्ट प्लेटफॉर्म बन गया है, जिसका इस्तेमाल लॉन्च, विस्तार से जानकारी देने और पॉलिसी या टैरिफ संदेशों के लिए किया जा रहा है।
भाषाई स्तर पर देखें तो अंग्रेजी और हिंदी के आसपास कंसोलिडेशन दिख रहा है। दोनों मिलकर प्रिंट ADEX का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। अंग्रेजी अखबारों ने अतिरिक्त ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान दिया। अंग्रेजी वॉल्यूम 94 मिलियन कॉलम सेंटीमीटर से बढ़कर 100 मिलियन कॉलम सेंटीमीटर हुआ, यानी 6% की बढ़त। इसकी हिस्सेदारी 28% से बढ़कर 30% हो गई और यह बड़ी भाषाओं में इकलौता स्पष्ट ग्रोथ ड्राइवर बना।
हिंदी 121 मिलियन कॉलम सेंटीमीटर पर स्थिर रही और 36% हिस्सेदारी के साथ मास-रीच का आधार बनी रही। तमिल में 5% की बढ़ोतरी के साथ वॉल्यूम 19 मिलियन कॉलम सेंटीमीटर पहुंचा। कन्नड़ में 3% की हल्की बढ़त के साथ 18 मिलियन कॉलम सेंटीमीटर रहा। वहीं मराठी और तेलुगु दोनों में 6% की गिरावट आई और ये क्रमशः 26 मिलियन और 15 मिलियन कॉलम सेंटीमीटर पर आ गए।
“अन्य” श्रेणी में करीब 5% की गिरावट आई और इसकी हिस्सेदारी 12% से घटकर 11% रह गई। आंकड़े बताते हैं कि विज्ञापनदाता प्रीमियम, शहरी और निर्णय लेने वाले वर्ग तक पहुंचने के लिए अंग्रेजी खरीद रहे हैं और बड़े पैमाने पर पहुंच के लिए हिंदी, जबकि अन्य भाषाओं में वे ज्यादा चयनात्मक हो गए हैं, भले उनकी पाठक संख्या मजबूत हो।
कैटेगरी के आंकड़े भी यही दिखाते हैं कि ग्रोथ भरोसे और जानकारी पर आधारित सेक्टरों में केंद्रित है। ऑटो सबसे बड़ा ग्रोथ ड्राइवर रहा। यह 8% बढ़कर 2,803 करोड़ रुपये से 3,036 करोड़ रुपये हो गया, यानी 233 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी, और कुल प्रिंट ADEX का 15% हिस्सा रहा।
BFSI में 7% की बढ़ोतरी के साथ 1,420 करोड़ रुपये का आंकड़ा रहा। क्लोदिंग, फैशन और ज्वेलरी 7% बढ़कर 1,368 करोड़ रुपये पर पहुंचे। रिटेल 4% बढ़कर 1,443 करोड़ रुपये हुआ। रियल एस्टेट में 3% की स्थिर ग्रोथ के साथ 1,613 करोड़ रुपये रहे। ई-कॉमर्स 9% बढ़कर 670 करोड़ रुपये हो गया, जिससे साफ है कि डिजिटल-फर्स्ट ब्रांड भी भरोसा और गहराई के लिए प्रिंट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसके उलट FMCG सबसे बड़ा दबाव वाला सेक्टर रहा। यह 3% गिरकर 2,403 करोड़ रुपये से 2,325 करोड़ रुपये पर आ गया। एजुकेशन 2% घटकर 1,873 करोड़ रुपये रहा और टेलीकॉम ने भी अपने बजट कम किए। इन बड़े मास कैटेगरी में गिरावट दिखाती है कि इनके मीडिया बजट का हिस्सा अब डिजिटल और रिटेल मीडिया परफॉर्मेंस प्लेटफॉर्म की ओर जा रहा है।
आगे 2026–27 के लिए रिपोर्ट कहती है कि प्रिंट एक स्थिर लेकिन चुनिंदा और यील्ड-ड्रिवन माध्यम रहेगा। ऑटो, BFSI, रियल एस्टेट और होम इम्प्रूवमेंट, साथ ही प्रीमियम एजुकेशन जैसे सेक्टर में यह खास तौर पर असरदार रहेगा, खासकर हिंदी और अंग्रेजी बाजारों में।
रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंट तब सबसे ज्यादा असरदार होगा जब इसे डिजिटल और लार्ज स्क्रीन मीडिया के साथ मिलाकर प्लान किया जाएगा, न कि अकेले मास-रीच टूल की तरह। यानी डिजिटल-हावी विज्ञापन माहौल में प्रिंट अब एक प्रीमियम और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हो चुका है।
पूरी Pitch Madison Advertising Report (PMAR) 2026 डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक किया जा सकता है: https://e4mevents.com/pitch-madison-advertising-report-2026/download-report
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