कैसे-कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं/गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं/अब तो इस तालाब का पानी...
राजेश बादल 6 years ago
जी हां! मुझे पता है, शीशा टूटेगा/ लेकिन पत्थर सा सन्नाटा टूटेगा/ बाहर वाले...
राजेश बादल 7 years ago
दर्शक कराह रहा है। टीआरपी की होड़ है। अच्छे कार्यक्रमों का अकाल है। अच्छा कंटेंट नदारद...
राजेश बादल 7 years ago