सावधान! समय आ पहुंचा है। वक़्त की बारूद के ढेर पर बैठ चुके हैं...

राजेश बादल 6 years ago


कैसे-कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं/गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं/अब तो इस तालाब का पानी...

राजेश बादल 6 years ago



स्थिति विकट है। बंटवारा खुलकर सामने आ गया है। यह मेरा चैनल, वह तेरा...

राजेश बादल 6 years ago


हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव मीडिया को भी आगाह करने वाला...

राजेश बादल 6 years ago


सत्तर साल नहीं बंटी, पत्रकारिता अब बंट गई। मतभेद होते थे, पर ऐसे न...

राजेश बादल 7 years ago


अच्छा लगता है, सुनने-कहने में अच्छा लगता है, हिन्दुस्तान का चैनल उद्योग...

राजेश बादल 7 years ago


क्या होता जा रहा है हमें? कुंद और संवेदनहीन होने की अवस्था की...

राजेश बादल 7 years ago


जी हां! मुझे पता है, शीशा टूटेगा/ लेकिन पत्थर सा सन्नाटा टूटेगा/ बाहर वाले...

राजेश बादल 7 years ago


दर्शक कराह रहा है। टीआरपी की होड़ है। अच्छे कार्यक्रमों का अकाल है। अच्छा कंटेंट नदारद...

राजेश बादल 7 years ago