'मिस्टर मीडिया': कितना क्रूर और असंवेदनशील चेहरा हो गया है तुम्हारा!

जी हां! मुझे पता है, शीशा टूटेगा/ लेकिन पत्थर सा सन्नाटा टूटेगा/ बाहर वाले...

राजेश बादल by
Published - Friday, 09 November, 2018
Last Modified:
Friday, 09 November, 2018
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राजेश बादल वरिष्ठ पत्रकार ।। जी हां! मुझे पता है, शीशा टूटेगा/ लेकिन पत्थर सा सन्नाटा टूटेगा/ बाहर वाले आज़ादी के क़ैदी हैं/ भीतर से ही ये दरवाज़ा...
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