इसी विषय पर अगर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई भी विचार व्यक्त करते हैं, तो क्या उन्हें भी जातिवादी या मनुवादी कह देना उचित है?
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।