इसमें न किसी बदनामी का खतरा है और न इसे आप पीत पत्रकारिता कह सकते हैं। ऐसी स्थिति में पुरानी पीढ़ी के अनेक पत्रकारों में नई चिंता देखी गई है
राजेश बादल 6 years ago
आज भी हमारे कई मीडिया शिक्षा संस्थान ऐसे मामलों की कवरेज का व्यावहारिक, नैतिक और सैद्धांतिक पक्ष नहीं पढ़ाते
राजेश बादल 6 years ago
मीडिया और अवाम अपने कंधों का इस्तेमाल न होने दे तो ही इस तरह की स्थिति पर कुछ लगाम लग सकती है
राजेश बादल 6 years ago
मीडिया शिक्षण संस्थान अभी तक अध्ययन में गुणवत्ता पर अधिक गंभीरता नहीं दिखाते थे। लेकिन बीते एक बरस से ऐसे आयोजन लगातार मंथन कर रहे हैं
राजेश बादल 6 years ago
सितंबर में हिंदी पर केंद्रित अनेक कार्यक्रम होते हैं, लेकिन यह माह निकलने के बाद जैसे हमारा हिंदी प्रेम गहरी नींद में चला जाता है
राजेश बादल 6 years ago
पत्रकारिता अभिव्यक्ति का माध्यम है। पेशा नहीं। यह दाल रोटी की जुगाड़ का ज़रिया हो सकता है
राजेश बादल 6 years ago
केंद्रीय गृह मंत्रालय के पिछले चालीस साल के परिपत्र देखिए। ऐसा लगता है कि सबकी होली जला दी गई है।
राजेश बादल 6 years ago
प्रेस काउंसिल उन माध्यमों पर बंदिश लगाए जाने की वकालत कैसे कर सकती है, जो उसके कार्यक्षेत्र से बाहर हैं
राजेश बादल 6 years ago