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मौकापरस्त गठबंधन लोकतंत्र के लिए गंभीर: सुमित अवस्थी
अजित पवार ने स्पष्ट किया कि इससे आगे किसी तरह के स्थायी गठबंधन या पार्टी विलय की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि मर्जर या फिर दोनों गुटों के एक होने की खबरें पूरी तरह अफवाह हैं।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज़ है और सभी प्रमुख दल एक-दूसरे पर हमलावर हैं। इसी बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने टाइम्स नाउ नवभारत से खास बातचीत में मौजूदा राजनीतिक समीकरणों पर स्थिति साफ की। उन्होंने शरद पवार के साथ भविष्य के गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों के बीच तालमेल केवल मौजूदा चुनाव तक सीमित है।
इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार सुमित अवस्थी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट की और कहा कि मौकापरस्त गठबंधन लोकतंत्र के लिए गंभीर बात है। उन्होंने लिखा, वाकई गजब है। राजनीतिक पार्टियों ने मतदाताओं को बहुत हल्के में ले लिया है। जब मन किया तो बंटवारा कर लिया और जैसे ही चुनाव आया, फिर एक हो गए।
केंद्र में जिनके साथ गठबंधन होता है, राज्य या नगर निकाय चुनावों में उन्हीं के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। ऐसे मौकापरस्त गठबंधन लोकतंत्र की गंभीरता पर सवाल खड़े करते हैं। सवाल यह है कि क्या इस तरह के अवसरवादी गठबंधनों पर लगाम लगाने की व्यवस्था हमारी लोकतांत्रिक प्रणाली में होनी चाहिए?
अगर होनी चाहिए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन ले? सरकारें, अदालतें, चुनाव आयोग या कोई और संस्थागत व्यवस्था? आपको बता दें, अजित पवार ने स्पष्ट किया कि इससे आगे किसी तरह के स्थायी गठबंधन या पार्टी विलय की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि मर्जर या फिर दोनों गुटों के एक होने की खबरें पूरी तरह अफवाह हैं।
गजब है… राजनीतिक पार्टियों ने वोटर को बहुत ही हल्के में ले लिया है…. जब मन किया अलग हो गये (बंटवारा कर लिया) // जब (चुनाव आया ) मन किया तो एक हो गये…. // केन्द्र में जिसके साथ राज्य या फिर नगर चुनावों में उसके खिलाफ….// …. #गजबेहै
— awasthis (@awasthis) January 12, 2026
इस तरह के मौकापरस्त गठबंधनों पर लगाम लगाने… https://t.co/g4VWsK8sxS
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