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मीडिया का उद्देश्य जनसरोकार हो निजी स्वार्थ नहीं: आलोक श्रीवास्तव
महज़ दो दशक पहले तक अख़बार या न्यूज़ चैनल शुरू करने का विचार वही व्यक्ति करता था, जिसे पत्रकारिता, समाज, समय और साहित्य की गहरी समझ और सरोकारों की सच्ची चिंता होती थी।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 4 hours ago
बीते समय की स्मृतियों में झाँकें तो पत्रकारिता केवल समाचारों का व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज की धड़कनों को शब्द देने का एक गंभीर दायित्व हुआ करती थी। उसमें संवेदना थी, सरोकार थे और सत्य के प्रति अडिग निष्ठा थी। कलम को साधन नहीं, साधना माना जाता था। परंतु बदलते दौर में मानो मूल्यों की वह आभा धूमिल पड़ती जा रही है।
इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार, कवि, लेखक आलोक श्रीवास्तव ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट की और अपने मन की बात कही। उन्होंने लिखा, महज़ दो दशक पहले तक अख़बार या न्यूज़ चैनल शुरू करने का विचार वही व्यक्ति करता था, जिसे पत्रकारिता, समाज, समय और साहित्य की गहरी समझ और सरोकारों की सच्ची चिंता होती थी।
यह एक जिम्मेदारी मानी जाती थी, धंधा नहीं। पर अब परिदृश्य बदल गया है। आज कोई भी बिल्डर, नेता, कारोबारी, कबाड़ी अपना प्रभाव बढ़ाने, छवि सुधारने या अपना हित साधने के लिए मीडिया हाउस खड़ा कर देता है। मीडिया का उद्देश्य जनसरोकार होना चाहिए, निजी स्वार्थ नहीं, पर जब प्राथमिकता बदल जाती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। फिर सोचिए, क्या हम पत्रकारिता को सशक्त बना रहे हैं, या उसे सिर्फ़ एक औज़ार में बदल रहे हैं?
महज़ दो दशक पहले तक अख़बार या न्यूज़ चैनल शुरू करने का विचार वही व्यक्ति करता था, जिसे पत्रकारिता, समाज, समय और साहित्य की गहरी समझ और सरोकारों की सच्ची चिंता होती थी. यह एक जिम्मेदारी मानी जाती थी, धंधा नहीं. पर अब परिदृश्य बदल गया है. आज कोई भी बिल्डर, नेता, कारोबारी, कबाड़ी…
— Aalok Shrivastav (@AalokTweet) February 27, 2026
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