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क्या अगड़ी जाति में पैदा होना अब गुनाह हो गया: राणा यशवंत
नए प्रावधानों में केवल अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए शिकायत की व्यवस्था स्पष्ट है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए समान और भरोसेमंद व्यवस्था नहीं दिखती।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव ख़त्म करने के लिए यूजीसी ने अपने मौजूदा नियमों को और सख़्त किया है। 13 जनवरी को यूजीसी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग विनिमय 2026 जारी किया जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थाओं में समानता को बढ़ाना है। विवाद की मूल वजह जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) को शामिल करना है।
विरोध करने वालों का तर्क है कि ये सामान्य वर्ग के लोगों के ख़िलाफ़ है। इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने भी अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने एक्स पर लिखा, क्या यह सिर्फ एक संयोग है कि NEET-PG में ओबीसी, एससी और एसटी का कटऑफ माइनस 40 कर दिया गया और अब यूजीसी ने अपने नए नियमों में यह संदेश दिया है कि समाज में बदसलूकी और जाति के नाम पर ज़हर फैलाने वाली केवल अगड़ी जातियाँ हैं।
ऐसा दिखाया जा रहा है कि उन्हें गालियाँ देना गाली नहीं है, उनका अपमान हो ही नहीं सकता, बल्कि वे सबसे असभ्य और हिंसक लोग हैं। उन्हें सबक सिखाने के नाम पर यूजीसी ने ऐसा कानून बना दिया है कि जब चाहो अगड़ों को निशाना बनाओ। सवाल यह है कि इतना सब करने की ज़रूरत ही क्या थी, सीधे कह दीजिए कि आप लोग कहीं और चले जाएँ।
किसी जाति में पैदा होना इंसान के हाथ में नहीं होता, वह महज़ संयोग है, लेकिन अब यही बात अगड़ी जातियों के लिए जैसे कोई गुनाह बना दी गई है। आपको बता दें, नए प्रावधानों में केवल अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिए शिकायत की व्यवस्था स्पष्ट है, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए समान और भरोसेमंद व्यवस्था नहीं दिखती।
क्या यह महज़ संयोग है कि #NEETPG में ओबीसी, एससी और एसटी का कट ऑफ माइनस 40 कर दिया गया और अब #UGC ने अपने नए नियम में यह बता दिया कि समाज में बदसलूक और जाति के नाम पर ज़हर बोनेवाली सिर्फ अगड़ी जातियां हैं. उनको गालियाँ, गालियाँ नहीं हैं, उनका अपमान हो ही नहीं सकता. अलबत्ता वे…
— Rana Yashwant (@RanaYashwant1) January 27, 2026
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