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इस देश में जाति हमें हर रोज मारती है: चित्रा त्रिपाठी
17 जनवरी 2016 को रोहित वेमुला ने आत्महत्या की, जिस पर जातीय उत्पीड़न के आरोप लगे और यह मामला पूरे देश की सुर्खियाँ बना। नेता उनके परिवार से मिलने पहुंचे, यूजीसी ने नए नियम तक बना दिए।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC द्वारा 13 जनवरी 2026 को लागू किए गए 'इक्विटी रेगुलेशन्स' ने देशभर में एक तीखा विवाद छेड़ दिया है। सामान्य वर्ग के छात्र और कई संगठन इसे 'एकतरफा और दमनकारी' बता रहे हैं। इस मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार चित्रा त्रिपाठी ने भी अपने एक्स हैंडल से एक पोस्ट कर अपनी बात कहीं।
उन्होंने लिखा, 17 जनवरी 2016 को रोहित वेमुला ने आत्महत्या की, जिस पर जातीय उत्पीड़न के आरोप लगे और यह मामला पूरे देश की सुर्खियाँ बना। नेता उनके परिवार से मिलने पहुंचे, यूजीसी ने नए नियम तक बना दिए। वहीं 26 फरवरी 2016 को लखनऊ में इंजीनियरिंग के छात्र लवकेश मिश्रा ने आत्महत्या की, अपनी चिट्ठी में एचओडी पर आरोप लगाए, लेकिन न यह खबर बनी, न कोई नेता उनके घर गया और आज शायद ही कोई उनका नाम जानता हो।
सच यह है कि इस देश में जाति हमें हर रोज़ मारती है, फर्क बस इतना है कि राजनीति ने एक वर्ग के छात्रों को हाशिये पर धकेल दिया है, क्योंकि उनके जीने-मरने से नेताओं को कोई फर्क नहीं पड़ता और उनके संघर्ष से वोट नहीं मिलते। इस हमाम में सब एक जैसे हैं।
आपको बता दें, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विवाद पर सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि सरकार सभी छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और सरकार इस मामले में सभी पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) की बात सुनने को तैयार है।
17 Jan 2016- रोहित वेमुला का सुसाइड, जातीय उत्पीड़न के आरोप ( पूरे देश की खबर बनी, नेताओं का ताँता उनके परिवार वालों से मिलने में लग गया, UGC ने तो नया नियम ही बना दिया )
— Chitra Tripathi (@chitraaum) January 27, 2026
26 Feb 2016- लखनऊ में इंजीनियरिंग के छात्र लवकेश मिश्रा ने सुसाइड किया, चिट्ठी में HOD पर आरोप लगाया, ना…
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