हर गुरुवार की सुबह टीवी इंडस्ट्री के लिए बेहद अहम होती थी। इसी दिन आने वाली रेटिंग्स कई चैनलों की किस्मत तय करती थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डॉ. अनुराग बत्रा, चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।
भारत में टेलीविजन ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम पिछले कई वर्षों के सबसे बड़े बदलावों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में ब्रॉडकास्टर्स, ऐडवर्टाइजर, मीडिया एजेंसीज और पॉलिसी मेकर्स सभी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि आखिर आगे क्या होगा। लेकिन असली सवाल सिर्फ यह नहीं है कि रेटिंग्स कब वापस आएंगी। बड़ा सवाल यह है कि क्या भारतीय मीडिया इंडस्ट्री दर्शकों को मापने के बिल्कुल नए तरीके के लिए तैयार है?
हर गुरुवार की सुबह देशभर के टेलीविजन एग्जिक्यूटिव्स, मीडिया प्लानर्स और ऐडवर्टाइजर्स के लिए एक खास दिन हुआ करता था। यह सिर्फ रेटिंग्स जारी होने का दिन नहीं होता था, बल्कि ऐसा दिन होता था जब कई चैनलों की किस्मत बनती और बिगड़ती थी। कोई शो अगर रैंकिंग में ऊपर पहुंच जाता तो वह ज्यादा विज्ञापन दरें वसूल सकता था, जबकि रैंकिंग में नीचे आने वाले शो के सामने स्पॉन्सरशिप, मार्केटिंग सपोर्ट या यहां तक कि अपने प्रसारण स्लॉट को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो जाती थी।
करीब दो दशकों तक ऑडियंस रेटिंग्स भारत के टेलीविजन कारोबार की साझा भाषा रही हैं। इन्हीं के आधार पर प्रोग्रामिंग से जुड़े फैसले लिए गए, हजारों करोड़ रुपये के विज्ञापन निवेश तय हुए और यह निर्धारित हुआ कि कौन-से चैनल मार्केट के लीडर बनेंगे। लेकिन आज यह पूरी भाषा बदल रही है।
टेलीविजन रेटिंग्स सिस्टम में हो रहे बदलावों और बदलती नियामकीय अपेक्षाओं के बीच इंडस्ट्री एक अहम मोड़ पर खड़ी है। लगभग सभी इस बात पर सहमत हैं कि ऑडियंस मीजरमेंट विश्वसनीय, पारदर्शी और प्रतिनिधिक होना चाहिए। लेकिन भविष्य का सिस्टम कैसा होगा और उसे तय करने का अधिकार किसके पास होगा, इस पर अभी भी स्पष्ट सहमति नहीं है। रेटिंग्स को लेकर बनी अनिश्चितता ने चर्चा को सिर्फ मीजरमेंट तक सीमित नहीं रखा है। इसने पूरी इंडस्ट्री को भरोसे, गवर्नेंस, तकनीक और तेजी से बदलती टीवी देखने की आदतों जैसे बड़े सवालों का सामना करने के लिए मजबूर कर दिया है।
शायद पहली बार, जब से भारत में ऑडियंस मीजरमेंट को संस्थागत रूप मिला है, बहस सिर्फ रेटिंग्स तक सीमित नहीं रह गई है। अब चर्चा इस बात की है कि टेलीविजन इंडस्ट्री की सबसे कीमती करेंसी का भविष्य आखिर क्या होगा।
रेटिंग्स: टेलीविजन कारोबार की असली करेंसी
अखबारों की सर्कुलेशन या डिजिटल पेज व्यूज की तरह टेलीविजन दर्शकों की संख्या को रियल टाइम में सीधे नहीं गिना जा सकता। इसके लिए वैज्ञानिक सैंपलिंग का सहारा लिया जाता है, जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि कौन, क्या और कितना देख रहा है। यही अनुमान आगे चलकर वह करेंसी बन जाता है, जिसके आधार पर विज्ञापन कारोबार चलता है। इस करेंसी पर पूरी इंडस्ट्री निर्भर करती है।
ब्रॉडकास्टर्स रेटिंग्स के जरिए अपने कार्यक्रमों की सफलता का आकलन करते हैं और विज्ञापन दरें तय करते हैं। ऐडवर्टाइजर इन्हीं के आधार पर यह निर्णय लेते हैं कि अपना मार्केटिंग बजट कहां खर्च करना है। मीडिया एजेंसीज चैनलों की तुलना करती हैं, मीडिया प्लान तैयार करती हैं और अपने ग्राहकों को दी गई सलाह को सही ठहराती हैं। वहीं निवेशक और मार्केट एनालिस्ट भी रेटिंग्स को किसी नेटवर्क की प्रतिस्पर्धी ताकत का महत्वपूर्ण संकेत मानते हैं।
कई मायनों में रेटिंग्स टेलीविजन इंडस्ट्री के लिए वही महत्व रखती हैं, जो शेयर मार्केट में शेयरों की कीमत रखती है। इसलिए सिर्फ आंकड़े ही महत्वपूर्ण नहीं होते, बल्कि पूरे सिस्टम पर भरोसा होना उससे भी ज्यादा जरूरी होता है। जब भरोसा कमजोर पड़ता है तो हर तरह का व्यावसायिक लेनदेन अधिक जटिल हो जाता है।
मीजरमेंट से जवाबदेही तक
ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम कभी भी आलोचनाओं से पूरी तरह मुक्त नहीं रहा। सैंपल किस तरह चुने जाते हैं, शहर और गांव के बीच संतुलन कितना है, अलग-अलग क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कितना सही है और पैनल में हेरफेर की संभावना जैसे सवाल समय-समय पर उठते रहे हैं। कुछ वर्ष पहले सामने आए कथित टीआरपी हेरफेर विवाद ने इस मुद्दे को केवल इंडस्ट्री की बहस से निकालकर राष्ट्रीय स्तर की चर्चा बना दिया।
इसके बाद न्यूज रेटिंग्स को निलंबित किया गया और नियामकीय निगरानी भी काफी बढ़ गई। यही वह मोड़ था जिसने पूरे सिस्टम की दिशा बदल दी।
पॉलिसी मेकर्स के लिए यह सिर्फ ऑडियंस मीजरमेंट का मामला नहीं रह गया था। यह उस सिस्टम की विश्वसनीयता का सवाल बन गया था, जो विज्ञापनों पर खर्च होने वाले अरबों रुपये के फैसलों को प्रभावित करता है।
इसके बाद से इंडस्ट्री का ध्यान गवर्नेंस को मजबूत करने, मीजरमेंट की कार्यप्रणाली में सुधार लाने और पैनल का विस्तार करने पर केंद्रित रहा है। हालांकि सुधारों पर लगातार चर्चा हो रही है, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि नया ढांचा कब लागू होगा, उसका स्वरूप क्या होगा और क्या भविष्य का ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम मौजूदा व्यवस्था से पूरी तरह अलग होगा।
सरकार चाहती है विश्वसनीयता, इंडस्ट्री चाहती है निश्चितता
अगर ब्रॉडकास्टर्स यह जानना चाहते हैं कि स्थिर और भरोसेमंद रूप में रेटिंग्स कब वापस आएंगी, तो पॉलिसी मेकर्स एक अलग सवाल पूछते नजर आते हैं। उनका सवाल है कि ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम पर लोगों का भरोसा और मजबूत कैसे बनाया जाए?
इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि सरकार का फोकस आगे भी पारदर्शिता, मजबूत गवर्नेंस व्यवस्था और बेहतर निगरानी तंत्र पर रहेगा। भविष्य में बड़े और ज्यादा प्रतिनिधिक सैंपल, मजबूत कार्यप्रणाली, बेहतर सुरक्षा उपाय और सुदृढ़ संस्थागत प्रक्रियाएं सुधारों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती हैं। दूसरी ओर, ब्रॉडकास्टर्स और ऐडवर्टाइजर्स के लिए एक और चिंता लगातार बढ़ती जा रही है- निश्चितता।
टेलीविजन विज्ञापन कारोबार तभी सबसे बेहतर तरीके से चलता है, जब पूरी इंडस्ट्री एक ही मीजरमेंट करेंसी पर भरोसा करती हो। 75 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के टीवी विज्ञापन मार्केट और करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये के कुल विज्ञापन मार्केट, जो आगे बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, के लिए भारत को एक ऐसी बुनियादी, भरोसेमंद और सभी की ओर से स्वीकार की गई ऑडियंस मीजरमेंट करेंसी की जरूरत है, जो ब्रॉडकास्टर्स को स्पष्टता, ऐडवर्टाइजर्स को भरोसा, मीडिया एजेंसियों को स्थिरता और हर साल अरबों रुपये निवेश करने वाले ब्रैंड्स को विश्वसनीयता प्रदान करे। अगर मीजरमेंट सिस्टम कई हिस्सों में बंट जाता है या लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रहती है, तो इससे विज्ञापन दरों पर बातचीत मुश्किल हो सकती है, कैंपेन प्लानिंग में देरी हो सकती है और पूरे इकोसिस्टम का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
यही वजह है कि इंडस्ट्री के सामने एक नाजुक संतुलन बनाने की चुनौती है। सुधार जरूरी हैं, लेकिन वे विश्वसनीयता की कीमत पर नहीं होने चाहिए। वहीं दूसरी ओर, लंबे समय तक बनी रहने वाली अनिश्चितता की भी अपनी आर्थिक कीमत होती है।
BARC के सामने सबसे बड़ी चुनौती तकनीक नहीं, बल्कि भरोसा है
इस पूरी बहस के सबसे करीब अगर कोई संस्था है तो वह है BARC India. पिछले कुछ वर्षों में BARC ने ऑडियंस मीजरमेंट का दायरा बढ़ाया है, नई तकनीकों को अपनाया है और पैनल विस्तार पर भी निवेश किया है। लेकिन अगला दौर कितना सफल होगा, यह सिर्फ तकनीक तय नहीं करेगी। असल मुद्दा अब भरोसा बन चुका है।
क्या ब्रॉडकास्टर्स, ऐडवर्टाइजर और मीडिया एजेंसीज फिर से एक ही आंकड़ों को पूरी इंडस्ट्री की साझा करेंसी के रूप में स्वीकार करेंगी? क्या मीजरमेंट की कार्यप्रणाली इतनी तेजी से बदलेगी कि वह लोगों की बदलती टीवी देखने की आदतों को सही तरीके से दिखा सके? क्या गवर्नेंस में होने वाले सुधार सभी हितधारकों को यह भरोसा दिला पाएंगे कि यह सिस्टम किसी भी तरह के प्रभाव या दबाव से पूरी तरह सुरक्षित है?
संभव है कि आने वाले समय में ये सवाल किसी भी तकनीकी सुधार से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण साबित हों।
ब्रॉडकास्टर्स अब अलग-अलग सवाल पूछ रहे हैं
रेटिंग्स को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि पूरी ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री एक जैसी सोच रखती है। हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। अलग-अलग ब्रॉडकास्टर्स की प्राथमिकताएं भी अलग-अलग हैं।
बड़े जनरल एंटरटेनमेंट नेटवर्क स्थिरता और अनुमानित सिस्टम चाहते हैं, क्योंकि उनका विज्ञापन कारोबार लगातार और भरोसेमंद मीजरमेंट पर निर्भर करता है। वहीं क्षेत्रीय चैनलों का कहना है कि अलग-अलग भाषाई मार्केट्स में दर्शकों की आदतों को ज्यादा बेहतर तरीके से प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। न्यूज चैनल अब भी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या पारंपरिक टेलीविजन मीजरमेंट आज के डिजिटल न्यूज इकोसिस्टम में उनके वास्तविक प्रभाव को सही तरीके से माप पाता है।
स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर्स के सामने अलग तरह की चुनौती है। बड़े खेल आयोजनों के दौरान दर्शकों की संख्या अचानक बहुत तेजी से बढ़ती है, लेकिन यह बढ़ोतरी कुछ समय के लिए ही होती है। इसलिए ऐसे मीजरमेंट सिस्टम की जरूरत है, जो अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के व्यवहार को सटीक तरीके से रिकॉर्ड कर सके। यानी ब्रॉडकास्टर्स की कोई एक जैसी राय नहीं है। कुछ चाहते हैं कि रेटिंग्स जल्द से जल्द वापस आ जाएं। जबकि कुछ का मानना है कि रेटिंग्स लौटने से पहले सिस्टम को पूरी तरह बेहतर बनाया जाना चाहिए।
ऐडवर्टाइजर्स को सिर्फ आंकड़े नहीं, जवाबदेही भी चाहिए
ऐडवर्टाइजर्स के लिए रेटिंग्स हमेशा से जवाबदेही का आधार रही हैं। हर मार्केटिंग बजट के सामने आखिरकार एक ही सवाल आता है- क्या निवेश सही दर्शकों तक पहुंचा या नहीं?
पारंपरिक रूप से टेलीविजन इस सवाल का जवाब ऑडियंस मीजरमेंट के जरिए देता रहा है। लेकिन अब दर्शक अपना समय ब्रॉडकास्ट टीवी, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, कनेक्टेड टीवी और मोबाइल स्क्रीन के बीच बांट रहे हैं। ऐसे में ऐडवर्टाइजर दर्शकों के व्यवहार की कहीं ज्यादा व्यापक तस्वीर देखना चाहते हैं।
आज कई मार्केटर्स किसी कैंपेन का मूल्यांकन सिर्फ टीवी रेटिंग्स के आधार पर नहीं करते। वे डिजिटल एनालिटिक्स, फर्स्ट-पार्टी कंज्यूमर डेटा, सोशल मीडिया एंगेजमेंट और बिक्री के आंकड़ों को भी साथ में देखते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि रेटिंग्स की अहमियत कम हो गई है। बल्कि उनकी भूमिका बदल रही है।
अब टेलीविजन रेटिंग्स सफलता का अकेला पैमाना नहीं रह गई हैं, बल्कि वे एक बड़े और व्यापक मीजरमेंट इकोसिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही हैं।
ऐडवर्टाइजर, मार्केटर्स, इंडियन सोसाइटी ऑफ एडवरटाइजर्स (ISA), नए ब्रैंड मालिक और ऐडवर्टाइजर्स के संगठन, जो मीडिया और ऑडियंस पर निवेश करते हैं, उन्हें मिलकर इस नई रेटिंग्स करेंसी की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। यह ऐसी करेंसी होनी चाहिए, जो अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म और फॉर्मेट पर होने वाली व्यूअरशिप और एंगेजमेंट दोनों को माप सके।
ब्रैंड्स और मार्केटर्स मिलकर हर साल लगभग 1.75 लाख करोड़ रुपये का विज्ञापन निवेश करते हैं। अगर वे सामूहिक रूप से इस राशि का लगभग 0.6 प्रतिशत यानी करीब 1,000 करोड़ रुपये ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम पर खर्च करें, तो इसका सबसे बड़ा लाभ उन्हें खुद मिलेगा और साथ ही पूरे मीडिया इकोसिस्टम को भी इसका फायदा होगा।
मीडिया एजेंसीज चुपचाप बदल रही हैं अपनी प्लानिंग का तरीका
अगर इस बदलाव के दौर में किसी ने सबसे तेजी से खुद को बदला है, तो वह मीडिया एजेंसीज हैं। मीडिया खपत के लगातार बिखरते स्वरूप को देखते हुए मीडिया प्लानर्स अब अपने ग्राहकों को सलाह देने के लिए कई तरह के डेटा का इस्तेमाल कर रहे हैं। ब्रॉडकास्ट टीवी कैंपेन की योजना बनाने में आज भी टेलीविजन रेटिंग्स की अहम भूमिका है, लेकिन अब उनके साथ डिजिटल व्यूअरशिप, कनेक्टेड टीवी की खपत, ऑनलाइन वीडियो के आंकड़े और एजेंसियों के अपने ऑडियंस टूल्स का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
यह बदलाव पूरी इंडस्ट्री की एक बड़ी सच्चाई को दिखाता है। आज के दर्शक "टेलीविजन" और "वीडियो" के बीच कोई फर्क नहीं करते। वे सिर्फ वही कंटेंट देखते हैं, जो उन्हें जिस स्क्रीन पर सबसे सुविधाजनक लगता है। लेकिन मीजरमेंट सिस्टम अभी भी इस बदलाव की रफ्तार से काफी पीछे चल रहे हैं।
रेटिंग्स से कहीं ज्यादा तेजी से बदले हैं दर्शक
शायद सबसे बड़ा बदलाव रेटिंग्स इंडस्ट्री के भीतर नहीं, बल्कि भारतीय घरों के अंदर आया है। अब टेलीविजन ही एकमात्र ऐसी स्क्रीन नहीं रह गई है, जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती हो। एक ही परिवार का कोई सदस्य प्राइम टाइम का ड्रामा टीवी पर देख सकता है, दूसरा मोबाइल पर क्रिकेट मैच की हाइलाइट्स देख सकता है, तीसरा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर फिल्म स्ट्रीम कर सकता है और उसी दिन कई बार शॉर्ट वीडियो भी देख सकता है।
पारंपरिक ऑडियंस मीजरमेंट सिस्टम उस दौर के लिए बनाया गया था, जब घरों में मनोरंजन का मुख्य माध्यम केवल टेलीविजन हुआ करता था। लेकिन आज दर्शकों की देखने की आदतें पहले की तुलना में कहीं ज्यादा बिखरी हुई और विविध हो चुकी हैं। यहीं से एक महत्वपूर्ण सवाल पैदा होता है।
क्या भारत आज भी सिर्फ टेलीविजन दर्शकों को माप रहा है, या अब उसे कुल वीडियो खपत को मापना शुरू कर देना चाहिए? इसी सवाल का जवाब आने वाले दशक में मीडिया प्लानिंग की दिशा तय कर सकता है।
क्या भारत को एक ही रेटिंग्स करेंसी चाहिए या कई?
ऑडियंस मीजरमेंट को लेकर एक और बहस तेजी से आगे बढ़ रही है। यह बहस इस बात को लेकर है कि भविष्य में मीजरमेंट सिस्टम का ढांचा कैसा होना चाहिए।
कई वर्षों से भारतीय टेलीविजन इंडस्ट्री इस सोच के साथ काम करती रही है कि एक ही मीजरमेंट करेंसी सबसे ज्यादा प्रभावी होती है। ब्रॉडकास्टर्स, ऐडवर्टाइजर और मीडिया एजेंसीज सभी एक ही डेटा सेट के आधार पर कारोबार करते हैं।
लेकिन तकनीक के विकास के साथ कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एक से ज्यादा मीजरमेंट सिस्टम होंगे, तो इससे नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा और इंडस्ट्री को ज्यादा गहरी और समृद्ध जानकारी मिल सकेगी।
वहीं दूसरे विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग मीजरमेंट करेंसी से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे मीडिया खरीदने की प्रक्रिया पहले की तुलना में और ज्यादा जटिल हो जाएगी, खासकर भारत जैसे बड़े मार्केट में, जहां वर्षों से एक भरोसेमंद साझा करेंसी के आधार पर ब्रॉडकास्टर्स, मीडिया एजेंसियों और ब्रैंड्स के बीच कारोबार होता आया है।
दुनिया के कई देशों में इस समय अलग-अलग मॉडल पर प्रयोग किए जा रहे हैं। वहां पारंपरिक टेलीविजन पैनल के साथ रिटर्न-पाथ डेटा, कनेक्टेड टीवी एनालिटिक्स और डिजिटल मीजरमेंट को जोड़कर नए समाधान विकसित किए जा रहे हैं। संभव है कि आने वाले समय में भारत के सामने भी ऐसे ही विकल्प हों।
वह दर्शक जिसकी सबसे कम चर्चा होती है
दिलचस्प बात यह है कि रेटिंग्स को लेकर होने वाली बहस में जिस सबसे महत्वपूर्ण पक्ष की सबसे कम चर्चा होती है, वह है- दर्शक। हर ब्रॉडकास्टर दावा करता है कि वह अपने दर्शकों को समझता है। हर ऐडवर्टाइजर उन्हीं तक पहुंचना चाहता है। हर मीडिया एजेंसी उनका अध्ययन करती है। हर मीजरमेंट सिस्टम उन्हें सही तरीके से प्रस्तुत करने की कोशिश करता है। लेकिन यह चर्चा शायद ही कभी होती है कि खुद दर्शक चाहते क्या हैं और उन्हें किस तरह मापा जाना चाहिए।
असल में दर्शकों की प्राथमिकता सिर्फ अच्छी सामग्री, आसान पहुंच और ज्यादा विकल्प होती है। रेटिंग्स उनके लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण नहीं होतीं।लेकिन यही रेटिंग्स तय करती हैं कि कौन-सा कार्यक्रम बनाया जाएगा, कौन-सा शो ऑन एयर बना रहेगा और किस तरह के कंटेंट में निवेश किया जाएगा।
इस तरह देखा जाए तो ऑडियंस मीजरमेंट सिर्फ कारोबारी फैसलों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि उन करोड़ों भारतीयों तक पहुंचने वाले कंटेंट की दिशा भी तय करता है, जिसे वे हर दिन देखते हैं। यह बदलाव सिर्फ रेटिंग्स का नहीं, पूरे सिस्टम का है। अक्सर कहा जाता है कि टेलीविजन इंडस्ट्री बदलाव के दौर से गुजर रही है। लेकिन इस बार का बदलाव किसी अस्थायी रुकावट या केवल नियामकीय बदलाव से कहीं बड़ा है। यह उस पूरी सोच का पुनर्मूल्यांकन है कि ऐसे समय में दर्शकों को किस तरह मापा जाए, जब कंटेंट बिना किसी रुकावट के ब्रॉडकास्ट टीवी, कनेक्टेड टीवी, मोबाइल डिवाइस और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के बीच लगातार घूम रहा है।
आज पॉलिसी मेकर्स, ब्रॉडकास्टर्स, ऐडवर्टाइजर्स, मीडिया एजेंसियों और ऑडियंस मीजरमेंट कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ रेटिंग्स पर भरोसा बहाल करना नहीं है। बल्कि ऐसी मीजरमेंट व्यवस्था तैयार करना है, जो यह सही तरीके से दिखा सके कि भारत आज कंटेंट कैसे देखता है और आने वाले वर्षों में उसे किस तरह देखेगा। भविष्य में यह व्यवस्था एक मजबूत और अधिक सक्षम BARC के नेतृत्व में आगे बढ़ेगी, किसी अधिक तकनीक-आधारित ऑडियंस मीजरमेंट फ्रेमवर्क के जरिए विकसित होगी या फिर अलग-अलग प्लेटफॉर्म को जोड़ने वाली एक व्यापक और साझा मीजरमेंट करेंसी के रूप में सामने आएगी, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन एक बात अब बिल्कुल साफ है कि ऑडियंस मीजरमेंट के अगले दौर का मूल्यांकन सिर्फ इस आधार पर नहीं होगा कि उसके आंकड़े कितने सटीक हैं, बल्कि इस बात पर भी होगा कि वह पूरी इंडस्ट्री में कितना भरोसा पैदा कर पाता है। कई वर्षों तक रेटिंग्स यह तय करती रही हैं कि इंडस्ट्री में कौन आगे है और कौन पीछे। लेकिन अब इससे भी बड़ा सवाल यह है कि आने वाले समय में इस पूरे खेल के नियम कौन तय करेगा।
BARC को नए नेतृत्व, नई सोच और ज्यादा मानवीय, सक्रिय तथा विनम्र कार्यशैली की जरूरत है। लंबे समय से यह धारणा रही है कि BARC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इंडस्ट्री की चिंताओं और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) के उन निर्देशों के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा पाए, जो पूरे मीडिया उद्योग, ऐडवर्टाइजर्स और व्यापक इकोसिस्टम के हित में थे।
आगे बढ़ते हुए एक API आधारित मॉडल भी तैयार किया जा सकता है, जिसे अपेक्षाकृत कम निवेश में लागू करना संभव है। हालांकि, इसके लिए जरूरी होगा कि Meta, Facebook और अन्य बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसमें शामिल हों, ताकि मार्केटर्स और ऐडवर्टाइजर्स के लिए सभी माध्यमों को जोड़ने वाली एक साझा और एकीकृत मीजरमेंट करेंसी तैयार की जा सके। अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं रह गया है कि रेटिंग्स कब वापस आएंगी। असल सवाल यह है कि रेटिंग्स सिस्टम में सुधार और बदलाव की अगुवाई कौन करेगा, उसके नए नियम कौन तय करेगा और यह प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होगी।
भारतीय मीडिया इंडस्ट्री को जितनी जल्दी हो सके एक भरोसेमंद, पारदर्शी और सभी की ओर से स्वीकार की गई साझा रेटिंग्स व्यवस्था की जरूरत है। क्योंकि इस तरह का लंबा खालीपन या अनिश्चितता पूरे मीडिया और विज्ञापन उद्योग के लिए किसी भी तरह से अच्छी नहीं मानी जा सकती।
निष्ठा बधानी को राजस्थान पत्रिका में वाइस प्रेसिडेंट-नेशनल अकाउंट्स नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह जियोस्टार में एसोसिएट डायरेक्टर थीं और टेलीविजन व प्रिंट मीडिया में 16 साल का अनुभव रखती हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
निष्ठा बधानी (Nishtha Badhani) को राजस्थान पत्रिका (Rajasthan Patrika) में वाइस प्रेसिडेंट-नेशनल अकाउंट्स (Vice President-National Accounts) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।
अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उन्हें यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि उन्होंने राजस्थान पत्रिका प्राइवेट लिमिटेड (Rajasthan Patrika Pvt. Ltd.) में वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
इससे पहले निष्ठा बधानी करीब दो साल तक जियोस्टार (JioStar) के साथ एसोसिएट डायरेक्टर (Associate Director) के पद पर काम कर रही थीं।
निष्ठा बधानी को स्ट्रैटेजिक और रिजल्ट-ओरिएंटेड मीडिया सेल्स लीडर (Strategic and Result-Oriented Media Sales Leader) के तौर पर जाना जाता है। उन्हें टेलीविजन और प्रिंट मीडिया (Television and Print Media) में 16 वर्षों का अनुभव है। अपने करियर में उन्होंने रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) और रणनीति आधारित समाधानों के जरिए लंबे समय तक क्लाइंट रिलेशनशिप (Client Relationships) विकसित करने पर काम किया है।
इससे पहले वह डिज्नी स्टार (Disney Star), नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (Network18 Media & Investments Limited) और डीबी कॉर्प लिमिटेड (DB Corp Ltd.) समेत कई प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं।
मिली ऐश्वर्या ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया में 18 साल पूरे किए हैं। उन्होंने 2008 में शुरुआत की थी और अब एडल्ट पब्लिशिंग ग्रुप के साथ 13 इम्प्रिंट्स की जिम्मेदारी संभालती हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया (Penguin Random House India) की पब्लिशर और ग्रुप सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (Publisher and Group Senior Vice President) मिली ऐश्वर्या (Milee Ashwarya) ने कंपनी के साथ 18 साल पूरे कर लिए हैं। उन्होंने सितंबर 2008 में पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के साथ पब्लिशर, एबरी पब्लिशिंग और विंटेज पब्लिशिंग (Publisher, Ebury Publishing and Vintage Publishing) के तौर पर करियर शुरू किया था। इस भूमिका में उन्होंने 14 साल से ज्यादा समय बिताया।
जनवरी 2023 में उन्हें सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और पब्लिशर, एडल्ट पब्लिशिंग ग्रुप (Senior Vice President and Publisher, Adult Publishing Group) की जिम्मेदारी मिली। इसके बाद जनवरी 2026 में उन्हें पब्लिशर और ग्रुप सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पद पर प्रमोट किया गया।
18 साल पूरे होने के मौके पर लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा की गई पोस्ट में मिली ऐश्वर्या ने अपने सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्होंने पब्लिशिंग लैंडस्केप (Publishing Landscape) में बदलाव देखे, इंडस्ट्री की चुनौतियों का सामना किया, नए लेखकों के साथ काम किया और भारतीय पाठकों के लिए कई इम्प्रिंट्स लॉन्च किए।
उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे पब्लिशिंग प्रोग्राम (Publishing Programme) को तैयार करने पर खास गर्व है, जो भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और बौद्धिक विविधता को दर्शाता है और पाठकों तक नई आवाजों और विचारों को पहुंचाता है।
फिलहाल मिली ऐश्वर्या पेंगुइन इंडिया के एडल्ट पब्लिशिंग ग्रुप का नेतृत्व कर रही हैं। वह एलन लेन (Allen Lane), हैमिश हैमिल्टन (Hamish Hamilton), विंटेज (Vintage), वाइकिंग (Viking), पेंगुइन क्लासिक्स (Penguin Classics) और पेंगुइन बिजनेस (Penguin Business) समेत 13 इम्प्रिंट्स की जिम्मेदारी संभालती हैं।
तमिलनाडु न्यूजप्रिंट एंड पेपर्स लिमिटेड (TNPL) की 46वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 24 सितंबर 2026 को हुई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
तमिलनाडु न्यूजप्रिंट एंड पेपर्स लिमिटेड (TNPL) की 46वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) 24 सितंबर 2026 को हुई। बैठक में शेयरधारकों ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए वित्तीय नतीजों को मंजूरी दे दी।
बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई। इसका आयोजन कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के सर्कुलर के तहत किया गया। बैठक की अध्यक्षता कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कुमार जयंत ने की।
AGM में डिविडेंड घोषित करने, रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे एक डायरेक्टर की दोबारा नियुक्ति और वैधानिक ऑडिटर के पारिश्रमिक तय करने समेत कुल पांच साधारण प्रस्ताव रखे गए। सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए।
वोटिंग के नतीजे जारी
कंपनी ने SEBI के लिस्टिंग नियमों के रेगुलेशन 44(3) के तहत कंसोलिडेटेड वोटिंग रिजल्ट भी जारी किया है। 17 सितंबर 2026 की कट-ऑफ डेट तक कंपनी के कुल 51,591 शेयरधारक रिकॉर्ड पर थे।
शेयरधारकों ने 21 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक रिमोट ई-वोटिंग के जरिए और AGM के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग के जरिए मतदान किया।
वित्तीय स्टेटमेंट को मंजूरी देने वाले प्रस्ताव के पक्ष में 99.98% वोट पड़े, जबकि डिविडेंड घोषित करने के प्रस्ताव को 99.99% वोट मिले। वहीं, डॉ. एस. विजयकुमार, आईएएस की दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव के पक्ष में 99.97% वोट पड़े।

ऑडिट में क्या कहा गया?
कंपनी के वैधानिक ऑडिटर एम/एस ए. जॉन मॉरिस एंड कंपनी ने वित्तीय स्टेटमेंट पर बिना किसी प्रतिकूल टिप्पणी के ऑडिट राय दी। हालांकि, उन्होंने कंपनी के अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर Oracle E-Business Suite (EBS) में ऑडिट ट्रेल से जुड़ी एक बात बताई।
ऑडिटर्स के मुताबिक, EBS में एप्लिकेशन लेवल पर ऑडिट ट्रेल मौजूद है, लेकिन डेटाबेस लेवल पर सीधे किए जाने वाले डेटा बदलावों को रिकॉर्ड करने के लिए ऑडिट ट्रेल चालू नहीं है। ऑडिटर्स ने यह भी स्पष्ट किया कि यूजर्स के पास बैकएंड से एंट्री को बदलने या एडिट करने की सुविधा नहीं है।
इसके अलावा, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने ‘NIL’ रिपोर्ट दी, यानी खातों को लेकर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की गई। कंपनी के सेक्रेटेरियल ऑडिटर्स एम/एस श्रीधरन एंड श्रीधरन एसोसिएट्स ने भी अपनी रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में बताई गई योग्यताओं को बोर्ड की रिपोर्ट में संबोधित किया गया है।
AGM में कौन-कौन रहे मौजूद?
बैठक में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर कुमार जयंत, एन. वेंकटेश, आर. कन्नन और कई स्वतंत्र डायरेक्टर शामिल रहे। इनमें डॉ. एन. सुंदरदेवन, टी.एम.टी. एम. सत्यवती, मैथ्यू थॉमस और श्रीगणेश पद्मनाभन शामिल थे।
डॉ. एस. विजयकुमार पहले से तय व्यस्तताओं के कारण बैठक में मौजूद नहीं थे। उन्हें दोबारा डायरेक्टर नियुक्त करने का प्रस्ताव AGM में मंजूर किया गया। AGM दोपहर 1:45 बजे समाप्त हुई। इस दौरान शेयरधारकों ने कंपनी के कामकाज और बाजार की स्थिति से जुड़े सवाल भी पूछे।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड की 16वीं (पोस्ट-आईपीओ) सालाना आम बैठक (एजीएम) 24 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड की 16वीं (पोस्ट-आईपीओ) सालाना आम बैठक (एजीएम) 24 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई। कंपनी ने बैठक में रखे गए दोनों प्रस्तावों को जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिलने की जानकारी दी है।
कंपनी के मुताबिक, एजीएम सुबह 11 बजे शुरू हुई। शेयरधारकों को बैठक से पहले रिमोट ई-वोटिंग और एजीएम के दौरान ई-वोटिंग के जरिए वोट करने की सुविधा दी गई थी।
बैठक में पहला प्रस्ताव वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों को मंजूर करने से जुड़ा था। इसमें बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और ऑडिटर्स की रिपोर्ट भी शामिल थी। इस प्रस्ताव को 99.9935 फीसदी वोट के साथ मंजूरी मिली।
दूसरा प्रस्ताव प्रियव्रत भारती को रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के बाद फिर से डायरेक्टर नियुक्त करने से जुड़ा था। वे दोबारा नियुक्ति के लिए पात्र थे और उन्होंने इसके लिए अपनी पेशकश की थी। इस प्रस्ताव को 99.9934 फीसदी वोट के साथ मंजूरी मिली।
कंपनी के 17 सितंबर 2026 के कट-ऑफ डेट तक कुल 15,769 शेयरधारक थे। एजीएम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप से 1 और पब्लिक कैटेगरी से 49 शेयरधारकों ने हिस्सा लिया।
कंपनी ने बताया कि दोनों प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए हैं। वोटिंग के नतीजे और स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट कंपनी की वेबसाइट और नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) की ई-वोटिंग वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
डी.बी. कॉर्प को NSE और BSE से दो प्रमोटर ग्रुप कंपनियों को ‘पब्लिक’ कैटेगरी में लाने के लिए नो-ऑब्जेक्शन लेटर मिला है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डी.बी. कॉर्प लिमिटेड ने बताया है कि उसे नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से अपने दो प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी कंपनियों को ‘प्रमोटर ग्रुप’ कैटेगरी से ‘पब्लिक’ कैटेगरी में लाने के लिए नो-ऑब्जेक्शन लेटर मिल गया है।
कंपनी ने 23 सितंबर 2026 को शेयर बाजारों को दी जानकारी में बताया कि उसे BEDR Realcon Private Limited और Diligent Pinkcity Center Private Limited के पुनर्वर्गीकरण (Reclassification) के लिए दोनों एक्सचेंजों से नो-ऑब्जेक्शन लेटर मिला है। यह प्रक्रिया सेबी के लिस्टिंग नियमों के रेगुलेशन 31A के तहत की जा रही है।
NSE ने अपने पत्र में कहा है कि कंपनी की ओर से 22 जुलाई 2026 को दिए गए आवेदन के आधार पर दोनों प्रमोटर ग्रुप कंपनियों के पुनर्वर्गीकरण के आवेदन पर नो-ऑब्जेक्शन दिया गया है।
BSE ने भी 23 सितंबर 2026 को जारी अपने पत्र में BEDR Realcon Private Limited और Diligent Pinkcity Centre Private Limited को प्रमोटर कैटेगरी से हटाकर पब्लिक कैटेगरी में लाने के अनुरोध पर नो-ऑब्जेक्शन दिया है।
Infomedia Press Limited की 71वीं सालाना आम बैठक (AGM) 18 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Infomedia Press Limited की 71वीं सालाना आम बैठक (AGM) 18 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई। कंपनी ने बैठक में हुए कामकाज के मतदान के नतीजे और स्क्रूटिनाइजर की संयुक्त रिपोर्ट शेयर बाजारों को सौंप दी है। कंपनी के मुताबिक, बैठक में रखे गए सभी 4 प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए।
कंपनी की ओर से 18 सितंबर 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को यह जानकारी दी गई। 71वीं AGM शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई।
कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 कट-ऑफ तारीख थी और उस तारीख तक कंपनी के कुल 16,577 शेयरधारक थे। शेयरधारकों को प्रस्तावों पर रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान ई-वोटिंग के जरिए वोट करने की सुविधा दी गई थी।
पहला प्रस्ताव
पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स और उस पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को अपनाने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव साधारण प्रस्ताव (Ordinary Resolution) था और इसे जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 2,54,88,707 वोट पड़े, जबकि 11,25,657 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल पड़े वोटों में 95.7705% वोट पक्ष में और 4.2295% वोट खिलाफ रहे।
दूसरा प्रस्ताव
दूसरे प्रस्ताव में करनवीर सिंह गिल को रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव था। यह भी साधारण प्रस्ताव था और इसे जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 2,54,88,017 वोट पड़े, जबकि 11,26,247 वोट खिलाफ रहे। यानी कुल वोटों में 95.7683% वोट पक्ष में और 4.2317% वोट खिलाफ रहे।
तीसरा प्रस्ताव
तीसरे प्रस्ताव में बिंदु नवींचंद्र त्रिवेदी को रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रही निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव भी जरूरी बहुमत के साथ पास हुआ। इस प्रस्ताव के पक्ष में 2,54,88,017 वोट पड़े, जबकि 11,26,247 वोट इसके खिलाफ रहे। पक्ष में पड़े वोटों का प्रतिशत 95.7683% और खिलाफ पड़े वोटों का प्रतिशत 4.2317% रहा।
चौथा प्रस्ताव
चौथे प्रस्ताव में पुनीत सिंहवी को कंपनी के गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र निदेशक (Non-Executive Non-Independent Director) के तौर पर नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव भी जरूरी बहुमत के साथ पास हुआ।इस प्रस्ताव के पक्ष में 2,54,88,117 वोट पड़े, जबकि 11,26,247 वोट खिलाफ रहे। पक्ष में पड़े वोटों का प्रतिशत 95.7683% और खिलाफ पड़े वोटों का प्रतिशत 4.2317% रहा।
स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 को AGM के बाद ई-वोटिंग के नतीजों को अनब्लॉक किया गया और वोटों का कंपनी के रिकॉर्ड के साथ मिलान किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्तावों पर पड़े कुल वोटों में कोई अमान्य वोट नहीं था।
स्क्रूटिनाइजर नीलेश कुमार जैन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नोटिस में दिए गए आइटम नंबर 1 से 4 तक के सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए।
जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) की 50वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चार पूर्ण कालिक निदेशकों (Whole-time Directors) की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) की 50वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चार पूर्ण कालिक निदेशकों (Whole-time Directors) की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा महेंद्र मोहन गुप्ता को Non-Executive Director के तौर पर आगे भी बनाए रखने की मंजूरी दी गई है।
कंपनी ने 18 सितंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि 50वीं AGM शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC)/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम (OAVM) के जरिए हुई। बैठक में सदस्यों ने इन नियुक्तियों और आगे जारी रखने को मंजूरी दी।
चार पूर्ण कालिक निदेशकों की पांच साल के लिए दोबारा नियुक्ति
बोर्ड की सिफारिश के आधार पर सदस्यों ने चार पूर्ण कालिक निदेशकों को अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने की मंजूरी दी है। इनका नया कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा।
धीरेंद्र मोहन गुप्ता को कंपनी के पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर पांच साल के लिए फिर नियुक्त किया गया है। वह 82 साल के हैं और उन्होंने आर्ट्स में स्नातक की डिग्री ली है। कंपनी के मुताबिक, उन्हें प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 60 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और कंपनी की शुरुआत से ही इसके साथ निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वह महेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं। उनकी यह नियुक्ति रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन होगी।
सुनील गुप्ता को भी पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 64 वर्षीय सुनील गुप्ता ने कॉमर्स में स्नातक और मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह प्रमोटर ग्रुप के सदस्य हैं और 1993 से कंपनी के निदेशक हैं। कंपनी ने बताया कि उनका किसी अन्य निदेशक के साथ कोई संबंध नहीं है। उनकी नियुक्ति भी रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन होगी।
संजय गुप्ता को भी पांच साल के लिए पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 63 वर्षीय संजय गुप्ता ने साइंस में स्नातक की डिग्री ली है और उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और 1993 से कंपनी के निदेशक हैं। वह संदीप गुप्ता के भाई हैं। उनकी नियुक्ति रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन नहीं होगी।
शैलेश गुप्ता को भी पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर अगले पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 57 वर्षीय शैलेश गुप्ता ने कॉमर्स में स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह Promoter Group के सदस्य हैं और 1994 से कंपनी के निदेशक हैं। वह महेंद्र मोहन गुप्ता के बेटे हैं। उनकी नियुक्ति भी रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन नहीं होगी।
कंपनी ने यह भी बताया कि इन चारों निदेशकों को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) या किसी अन्य प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
महेंद्र मोहन गुप्ता गैर-कार्यकारी निदेशक (Non-Executive Director) के तौर पर बने रहेंगे
AGM में सदस्यों ने महेंद्र मोहन गुप्ता को कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर आगे भी बनाए रखने की मंजूरी दी है। उनका नया कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक पांच साल का होगा। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर नहीं होंगे।
महेंद्र मोहन गुप्ता को 1 अक्टूबर 2021 से दो साल के लिए कंपनी का चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) नियुक्त किया गया था। उनका यह कार्यकाल 30 सितंबर 2023 को पूरा हुआ। इसके बाद 1 अक्टूबर 2023 से उन्हें कंपनी का गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (Non-Executive Chairman) बनाया गया। अब उनका गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को समाप्त होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से वह गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर कंपनी में बने रहेंगे।म
महेंद्र मोहन गुप्ता 85 साल के हैं और उन्होंने कॉमर्स में स्नातक की डिग्री ली है। कंपनी के अनुसार, उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 65 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और कंपनी की शुरुआत से ही इसके साथ निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वह शैलेश गुप्ता के पिता और धीरेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं।
कंपनी ने बताया कि महेंद्र मोहन गुप्ता को भी SEBI या किसी अन्य प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार द हिंदू (The Hindu) ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह से जुड़े एक विज्ञापन के प्रकाशन पर अपने पाठकों से बिना शर्त माफी मांगी है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।
अखबार ने अपने माफीनामे में इस विज्ञापन को “offensive front-page advertisement” और “deeply offensive advertisement” बताया। द हिंदू ने कहा कि उसे इस विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार के निदेशक एन. राम (N. Ram) की ओर से भी इस मामले को लेकर जानकारी साझा की गई है।
Apology -- This is a screenshot of the front page of today’s Delhi edition of The Hindu. The apology that appears on this page has been published on the front page of all the editions of The Hindu. pic.twitter.com/manZfhQkER
— N. Ram (@nramind) September 13, 2026
यह था पूरा मामला: दरअसल, 12 सितंबर के द हिंदू के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों के फ्रंट पेज पर डेरा सच्चा सौदा की ओर से एक पूरे पेज का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। इसका शीर्षक था “What is Dera Sacha Sauda? (Facts vs Fiction)”। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ लगे आरोपों और मामलों को लेकर डेरा की ओर से अपना पक्ष रखा गया था। विज्ञापन में उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर साजिश का दावा भी किया गया था। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा की ओर से सामाजिक कार्यों को लेकर कई आंकड़े भी दिए गए थे। इनमें नशे से लोगों को बाहर निकालने, पेड़ लगाने, रक्तदान और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से जुड़े दावे शामिल थे।
राम रहीम को लेकर क्या है मामला?: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को वर्ष 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें 20 साल की सजा सुनाई थी। विज्ञापन प्रकाशित होने के समय वह 21 दिन की फरलो पर जेल से बाहर थे। इसी पृष्ठभूमि में द हिंदू के फ्रंट पेज पर इस विज्ञापन के प्रकाशन को लेकर पत्रकारों और सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने सवाल उठाए। इसके बाद द हिंदू ने अपने पाठकों से इस विज्ञापन को प्रकाशित करने के लिए बिना शर्त माफी मांगी।
द हिंदू ने क्या कहा?: 13 सितंबर को फ्रंट पेज पर प्रकाशित अपने माफीनामे में अखबार ने कहा कि उसे दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में “डेरा सच्चा सौदा क्या है? (तथ्य बनाम कल्पना)” शीर्षक से प्रकाशित आपत्तिजनक फ्रंट-पेज विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार ने विज्ञापन में किए गए उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख और दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ “ड्रग माफिया और डेरा के विरोधी ताकतों” की ओर से साजिश का दावा किया गया था।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है। कंपनी ने बताया कि 8 सितंबर 2026 को 8,708 OCDs को 16,02,011 इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट किया गया है। इन शेयरों की कुल राशि 85 करोड़ रुपये है।
इस कन्वर्जन के बाद HMVL को StockGro में 2.48 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह हिस्सेदारी OCDs के इक्विटी शेयरों में कन्वर्जन के जरिए हासिल हुई है।
StockGro में नहीं हुआ नया कैश निवेश
कंपनी के मुताबिक, यह लेन-देन OCDs को इक्विटी शेयरों में बदलने के रूप में हुआ है। यानी इस चरण में 85 करोड़ रुपये का कोई नया नकद निवेश करने की बात नहीं कही गई है। HMVL ने पहले StockGro में निवेश के तहत ये OCDs रखे हुए थे, जिन्हें अब शेयरों में बदला गया है।
निवेश का उद्देश्य क्या है?
कंपनी ने बताया है कि इस निवेश का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही कंपनी में निवेश के जरिए भविष्य में पूंजी पर रिटर्न हासिल करना है। इसके साथ ही HMVL की ओर से कंपनी के मीडिया एसेट्स का लाभ उठाने की भी बात कही गई है।
StockGro क्या करती है?
Assetgro Fintech Pvt Ltd, जिसे StockGro के नाम से जाना जाता है, फिनटेक सेक्टर में काम करती है। कंपनी के अनुसार, StockGro एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो निवेश सलाह, ज्ञान साझा करने और कम्युनिटी आधारित बातचीत को एक ही इकोसिस्टम में जोड़ता है।
इसके प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड निवेश सलाहकारों और यूजर्स के बीच बातचीत की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने इसे भारत का पहला ऐसा प्लेटफॉर्म बताया है जो इन अलग-अलग सुविधाओं को एक साथ जोड़ता है।
StockGro का कारोबार बढ़ा
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, StockGro का टर्नओवर पिछले तीन वित्त वर्षों में बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का टर्नओवर 99 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 125.51 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 में 231.10 करोड़ रुपये हो गया।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह लेन-देन रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन नहीं है। साथ ही HMVL के प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप या ग्रुप कंपनियों की StockGro में कोई रुचि नहीं है। इस कन्वर्जन के लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं थी।
भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी का मकसद BCCL के अखबारों और डिजिटल प्रकाशनों की खबरों को ChatGPT के जरिए ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुंचाना है। खास बात यह है कि ChatGPT पर दिखाई जाने वाली खबरों के साथ मूल प्रकाशन और खबर की पूरी रिपोर्ट तक पहुंचने के लिए सीधे लिंक भी दिए जाएंगे।
इस साझेदारी के तहत BCCL के चुनिंदा प्रकाशनों, जिनमें The Times of India और The Economic Times शामिल हैं, की सामग्री संबंधित सवालों के जवाब में ChatGPT पर दिखाई जा सकेगी। जहां किसी खबर का संक्षिप्त सार या कुछ हिस्सा दिखाया जाएगा, वहां संबंधित प्रकाशन का नाम भी बताया जाएगा और मूल खबर का सीधा लिंक दिया जाएगा। इससे पाठक पूरी खबर और उसका संदर्भ BCCL के प्लेटफॉर्म पर जाकर देख सकेंगे।
अंग्रेजी के साथ भारतीय भाषाओं की खबरें भी होंगी शामिल
यह साझेदारी सिर्फ लाइव खबरों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें BCCL के अंग्रेजी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाली अन्य सामग्री भी शामिल होगी। हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।
BCCL के लिए इस साझेदारी में खबर के मूल स्रोत और उसकी पहचान को बनाए रखने पर खास जोर दिया गया है। BCCL के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और बोर्ड मेंबर मोहित जैन ने कहा कि इस साझेदारी से पाठकों को BCCL के अलग-अलग प्रकाशनों की पत्रकारिता खोजने में मदद मिलेगी, साथ ही मूल खबर के स्रोत, संदर्भ और पहचान को भी बरकरार रखा जाएगा।
वहीं, OpenAI के मीडिया पार्टनरशिप्स के वाइस प्रेसिडेंट वरुण शेट्टी ने कहा कि साझेदारी से ChatGPT के यूजर्स BCCL के अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं के प्रकाशनों की खबरें स्पष्ट स्रोत जानकारी और मूल खबर के सीधे लिंक के साथ खोज सकेंगे।
सिर्फ खबरों तक पहुंच नहीं, AI के दूसरे इस्तेमाल पर भी काम
BCCL और OpenAI की साझेदारी केवल ChatGPT पर खबरें दिखाने तक सीमित नहीं है। दोनों कंपनियां BCCL के अलग-अलग उत्पादों, पाठक सेवाओं और आंतरिक कामकाज में OpenAI की तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाशेंगी।
इसमें पुराने समाचारों और आर्काइव को खोजने, रिसर्च, डेटा विश्लेषण, अनुवाद, पाठक सेवाओं और कारोबारी कामकाज जैसे क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं शामिल हैं।
न्यूजरूम में AI इस्तेमाल पर संपादकीय नियंत्रण बरकरार रहेगा
BCCL ने साफ किया है कि उसके न्यूजरूम में AI का इस्तेमाल होने की स्थिति में संबंधित प्रकाशनों के संपादकीय नियमों और नीतियों का पालन किया जाएगा। साथ ही हर स्तर पर मानवीय निगरानी भी बनी रहेगी।
BCCL के प्रकाशनों का संपादकीय नियंत्रण पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा। खबर क्या होगी, उसकी जांच कैसे होगी, उसे कैसे संपादित किया जाएगा और कब प्रकाशित किया जाएगा, इसका फैसला संपादक और पत्रकार ही करेंगे। OpenAI को BCCL के कवरेज या संपादकीय रुख तय करने में कोई भूमिका नहीं होगी।
AI के दौर में बदल रहा है खबरों तक पहुंचने का तरीका
यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब जनरेटिव AI लोगों के लिए जानकारी और खबरें खोजने का एक नया माध्यम बनता जा रहा है। ऐसे में मीडिया कंपनियों के सामने खबर के मूल स्रोत, सही श्रेय, मूल रिपोर्ट तक पाठकों की पहुंच और संपादकीय स्वतंत्रता जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
BCCL और OpenAI की यह साझेदारी इसी बदलते माहौल का हिस्सा है। इसमें एक ओर ChatGPT के जरिए BCCL की पत्रकारिता को नए पाठकों तक पहुंचाने पर जोर है, तो दूसरी ओर पाठकों को पूरी खबर और उसका मूल संदर्भ देखने के लिए BCCL की वेबसाइट और प्लेटफॉर्म पर वापस भेजने की व्यवस्था भी रखी गई है।
OpenAI दुनिया भर के प्रकाशकों के साथ ऐसी साझेदारियों के जरिए विश्वसनीय जानकारी तक लोगों की पहुंच बेहतर करने और समाचार व प्रकाशन के कामकाज में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है। BCCL के लिए यह साझेदारी पाठकों तक खबरों की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ प्रकाशन और कारोबारी कामकाज के कई क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल का रास्ता भी खोलती है।