OTT का बढ़ता खर्च: क्या दर्शक अब सब्सक्रिप्शंस से बनाने लगा है दूरी?

भारतीय दर्शक अब एक नई तरह की थकान महसूस कर रहा है। इंडस्ट्री की भाषा में इसे “Subscrption Fatigue” कहा जाता है, यानी OTT खर्चों से थकता दर्शक।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 14 May, 2026
Last Modified:
Thursday, 14 May, 2026
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मान लीजिए आप एक सामान्य शहरी परिवार हैं। महीने के अंत में बिजली का बिल, किराया और राशन जैसे जरूरी खर्चों के साथ अब एक नई जिम्मेदारी भी जुड़ गई है- OTT सब्सक्रिप्शंस। Netflix, Amazon Prime Video, JioHotstar, Sony LIV, Zee5 जैसे प्लेटफॉर्म्स, और अगर घर में क्रिकेट देखने वाले हैं तो अलग से स्पोर्ट्स पैक। ऐसे में यह खर्च आसानी से ₹1,500 प्रति महीने के पार पहुंच जाता है।

कोरोना काल के दौरान OTT प्लेटफॉर्म्स भारत में मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। हर प्लेटफॉर्म अलग सब्सक्रिप्शन मांग रहा है, हर बड़ा कंटेंट किसी एक ही ऐप पर “एक्सक्लूसिव” हो गया है और हर साल कीमतें भी बढ़ रही हैं। इसका असर यह है कि भारतीय दर्शक अब एक नई तरह की थकान महसूस कर रहा है। इंडस्ट्री की भाषा में इसे “Subscrption Fatigue” कहा जाता है, यानी OTT खर्चों से थकता दर्शक।

पहले एक बिल था, अब एक दर्जन ऐप्स

केबल टीवी के दौर में मामला काफी आसान था- एक DTH कनेक्शन, एक मंथली रिचार्ज और सैकड़ों चैनल्स। लेकिन OTT के दौर में यह पूरा फॉर्मूला बदल गया है। अब हर प्लेटफॉर्म का अपना कंटेंट किला है और अपनी अलग दीवारें हैं।

Ormax Media की ताजा रिपोर्ट (2025) के मुताबिक भारत में OTT दर्शकों की संख्या 60.12 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यानी देश की 41% आबादी किसी न किसी रूप में ऑनलाइन वीडियो देखती है। इनमें से पेड सब्सक्रिप्शंस की संख्या 14.82 करोड़ है। भारत का OTT मार्केट 2025 में $5.4 बिलियन का हो चुका है और 2034 तक इसके $28.1 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

हालांकि इन चमकदार आंकड़ों के पीछे एक असुविधाजनक सच भी छिपा है। भारतीय दर्शक अब प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती संख्या और लगातार बढ़ती कीमतों से ऊबने लगा है। 

Subscrption Fatigue क्या है?

Subscrption Fatigue वह मनोवैज्ञानिक थकान है, जो तब पैदा होती है जब दर्शकों को लगने लगता है कि OTT प्लेटफॉर्म्स की संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है। लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि कौन-सा कंटेंट किस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

इसके साथ ही हर प्लेटफॉर्म अलग से पेमेंट मांग रहा है। किसी एक शो के लिए एक ऐप, तो दूसरी फिल्म के लिए दूसरा ऐप लेना पड़ता है। कंटेंट पूरी तरह बिखर गया है- एक शो यहां, दूसरा वहां।

दर्शकों की परेशानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। हर महीने OTT पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन कई लोगों को उसके मुकाबले उतनी “वैल्यू” महसूस नहीं होती। यही वजह है कि लोग अब OTT सब्सक्रिप्शंस से थकान महसूस करने लगे हैं।

यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं है। अमेरिका जैसे मैच्योर OTT मार्केट्स में भी लोग अब अपने सब्सक्रिप्शंस को रोटेट करने लगे हैं। यानी एक महीने Netflix लिया, अगले महीने Disney+, फिर जरूरत खत्म होने पर कैंसल कर दिया। भारत में भी यही पैटर्न धीरे-धीरे उभरता दिखाई दे रहा है।

भारतीय घर का मंथली OTT बिल: असली हिसाब

आइए एक सामान्य शहरी परिवार का हिसाब देखते हैं, जो सभी मुख्य OTT प्लेटफॉर्म्स सब्सक्राइब करती है:

प्लेटफॉर्म

प्लान (2026)

Netflix (Standard)

₹499/माह

Amazon Prime Video

₹299/माह

JioHotstar (Premium)

₹299/माह

Sony LIV (Premium monthly)

₹399/माह

Zee5 (All Languages + KidZ)

₹299/माह

कुल मासिक खर्च (approx.)

~₹1,795/माह

यानी सिर्फ इन पांच OTT प्लेटफॉर्म्स पर ही अगर सालाना पैकेज लिया जाए, तो दर्शकों का खर्च लगभग ₹8,000 से ₹10,000 तक पहुंच जाता है। इसमें अगर Crunchyroll (anime), Lionsgate Play या कोई रीजनल OTT प्लेटफॉर्म भी जोड़ दिया जाए, तो यह खर्च और ज्यादा बढ़ जाता है।

MiQ की Advanced TV Report India के अनुसार भारतीय दर्शक औसतन 3 स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स subscribe करते हैं और इस पर करीब ₹1,360 प्रति माह खर्च करते हैं। यह आंकड़ा भारत के मध्यम वर्ग के लिए किसी बड़े बोझ से कम नहीं है, क्योंकि जरूरी खर्चों के बाद बचने वाली कमाई पर पहले से ही कई जिम्मेदारियां होती हैं।

Netflix ने मार्च 2026 में अमेरिका में अपने प्लान्स की कीमत एक बार फिर बढ़ाई। पिछले 6 साल में यह 5वीं बार है, जब कंपनी ने कीमतों में इजाफा किया है। हालांकि भारत में Netflix के प्लान्स फिलहाल नहीं बदले गए हैं- Mobile ₹149, Standard ₹499 और Premium ₹649- लेकिन पिछले ट्रेंड बताते हैं कि अमेरिका में कीमतें बढ़ने के 6-12 महीने बाद उसका असर भारत में भी देखने को मिलता है।

वहीं, JioHotstar ने जनवरी 2026 से अपने प्रीमियम सालाना प्लान की कीमत ₹1,499 से बढ़ाकर ₹2,199 कर दी। यानी इसमें करीब 47% की बढ़ोतरी हुई है।

Amazon Prime Video ने June 2025 से अपने स्टैंडर्ड प्लान में विज्ञापन दिखाने शुरू कर दिए हैं। अब विज्ञापन मुक्त कंटेंट देखने के लिए यूजर्स को ₹699 प्रति वर्ष या ₹129 प्रति माह अलग से चुकाने पड़ रहे हैं।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या कीमत को लेकर संवेदनशील भारतीय बाजार यह बढ़ता OTT खर्च लंबे समय तक झेल पाएगा?

Telecom Bundling: थकान का अस्थायी इलाज

OTT इंडस्ट्री की असली लाइफलाइन फिलहाल Telecom Bundling बनती जा रही है।

Reliance Jio का ₹749 वाला पोस्टपेड प्लान Netflix Basic, Amazon Prime Lite और JioHotstar तीनों का एक्सेस एक साथ देता है। वहीं Airtel के Xstream bundles में भी कई OTT सर्विसेज शामिल हैं। यानी बड़ी संख्या में यूजर्स को OTT का डायरेक्ट बिल अलग से नहीं भरना पड़ता, क्योंकि उसका खर्च उनके मोबाइल रिचार्ज में ही जुड़ा होता है।

यह मॉडल इसलिए कारगर माना जा रहा है, क्योंकि इसमें यूज़र्स को अलग-अलग पेमेंट करने का झंझट नहीं रहता। साथ ही टेलीकॉम कंपनियों की सब्सक्राइबर रिटेंशन बेहतर होती है और OTT प्लेटफॉर्म्स को एक भरोसेमंद सब्सक्राइबर बेस मिल जाता है।

हालांकि यह समाधान पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। Bundled प्लान्स में अक्सर सिर्फ बेसिक टियर ही मिलता है। HD या 4K क्वॉलिटी और प्रीमियम प्लान्स के लिए यूज़र्स को अलग से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा जैसे-जैसे टेलीकॉम प्लान्स महंगे हो रहे हैं, वैसे-वैसे यह “फ्री” OTT भी लोगों को महंगा पड़ने लगा है।

पॉसवर्ड शेयरिंग: OTT का साइलेंट क्राइसेस

भारत में एक OTT सब्सक्रिप्शन को घर के कई लोग, दोस्त और रिश्तेदार मिलकर इस्तेमाल करते हैं। यह कोई सिक्रेट नहीं, बल्कि एक आम सामाजिक प्रैक्टिस बन चुकी है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर OTT प्लेटफॉर्म्स पॉसवर्ड शेयरिंग को प्रभावी तरीके से रोक दें, तो वे अपने पेड सब्सक्राइबर बेस को दोगुना तक बढ़ा सकते हैं।

Netflix ने पॉसवर्ड शेयरिंग रोकने के लिए दुनियाभर में सख्ती शुरू की थी। इसका फायदा कंपनी को तुरंत मिला। सिर्फ Q2 2023 में ही Netflix को 59 लाख नए सब्सक्राइबर्स मिले, जबकि इससे एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी ने 10 लाख सब्सक्राइबर्स खो दिए थे।

लेकिन भारत में यह तरीका उतना आसान नहीं है। यहां सबसे बड़ी समस्या एफोर्डबिलिटी (affordability) यानी लोगों की खर्च करने की क्षमता है। अगर कोई परिवार अब तक एक ही Netflix अकाउंट मिल-बांटकर चला रहा था और अब सभी को अलग सब्सक्रिप्शन लेना पड़े, तो कई लोग सीधा कहेंगे- “Netflix बंद कर दो।”

इसी वजह से भारत में पॉसवर्ड शेयरिंग को पायरेसी का एक “सॉफ्ट वर्जन” माना जाने लगा है। लोग पैसे कम खर्च करना चाहते हैं, लेकिन अपने पसंदीदा कंटेंट को छोड़ना भी नहीं चाहते।

 Ad-Supported OTT: फ्री का जादू वापस आ रहा है

OTT इंडस्ट्री इस समय एक बड़ा U-turn लेती दिखाई दे रही है। जिन प्लेटफॉर्म्स ने शुरुआत में सिर्फ सब्सक्रिप्शन मॉडल के दम पर अपनी पहचान बनाई थी, वे अब तेजी से ऐडवर्टाइजिंग की तरफ लौट रहे हैं।

SVOD यानी Subscription Video On Demand- यह Netflix-style पेड मॉडल है, जहां दर्शकों को कंटेंट देखने के लिए हर महीने या सालाना शुल्क देना पड़ता है। वहीं AVOD यानी ऐडवर्टाइजिंग Video On Demand- YouTube-style मॉडल है, जिसमें कंटेंट मुफ्त होता है, लेकिन बीच-बीच में विज्ञापन दिखाए जाते हैं।

अब OTT इंडस्ट्री का झुकाव तेजी से AVOD मॉडल की तरफ बढ़ रहा है।

Amazon Prime Video ने जून 2025 में अपने स्टैंडर्ड प्लान को AVOD मॉडल में बदल दिया। इसका मतलब यह है कि अब रेगुलर प्राइम मेंबर्स को भी कंटेंट देखते समय विज्ञापन दिखाई देते हैं। अगर कोई यूज़र विज्ञापन-मुक्त अनुभव चाहता है, तो उसे इसके लिए अलग से पैसे देने पड़ते हैं।

वहीं Netflix का ad-supported tier भी तेजी से नए सब्सक्राइबर्स जोड़ रहा है। FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के मुताबिक AVOD अब OTT रेवेन्यू ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बनता जा रहा है और इसकी रफ्तार SVOD मॉडल से भी ज्यादा तेज है।

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत मूल रूप से फ्री कंटेंट का बाजार माना जाता है। YouTube, MX Player और JioCinema के फ्री cricket स्ट्रीमिंग एक्सपेरिमेंट्स ने यह बात साफ कर दी है।

IPL 2023 में जब JioCinema ने फ्री स्ट्रीमिंग शुरू की, तो टूर्नामेंट के पहले 17 मैचेस में ही 550 करोड़ cumulative video views दर्ज किए गए। वहीं फाइनल मुकाबले के दौरान एक साथ 3.2 करोड़ concurrent व्युअर्स जुड़े, जो एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड था। यह वह स्केल है, जहां तक किसी भी पेड OTT प्लेटफॉर्म का पहुंचना बेहद मुश्किल माना जाता है।

इसी वजह से माना जा रहा है कि भारत में सिर्फ पैसे देकर चलने वाला OTT मॉडल लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा।

Sports राइट्स: सबसे बड़ी Fragmentation की जड़

आज OTT की दुनिया में दर्शकों को अपनी पसंद के कंटेंट के हिसाब से अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन लेना पड़ रहा है।

अगर आप क्रिकेट फैन हैं, तो JioHotstar जरूरी है, क्योंकि IPL राइट्स उसी के पास हैं। अगर आप फुटबॉल देखना पसंद करते हैं, तो उसके लिए अलग प्लेटफॉर्म चाहिए। WWE देखने वालों को Sony LIV लेना पड़ता है। Anime पसंद करने वाले दर्शकों के लिए Crunchyroll जरूरी हो जाता है। वहीं Hollywood का लेटेस्ट कंटेंट देखने के लिए Netflix या Prime का सहारा लेना पड़ता है।

यानी अब दर्शकों को कंटेंट के हिसाब से अलग-अलग OTT सब्सक्रिप्शंस लेने पड़ रहे हैं।

केबल टीवी के दौर में स्थिति काफी अलग थी। उस समय “one pack, many channels” का मॉडल चलता था। लेकिन OTT के दौर में अब “many ऐप्स, many bills” नई रियलटी बनती जा रही है।

स्पोर्ट्स राइट्स को लेकर प्लेटफॉर्म्स के बीच होड़ ने यह समस्या और बढ़ा दी है। अब लगभग हर बड़ी स्पोर्ट्स लीग किसी एक OTT प्लेटफॉर्म पर ही देखने को मिलती है। ऐसे में दर्शकों के पास दो ही रास्ते बचते हैं- या तो उस प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन लें, या फिर अपना पसंदीदा मैच और कंटेंट छोड़ दें।

रीजनल OTT: दिल जीता, जेब नहीं

Regional OTT: दिल जीता, जेब नहीं

भारत कई भाषाओं वाला देश है और रीजनल OTT प्लेटफॉर्म्स ने इस बात को अच्छी तरह समझा है।

Hoichoi (बंगाली), ManoramaMAX (मलयालम), Sun NXT (तमिल, तेलुगु) और Chaupal (पंजाबी) जैसे प्लेटफॉर्म्स ने अपनी-अपनी भाषाओं के दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई है।

Market Research Future के मुताबिक 2025 में रीजनल language content में 40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह trend साफ दिखाता है कि दर्शक अपनी भाषा में कंटेंट देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

लेकिन यहां भी सबसे बड़ी समस्या वही है- हर रीजनल ऐप का अलग subscription।

उदाहरण के तौर पर, अगर मुंबई में रहने वाला कोई मराठी परिवार Bengali content भी देखना चाहता है, तो उसे national OTT प्लेटफॉर्म्स के अलावा दो रीजनल ऐप्स का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या रीजनल OTT प्लेटफॉर्म्स अपने survival के लिए telecom bundling या national aggregation का रास्ता अपनाएंगे? 2026 में यह OTT इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा strategic सवाल माना जा रहा है।

Aggregator ऐप्स: Cable Operator की वापसी?

OTT इंडस्ट्री में अब एक नई संभावना भी दिखाई दे रही है। जैसे पहले cable operators एक ही subscription में सैकड़ों चैनल्स उपलब्ध कराते थे, वैसे ही अब OTT aggregator ऐप्स का चलन बढ़ सकता है।

Tata Play Binge पहले से इस मॉडल पर काम कर रही है। इसमें users को एक ही app में कई OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस और एक ही billing system मिलता है।

Smart TV ecosystems और broadband bundles में भी यह trend तेजी से दिखाई देने लगा है।

अगर यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल हो जाता है, तो यह subscription fatigue का सबसे practical समाधान बन सकता है। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि OTT प्लेटफॉर्म्स आपस में revenue share करने के लिए कितने तैयार होते हैं।

Connected TV: Big Screen पर Big Business

सब्सक्रिप्शन fatigue के बीच एक बड़ा बदलाव Connected TV यानी CTV के रूप में भी देखने को मिल रहा है।

Ormax की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में active CTV users की संख्या 12.92 करोड़ तक पहुंच गई है। यह 2024 के मुकाबले 87% की बड़ी छलांग है।

FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के अनुसार यह करीब 6.8 करोड़ CTV households तक फैल चुका है, जिनमें से 4 करोड़ weekly active हैं।

इसी रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में CTV ऐडवर्टाइजिंग revenues 42% बढ़कर ₹9,900 करोड़ तक पहुंच गए।

वहीं WPP की TYNY 2026 report का अनुमान है कि 2026 में CTV ऐडवर्टाइजिंग में 22% की growth देखने को मिलेगी।

यह advertisers के लिए एक नई opportunity बनकर उभर रहा है। जैसे-जैसे लोग पेड सब्सक्रिप्शंस से हटकर फ्री और ad-supported प्लेटफॉर्म्स की तरफ बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे ब्रैंड्स को बड़े स्क्रीन पर टार्गेटेड ऐडवर्टाइजिंग का मौका मिल रहा है।

अनुमान है कि CTV ऐडवर्टाइजिंग 2026 तक ₹8,000 करोड़ तक पहुंच सकती है।

Consumer Psychology: “कुछ देखने को नहीं” का Paradox

OTT इंडस्ट्री में एक दिलचस्प स्थिति भी देखने को मिलती है। आज 600 करोड़ वीडियोज, हजारों शोज और दर्जनों प्लेटफॉर्म्स मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय दर्शक अक्सर शिकायत करता है- “कुछ देखने को नहीं।”

यह स्थिति जरूरत से ज्यादा कंटेंट होने की वजह से बनती है। जब देखने के लिए बहुत ज्यादा विकल्प होते हैं, तो लोग समझ नहीं पाते कि आखिर क्या देखें।

Auto-debit frustration, मंथली सब्सक्रिप्शन रिमाइंडर्स और अलग-अलग ऐप्स में कंटेंट ढूंढने की परेशानी- यह सब मिलकर व्युअर्स को मानसिक रूप से थका देता है।

MiQ की रिपोर्ट के मुताबिक 67% भारतीय व्युअर्स आने वाले समय में अपने streaming सब्सक्रिप्शंस बढ़ाने की सोच रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ वही दर्शक प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती कीमतों से नाराज भी हैं।

यही उलझन भारतीय OTT बाजार की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

Advertisers के लिए क्या मायने?

अगर दर्शक पेड सब्सक्रिप्शंस कम करते हैं और फ्री या ad-supported प्लेटफॉर्म्स की तरफ जाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को मिल सकता है।

FICCI-EY की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग 2025 में 26% बढ़कर ₹94,700 करोड़ ($11.4 बिलियन) तक पहुंच गई। अनुमान है कि 2028 तक यह आंकड़ा ₹1,39,000 करोड़ तक पहुंच जाएगा।

YouTube अकेले 2030 तक भारत में $3.05 बिलियन का ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू जनरेट करेगा।

OTT प्लेटफॉर्म्स पर ऐड इन्वेंट्री बढ़ने से ब्रैंड्स को टार्गेटेड और डेटा संचालित वीडियो ऐडवर्टाइजिंग का बेहतर मौका मिलेगा। वहीं Connected TV पर प्रीमियम ऐप प्लेसमेंट्स की वैल्यू भी लगातार बढ़ेगी।

OTT का Next Phase: क्या होगा आगे?

2026 और उसके बाद भारत का OTT landscape कई बड़े बदलावों से गुजर सकता है।

Consolidation: छोटे OTT प्लेटफॉर्म्स या तो बड़े प्लेटफॉर्म्स में merge हो सकते हैं या फिर बाजार से बाहर हो सकते हैं। बढ़ते competitive pressure में survival आसान नहीं रहेगा।

Flexible Pricing:  भविष्य में वीकली प्लान्स, event-based सब्सक्रिप्शंस (जैसे सिर्फ IPL सीजन के लिए) और माइक्रो-पेमेंट्स जैसे एक्सपेरिमेंट्स बढ़ सकते हैं।

Hybrid Models का विस्तार: फ्री + विज्ञापन वाला टियर लगभग हर प्लेटफॉर्म पर स्टैंडर्ड बन सकता है। वहीं सिर्फ पेड मॉडल धीरे-धीरे लग्जरी सेगमेंट तक सीमित हो सकता है।

AI-Powered Personalization: आने वाले समय में OTT प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट सुझाव इतनी बेहतर हो सकती है कि लोगों को अलग-अलग ऐप्स पर जाकर कंटेंट ढूंढने की जरूरत न पड़े। उन्हें एक ही जगह अपनी पसंद का ज्यादा कंटेंट आसानी से मिल सकता है।

MPA यानी Media Partners Asia के मुताबिक 2030 तक भारत में SVOD सब्सक्रिप्शंस की संख्या 357 मिलियन तक पहुंच सकती है। इसके साथ भारत, China को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा SVOD सब्सक्रिप्शन मार्केट बन सकता है। लेकिन यह तभी संभव होगा, जब OTT प्लेटफॉर्म्स सही कीमत पर अच्छा कंटेंट देकर दर्शकों को बेहतर अनुभव दे पाएंगे।

बैलेंस ही असली जवाब

भारत में OTT की कहानी अब सिर्फ technology और entertainment तक सीमित नहीं रह गई है। यह लोगों की बदलती आदतों और डिजिटल मनोरंजन के बदलते कारोबार की कहानी बन चुकी है।

एक तरफ देश में 60 करोड़ से ज्यादा OTT व्युअर्स हैं, Connected TV की पहुंच तेजी से बढ़ रही है और भारत दुनिया का सबसे बड़ा SVOD मार्केट बनने की तरफ बढ़ रहा है। लेकिन दूसरी तरफ OTT प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती कीमतें, अलग-अलग ऐप्स में बंटा कंटेंट, पॉसवर्ड शेयरिंग की समस्या और बढ़ता खर्च लोगों को परेशान भी कर रहा है।

मिडिल क्लास दर्शक हर महीने यही सोचता है- “इस बार कौन सा OTT बंद करूं?”

यही वजह है कि भारत में OTT का भविष्य सिर्फ महंगे सब्सक्रिप्शंस पर नहीं टिका होगा। आने वाले समय में वही प्लेटफॉर्म ज्यादा सफल होंगे, जो कम कीमत, अच्छे कंटेंट, विज्ञापन और आसान एक्सेस के बीच सही संतुलन बना पाएंगे।

जो प्लेटफॉर्म दर्शकों की जरूरत और उनकी जेब- दोनों को समझेगा, वही सबसे आगे निकलेगा।

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बच्चों के लिए पौराणिक एनिमेटेड सीरीज लेकर आ रहा ZEE5, 17 जुलाई से होगी स्ट्रीम

ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 बच्चों के लिए एक नई पौराणिक एनिमेटेड सीरीज लेकर आ रहा है। इस सीरीज के जरिए बच्चों को भारतीय पौराणिक कथाओं से एक नए और मनोरंजक अंदाज में जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 16 July, 2026
Last Modified:
Thursday, 16 July, 2026
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ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 बच्चों के लिए एक नई पौराणिक एनिमेटेड सीरीज लेकर आ रहा है। 'शिवलोक के कुंडक्का मंडक्का' नाम की यह ओरिजिनल सीरीज 17 जुलाई से प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम होगी। कंपनी का कहना है कि इस सीरीज के जरिए बच्चों को भारतीय पौराणिक कथाओं से एक नए और मनोरंजक अंदाज में जोड़ने की कोशिश की गई है।

यह सीरीज ZEE5 के KidZ सेक्शन का हिस्सा है और मशहूर लेखक आनंद नीलकांतन की लोकप्रिय बच्चों की किताब 'The Very, Extremely, Most Naughty Asura Tales for Kids' पर आधारित है।

कहानी दो शरारती असुर जुड़वां भाई-बहनों कुंडक्का और मंडक्का के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों अपने रोमांचक सफर के दौरान कई नई चुनौतियों का सामना करते हैं और साहस, दोस्ती तथा आत्मविश्वास जैसे जीवन के महत्वपूर्ण सबक सीखते हैं।

ZEE5 का कहना है कि यह सीरीज रामायण और महाभारत की जानी-पहचानी कहानियों से अलग है। इसमें भारतीय पौराणिक कथाओं के ऐसे पात्रों और दुनिया को दिखाया गया है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। बच्चों को ध्यान में रखते हुए इसमें हास्य, रोमांच और आकर्षक एनिमेशन का खास मिश्रण रखा गया है।

यह सीरीज हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बांग्ला और अंग्रेजी सहित छह भाषाओं में उपलब्ध होगी, ताकि देशभर के बच्चे इसे अपनी पसंदीदा भाषा में देख सकें।

ZEE5 के हेड- KidZ, चंदन खंडेलवाल ने कहा कि प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक अंदाज में बच्चों तक पहुंचाना है। उनके अनुसार, ऐसी कहानियां पीढ़ियों से लोगों के बीच लोकप्रिय रही हैं और अब इन्हें नए दौर के बच्चों के लिए शानदार एनिमेशन और रोचक कहानी के साथ पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सीरीज सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ बैठकर देखने लायक बनाई गई है।

वहीं, लेखक आनंद नीलकांतन ने भी इस सीरीज को लेकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बच्चे कुंडक्का और मंडक्का के रोमांचक सफर का उतना ही आनंद लेंगे, जितना उन्हें इन पात्रों को लिखते समय मिला था। उनके मुताबिक, इन शरारती किरदारों को एनिमेशन के जरिए नई पहचान मिलना बेहद सुखद है।

पिछले कुछ समय से ओटीटी प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं पर आधारित ओरिजिनल कंटेंट तैयार करने पर खास ध्यान दे रहे हैं। ZEE5 की यह नई सीरीज भी इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। कंपनी की योजना इसे एक बड़े पौराणिक फ्रेंचाइजी के रूप में विकसित करने की है, जिसमें आगे चलकर नए किरदारों और नई कहानियों को भी जोड़ा जाएगा।

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26 अगस्त से शुरू होगी यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग, भारत में JioStar करेगा प्रसारण

जियोस्टार (JioStar) को यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग (ETPL) के पहले सीजन का भारत में आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर बनाया गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 14 July, 2026
Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2026
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जियोस्टार (JioStar) को यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग (ETPL) के पहले सीजन का भारत में आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर बनाया गया है। टूर्नामेंट के आयोजकों ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि दुनिया के कई प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स के साथ भी साझेदारी की गई है, ताकि लीग को वैश्विक स्तर पर दर्शकों तक पहुंचाया जा सके।

आईसीसी (ICC) से मान्यता प्राप्त यह फ्रेंचाइजी टी20 लीग 26 अगस्त से 20 सितंबर 2026 तक खेली जाएगी। भारत में इसके सभी मुकाबलों का सीधा प्रसारण जियोस्टार अपने टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करेगा।

टूर्नामेंट में ग्लासगो, एम्स्टर्डम, एडिनबर्ग, डबलिन, बेलफास्ट और रॉटरडैम की छह शहर-आधारित फ्रेंचाइजी हिस्सा लेंगी। पूरे सीजन में कुल 32 मैच खेले जाएंगे।

भारत के अलावा, यूके और आयरलैंड में लीग का प्रसारण TNT Sports और HBO Max पर होगा। वहीं अमेरिका, कनाडा, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका (MENA) और दक्षिण-पूर्व एशिया में Willow और Cricbuzz टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए टूर्नामेंट का प्रसारण करेंगे।

ईटीपीएल की सह-संस्थापक प्रियंका कौल ने कहा कि जियोस्टार, TNT Sports और Willow जैसे ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स के साथ जुड़ने से लीग को दुनिया भर में बड़ी पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे फ्रेंचाइजी, खिलाड़ियों, प्रायोजकों और साझेदारों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका मिलेगा और यूरोपीय क्रिकेट को भी वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी।

क्रिकेट आयरलैंड के चेयरमैन ब्रायन मैकनीस ने कहा कि यह लीग यूरोप में क्रिकेट के विकास के लिए बड़ा कदम साबित होगी। उनके मुताबिक, इससे उभरते खिलाड़ियों को अवसर मिलेगा और पूरे यूरोप में क्रिकेट को नई गति मिलेगी।

जियोस्टार में स्पोर्ट्स के हेड ऑफ राइट्स एंड इनोवेशन प्रशांत खन्ना ने कहा कि यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में एक नया और रोमांचक टूर्नामेंट है। उन्होंने कहा कि इस लीग में यूरोप के उभरते खिलाड़ियों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय सितारे भी खेलेंगे, जिससे भारतीय दर्शकों को नया क्रिकेट अनुभव मिलेगा।

वहीं WBD Sports Europe के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ट्रोजन पैलॉट ने कहा कि ETPL उनके क्रिकेट पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह लीग यूके और आयरलैंड के क्रिकेट प्रशंसकों के बीच खासा लोकप्रिय होगी।

Willow के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर टॉड मायर्स ने कहा कि ETPL क्रिकेट के लगातार बढ़ते वैश्विक विस्तार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह लीग यूरोप में क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और नए खिलाड़ियों को मंच देने का बेहतरीन अवसर है।

गौरतलब है कि ETPL की फ्रेंचाइजी मालिकों के समूह में क्रिकेट जगत के कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें स्टीव वॉ, राहुल द्रविड़, जोंटी रोड्स, मैथ्यू हेडन, फाफ डु प्लेसिस और हेनरिक क्लासेन जैसे दिग्गज शामिल हैं। आयोजकों ने बताया कि आने वाले दिनों में लीग के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्ट साझेदारों की भी घोषणा की जाएगी।

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एमेजॉन ने बेन रोल्स्टन को दी बड़ी जिम्मेदारी, APAC क्षेत्र के लिए प्राइम के बने हेड

ई-कॉमर्स और टेक कंपनी एमेजॉन (Amazon) ने बेन रोल्स्टन (Ben Rolleston) को एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के लिए प्राइम का हेड नियुक्त किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 11 July, 2026
Last Modified:
Saturday, 11 July, 2026
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ई-कॉमर्स और टेक कंपनी एमेजॉन (Amazon) ने बेन रोल्स्टन (Ben Rolleston) को एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के लिए प्राइम का हेड नियुक्त किया है। इस नई भूमिका में वह पूरे APAC क्षेत्र में प्राइम सब्सक्राइबर बढ़ाने, ग्राहकों की भागीदारी (Customer Engagement) मजबूत करने और Prime से जुड़ी रणनीतियों का नेतृत्व करेंगे।

बेन रोल्स्टन ने अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने लिखा कि वह एमेजॉन में ऑफ APAC क्षेत्र के लिए प्राइम के हेड के रूप में नई भूमिका संभालने को लेकर उत्साहित हैं। इस पद पर वह Prime Shopping, Prime Video, Prime Music और Prime के अन्य लाभों से जुड़े कमर्शियल ग्रोथ, सब्सक्राइबर बढ़ाने, रणनीतिक योजना, कस्टमर मार्केटिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कस्टमर लाइफसाइकिल एंगेजमेंट की जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्होंने इस अवसर के लिए अर्नो लेनोयर (Arno Lenior) का भी धन्यवाद दिया।

नई जिम्मेदारी संभालने से पहले रोल्स्टन एमेजॉन के APAC एंटरप्राइज बिजनेस डेवलपमेंट का नेतृत्व कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय विकास रणनीति, गो-टू-मार्केट पहल और एंटरप्राइज पार्टनरशिप पर काम किया। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में Alexa के लिए सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट के प्रमुख भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने Echo, Fire TV और Alexa सेवाओं से जुड़ी साझेदारियों का नेतृत्व किया।

एमेजॉन से पहले बेन रोल्स्टन Audible Australia में कंट्री मैनेजर और मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे। वहां उन्होंने बिजनेस ग्रोथ, कंटेंट, मार्केटिंग और प्रोडक्ट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व किया।

इसके अलावा उन्होंने Nine, Viacom International Media Networks, Singtel Optus, Rugby Union Players Association और APN News & Media जैसी कंपनियों में भी वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाएं निभाई हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया, कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन, कमर्शियल स्ट्रैटेजी, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और बिजनेस ग्रोथ का लंबा अनुभव है।

कॉर्पोरेट जिम्मेदारियों के साथ-साथ बेन रोल्स्टन Surfing NSW के चेयरमैन भी हैं। इस भूमिका में वह संगठन की रणनीतिक योजना, सामुदायिक जुड़ाव और कमर्शियल डेवलपमेंट से जुड़े कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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फीफा वर्ल्ड कप: ZEE5 के 95% प्रीमियम ऐड स्लॉट बुक, 10 सेकंड का विज्ञापन 25 लाख तक

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने दावा किया है कि उसके स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Z5 और स्पोर्ट्स टीवी चैनलों की 95 फीसदी से अधिक प्रीमियम विज्ञापन इन्वेंट्री पहले ही बिक चुकी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 10 July, 2026
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Friday, 10 July, 2026
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फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) 2026 के क्वार्टर फाइनल मुकाबलों के साथ टूर्नामेंट का रोमांच और भी बढ़ गया है। इसी बीच जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises) ने दावा किया है कि उसके स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Z5 और स्पोर्ट्स टीवी चैनलों की 95 फीसदी से अधिक प्रीमियम विज्ञापन इन्वेंट्री पहले ही बिक चुकी है।

कंपनी के मुताबिक, टूर्नामेंट के दौरान अब तक 22 से ज्यादा बड़े ब्रैंड उसके साथ जुड़े हैं। इनमें ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, बेवरेज, एफएमसीजी, हेल्थकेयर, स्पोर्ट्सवियर, फैशन, ई-कॉमर्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, ट्रैवल, रियल एस्टेट, पेंट्स, एनर्जी और एजुकेशन जैसे कई सेक्टर शामिल हैं।

क्वार्टर फाइनल और नॉकआउट मुकाबलों के दौरान विज्ञापनों की बढ़ती मांग का असर विज्ञापन दरों पर भी देखने को मिला है। कंपनी के अनुसार, 10 सेकंड के एक विज्ञापन की कीमत अब 20 लाख रुपये से 25 लाख रुपये के बीच पहुंच गई है।

इस मौके पर ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Advertisement Revenue) संदीप मेहरोत्रा ने कहा कि विज्ञापनदाताओं से मिला शानदार रिस्पॉन्स कंपनी की उम्मीदों से भी बेहतर रहा है। उन्होंने कहा कि 95 फीसदी से ज्यादा विज्ञापन इन्वेंट्री पहले ही बुक हो चुकी है और 22 से अधिक प्रमुख ब्रैंड इस टूर्नामेंट का हिस्सा बने हैं। उनके मुताबिक, FIFA World Cup 2026 ब्रैंड्स के लिए बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचने का एक मजबूत मंच बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट ने सिर्फ बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच ही नहीं दिलाई, बल्कि लाइव स्पोर्ट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म की ताकत को जोड़ते हुए इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सॉल्यूशंस भी उपलब्ध कराए हैं। उनका कहना है कि विज्ञापनदाताओं का बढ़ता भरोसा कंपनी के मजबूत और अलग स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के विजन को भी मजबूती देता है।

कंपनी ने बताया कि कई ब्रैंड्स ने ZEE5 की एडवांस टारगेटिंग क्षमता और अलग-अलग विज्ञापन फॉर्मेट का इस्तेमाल करते हुए कनेक्टेड टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशन को जोड़कर मल्टी-प्लेटफॉर्म कैंपेन भी चलाए हैं।

ज़ी के अनुसार, FIFA World Cup 2026 के दौरान इंटरैक्टिव कॉन्टेस्ट और दर्शकों को जोड़ने वाली कई पहल के जरिए टीवी, डिजिटल और सोशल मीडिया पर भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली है। कंपनी ने कहा कि वह अपने स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो का लगातार विस्तार कर रही है, जिसमें Bundesliga और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जैसे बड़े स्पोर्ट्स प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं।

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छोटा कंटेंट, बड़ा कारोबार! 2 मिनट की कहानियों पर क्यों बढ़ रही है निवेश की होड़?

यदि आपने सोशल मीडिया पर 1-2 मिनट के ट्विस्ट से भरपूर एपिसोड देखे हैं, तो आप माइक्रो-ड्रामा से परिचित हैं। इसकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते कई बड़ी मीडिया कंपनियां इसमें करोड़ों रुपये निवेश कर रही हैं।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 07 July, 2026
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Tuesday, 07 July, 2026
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यदि आपने पिछले कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर 1-2 मिनट के एपिसोड वाली कोई कहानी देखी है, जिसमें हर एपिसोड के अंत में बड़ा ट्विस्ट आता है और अगला एपिसोड देखने की उत्सुकता बनी रहती है, तो आपने माइक्रो-ड्रामा की दुनिया की झलक देखी है।

कुछ साल पहले तक मनोरंजन का मतलब टीवी, फिल्में और OTT प्लेटफॉर्म थे। लेकिन अब दर्शकों, खासकर Gen Z और मोबाइल-फर्स्ट यूजर्स की बदलती पसंद ने एक नया बाजार तैयार कर दिया है। यही वजह है कि देश की बड़ी मीडिया कंपनियां अब माइक्रो-ड्रामा, वर्टिकल वीडियो और डिजिटल-फर्स्ट कंटेंट पर तेजी से दांव लगा रही हैं।

क्या है माइक्रो-ड्रामा?

माइक्रो-ड्रामा ऐसी वेब सीरीज होती हैं, जिनके एपिसोड आमतौर पर 1 से 3 मिनट लंबे होते हैं। इन्हें मोबाइल स्क्रीन के हिसाब से वर्टिकल फॉर्मेट में बनाया जाता है। हर एपिसोड का अंत इस तरह होता है कि दर्शक अगला एपिसोड तुरंत देखने के लिए उत्सुक हो जाए।

यह फॉर्मेट सबसे पहले चीन में लोकप्रिय हुआ और अब भारत में भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है। यहां रोमांस, फैमिली ड्रामा, सस्पेंस और कॉमेडी जैसी श्रेणियां सबसे ज्यादा पसंद की जा रही हैं।

दर्शकों को कितना पसंद आ रहा है?

Meta और Ormax Media की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत में माइक्रो-ड्रामा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 65% दर्शकों ने पिछले एक साल के भीतर पहली बार माइक्रो-ड्रामा देखना शुरू किया। करीब 89% लोग इन तक सोशल मीडिया फीड के जरिए पहुंचते हैं। एक सामान्य दर्शक हर सप्ताह औसतन 3.5 घंटे माइक्रो-ड्रामा देखता है, जबकि लगभग 90% लोग इन्हें अकेले देखना पसंद करते हैं। सबसे लोकप्रिय श्रेणियों में रोमांस, फैमिली ड्रामा और कॉमेडी शामिल हैं। यह अध्ययन 14 राज्यों में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के 2,000 लोगों पर आधारित है।

बाजार किस दिशा में बढ़ रहा है?

भारत में माइक्रो-ड्रामा उद्योग अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन बड़ी मीडिया कंपनियों के लगातार निवेश से इसके तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, सस्ता इंटरनेट और मोबाइल-फर्स्ट दर्शकों की संख्या इस फॉर्मेट को तेजी से आगे बढ़ा रही है।

Yash Raj Films ने क्यों लगाया दांव?

बॉलीवुड की प्रमुख फिल्म कंपनी Yash Raj Films (YRF) ने हाल ही में Gen Z पर फोकस करने वाली डिजिटल कंपनी Rusk Media में निवेश किया है। निवेश राशि सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह पहली बार है जब YRF ने मोबाइल-फर्स्ट स्टोरीटेलिंग में कदम रखा है।

YRF के CEO अक्षय विधानी के मुताबिक, भारत में करीब 37.7 करोड़ मोबाइल-फर्स्ट दर्शक हैं। ऐसे में कंपनी सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वहां भी पहुंचना चाहती है जहां दर्शक अपना अधिक समय बिताते हैं।

JioStar भी मैदान में

देश की सबसे बड़ी मीडिया और स्ट्रीमिंग कंपनियों में शामिल JioStar ने भी माइक्रो-ड्रामा सेगमेंट में एंट्री कर ली है। कंपनी ने JioHotstar ऐप पर 'Tadka' नाम से एक नया माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।

'Tadka' पर 30 से 90 सेकंड तक के वर्टिकल एपिसोड वाले ओरिजिनल शो उपलब्ध हैं। इसमें रोमांस, थ्रिलर, कॉमेडी, फैमिली ड्रामा और युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया कंटेंट शामिल है। कंपनी इसे मोबाइल-फर्स्ट दर्शकों के लिए नए मनोरंजन अनुभव के रूप में पेश कर रही है।

Zee Entertainment भी पीछे नहीं

Zee Entertainment Enterprises ने पिछले साल माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म Bullet में निवेश किया था। इसके बाद कंपनी ने इसमें 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की घोषणा भी की। साथ ही Zee ने PhantomFX में 116 करोड़ रुपये तक का रणनीतिक निवेश किया है, ताकि विजुअल इफेक्ट्स, नई तकनीक और डिजिटल स्टोरीटेलिंग में अपनी क्षमता को मजबूत किया जा सके।

Saregama ने खरीदी डिजिटल कंपनी

संगीत और मनोरंजन कंपनी Saregama India ने डिजिटल कंटेंट कंपनी Pocket Aces में 90% से अधिक हिस्सेदारी कई चरणों में 308 करोड़ रुपये में खरीदी। इसके बाद Pocket Aces के जरिए Finnet Media का भी अधिग्रहण किया गया, जो कंटेंट क्रिएशन और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करती है।

यह सौदा बताता है कि पारंपरिक मीडिया कंपनियां अब नई डिजिटल कंपनियां खड़ी करने के बजाय उन्हें खरीदकर तेजी से इस बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

Rusk Media को मिला बड़ा निवेश

Rusk Media ने हाल ही में 100 करोड़ रुपये की प्री-सीरीज C फंडिंग जुटाई। इस फंडिंग का नेतृत्व Nazara Technologies ने किया, जबकि Info Edge Ventures, IvyCap Ventures और Audacity VC समेत कई निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल ओरिजिनल एनिमेशन और माइक्रो-ड्रामा कंटेंट के विस्तार में करेगी।

आखिर कंपनियां इतना पैसा क्यों लगा रही हैं?

इसकी सबसे बड़ी वजह है दर्शकों की बदलती आदत। आज का दर्शक लंबी फिल्म या वेब सीरीज देखने के बजाय यात्रा, ऑफिस ब्रेक या खाली समय में कुछ मिनटों में पूरी होने वाली कहानी देखना पसंद कर रहा है।

सोशल मीडिया के एल्गोरिद्म भी ऐसे कंटेंट को तेजी से लोगों तक पहुंचा रहे हैं। यही कारण है कि माइक्रो-ड्रामा का पूरा बिजनेस "मोबाइल-फर्स्ट" मॉडल पर आधारित होता जा रहा है।

कमाई कैसे होती है?

माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म विज्ञापन, प्रीमियम एपिसोड, इन-ऐप खरीदारी, ब्रैंड इंटीग्रेशन और सब्सक्रिप्शन जैसे कई मॉडलों से कमाई करते हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी इस कारोबार की सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों से सीधे भुगतान कराना है। Meta-Ormax रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत कम लोग कंटेंट देखने के लिए सीधे भुगतान करते हैं। इसलिए फिलहाल कंपनियों का फोकस पहले बड़े पैमाने पर दर्शक आधार तैयार करने पर है।

आगे क्या?

भारतीय मनोरंजन उद्योग तेजी से बदल रहा है। जिस तरह एक दशक पहले OTT प्लेटफॉर्म्स ने टीवी देखने की आदत बदल दी थी, उसी तरह माइक्रो-ड्रामा अब मोबाइल मनोरंजन का नया अध्याय बनता दिखाई दे रहा है।

Yash Raj Films, JioStar, Zee Entertainment, Saregama और Nazara Technologies जैसी कंपनियों की रणनीति साफ बताती है कि वे इसे कोई अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य के बड़े डिजिटल कारोबार के रूप में देख रही हैं। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और निवेश, नए प्लेटफॉर्म तथा क्षेत्रीय भाषाओं में अधिक कंटेंट देखने को मिल सकता है।

फिलहाल इतना तय है कि मनोरंजन की दुनिया तेजी से मोबाइल स्क्रीन पर सिमट रही है और 2 मिनट की कहानी अब मीडिया कंपनियों के लिए भविष्य के सबसे बड़े डिजिटल अवसरों में से एक बनती जा रही है।

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नेटफ्लिक्स ने भारत में लॉन्च किया ''NextGen India Writers’ Program''

नेटफ्लिक्स (Netflix) ने भारत में पहली बार NextGen India Writers’ Program लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य नए और उभरते स्क्रीनराइटर्स को प्रशिक्षण, मेंटरशिप और प्रोफेशनल अवसर उपलब्ध कराना है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 04 July, 2026
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Saturday, 04 July, 2026
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ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) ने भारत में पहली बार 'नेक्स्टजेन इंडिया राइटर्स प्रोग्राम' (NextGen India Writers’ Program) लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य नए और उभरते स्क्रीनराइटर्स (Screenwriters) की पहचान करना, उन्हें प्रशिक्षण देना और उनकी कहानियों को पेशेवर स्तर तक पहुंचाने में मदद करना है।

कंपनी के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए वे लेखक आवेदन कर सकते हैं, जिनके पास अधिकतम तीन वर्ष का प्रोफेशनल राइटिंग (Professional Writing) अनुभव है। इस पहल की मेजबानी करने वाला भारत, फ्रांस (France) और नीदरलैंड (Netherlands) के बाद तीसरा देश बन गया है।

चयनित प्रतिभागियों को दो महीने के हाइब्रिड (Hybrid) प्रोग्राम में शामिल किया जाएगा। इस दौरान उन्हें इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स (Industry Experts) की मेंटरशिप (Mentorship), वर्कशॉप्स (Workshops) और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही प्रतिभागियों को अपनी कहानी को प्रोफेशनल 'सीरीज बाइबिल' (Series Bible) के रूप में विकसित करना भी सिखाया जाएगा, ताकि उसे वेब सीरीज (Web Series) में बदला जा सके।

नेटफ्लिक्स इंडिया (Netflix India) की वाइस प्रेसिडेंट (Vice President) मोनिका शेरगिल (Monika Shergill) ने कहा कि हर बेहतरीन कहानी की शुरुआत एक लेखक से होती है। भारत में ऐसे कई प्रतिभाशाली लोग हैं, जिनके पास शानदार कहानियां हैं, लेकिन उन्हें अब तक सही मंच नहीं मिल पाया। यह कार्यक्रम ऐसे नए टैलेंट को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

उन्होंने कहा कि नेटफ्लिक्स (Netflix) का मानना है कि भारतीय मनोरंजन उद्योग का अगला दौर नए नजरिए और अलग सोच रखने वाले कहानीकारों के दम पर आगे बढ़ेगा। कंपनी ने बताया कि यह पहल नए क्रिएटिव टैलेंट (Creative Talent) को बढ़ावा देने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले 'द रेलवे मेन' (The Railway Men) और आगामी सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' (Operation Safed Sagar) जैसे प्रोजेक्ट्स में भी नए रचनात्मक प्रतिभाओं को अवसर दिया जा चुका है।

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क्या सिनेमाघरों का स्वर्ण युग लौट आया है या OTT अब भी आगे है?

मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 25 June, 2026
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Thursday, 25 June, 2026
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मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है। लोग घरों में बंद हुए और OTT प्लेटफॉर्म्स ने अपनी सबसे बड़ी छलांग लगाई। Netflix, Amazon Prime, Disney+ Hotstar, सब एकसाथ भारतीय दर्शकों के ड्रॉइंग रूम में घुस आए। जब थिएटर खुले, तो सवाल यह था कि क्या दर्शक वापस आएंगे? आंकड़े कहते हैं, हां, लेकिन पुरानी शर्तों पर नहीं।

थिएटर की वापसी: रिकॉर्ड तोड़ा, पर खाली कुर्सियां अभी भी बोल रही हैं

Ormax Media की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 भारतीय बॉक्स ऑफिस का अब तक का सबसे बड़ा साल रहा। कुल ग्रॉस बॉक्स ऑफिस ₹13,395 करोड़ रहा, यह इतिहास में पहली बार था जब भारतीय बॉक्स ऑफिस ₹13,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया और 2023 के ₹12,226 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। 37 फिल्में ₹100 करोड़ का क्लब पार कर गईं, जो 2024 की 22 फिल्मों से काफी ज्यादा थीं। 2026 में यह गति जारी है, जनवरी-मार्च 2026 में ₹3,440 करोड़ का बॉक्स ऑफिस दर्ज हुआ, जो 2025 की समान अवधि से 17% अधिक है।

तुलना के लिए देखें: 2024 में कुल बॉक्स ऑफिस ₹11,833 करोड़ था, जो 2023 (₹12,226 करोड़) के बाद दूसरा सबसे बड़ा साल था। 2019 (कोविड-पूर्व) में यह आंकड़ा ₹10,948 करोड़ था।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है। संख्याएं बड़ी दिखती हैं क्योंकि टिकट की कीमतें बढ़ी हैं। 2019 में औसत टिकट मूल्य (ATP) ₹106 था, 2024 में ₹134 और 2025 में यह ₹161 हो गया, यानी 2019 के मुकाबले 52% की बढ़ोतरी। लेकिन दर्शकों की संख्या (फुटफॉल) उलटी दिशा में गई। 2019 में 103 करोड़ दर्शक थिएटर पहुंचे थे, जो 2024 में 88.3 करोड़ और 2025 में घटकर 83.2 करोड़ रह गए, 2019 की तुलना में 19% की गिरावट।

भारत में कुल 10,033 स्क्रीन हैं (2025)। PVR INOX, देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन, 111 शहरों में 1,749 स्क्रीन संचालित करती है। सिंगल स्क्रीन थिएटर की हालत ज्यादा चिंताजनक है, हर साल करीब 150 सिंगल स्क्रीन बंद होते हैं, जबकि नए मल्टीप्लेक्स स्क्रीन जुड़ते रहते हैं।

OTT: उछाल के बाद परिपक्वता का दौर

कोविड के दौरान जो OTT क्रांति आई, वह 2025-26 में एक नए चरण में है, तेज ग्रोथ की जगह अब रणनीतिक विस्तार ने ली है।

JioHotstar, फरवरी 2025 में JioCinema और Disney+ Hotstar के विलय से बना यह प्लेटफॉर्म, IPL 2025 तक 30 करोड़ सब्सक्राइबर तक पहुंचा और मार्च 2026 तक MAU 55 करोड़ (550 मिलियन) हो गए। IPL 2026 ने नए रिकॉर्ड बनाए, ओपनिंग वीकेंड में ही 51.5 करोड़ दर्शकों तक रीच (reach) बनी, वॉच-टाइम 2025 के मुकाबले 26% बढ़ा, और लीग स्टेज के दौरान cumulative रीच 1.1 अरब पार कर गई (IPL 2025 की फाइनल रीच 1.19 अरब थी)। डिजिटल रीच 15%, CTV रीच 25% और रीजनल लैंग्वेज वॉच-टाइम 42% बढ़ा। JioHotstar का FY26 में परिचालन राजस्व ₹31,048 करोड़ और PBT ₹3,228 करोड़ रहा।

Amazon Prime Video के भारत में करीब 2.5-3 करोड़ पेड सब्सक्राइबर हैं। Netflix के भारत में 2 करोड़ (20 मिलियन) पेड सब्सक्राइबर हो गए हैं, जो 2021 के महज 55 लाख से काफी वृद्धि है। Netflix का भारत में राजस्व 2025 में $905 मिलियन (लगभग ₹7,600 करोड़) तक पहुंचने का HSBC का अनुमान था।

OTT का मुद्रीकरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। Ormax OTT Audience Report 2025 के अनुसार कुल OTT यूजर्स 60.1 करोड़ के पार हैं, लेकिन active paid subscriptions केवल 14.82 करोड़ हैं, बाकी बड़ी संख्या मुफ्त या विज्ञापन-सहित कंटेंट पर निर्भर है।

AVOD बनाम SVOD का संघर्ष अब और स्पष्ट है। Amazon Prime Video ने 2025 में भारत में विज्ञापन-सहित बेस प्लान शुरू किया। Statista के अनुसार भारत का OTT वीडियो बाजार 2026 में $4.96 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, और 2030 तक $6.76 अरब होने की संभावना है।

बड़ी फिल्में: थिएटर की असली लाइफलाइन

थिएटर बिजनेस का एक कड़वा सच यह है कि वह अब कुछ बड़ी इवेंट फिल्मों पर टिका है।

2024 की टॉप फिल्में: 'पुष्पा 2: द रूल' ₹1,403 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) के साथ सबसे बड़ी हिट रही। 'कल्कि 2898 AD' लगभग ₹758 करोड़ और 'स्त्री 2' ₹740 करोड़ डोमेस्टिक ग्रॉस पर रहीं।

2025 की टॉप फिल्में: 'धुरंधर' (₹950 करोड़) ने अब तक की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म का रिकॉर्ड बनाया, 'स्त्री 2' के ₹698 करोड़ के आंकड़े को पार करते हुए। 'कांतारा: ए लेजेंड चैप्टर 1' और 'छावा' भी ₹500 करोड़+ क्लब में रहीं। 'सैयारा', 'कूली' और एनिमेटेड फिल्म 'महावतार नरसिम्हा' ₹300 करोड़+ पर रहीं।

2026 की शुरुआत: 'धुरंधर: द रिवेंज' (मार्च 2026) ने ₹1,375 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) कमाकर हिंदी फिल्मों का नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया, वर्ल्डवाइड यह ₹1,813 करोड़ ($200 मिलियन+) तक पहुंची।

हिंदी सिनेमा के लिए उल्लेखनीय बात: 2025 में 93% हिंदी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मूल हिंदी फिल्मों से आया, डब दक्षिण भारतीय फिल्मों पर निर्भरता 31% (2024) से घटकर मात्र 7% रह गई।

मिड-बजट सिनेमा: OTT ने छीना, OTT ने दिया

20-80 करोड़ बजट वाली फिल्मों की कहानी सबसे दिलचस्प है। कोविड के बाद के कुछ वर्षों में OTT प्लेटफॉर्म्स ने इन फिल्मों के लिए "गारंटीड डील" दी, रिलीज से पहले ही पैसे मिल जाते थे। इससे निर्माता थिएटर रिलीज का जोखिम उठाने से बचने लगे।

लेकिन 2025 में पासा पलटा। OTT प्लेटफॉर्म्स अब ज्यादा सतर्क और चयनात्मक हो गए हैं। उन्होंने थिएटर-अप्रूव्ड फिल्मों को तरजीह देनी शुरू की है, जिसका मतलब है कि अच्छा थिएटरी प्रदर्शन OTT डील की कीमत बढ़ाता है। 'धुरंधर: द रिवेंज' जैसी फिल्म के डिजिटल अधिकार JioHotstar ने ₹150 करोड़ में खरीदे, जो पहली फिल्म से लगभग दोगुना था। यह बदलाव मिड-बजट फिल्मों को एक बार फिर थिएटर रिलीज की ओर धकेल रहा है।

थिएटरी विंडो: अदृश्य युद्ध जारी है

पहले फिल्में थिएटर में 8-12 हफ्ते रहती थीं। कोविड के बाद यह खिड़की सिकुड़ी। आज स्थिति यह है:

हिंदी फिल्में आम तौर पर 6-8 हफ्ते बाद OTT पर आती हैं, लेकिन कमजोर फिल्में कभी-कभी 4 हफ्ते में ही चली जाती हैं। तेलुगु और तमिल इंडस्ट्री में 3-4 हफ्ते की विंडो सामान्य हो चुकी है।

मल्टीप्लेक्स चेन्स इसका विरोध कर रही हैं। कई बड़े मल्टीप्लेक्स ने 8 हफ्ते से कम विंडो वाली फिल्मों को स्क्रीन देने से मना कर दिया। 'धुरंधर: द रिवेंज' IPL 2026 की समाप्ति के बाद (मई-जून 2026) JioHotstar पर आने का अनुमान है, यानी करीब 10 हफ्ते की थिएटरी विंडो।

थिएटर अब 'अनुभव' बेच रहे हैं

जब कंटेंट OTT पर मिलने लगा, तो थिएटर ने रणनीति बदली, वे अब सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि अनुभव बेचते हैं। IMAX ने भारत में फरवरी 2025 तक 31 स्क्रीन स्थापित किए हैं और 14 और आने वाले हैं। 4DX, रिक्लाइनर स्क्रीन, Premium Large Format (PLF), ये सब प्रीमियम टिकट के साथ F&B राजस्व बढ़ाने का तरीका हैं। PVR INOX अब फिल्म रिलीज से ज्यादा F&B और प्रीमियम फॉर्मेट से कमाई करने की ओर बढ़ रही है।

रीजनल सिनेमा: असली विजेता

अगर कोई सबसे ज्यादा फायदे में रहा, तो वह है रीजनल सिनेमा। 2024 में मलयालम सिनेमा ने पहली बार ₹1,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया और बाजार हिस्सेदारी 5% से दोगुनी होकर 10% हो गई; 2025 में यह गति बनी रही। कन्नड़ सिनेमा 2025 की एकमात्र दक्षिण भारतीय भाषा रही जिसने फुटफॉल में वृद्धि दर्ज की। गुजराती सिनेमा ने 2025 में 189% की वृद्धि के साथ ₹242 करोड़ का आंकड़ा छुआ।

OTT पर भी रीजनल कंटेंट की मांग बढ़ी है। JioHotstar और Netflix दोनों ही क्षेत्रीय भाषाओं में ओरिजिनल कंटेंट पर जोर दे रहे हैं। 'मंजुम्मेल बॉयज' (मलयालम), 'कांतारा', 'RRR' जैसी फिल्मों ने दिखाया कि भाषा अब बाधा नहीं है।

विज्ञापन बाजार: डिजिटल का बोलबाला

Ipsos के अनुसार, FY2025 में भारत का कुल विज्ञापन बाजार ₹1,11,000 करोड़ पार कर गया, जिसमें डिजिटल का हिस्सा ₹49,000 करोड़ (44% share) रहा, 20% की वार्षिक वृद्धि के साथ। FY2026 में यह 15% बढ़कर ₹56,400 करोड़ (कुल खर्च का 46%) तक पहुंचने का अनुमान है। CTV विज्ञापन खर्च 2022 के ₹450 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 2024 में ₹1,500 करोड़ हो गया, और 2025 में ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था, 2027 तक ₹3,500 करोड़ का लक्ष्य है।

थिएटर विज्ञापन भी धीरे-धीरे लौट रहे हैं, लेकिन डिजिटल की तुलना में उनका हिस्सा अभी बहुत कम है।

अब केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, साथ काम करने का दौर

2025-26 के आंकड़े एक स्पष्ट तस्वीर देते हैं, OTT और थिएटर अब एक-दूसरे के दुश्मन नहीं, बल्कि एक ही इकोसिस्टम के दो हिस्से हैं। बड़ी स्पेक्टेकल फिल्में थिएटर के लिए हैं, वहां बड़ा पर्दा, IMAX, 4DX, और सामूहिक अनुभव का कोई विकल्प नहीं। मिड-बजट और सीरीज कंटेंट OTT का प्राकृतिक घर बन रहा है।

लेकिन चुनौतियां असली हैं। फुटफॉल 2019 से 19% नीचे है और गिरावट जारी है। टिकटों की बढ़ती कीमतों के दम पर ग्रोथ हासिल करने की भी एक सीमा है। OTT प्लेटफॉर्म्स के पास 60 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 14.82 करोड़ लोग ही पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेते हैं। वहीं, दूसरी तरफ सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की संख्या लगातार घट रही है और कई थिएटर बंद हो रहे हैं।

अगले पांच साल में जो इंडस्ट्री उभरेगा, वह न पुराना थिएटर-प्रधान होगा, न पूरी तरह OTT-केंद्रित। यह होगा एक हाइब्रिड एंटरटेनमेंट अर्थव्यवस्था, जिसमें सिनेमाघर प्रीमियम अनुभव केंद्र होंगे, और OTT रोज़ की कहानियों का घर। 

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Dentsu व IWMBuzz की Stream Culture 2026 रिपोर्ट जारी, बताया- भारत में स्ट्रीमिंग का भविष्य

Dentsu और IWMBuzz Media ने मिलकर ‘Stream Culture 2026’ नामक एक नई सांस्कृतिक और उद्योग विश्लेषण रिपोर्ट जारी की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 17 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
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Dentsu और IWMBuzz Media ने मिलकर ‘Stream Culture 2026’ नामक एक नई सांस्कृतिक और उद्योग विश्लेषण रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का अनावरण मुंबई में आयोजित dentsu-IWMBuzz Digital Awards के आठवें सीजन के दौरान किया गया। रिपोर्ट में भारत के स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम में तेजी से हो रहे बदलावों का विश्लेषण किया गया है और बताया गया है कि बदलती दर्शक पसंद, नए बिजनेस मॉडल, उभरती तकनीकें और सांस्कृतिक रुझान किस तरह स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री का भविष्य तय कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत की स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री अब “कंटेंट की भरमार” वाले दौर से निकलकर “प्रासंगिकता” यानी रिलिवेंस के दौर में प्रवेश कर चुकी है। पिछले एक दशक में सस्ता इंटरनेट, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और बड़े पैमाने पर कंटेंट निर्माण ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े कंटेंट बाजारों में शामिल कर दिया। लेकिन अब जब प्लेटफॉर्म परिपक्व हो रहे हैं, दर्शकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं और मुनाफा उद्योग की प्राथमिकता बन रहा है, तो सबसे बड़ी चुनौती अधिक कंटेंट बनाना नहीं रह गई है। अब असली चुनौती ऐसी कहानियां तैयार करना है जो लोगों का ध्यान आकर्षित करें, समुदाय बनाएं, संस्कृति को प्रभावित करें और रिलीज के बाद भी लंबे समय तक चर्चा में बनी रहें।

‘Stream Culture 2026’ रिपोर्ट में चार बड़े बदलावों के तहत 12 नए संकेतों की पहचान की गई है। इनमें ‘भारत कैसे देखता है’, ‘मूल्य कैसे पैदा होता है’, ‘संस्कृति कैसे यात्रा करती है’ और ‘कहानियां कैसे बदल रही हैं’ जैसे विषय शामिल हैं। रिपोर्ट का कहना है कि आज दर्शकों का व्यवहार, कहानी कहने का तरीका, तकनीक और बिजनेस प्रदर्शन एक-दूसरे से अलग नहीं देखे जा सकते। ये सभी मिलकर एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं जो तय करता है कि कौन-सा कंटेंट खोजा जाएगा, किस पर चर्चा होगी, क्या याद रखा जाएगा और किसे सफलता मिलेगी।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों में कहा गया है कि भारतीय दर्शकों के पास समय की कमी नहीं है, बल्कि उनकी सहनशीलता कम हो गई है। यदि कोई कहानी उनसे जुड़ती है तो वे उसे देखने में घंटों लगा सकते हैं, लेकिन अगर कंटेंट उन्हें सामान्य, दोहराव वाला या कमजोर लगता है तो वे उसे कुछ ही मिनटों में छोड़ देते हैं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि अब कंटेंट की खोज खुद कंटेंट अनुभव का हिस्सा बन गई है। दर्शक क्या देखेंगे, क्या आजमाएंगे और क्या साझा करेंगे, यह तय करने में कंटेंट क्रिएटर्स, ऑनलाइन कम्युनिटीज और सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाएं पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

एक और दिलचस्प निष्कर्ष यह है कि मोबाइल-फर्स्ट और वर्टिकल वीडियो देखने का चलन बढ़ने के बावजूद घर का लिविंग रूम फिर से स्ट्रीमिंग का सबसे मूल्यवान स्क्रीन बनकर उभर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि परिवार के साथ मिलकर कंटेंट देखने की आदत एक बार फिर मजबूत हो रही है।

रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय भाषाओं का कंटेंट अब सिर्फ एक वैकल्पिक श्रेणी नहीं रह गया है। यह तेजी से भारत की मुख्यधारा सांस्कृतिक चर्चा को आकार दे रहा है। टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों और कस्बों के दर्शक अब स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री की अगली विकास लहर को आगे बढ़ा रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब स्ट्रीमिंग उद्योग की अदृश्य लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बुनियाद बनता जा रहा है। कंटेंट निर्माण, पर्सनलाइजेशन, कंटेंट डिस्कवरी और दर्शकों की भागीदारी बढ़ाने जैसे लगभग हर क्षेत्र में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

शोध का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री अब “रीच” से “रिलिवेंस” और “लॉन्च” से “लॉन्गेविटी” की ओर बढ़ रही है। यानी किसी कंटेंट की सफलता सिर्फ उसके लॉन्च के समय बने शोर, व्यूज या नए सब्सक्राइबर्स की संख्या से नहीं मापी जाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य में सफलता इस बात से तय होगी कि कोई कहानी कितने समय तक चर्चा में बनी रहती है, कितने समर्पित प्रशंसक तैयार करती है और समाज तथा संस्कृति पर कितना स्थायी प्रभाव छोड़ती है। दूसरे शब्दों में, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए अब सिर्फ कंटेंट बनाना काफी नहीं होगा, बल्कि ऐसा कंटेंट बनाना जरूरी होगा जो लोगों के साथ लंबे समय तक जुड़ा रहे और सांस्कृतिक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

रिपोर्ट के लिंक:

डिजिटल वर्जन: https://www.dentsu.com/in/en/reports/asa_streamculture2026

ऑडियो वर्जन: https://www.youtube.com/watch?v=LeIqdXVHtCI

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JioHotstar में समीर त्रिपाठी को बड़ी जिम्मेदारी, बने डायरेक्टर(LCS)

'जियोस्टार' (JioHotstar) ने समीर त्रिपाठी को प्रमोट करते हुए डायरेक्टर (LCS) नियुक्त किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 16 June, 2026
Last Modified:
Tuesday, 16 June, 2026
SameerTripathi512

'जियोस्टार' (JioHotstar) ने समीर त्रिपाठी को प्रमोट करते हुए डायरेक्टर (LCS) नियुक्त किया है। समीर त्रिपाठी ने खुद इस नई जिम्मेदारी की जानकारी लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की।

नई भूमिका में समीर त्रिपाठी कई तेजी से बढ़ते उपभोक्ता क्षेत्रों का नेतृत्व करेंगे। इनमें ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, ज्वेलरी और लाइफस्टाइल जैसी प्रमुख कैटेगरी शामिल हैं। कंपनी के लिए ये सेक्टर काफी अहम माने जा रहे हैं और आने वाले समय में इनके विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं।

अपनी पदोन्नति पर खुशी जताते हुए समीर त्रिपाठी ने कहा कि ये सभी सेक्टर भारत के उपभोक्ता बाजार में तेजी से हो रहे बदलावों का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह ब्रांड्स के साथ मिलकर स्ट्रीमिंग और डिजिटल इनोवेशन की ताकत के जरिए प्रभावशाली ग्रोथ स्टोरीज बनाने के लिए उत्साहित हैं।

इस पदोन्नति से पहले समीर त्रिपाठी JioHotstar में Associate Director के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने इस भूमिका में कंपनी के साथ महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसके बाद उन्हें यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।

JioHotstar से जुड़ने से पहले समीर त्रिपाठी ने दो साल से अधिक समय तक Viacom18 Media Private Limited में काम किया था। वहां भी उन्होंने मीडिया और डिजिटल बिजनेस से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाई।

अपने करियर के शुरुआती दौर में समीर त्रिपाठी कई प्रतिष्ठित मीडिया और डिजिटल कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं। उन्होंने MX Player, The Viral Fever (TVF), ABP News और Eenadu Publication Pvt. Ltd. जैसी संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

मीडिया, डिजिटल कंटेंट और ब्रांड सॉल्यूशंस के क्षेत्र में लंबे अनुभव के साथ समीर त्रिपाठी की यह पदोन्नति JioHotstar के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में उपभोक्ता-केंद्रित कई बड़े बिजनेस सेक्टरों में नई वृद्धि और नवाचार देखने को मिलेगा।

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e4m Play Streaming Media Awards: बेहतरीन कंटेंट और क्रिएटिविटी को मिला सम्मान

मुंबई में 11 जून को आयोजित e4m Play Streaming Media Awards के सातवें संस्करण में स्ट्रीमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बेहतरीन काम को सम्मानित किया गया।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 12 June, 2026
Last Modified:
Friday, 12 June, 2026
e4m Play Streaming Media Awards

मुंबई में 11 जून को आयोजित e4m Play Streaming Media Awards के सातवें संस्करण में स्ट्रीमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बेहतरीन काम को सम्मानित किया गया। इस भव्य समारोह में कंटेंट क्रिएटर्स, ब्रैंड्स, प्लेटफॉर्म्स और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स को उनके नवाचार, रचनात्मकता और प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग के लिए अवॉर्ड्स दिए गए।

इस साल के अवॉर्ड्स में JioHotstar, Sony LIV, Netflix, Arha Media Broadcasting Pvt Ltd, Jio Studios और Prime Video ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई बड़े अवॉर्ड्स अपने नाम किए। JioHotstar ने कंटेंट कैटेगरी में 5, टैलेंट कैटेगरी में 8 और ब्रैंड इंटीग्रेशन एवं मार्केटिंग कैटेगरी में 6 अवॉर्ड्स जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

वहीं JioHotstar के माइक्रो ड्रामा प्लेटफॉर्म Tadka ने भी शानदार प्रदर्शन किया। Tadka को कंटेंट कैटेगरी में 1 और टैलेंट कैटेगरी में 14 अवॉर्ड्स मिले। Sony LIV ने कंटेंट कैटेगरी में 6 और टैलेंट कैटेगरी में 16 अवॉर्ड्स जीतकर अपनी मजबूत स्थिति साबित की।

Netflix को कंटेंट कैटेगरी में 6 और टैलेंट कैटेगरी में 11 अवॉर्ड्स मिले। वहीं Arha Media Broadcasting Pvt Ltd ने कंटेंट कैटेगरी में 5, टैलेंट कैटेगरी में 3 और ब्रैंड इंटीग्रेशन एवं मार्केटिंग कैटेगरी में 3 अवॉर्ड्स अपने नाम किए। Prime Video ने कंटेंट कैटेगरी में 8 बड़े अवॉर्ड्स जीते, जबकि Jio Studios को कंटेंट कैटेगरी में 1 और टैलेंट कैटेगरी में 7 अवॉर्ड्स मिले। 

अवॉर्ड्स नाइट में कई ब्रैंड्स और एजेंसियों को उनके प्रभावशाली मार्केटिंग कैंपेन के लिए सम्मानित किया गया। इनमें Ching's Secret (Tata Consumer Products), Purnima Advertising Agency Pvt. Ltd., Omnicom Media, White Turtle Studios – A Trailer Park Group Company, Piramal Consumer Healthcare, Jaquar & Company Pvt. Ltd., Crescent Communications Pvt. Ltd. और Zone Media प्रमुख रहे।

e4m Play Streaming Media Awards 2026 में Association of Mutual Funds in India (AMFI) के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर वेंकट नागेश्वर चालासानी (Venkat Nageswar Chalasani) ने मार्केटिंग जूरी चेयर की भूमिका निभाई।

वहीं प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक और संपादक Rahul Rawail कंटेंट और टैलेंट कैटेगरी के जूरी चेयर रहे। इसके अलावा विज्ञापन, मीडिया और मार्केटिंग जगत के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ और इंडस्ट्री के लीडर जूरी का हिस्सा बने।

ग्राउंडब्रेकिंग शोज़, प्रभावशाली कैंपेन और दमदार स्टोरीटेलिंग के जरिए विजेताओं ने रचनात्मकता की नई सीमाएं तय कीं। इसी वजह से e4m Play Streaming Media Awards आज स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम में बेहतरीन काम को सम्मानित करने वाले प्रमुख मंचों में से एक बन चुका है।

यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स प्रतिभाओं, कंटेंट, ब्रैंड्स और प्लेटफॉर्म्स को उनकी उत्कृष्टता, रचनात्मकता और नवाचार के लिए सम्मानित करते हैं। साथ ही यह उन लोगों को पहचान दिलाते हैं जो इंडस्ट्री में नए मानक स्थापित कर रहे हैं और स्ट्रीमिंग मीडिया के भविष्य को आकार देने वाले विचारों और उपलब्धियों को सामने ला रहे हैं।

यहां देखें विजेताओं की पूरी सूची-

 

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