13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया नियम कड़े करेगा EU

उम्मीद है कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) सितंबर में अपने वार्षिक 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (State of the Union) संबोधन के दौरान इस पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगी।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2026
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यूरोपीय संघ (European Union-EU) 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया (Social Media) इस्तेमाल पर सख्त नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित नियमों के तहत 27 सदस्य देशों (27-member bloc) में छोटे बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर आयु-आधारित (Age-based) प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं।

यूरोपीय आयोग (European Commission) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने सोमवार को दो विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई सिफारिशें पेश कीं। इन सिफारिशों में बच्चों के लिए आयु के आधार पर सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने का सुझाव दिया गया है।

प्रस्ताव के अनुसार, 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को केवल सीमित समय के लिए और माता-पिता, अभिभावकों (Caregivers) या शिक्षकों (Teachers) की निगरानी में ही सोशल मीडिया का उपयोग करने की अनुमति होगी। जैसे-जैसे बच्चों की उम्र बढ़ेगी, इन प्रतिबंधों में चरणबद्ध तरीके से ढील दी जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने कहा कि अब इस बात पर व्यापक सहमति बन चुकी है कि बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनकी उम्र के अनुरूप अधिक सुरक्षा (Age-appropriate Protection) की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अब चर्चा इस बात पर नहीं है कि ऑनलाइन जोखिम मौजूद हैं या नहीं, बल्कि इस पर है कि सरकारें बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित डिजिटल माहौल कैसे सुनिश्चित करें।

यूरोपीय आयोग (European Commission) गर्मियों के बाद इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव पेश करेगा। उम्मीद है कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) सितंबर में अपने वार्षिक 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (State of the Union) संबोधन के दौरान इस पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगी।

यह प्रस्ताव बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा (Online Safety) को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आयोग का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम (Screen Time), हानिकारक कंटेंट (Harmful Content) और प्लेटफॉर्म्स की लत लगाने वाली विशेषताओं (Addictive Features) को देखते हुए ऐसे कदम जरूरी हो गए हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित नियम केवल पारंपरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन अन्य ऑनलाइन सेवाओं पर भी लागू हो सकते हैं, जिनमें उम्र के अनुरूप नहीं मानी जाने वाली या लत बढ़ाने वाली सुविधाएं मौजूद हैं।

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WAVES 2027 के लिए MIB ने मांगे प्रस्ताव : 'Create in India Challenge Season 2' की शुरुआत

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने WAVES 2027 के तहत Create in India Challenge (CIC) Season 2 के लिए उद्योग संगठनों और संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2026
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information & Broadcasting-MIB) ने वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (World Audio Visual and Entertainment Summit-WAVES) 2027 के प्रमुख कार्यक्रम 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (Create in India Challenge-CIC) Season 2' के तहत उद्योग संगठनों, संस्थाओं और एसोसिएशनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।

प्रस्तावों की प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाने के लिए मंत्रालय ने एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल (Unified Online Portal) भी शुरू किया है। इसी पोर्टल के माध्यम से प्रस्ताव जमा किए जाएंगे और उनका मूल्यांकन किया जाएगा।

मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट (Media & Entertainment) क्षेत्र में युवाओं के बीच रचनात्मकता (Creativity), नवाचार (Innovation), कौशल विकास (Skill Development) और नई प्रतिभाओं की पहचान को बढ़ावा देना है।

चयनित चुनौतियां उद्योग के नेतृत्व में संचालित होंगी, जबकि सरकार उनका सहयोग करेगी। इनमें मेंटरशिप (Mentorship), प्रशिक्षण (Training), अपस्किलिंग (Upskilling) और सहयोगात्मक सीख (Collaborative Learning) पर विशेष जोर रहेगा।

क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (CIC) Season 2 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI), AVGC-XR, डिजिटल मीडिया (Digital Media), गेमिंग (Gaming), ई-स्पोर्ट्स (E-Sports), एनीमेशन (Animation), विजुअल इफेक्ट्स (VFX), कॉमिक्स (Comics), फिल्म (Films), ब्रॉडकास्टिंग (Broadcasting), संगीत (Music), नृत्य (Dance), एआर/वीआर (AR/VR) और अन्य उभरते मीडिया क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

इच्छुक संस्थाएं 31 जुलाई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने प्रस्ताव जमा कर सकती हैं। सरकार चयनित चुनौतियों के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक चुनौती पर अधिकतम ₹1 करोड़ की एकमुश्त वित्तीय सहायता (One-time Grant) उपलब्ध कराएगी। यह सहायता तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन, परिणाम आधारित योजना, जमीनी स्तर तक पहुंच और कौशल विकास कार्यक्रमों के आधार पर प्रदान की जाएगी।

मंत्रालय का लक्ष्य CIC Season 2 के तहत 50 से अधिक उद्योग-नेतृत्व वाली चुनौतियां आयोजित करना है। इनमें विशेष रूप से AI, डिजिटल एवं सोशल मीडिया (Digital & Social Media) तथा AVGC-XR जैसे उभरते क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा।

कार्यक्रम का समापन WAVES 2027 के दौरान आयोजित 'क्रिएटोस्फीयर (CreatoSphere)' में होगा, जहां विजेताओं और उनके प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।

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CSAM मामले में मेटा ने भारत सरकार को सौंपा जवाब : MeitY कर रहा समीक्षा

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को इंस्टाग्राम (Instagram) पर CSAM से जुड़े विज्ञापनों के मामले में मेटा (Meta) का जवाब मिल गया है।

Last Modified:
Tuesday, 14 July, 2026
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों के मामले में मेटा (Meta) ने भारत सरकार को अपना स्पष्टीकरण सौंप दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) फिलहाल कंपनी के जवाब की विस्तृत समीक्षा कर रहा है।

सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सचिव एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मंत्रालय को मेटा (Meta) का जवाब प्राप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि जवाब के प्रत्येक पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और समीक्षा पूरी होने के बाद ही सरकार अपने अगले कदम पर फैसला करेगी।

एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने कहा, "CSAM कंटेंट को लेकर हमने मेटा को जो नोटिस जारी किया था, उसका जवाब हमें मिल गया है। वर्तमान में यह हमारे परीक्षण के अधीन है। इस जवाब के गहन मूल्यांकन के आधार पर ही उचित कार्रवाई की जाएगी।"

हाल ही में सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इंस्टाग्राम (Instagram) पर कुछ प्रायोजित विज्ञापन ऐसे थे, जो 'चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूज मटेरियल' (Child Sexual Exploitative and Abuse Material-CSEAM) तक पहुंच को आसान बना रहे थे या उसका प्रचार कर रहे थे।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए MeitY ने मेटा (Meta) को नोटिस जारी किया था। मंत्रालय ने कंपनी को निर्देश दिया था कि ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित सामग्री को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। साथ ही निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।

आईटी सचिव ने बताया कि मेटा (Meta) ने शनिवार को अपना जवाब दाखिल किया, जो मंत्रालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा का अंतिम दिन था। अब सरकार इस जवाब का कानूनी और तकनीकी पहलुओं से परीक्षण कर रही है। समीक्षा पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाए।

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आईबीएम (IBM) एशिया पैसिफिक में तुहिना पांडे को मिली बड़ी जिम्मेदारी

आईबीएम (IBM) ने तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) को एशिया पैसिफिक (Asia Pacific) के लिए वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग (Vice President, Marketing) नियुक्त किया है।

Last Modified:
Monday, 13 July, 2026
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आईबीएम (IBM) ने तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) को एशिया पैसिफिक (Asia Pacific) के लिए वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग (Vice President, Marketing) की नई जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले वह डायरेक्टर APAC कम्युनिकेशंस एंड मार्केटिंग, इंडिया एंड साउथ एशिया (Director APAC Communications & Marketing, India and South Asia) के पद पर कार्यरत थीं।

तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) ने अपनी नई भूमिका की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा करते हुए कहा, "यह भूमिका हमारे ग्राहकों की प्राथमिकताओं के केंद्र में है। इसमें आईबीएम (IBM) की पूरी क्षमताओं को एक साथ लाकर ग्राहकों की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करना और क्षेत्रभर में प्रभाव को बढ़ाने के लिए साझेदारों के साथ मिलकर काम करना शामिल है।"

तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) वर्ष 2020 में आईबीएम (IBM) से हेड ऑफ कम्युनिकेशंस, इंडिया एंड साउथ एशिया (Head of Communications, India and South Asia) के रूप में जुड़ी थीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी की कम्युनिकेशंस और मार्केटिंग रणनीतियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आईबीएम (IBM) से पहले वह टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) में ग्लोबल कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस एंड पब्लिक अफेयर्स (Global Corporate Communications and Public Affairs) का नेतृत्व कर चुकी हैं।

नई भूमिका में तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) एशिया पैसिफिक क्षेत्र में आईबीएम (IBM) की मार्केटिंग रणनीति को आगे बढ़ाने, ग्राहकों के साथ जुड़ाव मजबूत करने और क्षेत्रीय स्तर पर बिजनेस ग्रोथ को गति देने पर काम करेंगी।

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वॉट्सऐप यूजरनेम फीचर विवाद : 'Meta' ने अब तक नहीं भेजा जवाब

वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर भेजे गए नोटिस पर मेटा (Meta) का जवाब अभी तक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को नहीं मिला है।

Last Modified:
Friday, 10 July, 2026
WhatsApp username feature

वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम (Username) फीचर को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) द्वारा भेजे गए नोटिस पर मेटा (Meta) का जवाब अभी तक मंत्रालय को प्राप्त नहीं हुआ है। जबकि कंपनी को जवाब देने के लिए दी गई विस्तारित समय-सीमा गुरुवार को समाप्त हो रही है।

नई दिल्ली (New Delhi) में सीआईआई (Confederation of Indian Industry-CII) बिजनेस समिट (Business Summit) के दौरान आईटी सचिव एस. कृष्णन (S Krishnan) ने कहा कि सरकार मेटा (Meta) का जवाब मिलने और उसकी समीक्षा करने के बाद ही अगला कदम तय करेगी।

उन्होंने कहा, "हमें अभी तक नोटिस का जवाब नहीं मिला है। जवाब देने के लिए अभी थोड़ा समय बाकी है। आज जवाब दाखिल करने का अंतिम दिन है।" एस. कृष्णन (S Krishnan) ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार फिलहाल मेटा (Meta) से जुड़े दो अलग-अलग मामलों पर काम कर रही है। पहला वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर से जुड़ा है, जबकि दूसरा चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से संबंधित नोटिस का मामला है।

सरकार ने मेटा (Meta) से वॉट्सऐप (WhatsApp) की उस योजना पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसके तहत उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर साझा किए बिना यूनिक यूजरनेम (Unique Username) के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। केंद्र का मानना है कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना यह फीचर शुरू होने पर फिशिंग (Phishing), प्रतिरूपण (Impersonation), ऑनलाइन ठगी (Online Scam) और तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) जैसे साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है।

अब सभी की निगाहें मेटा (Meta) के जवाब और उसके बाद MeitY के अगले कदम पर टिकी हैं। सरकार का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी का स्पष्टीकरण उपयोगकर्ता सुरक्षा, साइबर धोखाधड़ी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही से जुड़े सवालों का कितना संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करता है।

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खेल प्रसारण में एडल्ट विज्ञापन कितने उचित? भारत-इंग्लैंड मैच से उठे बड़े सवाल

कंडोम विज्ञापन के प्रसारण पर विवाद छिड़ गया है। पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने आपत्ति जताते हुए खेल प्रसारणों में परिवार और बच्चों की मौजूदगी को देखते हुए विज्ञापन नीति की समीक्षा की मांग की है।

Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
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भारत-इंग्लैंड टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के प्रसारण के दौरान कंडोम का विज्ञापन दिखाए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या परिवारों और बच्चों द्वारा बड़ी संख्या में देखे जाने वाले खेल आयोजनों के दौरान वयस्क उत्पादों से जुड़े विज्ञापन प्रसारित किए जाने चाहिए। हालांकि भारत में कंडोम का विज्ञापन पूरी तरह वैध है और इसे सुरक्षित यौन संबंध, यौन स्वास्थ्य जागरूकता तथा परिवार नियोजन जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों का हिस्सा माना जाता है, लेकिन कई दर्शकों ने इसके समय और प्रसारण मंच पर सवाल उठाए हैं।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर कीर्ति आजाद ने इस विज्ञापन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि क्रिकेट ऐसा खेल है जिसे बच्चे, किशोर और पूरा परिवार एक साथ बैठकर देखता है। उनके अनुसार, ऐसे विज्ञापन लाइव मैचों के दौरान प्रसारित नहीं होने चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को जरूरत पड़ने पर संसद में उठाने की बात भी कही है और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से यह जांच करने का आग्रह किया है कि मैच के प्रसारण के दौरान ऐसे विज्ञापन कैसे शामिल किए गए।

इस विवाद ने कानूनी वैधता और प्रसारण की उपयुक्तता के बीच अंतर को भी चर्चा का विषय बना दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कंडोम विज्ञापन पर कोई कानूनी रोक नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ऐसे विज्ञापन उस समय दिखाए जाने चाहिए जब करोड़ों परिवार एक साथ क्रिकेट देख रहे हों। दूसरी ओर, कई लोग मानते हैं कि आज के डिजिटल दौर में दर्शक टीवी, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इस तरह की सामग्री पहले से देख रहे हैं, इसलिए सुरक्षित यौन स्वास्थ्य से जुड़े संदेशों को अनुचित नहीं माना जाना चाहिए।

फिलहाल प्रसारक, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म या BCCI की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। ऐसे में यह विवाद किसी उत्पाद पर प्रतिबंध लगाने का नहीं, बल्कि विज्ञापनों के समय, प्रसारण नीति और दर्शकों की संवेदनशीलता के बीच संतुलन बनाने का मुद्दा बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में खेल प्रसारणों के लिए विज्ञापन निर्धारण संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देशों पर गंभीर विचार की आवश्यकता हो सकती है।

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बच्चों की सुरक्षा के लिए मेटा का बड़ा कदम: भारत में हटाए 1.6 लाख अकाउंट

भारत सरकार की नोटिस के बाद मेटा (Meta) ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट पर कार्रवाई तेज करते हुए पिछले छह महीनों में भारत में 1.6 लाख संदिग्ध अकाउंट हटाने का दावा किया है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2026
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मेटा (Meta) ने बच्चों के यौन शोषण (Child Exploitation) से जुड़े कंटेंट पर रोक लगाने के लिए अपने प्लेटफॉर्म्स पर नए सुरक्षा उपायों की घोषणा की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब हाल ही में भारत सरकार ने इंस्टाग्राम (Instagram) पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े विज्ञापनों को लेकर कंपनी को नोटिस जारी किया था।

एक ब्लॉग पोस्ट में मेटा (Meta) ने कहा कि सार्वजनिक रूप से मामला सामने आने से पहले ही उसने कई आपत्तिजनक विज्ञापनों और अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें हटा दिया था। इसके बाद की गई विस्तृत जांच में कंपनी ने अतिरिक्त विज्ञापनों को हटाया, कई अन्य अकाउंट्स को निष्क्रिय किया और नीति का उल्लंघन करने वाले कंटेंट से जुड़े यूआरएल (URLs) भी ब्लॉक किए।

कंपनी के अनुसार, वह संदिग्ध बाहरी लिंक (Off-platform Links) साझा करने वाले अकाउंट्स और बच्चों के शोषण से जुड़े अन्य संकेतों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित तकनीक का उपयोग करती है। मेटा (Meta) ने दावा किया कि पिछले छह महीनों में इसी तकनीक की मदद से भारत में 1.6 लाख संदिग्ध अकाउंट हटाए गए।

मेटा (Meta) ने उन दावों को भी खारिज किया कि उसकी विज्ञापन प्रणाली जानबूझकर ऐसे यूजर्स को टार्गेट करती है, जिनकी बच्चों में अनुचित रुचि हो सकती है। कंपनी का कहना है कि उसकी तकनीक संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करती है और वर्ष 2025 के दौरान वैश्विक स्तर पर बच्चों से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों के कारण 40 लाख से अधिक अकाउंट हटाए गए।

कंपनी ने बताया कि वह विज्ञापनों की जांच और विज्ञापनदाताओं की गतिविधियों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम (Automated Systems) और मैन्युअल समीक्षा (Manual Review) दोनों का इस्तेमाल करती है। विज्ञापन नीति (Advertising Policy) या कम्युनिटी स्टैंडर्ड्स (Community Standards) का उल्लंघन करने वाले व्यवसायों पर विज्ञापन संबंधी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं या उन्हें मेटा (Meta) के सभी प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापन देने से प्रतिबंधित किया जा सकता है।

मेटा (Meta) ने यह भी कहा कि कंटेंट मॉडरेशन (Content Moderation) को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उसने AI में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। कंपनी के अनुसार, उसकी AI प्रणाली अब उन भाषाओं का समर्थन करती है, जिनका उपयोग दुनिया के 98 प्रतिशत इंटरनेट यूजर्स करते हैं।

कंपनी ने कहा कि वह बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies), उद्योग से जुड़े भागीदारों और अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर काम करती रहेगी। साथ ही नई तकनीकों, इंटेलिजेंस शेयरिंग (Intelligence Sharing) और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों में निवेश भी जारी रखेगी।

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फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स से सावधान रहने की विदेश मंत्रालय की हिदायत

ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने लोगों को फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स से सावधान रहने की सलाह दी है।

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2026
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ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने लोगों को फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स से सावधान रहने की सलाह दी है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि कुछ लोग खुद को मंत्रालय का सलाहकार बताकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं और उनसे पैसे भी वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच भाजपा सांसद संबित पात्रा का वॉट्सऐप अकाउंट कथित तौर पर हैक होने का मामला भी सामने आया है, जिसमें उनके नाम पर लोगों से पैसे मांगे गए।

विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक फैक्ट-चेक हैंडल के जरिए जारी एडवाइजरी में कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर अपनी पहचान गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। ये लोग दावा कर रहे हैं कि वे व्यापार, माइग्रेशन और अन्य नीतिगत मामलों पर विदेश मंत्रालय को सलाह देते हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, कुछ फर्जी अकाउंट्स मंत्रालय के साथ काम करने का तरीका बताने के नाम पर पेड सेशन (पैसे लेकर सलाह देने वाले सत्र) भी चला रहे हैं और लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे हैं।

विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि इन लोगों का मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर ऐसे फर्जी दावों और अकाउंट्स से सतर्क रहें तथा किसी भी आधिकारिक जानकारी या सहायता के लिए केवल सरकार के सत्यापित (Verified) प्लेटफॉर्म और आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें।

 भाजपा सांसद संबित पात्रा के नाम से पत्रकार को आया फेक मैसेज

विदेश मंत्रालय की इस चेतावनी के बीच भाजपा सांसद संबित पात्रा का वॉट्सऐप अकाउंट कथित तौर पर हैक होने का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि हैकर ने उनके अकाउंट का इस्तेमाल कर उनके दोस्तों, परिचितों और समर्थकों को आर्थिक मदद के नाम पर संदेश भेजे।

इस मामले का खुलासा रविवार को बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और यूट्यूबर अजीत अंजुम ने फेसबुक पर किया। उन्होंने बताया कि उन्हें संबित पात्रा के वॉट्सऐप नंबर से एक संदेश मिला, जिसमें लिखा था, "हैलो, मुझे थोड़ी मदद चाहिए।"

अजीत अंजुम ने बताया कि पहले उन्हें हैरानी हुई कि एक सांसद उनसे आर्थिक मदद क्यों मांग रहे हैं, जबकि दोनों के बीच पिछले पांच-सात वर्षों से कोई बातचीत नहीं हुई थी। उन्होंने वॉट्सऐप कॉल करके पुष्टि करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

इसके बाद उसी नंबर से एक क्यूआर कोड भेजा गया और 65 हजार रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्हें शक हुआ कि संबित पात्रा का वॉट्सऐप अकाउंट हैक हो गया है और कोई ठग उनके नाम का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे मांग रहा है।

अजीत अंजुम ने अपनी X पोस्ट के साथ कथित वॉट्सऐप चैट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक संबित पात्रा की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल ठग फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने के साथ-साथ WhatsApp अकाउंट हैक कर परिचित लोगों से पैसे मांगने जैसे तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में अगर किसी परिचित के नाम से अचानक पैसे मांगने का संदेश मिले, तो बिना पुष्टि किए कोई भी भुगतान न करें। पहले संबंधित व्यक्ति से फोन कॉल या किसी अन्य माध्यम से संपर्क कर यह सुनिश्चित कर लें कि संदेश वास्तव में उसी ने भेजा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती ऐसी घटनाओं को देखते हुए लोगों को अधिक सतर्क रहने और केवल आधिकारिक व सत्यापित स्रोतों पर ही भरोसा करने की जरूरत है।

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एजेंसी से टेक और एंटरटेनमेंट तक : अजीत वर्गीज की प्रेरक यात्रा

मीडिया, विज्ञापन, टेक और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले अजीत वर्गीज (Ajit Varghese) आज मैडिसन वर्ल्ड (Madison World) के पार्टनर और सीईओ हैं।

Last Modified:
Monday, 06 July, 2026
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भारत के मीडिया और विज्ञापन उद्योग के अनुभवी पेशेवरों में शामिल अजीत वर्गीज (Ajit Varghese) का करियर एजेंसी, टेक्नोलॉजी और एंटरटेनमेंट की दुनिया को जोड़ने वाली एक अनूठी यात्रा रहा है। तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने कई राष्ट्रीय और वैश्विक संगठनों में नेतृत्व की जिम्मेदारियां निभाईं और उद्योग के बदलते दौर के साथ खुद को लगातार नई भूमिकाओं में स्थापित किया।

अजीत वर्गीज (Ajit Varghese) ने अपने करियर की मजबूत पहचान मैडिसन वर्ल्ड (Madison World) से बनाई, जहां वह 1999 से 2006 तक चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer-COO) रहे। इसके बाद उन्होंने मैक्सस (Maxus) में मैनेजिंग डायरेक्टर – साउथ एशिया (Managing Director, South Asia) के रूप में जिम्मेदारी संभाली। यहां उन्होंने बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन का नेतृत्व किया और बाद में कंपनी के सीईओ – एशिया पैसिफिक (CEO, Asia Pacific) बने।

इसके बाद उनका सफर वैश्विक स्तर पर वेवमेकर (Wavemaker) तक पहुंचा, जहां ग्लोबल प्रेसिडेंट (Global President) के रूप में उन्होंने 50 से अधिक देशों में कारोबार का नेतृत्व किया और 3,000 से अधिक पेशेवरों की टीम का प्रबंधन किया।

साल 2020 में उन्होंने पारंपरिक एजेंसी जगत से आगे बढ़ते हुए उपभोक्ता प्रौद्योगिकी (Consumer Technology) क्षेत्र में कदम रखा और शेयरचैट (ShareChat) तथा मोज (Moj) में चीफ कमर्शियल ऑफिसर (Chief Commercial Officer) बने। यहां उन्होंने डिजिटल और सोशल मीडिया इकोसिस्टम में कंपनी की व्यावसायिक रणनीतियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके बाद अजीत वर्गीज (Ajit Varghese) द वॉल्ट डिज्नी कंपनी (The Walt Disney Company) से जुड़े, जहां उन्होंने विज्ञापन और रेवेन्यू से जुड़े वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर काम किया। इस दौरान उन्होंने एंटरटेनमेंट कारोबार और बाद में जियोस्टार (JioStar) से जुड़े बदलते मीडिया परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

साल 2025 में उनका करियर एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा, जब वह दो दशक से अधिक समय बाद मैडिसन वर्ल्ड (Madison World) में पार्टनर और सीईओ (Partner & CEO) के रूप में लौटे। यह केवल पुराने संगठन में वापसी नहीं थी, बल्कि मीडिया, विज्ञापन, टेक्नोलॉजी और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन के बीच लगातार विकसित होते उनके करियर का नया अध्याय था।

ज़ेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, भुवनेश्वर (Xavier Institute of Management, Bhubaneswar-XIMB) के पूर्व छात्र अजीत वर्गीज (Ajit Varghese) ने पारंपरिक मीडिया बाइंग से लेकर वैश्विक एजेंसी नेटवर्क, डिजिटल बदलाव, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एकीकृत एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम तक उद्योग के कई बड़े बदलावों को करीब से देखा और उनमें सक्रिय भूमिका निभाई।

उनके जन्मदिन के अवसर पर उनका पेशेवर सफर इस बात का उदाहरण है कि बदलती मीडिया इंडस्ट्री में निरंतर सीखने, नेतृत्व क्षमता और नए अवसरों को अपनाने की सोच किस तरह लंबे समय तक सफलता का आधार बन सकती है।

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वॉट्सऐप यूजरनेम विवाद: सरकार ने मेटा के जवाब देने की डेडलाइन बढ़ाई

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने वॉट्सऐप के यूजरनेम फीचर पर जवाब देने के लिए मेटा (Meta) को तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दी है।

Last Modified:
Monday, 06 July, 2026
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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) ने वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) पर जवाब देने के लिए मेटा (Meta) को तीन दिन की अतिरिक्त मोहलत दे दी है। भारत में कंपनी के प्लेटफॉर्म्स को लेकर बढ़ती नियामकीय जांच के बीच अब मेटा (Meta) को अपना जवाब 9 जुलाई तक सौंपना होगा।

दरअसल, केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) के स्वामित्व वाले वॉट्सऐप के अलावा टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) को भी नोटिस जारी कर उनके यूजरनेम फीचर (Username Feature) और धोखाधड़ी रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी थी।

सरकारी अधिकारी वॉट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम सिस्टम में लागू किए जाने वाले प्रतिबंधों, वेरिफिकेशन (Verification) प्रक्रिया और यूजर्स के लिए उपलब्ध रिपोर्टिंग मैकेनिज्म (Reporting Mechanism) की भी समीक्षा कर रहे हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से जारी नोटिस नए डिजिटल पहचान फीचर्स (Digital Identity Features) से जुड़े संभावित जोखिमों की व्यापक समीक्षा का हिस्सा हैं। सरकार विशेष रूप से इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं ऐसे फीचर्स मौजूदा मोबाइल नंबर आधारित पहचान प्रणाली (Phone Number-based Authentication) को कमजोर तो नहीं करेंगे।

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फिल्म और ओटीटी पायरेसी पर टेलीग्राम को केंद्र सरकार का नोटिस

भारत सरकार ने टेलीग्राम (Telegram) को पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी (OTT) कंटेंट के प्रसार पर रोक लगाने के लिए नोटिस जारी किया है और 15 दिनों में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।

Last Modified:
Saturday, 04 July, 2026
telegram

भारत सरकार ने पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी (OTT) कंटेंट के प्रसार को लेकर टेलीग्राम (Telegram) को एक बार फिर नोटिस जारी किया है। सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वह बड़े स्तर पर हो रही डिजिटल पायरेसी (Digital Piracy) पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई करे और 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (Action Taken Report-ATR) सौंपे।

एएनआई (ANI) के अनुसार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB) ने टेलीग्राम (Telegram) से कहा है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर पायरेटेड फिल्मों, वेब सीरीज (Web Series) और अन्य ओटीटी कंटेंट (OTT Content) के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए।

सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई भारत की क्रिएटर इकोनॉमी (Creator Economy), फिल्म उद्योग (Film Industry), ब्रॉडकास्टर्स (Broadcasters), ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (OTT Platforms), फिल्म निर्माताओं (Film Producers) और डिस्ट्रीब्यूटर्स (Distributors) के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से की जा रही है।

पायरेसी (Piracy) का अर्थ किसी कॉपीराइट (Copyright) से संरक्षित कंटेंट की उसके अधिकारधारक की अनुमति के बिना कॉपी करना, डाउनलोड करना, साझा करना, बेचना या अन्य किसी रूप में इस्तेमाल करना है। यह कॉपीराइट कानून (Copyright Law) का उल्लंघन माना जाता है और इससे कंटेंट निर्माताओं, कलाकारों तथा प्रोडक्शन कंपनियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

हाल के महीनों में टेलीग्राम (Telegram) को लेकर सरकार की यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक और भ्रामक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध लगाए थे। बाद में टेलीग्राम (Telegram) ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में चुनौती दी थी, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद अस्थायी प्रतिबंध हटा लिया गया था।

टेलीग्राम (Telegram) एक क्लाउड आधारित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (Cloud-based Messaging Platform) है, जो अपने एडवांस्ड फीचर्स (Advanced Features) और सुरक्षा सुविधाओं के लिए जाना जाता है। प्लेटफॉर्म पर एक ग्रुप में दो लाख तक सदस्यों को जोड़ा जा सकता है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर कंटेंट साझा करना संभव होता है। यही वजह है कि सरकार प्लेटफॉर्म पर कॉपीराइट उल्लंघन और पायरेटेड कंटेंट के प्रसार को लेकर अधिक सतर्क रुख अपना रही है।

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