समाचार4मीडिया से बातचीत में अमित सैनी ने बताया कि संपादन और प्रकाशन का पूरा कार्य पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर स्थित प्रधान कार्यालय में केंद्रीकृत किया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
वरिष्ठ पत्रकार अमित सैनी ने अपने डिजिटल वेंचर ’समाचार टुडे’ (Samachar Today) को बंद कर अब नया डिजिटल मीडिया वेंचर ’द एक्स इंडिया’ (The X India) लॉन्च किया है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अमित सैनी ने बताया कि ’द एक्स इंडिया’ डिजिटल मीडिया परिदृश्य में क्रांति लाने के लिए तैयार है। संपादन और प्रकाशन का पूरा कार्य पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर स्थित प्रधान कार्यालय में केंद्रीकृत किया जाएगा।
डिजिटल युग को अपनाते हुए ’द एक्स इंडिया’ पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा, जो स्ट्रीमिंग के माध्यम से विभिन्न ओटीटी प्लेटफार्म्स के साथ-साथ लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध होगा।
अमित सैनी के अनुसार, ’द एक्स इंडिया’ को कई बैंकों और एनबीएफसी के साथ काम करने वाली अग्रणी वित्तीय संस्था ’रुपये वाला फाइनेंस’ से पर्याप्त वित्तीय सहायता मिली है। उन्होंने बताया कि ’द एक्स इंडिया’ के लिए ’समाचार टुडे’ की पुरानी टीम और नेटवर्क को बरकरार रखा गया है। अनुभवी व्यक्तियों को प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, ज्ञानेश वर्मा लखनऊ ब्यूरो की देखरेख कर रहे हैं और प्रभाकर राणा दिल्ली में मामलों का प्रबंधन कर रहे हैं।
बता दें कि अमित सैनी को प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में लगभग दो दशक का अनुभव है। अमित सैनी ने अमर उजाला, जी न्यूज, भास्कर न्यूज और इंडिया क्राइम जैसे तमाम प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्ष 2023 में अमित सैनी को समाचार4मीडिया ’पत्रकारिता 40अंडर40’ की सूची में भी शामिल किया जा चुका है।
अमित सैनी ने बताया कि ’द एक्स इंडिया’ के अलावा वह ’द क्विंट’ सहित अन्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के साथ अपना सहयोग जारी रखेंगे।
BARC की टीवी रेटिंग्स पर रोक के बाद आज IBDF बोर्ड बैठक करेगा। मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात करेगा।
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Samachar4media Bureau
भारत में टेलीविजन रेटिंग प्रणाली पर बने संकट के बीच इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) का बोर्ड सोमवार दोपहर 12:30 बजे बैठक करेगा। इस बैठक में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) की सभी टीवी रेटिंग्स के प्रकाशन पर लगाई गई रोक के व्यावसायिक और परिचालन प्रभावों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही उद्योग की ओर से सरकार के समक्ष रखे जाने वाले साझा रुख को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, IBDF का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार शाम 5 बजे सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात करेगा। इस दौरान BARC के लाइसेंस नवीनीकरण की स्थिति, नई टेलीविजन रेटिंग नीति 2026 के तहत पंजीकरण प्रक्रिया और रेटिंग्स बहाल करने की संभावित समय-सीमा पर स्पष्टता मांगी जाएगी।
दरअसल, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने BARC को निर्देश दिया है कि वह नया लाइसेंस मिलने तक किसी भी टीवी श्रेणी की रेटिंग प्रकाशित न करे। पहले केवल समाचार चैनलों की रेटिंग्स रुकी हुई थीं, लेकिन अब मनोरंजन, खेल, फिल्म और क्षेत्रीय चैनलों सहित सभी श्रेणियों की रेटिंग्स पर रोक लगा दी गई है। इससे प्रसारकों, विज्ञापनदाताओं और मीडिया एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि टीवी रेटिंग्स ही विज्ञापन दर तय करने, मीडिया प्लानिंग और कार्यक्रमों के प्रदर्शन का प्रमुख आधार होती हैं।
यह निर्णय नई टेलीविजन रेटिंग नीति 2026 लागू होने के बाद लिया गया है। नीति के क्लॉज 14.2 के अनुसार कोई भी रेटिंग एजेंसी तब तक रेटिंग जारी नहीं कर सकती, जब तक वह नए नियमों का पालन करते हुए मंत्रालय से नया पंजीकरण प्राप्त न कर ले। BARC का पुराना पंजीकरण समाप्त हो चुका है और उसका नवीनीकरण आवेदन अभी मंत्रालय के विचाराधीन है।
नई नीति में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं। इनमें बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की व्यवस्था, सख्त ऑडिट, डेटा संरक्षण नियमों का पालन, बड़े सैंपल साइज, कार्यप्रणाली का अधिक खुलासा और मंत्रालय द्वारा नियमित निरीक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। साथ ही लैंडिंग पेज व्यूअरशिप को रेटिंग गणना से बाहर रखा गया है और नई एजेंसियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की शर्त 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि त्योहारी सीजन से पहले रेटिंग्स बंद होने से विज्ञापन सौदों, मीडिया खरीद और कार्यक्रमों की प्रतिस्पर्धात्मक समीक्षा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में IBDF और मंत्रालय के बीच होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि BARC की रेटिंग्स कब दोबारा शुरू होंगी और उद्योग इस संकट से कैसे बाहर निकलेगा।
जिष्णु सेन के निधन की जानकारी उनके चचेरे भाई शुभो सेनगुप्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी।। जिष्णु सेन के निधन से विज्ञापन और मार्केटिंग इंडस्ट्री में शोक की लहर है।
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विज्ञापन और मार्केटिंग जगत के सीनियर प्रोफेशनल जिष्णु सेन का रविवार तड़के निधन हो गया। उनके निधन से विज्ञापन और मार्केटिंग इंडस्ट्री में शोक की लहर है।
जिष्णु सेन के निधन की जानकारी उनके चचेरे भाई शुभो सेनगुप्ता ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी। उन्होंने बताया कि जिष्णु सेन पिछले कुछ वर्षों से एक बीमारी से जूझ रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पूरे उत्साह और सकारात्मकता के साथ जीवन जिया।
शुभो सेनगुप्ता ने अपने संदेश में जिष्णु सेन को विज्ञापन और मार्केटिंग क्षेत्र का एक सम्मानित और अनुभवी पेशेवर बताते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा कि जिष्णु सेन का इस क्षेत्र में लंबा और प्रतिष्ठित करियर रहा और बाद के वर्षों में वे बेंगलुरु में रह रहे थे।
जिष्णु सेन का करियर तीन दशक से अधिक समय तक फैला रहा। उन्होंने अपने विज्ञापन करियर की शुरुआत JWT से की थी। इसके बाद वे Young & Rubicam से जुड़े, जहां न्यूयॉर्क में रहते हुए उन्होंने Colgate Asia-Pacific के कारोबार का नेतृत्व किया।
साल 2007 में उन्होंने Grey India का दामन थामा। बाद में वे कंपनी के प्रेजिडेंट एवं चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) बने। उनके नेतृत्व में एजेंसी ने उल्लेखनीय विकास किया और डिजिटल, एक्टिवेशन तथा शॉपर मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का विस्तार किया।
एजेंसी जगत में सफल पारी के बाद जिष्णु सेन कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़े। उन्होंने Essar Telecom Retail में Director – Brand Strategy के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे ‘बिग बाजार’ में चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) बने।
हाल के वर्षों में वे विभिन्न कंपनियों के लिए ग्रोथ और मार्केटिंग सलाहकार के रूप में कार्य कर रहे थे। उन्होंने Porter, Bergner India, DealShare और L'amar जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों को ब्रैंड निर्माण और ग्रोथ स्ट्रैटेजी के क्षेत्र में मार्गदर्शन दिया।
अपने लंबे करियर के दौरान जिष्णु सेन ने Future Group, Pepsi, GSK, Yum Foods, Colgate Palmolive, Britannia, Reliance Telecom और Ferrero सहित कई प्रमुख ब्रैंड्स के साथ काम किया।
पिछले दिनों जारी उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची में यतेंद्र शर्मा का नाम प्रदेश मंत्री के रूप में शामिल किया गया है।
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पत्रकार और ‘न्यूज18 इंडिया’ (News18 India) के पूर्व पॉलिटिकल एडिटर यतेंद्र शर्मा ने सक्रिय राजनीति में नई पारी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उन्हें उत्तर प्रदेश की नई प्रदेश कार्यसमिति में प्रदेश मंत्री नियुक्त किया है।
पिछले दिनों जारी उत्तर प्रदेश भाजपा की नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची में यतेंद्र शर्मा का नाम प्रदेश मंत्री के रूप में शामिल किया गया है। इससे पहले उन्होंने लंबे समय तक पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाई और हाल ही में News18 India से इस्तीफा देकर सार्वजनिक जीवन की नई दिशा चुनी है।
यतेंद्र शर्मा ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2006 में S1 News से की थी। इसके बाद वह MH1 News से जुड़े। उन्होंने India News में करीब साढ़े 11 वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और राजनीतिक रिपोर्टिंग में अपनी अलग पहचान बनाई।
फरवरी 2021 में उन्होंने News18 India जॉइन किया, जहां पॉलिटिकल एडिटर और एंकर के तौर पर कार्य किया। इस दौरान उन्होंने दिल्ली रिपोर्टिंग टीम का नेतृत्व किया। उन्हें टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक कवरेज की रणनीति, रिपोर्टर्स मूवमेंट, आइडियेशन और प्रमुख राजनीतिक कार्यक्रमों की एंकरिंग जैसी अहम जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं। राजनीतिक मामलों, बीजेपी, आरएसएस और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की रिपोर्टिंग पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
करीब दो दशक लंबे पत्रकारिता अनुभव के बाद अब यतेंद्र शर्मा ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा है। उत्तर प्रदेश भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में प्रदेश मंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति को राजनीतिक और मीडिया जगत, दोनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
समाचार4मीडिया की ओर से यतेंद्र शर्मा को नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।
यूपी बीजेपी में प्रदेश मंत्री बनने के बाद यतेंद्र शर्मा ने प्रचंड गर्मी के बावजूद गाजियाबाद से सासनी तक का सफर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) की बस से किया।
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उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने पैतृक आवास सासनी पहुंचे यतेंद्र शर्मा का स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। हालांकि इस पूरे दौरे की सबसे अधिक चर्चा उनके स्वागत से ज्यादा उस तरीके की रही, जिसे उन्होंने अपने गृह जनपद पहुंचने के लिए चुना।
आमतौर पर किसी बड़े राजनीतिक पद पर नियुक्ति के बाद नेताओं के गृह आगमन पर लंबे-चौड़े काफिले, दर्जनों लग्जरी गाड़ियां और शक्ति प्रदर्शन देखने को मिलता है। लेकिन यतेंद्र शर्मा ने इस परंपरा से अलग रास्ता अपनाते हुए प्रचंड गर्मी के इस मौसम में गाजियाबाद से सासनी तक का सफर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) की सरकारी बस से किया।
सरकारी बस से यात्रा करते हुए उनके सासनी पहुंचने की जानकारी मिलते ही कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोग चौंक गये क्योंकि परंपरानुसार यतेंद्र शर्मा को रिसीव करने के लिए गाड़ियों के बड़े क़ाफ़िले की व्यवस्था की गई थी और कई जगहों पर भव्य स्वागत की तैयारियां की गई थी। सरकारी बस से आने के कारण जनता में उत्सुकता का माहौल बन गया। कई लोगों ने इसे सादगी और जनसामान्य से जुड़ाव का प्रतीक बताया। वहीं, सोशल मीडिया पर भी उनके इस कदम की चर्चा शुरू हो गई।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसे समय में जब सार्वजनिक जीवन में सादगी और संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की चर्चा लगातार हो रही है, किसी वरिष्ठ पदाधिकारी का सरकारी सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करना एक अलग संदेश देता है। इससे अनावश्यक वाहनों के काफिले और ट्रैफिक दबाव से भी बचा जा सकता है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इरान-यूएस युद्ध के कारण बने हालातों के मद्देनजर ईंधन की बचत, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग और जनहित को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे। पीएम मोदी ने खुद अपने क़ाफ़िले से कई गाड़ियों को कम कर दिया है।
यतेंद्र शर्मा का यह कदम भी सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग और सादगीपूर्ण राजनीतिक संस्कृति की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
सासनी पहुंचने पर यतेंद्र शर्मा का भाजपा कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ पदाधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ने जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी है, उसका निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करेंगे। उन्होंने कहा कि उनके लिए पद से अधिक महत्वपूर्ण संगठन, कार्यकर्ता और जनता का विश्वास है।
यतेंद्र शर्मा के समर्थकों का मानना है कि राजनीति में सादगी, जवाबदेही और जनता से सीधा जुड़ाव ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। ऐसे में उनका यह कदम केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि राजनीतिक कार्यशैली का एक संदेश भी माना जा रहा है।
ग्रिन (Grin) ने घोषणा की है कि वह विद्वान और भू-राजनीति विशेषज्ञ रामी देसाई (Rami Desai) की पहली नॉन-फिक्शन पुस्तक प्रकाशित करेगा।
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प्रकाशन संस्था ग्रिन (Grin) ने घोषणा की है कि वह विद्वान और भू-राजनीति विशेषज्ञ (Geopolitical Expert) रामी देसाई (Rami Desai) की पहली नॉन-फिक्शन (Non-fiction) पुस्तक प्रकाशित करेगा।
पुस्तक का कार्यशील शीर्षक (Working Title) 'द अनसंग फ्रंटियर: एक्सक्लूज़न, एलियनेशन एंड द मेकिंग ऑफ कॉन्फ्लिक्ट इन द इंडियन नॉर्थईस्ट' (The Unsung Frontier: Exclusion, Alienation and the Making of Conflict in the Indian Northeast) रखा गया है।
इसकी जानकारी ग्रिन (Grin) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) लक्ष्मी कौल (Lakshmi Kaul) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए साझा की।
परियोजना की घोषणा करते हुए लक्ष्मी कौल (Lakshmi Kaul) ने लिखा, "हमें यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि विद्वान और भू-राजनीति विशेषज्ञ रामी देसाई (Rami Desai) अपनी पहली नॉन-फिक्शन पुस्तक, जिसका कार्यशील शीर्षक 'द अनसंग फ्रंटियर: एक्सक्लूज़न, एलियनेशन एंड द मेकिंग ऑफ कॉन्फ्लिक्ट इन द इंडियन नॉर्थईस्ट' (The Unsung Frontier: Exclusion, Alienation and the Making of Conflict in the Indian Northeast) है, हमारे साथ प्रकाशित करेंगी। इस पुस्तक के लिए जुड़े रहिए।"
उन्होंने आगे लिखा, "इस कहानी को उस विशेषज्ञ से बेहतर कौन बता सकता है, जिसने वर्षों तक जमीनी स्तर पर काम किया हो। हमें न केवल ग्रिन (Grin) परिवार में आपका स्वागत करते हुए खुशी हो रही है, बल्कि इस कहानी को वास्तविक रूप में सामने लाने के लिए हम आपके आभारी भी हैं।"
केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों से BAT-BMS, Epoch-i-ion और Lossigy नाम के तीन मोबाइल ऐप को Google Play Store और Apple App Store से हटाने का आदेश दिया है।
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Samachar4media Bureau
केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों से BAT-BMS, Epoch-i-ion और Lossigy नाम के तीन मोबाइल ऐप को Google Play Store और Apple App Store से हटाने का आदेश दिया है। सरकार को आशंका है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल ई-रिक्शा को दूर से बंद (रिमोटली डिसेबल) करने के लिए किया जा सकता है, जिससे लोगों की सुरक्षा और रोजगार दोनों पर असर पड़ सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले की जांच जारी है और सरकार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंत्रालय का कहना है कि इन ऐप्स के गलत इस्तेमाल की संभावना को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
शुक्रवार को CII साइबर सिक्योरिटी समिट के दौरान आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि सरकार की नजर में आए दो ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार गूगल और एप्पल जैसे ऐप स्टोर संचालकों से भी बात करेगी, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित खतरनाक ऐप को उपलब्ध कराने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच की जा सके।
कैसे सामने आया मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए। इनमें दावा किया गया कि कुछ ई-रिक्शा को ब्लूटूथ के जरिए दूर से बंद किया जा रहा है। आरोप है कि इसके लिए BAT-BMS ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा था।
ये ऐप आखिर करते क्या हैं?
ये ऐप ब्लूटूथ से जुड़े बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) के साथ काम करते हैं, जिनका इस्तेमाल लिथियम-आयन बैटरियों की निगरानी के लिए किया जाता है। आमतौर पर निर्माता और तकनीशियन इनकी मदद से बैटरी की स्थिति, चार्जिंग, डिस्चार्ज, खराबी और अन्य सेटिंग्स की जांच करते हैं।
लेकिन कुछ वर्जन ऐसे भी हैं, जिनके जरिए बैटरी की डिस्चार्ज सेटिंग को ऑन या ऑफ किया जा सकता है। यदि बैटरी सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा नहीं है, तो कोई भी व्यक्ति ब्लूटूथ के जरिए उससे जुड़कर ई-रिक्शा की बिजली सप्लाई बंद कर सकता है, जिससे वाहन तुरंत रुक जाता है।
ई-रिक्शा क्यों हो रहे हैं प्रभावित?
रिपोर्ट के अनुसार, कई ई-रिक्शा में ऐसे आफ्टरमार्केट ब्लूटूथ बैटरी सिस्टम लगे हैं, जिनमें डिफॉल्ट पासवर्ड, ऑथेंटिकेशन या अन्य सुरक्षा इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में लगभग 10 से 15 मीटर की दूरी पर मौजूद कोई भी व्यक्ति इन ऐप्स के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर उसकी सेटिंग बदल सकता है और ई-रिक्शा की बिजली बंद कर सकता है।
फिलहाल सरकार इस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन ऐप्स का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाएं।
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के 11 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की उपलब्धियां साझा की हैं।
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Samachar4media Bureau
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के 11 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल बदलाव की उपलब्धियां साझा की हैं। सरकार का कहना है कि Academic Bank of Credits (ABC), APAAR ID और National Academic Depository (NAD) जैसी पहल के जरिए अब छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित, डिजिटल और आसानी से सत्यापित किए जा सकते हैं। इससे स्कूल और कॉलेज बदलने की प्रक्रिया भी पहले से कहीं अधिक आसान हो गई है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अनुसार, 1 जुलाई 2026 तक 26.29 करोड़ से अधिक APAAR ID बनाई जा चुकी हैं, जबकि 110.65 करोड़ से ज्यादा शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए जा चुके हैं। इसके अलावा 2,963 उच्च शिक्षण संस्थान Academic Bank of Credits (ABC) प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।
सरकार के मुताबिक, Academic Bank of Credits (ABC) शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की पहल है। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां छात्र अपने शैक्षणिक क्रेडिट सुरक्षित रख सकते हैं, उन्हें एक संस्थान से दूसरे संस्थान में ट्रांसफर कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर उनका उपयोग भी कर सकते हैं। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत मल्टीपल एंट्री-मल्टीपल एग्जिट (MEME) और लचीली पढ़ाई की व्यवस्था को बढ़ावा देती है।
ABC को APAAR (Automated Permanent Academic Account Registry) से जोड़ा गया है। इसके तहत हर छात्र को एक स्थायी डिजिटल अकादमिक पहचान (Academic Identity) मिलती है, जिससे स्कूल, कॉलेज, स्किल डेवलपमेंट और अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों के रिकॉर्ड एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहते हैं।
सरकार ने बताया कि National Academic Depository (NAD) के जरिए डिग्री, डिप्लोमा, मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं। छात्र इन्हें कभी भी और कहीं से भी एक्सेस कर सकते हैं। साथ ही, शिक्षण संस्थान, नियोक्ता और सरकारी एजेंसियां इन दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन कर सकती हैं।
मंत्रालय के अनुसार, इस व्यवस्था से कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम हुई है, फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने में मदद मिली है और प्रवेश, छात्रवृत्ति, नौकरी तथा इंटर्नशिप जैसी प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और तेज हुई हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदनों की डिजिटल जांच से भी मानव हस्तक्षेप कम हुआ है और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी है।
सरकार का कहना है कि ABC, APAAR, NAD और DigiLocker के एकीकरण से देश में एक मजबूत डिजिटल शैक्षणिक इकोसिस्टम तैयार हुआ है। इससे छात्रों को अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, आसानी से साझा करने और कहीं भी सत्यापित कराने की सुविधा मिल रही है।
छत्तीसगढ़ के रुंगटा इंटरनेशनल स्किल्स यूनिवर्सिटी की एमबीए छात्रा अंजलि राठौर ने बताया कि APAAR ID से दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया आसान हो गई है और कागजी कार्यवाही काफी कम हुई है। वहीं, गवर्नमेंट वी.वाई.टी. पीजी ऑटोनॉमस कॉलेज, दुर्ग के छात्र आशीष तिवंगन ने कहा कि अब उनकी मार्कशीट और अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित हैं तथा भविष्य में एडमिशन, क्रेडिट ट्रांसफर और छात्रवृत्ति के लिए भी यह व्यवस्था काफी उपयोगी साबित हो रही है।
सरकार का कहना है कि पिछले 11 वर्षों में डिजिटल इंडिया अभियान ने शिक्षा सेवाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया है। आने वाले समय में इन पहलों के जरिए पेपरलेस गवर्नेंस को और मजबूत किया जाएगा तथा विकसित भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी।
इस लैब के साथ विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी फोरेंसिक वैज्ञानिकों की एक टीम भी जुड़ी है, जो डिजिटल, फिजिकल और क्राइम सीन जांच से जुड़े परीक्षण करती है एवं रिपोर्ट तैयार करती है।
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देश में फोरेंसिक साइंस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर, लक्सर एविडेंस लैब्स प्राइवेट लिमिटेड को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज़ (NABL) से मान्यता मिल गई है। NABL, भारत सरकार के तहत टेस्टिंग और कैलिब्रेशन लैब्स को मान्यता देने वाली प्रमुख संस्था है।
बता दें कि NABL की मान्यता को किसी भी लैब की काबिलियत, वैज्ञानिक क्षमता और काम की गुणवत्ता की महत्वपूर्ण पहचान माना जाता है। यह मान्यता तभी मिलती है, जब टेस्टिंग के तरीकों, लैब की प्रक्रिया, क्वालिटी सिस्टम, इंफ्रास्ट्रक्चर, उपकरणों के कैलिब्रेशन, दस्तावेज़ों और स्टाफ की वैज्ञानिक योग्यता की पूरी और सख्त जांच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य मानकों के अनुसार की जाती है। इसके लिए NABL के विशेषज्ञों की टीम लैब का निरीक्षण करती है।
इस बारे में जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस उपलब्धि के साथ, लक्सर लैब्स (Laxhar Lab) भारत की पहली प्राइवेट फोरेंसिक लैब बन गई है, जिसे एक साथ कई डोमेन—डिजिटल फोरेंसिक्स, फिजिकल फोरेंसिक्स और क्राइम सीन मैनेजमेंट—में NABL की मान्यता मिली है। यह उपलब्धि उत्तर प्रदेश के लिए भी खास है, जहां लक्सर लैब्स (Laxhar Lab) सरकारी और प्राइवेट, दोनों श्रेणियों में फोरेंसिक जांच के लिए NABL मान्यता पाने वाली पहली लैब बन गई है।
देश में अब आम लोगों तक पहुंचेगा फोरेंसिक साइंस: प्रेस रिलीज के अनुसार, कई वर्षों से भारत में फोरेंसिक साइंस की सुविधा मुख्य रूप से सरकारी लैब्स तक सीमित थी, जिससे आम लोगों और निजी संस्थानों के लिए इसका उपयोग करना आसान नहीं था। इस मान्यता के बाद अब कोई भी व्यक्ति, वकील, कंपनी, संस्थान या जांच एजेंसी एक मान्यता-प्राप्त प्राइवेट लैब से सबूतों की फोरेंसिक जांच करा सकती है।
चाहे मामला विवादित हस्ताक्षर का हो, जाली दस्तावेज़ का, साइबर धोखाधड़ी का, मोबाइल फोन की जांच का, ऑडियो या वीडियो की प्रामाणिकता की जांच का, फिंगरप्रिंट परीक्षण का, क्लाउड में मौजूद डिजिटल सबूतों का, क्राइम सीन जांच का या टेक्निकल सर्विलांस काउंटर-मेजर्स (TSCM) का—अब लोगों के पास ऐसी फोरेंसिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जो वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप जांची-परखी गई हैं और न्यायिक मामलों, कॉर्पोरेट जांच, बीमा दावों तथा अन्य विवादों के समाधान में सहायक हो सकती हैं।
यह लैब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023) की धारा 39 और 63 समेत अन्य लागू प्रावधानों के अनुरूप फोरेंसिक जांच और विशेषज्ञ राय (Expert Opinion) उपलब्ध कराती है। इसकी रिपोर्ट और विशेषज्ञ राय का उपयोग न्यायालयों तथा अन्य सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष, लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जा सकता है। लक्सर लैब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सेक्टर-73, नोएडा स्थित एन्थुरियम टावर में मौजूद है, जहां से वह देशभर के ग्राहकों तक अपनी सेवाएं पहुंचाएगी।

लक्सर लैब (Laxhar Lab) की अगुवाई फोरेंसिक सेवाओं के डायरेक्टर इंद्रजीत राय कर रहे हैं, जिन्हें वर्ष 2023 में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। वे फोरेंसिक विशेषज्ञ होने के साथ-साथ फोरेंसिक पत्रकार भी रह चुके हैं। इससे पहले वे एबीपी न्यूज़ में कार्यकारी संपादक, जी न्यूज में उप संपादक और नेटवर्क18 में क्राइम एडिटर के रूप में कार्य कर चुके हैं। इस लैब के साथ विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी फोरेंसिक वैज्ञानिकों की एक टीम भी जुड़ी है, जो डिजिटल, फिजिकल और क्राइम सीन जांच से जुड़े परीक्षण करती है एवं रिपोर्ट तैयार करती है।
इस मौके पर इंद्रजीत राय ने कहा, ‘यह मान्यता सिर्फ लक्सर लैब के लिए नहीं, बल्कि विज्ञान के जरिए इंसाफ चाहने वाले हर नागरिक के लिए एक बड़ा पड़ाव है। हमारा मकसद हमेशा यही रहा है कि मान्यता-प्राप्त फोरेंसिक सेवाएं सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि हर किसी तक पहुंचें। आज हर आम इंसान, वकील, कारोबारी और संस्थान के पास एक अंतरराष्ट्रीय मान्यता-प्राप्त लैब से भरोसेमंद और वैज्ञानिक तरीके से परीक्षण किए गए सबूत प्राप्त करने का अवसर है।’
लक्सर लैब (Laxhar Lab) निम्नलिखित क्षेत्रों में मान्यता-प्राप्त फोरेंसिक सेवाएं प्रदान करती है—
देश के न्यायिक तंत्र में आम आदमी के लिए एक बड़ा कदम: प्रेस रिलीज में कहा गया है कि NABL की यह मान्यता लक्सर लैब (Laxhar Lab) की वैज्ञानिक गुणवत्ता, निष्पक्षता और तकनीकी क्षमता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। मान्यता-प्राप्त फोरेंसिक सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाकर यह लैब सबूत-आधारित न्याय व्यवस्था को मजबूती देने, जांच एजेंसियों, वकीलों, संस्थानों और आम नागरिकों को भरोसेमंद वैज्ञानिक जांच उपलब्ध कराने की दिशा में काम करने का लक्ष्य रखती है।
डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (Senior Vice President) प्रिया सीएम (Priya CM) ने कहा कि लोटे (Lotte) दुनिया के प्रमुख कन्फेक्शनरी (Confectionery) ब्रांड्स में से एक है।
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लोटे इंडिया (Lotte India) ने डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) को अपना क्रिएटिव एजेंसी पार्टनर (Creative Agency Partner) नियुक्त किया है। यह अकाउंट मल्टी-एजेंसी पिच (Multi-agency Pitch) के बाद डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) को मिला है और इसे एजेंसी का चेन्नई (Chennai) कार्यालय संभालेगा।
कंपनी के अनुसार, यह रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) लोटे इंडिया (Lotte India) के प्रमुख ब्रांड्स को मजबूत बनाने और नई पीढ़ी के स्नैक उपभोक्ताओं के लिए नए अनुभव तैयार करने पर केंद्रित होगी। डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) ब्रांड स्ट्रैटेजी (Brand Strategy), क्रिएटिव डेवलपमेंट (Creative Development) और इंटीग्रेटेड कैंपेन (Integrated Campaigns) की जिम्मेदारी संभालेगी।
इसमें चोको पाई (Choco Pie), पेपेरो (PEPERO), जोई (Joee) और कॉफी बाइट (Coffy Bite), एक्लेयर्स (Eclairs), कोकोनट पंच (Coconut Punch), लैक्टो किंग (Lacto King), कैरामिल्क (Caramilk), च्यूइट्स (Chewits), लॉली ब्लिस (Lolly Bliss), लोटे जूसीज़ (Lotte Juicies) सहित अन्य ब्रांड्स शामिल हैं। इसकी शुरुआत भारत में कोरिया (Korea) के नंबर-1 स्नैक ब्रांड पेपेरो (PEPERO) के नए कैंपेन से होगी।
डेंट्सू (Dentsu) के प्रेसिडेंट – इंटीग्रेटेड क्लाइंट मैनेजमेंट (President – Integrated Client Management) इंद्रजीत मुखर्जी (Indrajeet Mookherjee) ने कहा कि लोटे (Lotte) जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के साथ साझेदारी करना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि यह जीत डेंट्सू (Dentsu) की डेटा-आधारित क्रिएटिविटी (Data-driven Creativity) और उपभोक्ताओं के साथ सार्थक जुड़ाव बनाने की क्षमता को दर्शाती है।
डेंट्सू क्रिएटिव (Dentsu Creative) की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (Senior Vice President) प्रिया सीएम (Priya CM) ने कहा कि लोटे (Lotte) दुनिया के प्रमुख कन्फेक्शनरी (Confectionery) ब्रांड्स में से एक है। उन्होंने कहा कि यह श्रेणी रचनात्मकता की नई सीमाएं तय करने, उपभोक्ताओं के साथ जुड़ाव बढ़ाने और प्रभावशाली ब्रांड कम्युनिकेशन (Brand Communication) विकसित करने के लिए व्यापक अवसर प्रदान करती है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' (सार्वजनिक प्राधिकरण) है।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत 'पब्लिक अथॉरिटी' (सार्वजनिक प्राधिकरण) है। इसका मतलब है कि अब NSE पर भी RTI Act के प्रावधान लागू होंगे और कानून के तहत उससे जानकारी मांगी जा सकेगी।
जस्टिस सी. हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने वर्ष 2010 में दिए गए एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए NSE की अपील खारिज कर दी।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वह एकल पीठ के इस निष्कर्ष से पूरी तरह सहमत है कि NSE, RTI Act की धारा 2(h) के तहत "अथॉरिटी" यानी सार्वजनिक प्राधिकरण की श्रेणी में आता है।
क्या था मामला?
साल 2010 में तत्कालीन जस्टिस संजीव खन्ना ने अपने फैसले में कहा था कि भले ही NSE की स्थापना कंपनी अधिनियम के तहत एक निजी कंपनी के रूप में हुई हो, लेकिन Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के तहत उसे स्टॉक एक्सचेंज के रूप में मिली मान्यता उसे सार्वजनिक कार्य करने वाली संस्था बना देती है।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि NSE को मिली यह मान्यता पहले केंद्र सरकार और बाद में SEBI के जरिए दी गई। इसलिए यह संस्था RTI कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण मानी जाएगी। साथ ही, एकल पीठ ने यह भी माना था कि NSE पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है।
NSE ने क्या दलील दी?
NSE ने इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि वह Companies Act, 1956 के तहत पंजीकृत एक निजी कंपनी है, इसलिए उसे सरकारी संस्था या सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं माना जा सकता।
हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि एकल पीठ का फैसला पूरी तरह तर्कसंगत और कानून के अनुरूप है। कोर्ट ने कहा कि उसके निष्कर्षों में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नहीं है।
इस फैसले के साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि NSE सूचना का अधिकार कानून के दायरे में आएगा और उससे RTI के तहत जानकारी मांगी जा सकेगी।