पुलिस ने तीन आरोपितों को किया गिरफ्तार, सीएम योगी आदित्यनाथ ने पत्रकार के परिजनों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा की
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समाचार4मीडिया ब्यूरो
पत्रकारों पर हमले की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। अब उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के फेफना थाना क्षेत्र में सोमवार की रात रतन सिंह नामक पत्रकार की गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि किसी पुराने विवाद के चलते पत्रकार को ग्राम प्रधान के घर के बाहर लाठी-डंडों से पीटा गया और फिर गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, परिजनों ने किसी भी तरह के भूमि विवाद से इनकार किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 45 वर्षीय रतन सिंह एक निजी हिंदी न्यूज चैनल में कार्यरत थे। सोमवार की रात रतन सिंह को कुछ लोग घर से बुलाकर ले गए थे और फिर लाठी-डंडों से पीटने के बाद गोली मारकर उनकी हत्या कर दी।
बताया जाता है कि बलिया के एक मुख्य मार्ग पर रतन सिंह के परिवार की जमीन के लिए आरोपितों से उनका 4-5 साल से विवाद चल रहा था। करीब तीन साल पहले रतन सिंह के बड़े भाई की भी हत्या हो चुकी है।
वहीं, इस मामले में पुलिस का कहना है कि रतन सिंह की हत्या किसी पुराने विवाद में की गई है, पत्रकारिता से इसका कोई लेना-देना नहीं है। पुलिस के अनुसार, मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच की जा रही है। जल्द ही हत्याकांड में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस मामले में इलाके के थाना इंचार्ज को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रतन सिंह की हत्या मामले में संज्ञान लेते हुए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने रतन सिंह के परिजनों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की है।
रतन सिंह की हत्या पर बलिया श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने खेद प्रकट किया है। जिले में आए दिन पत्रकारों की हत्या को लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को निशाने पर लिया है। इस बारे में उन्होंने एक ट्वीट भी किया है, जिसे आप यहां देख सकते हैं।
19 जून - श्री शुभममणि त्रिपाठी की हत्या
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) August 25, 2020
20 जुलाई - श्री विक्रम जोशी की हत्या
24 अगस्त- श्री रतन सिंह की हत्या, बलिया
पिछले 3 महीनों में 3 पत्रकारों की हत्या।
11 पत्रकारों पर खबर लिखने के चलते FIR।
यूपी सरकार का पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतन्त्रता को लेकर ये रवैया निंदनीय है।
नोएडा की फिल्म सिटी में बुधवार सुबह एक महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। यह घटना दिनदहाड़े उस इलाके में हुई, जहां कई मीडिया संस्थानों के दफ्तर मौजूद हैं।
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Samachar4media Bureau
नोएडा की फिल्म सिटी में बुधवार सुबह एक महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक बाइक सवार युवक ने ऑफिस जाते समय ऑटो-रिक्शा में बैठी पत्रकार का पीछा किया, अश्लील इशारे किए और अभद्र टिप्पणियां कीं। यह घटना दिनदहाड़े उस इलाके में हुई, जहां कई मीडिया संस्थानों के दफ्तर मौजूद हैं।
पीड़ित पत्रकार ने घटना के बाद सेक्टर-20 थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी की पहचान कर ली गई है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
ऑटो के साथ-साथ चलता रहा बाइक सवार
महिला पत्रकार ने बताया कि वह सुबह करीब 10 बजे एक्सप्रेस टॉवर स्थित अपने कार्यालय जा रही थीं। इसी दौरान एक बाइक सवार युवक उनके ऑटो के पास आया और अंदर झांकने लगा। इसके बाद वह लगातार ऑटो के साथ-साथ चलता रहा।
पत्रकार के अनुसार, युवक ने उनके पास आकर अश्लील इशारे किए और अभद्र टिप्पणियां भी कीं।
उन्होंने बताया, "शुरुआत में मुझे लगा कि शायद वह संयोग से साथ चल रहा है, लेकिन जब उसने बार-बार ऑटो के बराबर आकर गंदे इशारे करने शुरू किए, तब साफ हो गया कि वह मेरा पीछा कर रहा है। मैं उसका पीछा करना चाहती थी, लेकिन ऑटो उसकी बाइक की रफ्तार का मुकाबला नहीं कर सका।"
वीडियो बनाते ही भाग निकला आरोपी
पत्रकार ने अपनी शिकायत में बताया कि जैसे ही उन्होंने मोबाइल निकालकर वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया, आरोपी वहां से भाग गया। हालांकि, वह उसका एक वीडियो बनाने में सफल रहीं, जिसमें काले कपड़े पहने एक युवक मोटरसाइकिल से ऑटो को ओवरटेक कर तेजी से भागता हुआ दिखाई देता है।
बाद में पत्रकार ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी साझा किया।
CCTV से हुई पहचान
सेक्टर-20 थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान कर ली गई है। जांच में उसका पता दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती का मिला है।
उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद है कि एक-दो दिन के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस के अनुसार, आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
महिला सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद पत्रकार ने कहा कि नोएडा जैसे शहर में दिनदहाड़े इस तरह की घटना होना बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक, यह मामला महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर ऐसे इलाके में जहां बड़ी संख्या में मीडिया संस्थानों के कार्यालय मौजूद हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है।
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Samachar4media Bureau
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर खुद को पत्रकार बताने वाले कई लोग मुख्यधारा की पत्रकारिता की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं और गलत जानकारी फैला रहे हैं।
एक डिजिटल न्यूज पोर्टल को दिए पॉडकास्ट में उमर अब्दुल्ला ने कहा, "आज जिसके हाथ में मोबाइल है, वह फेसबुक पेज बनाकर खुद को पत्रकार कहने लगता है। उसे यह भी नहीं पता कि खबर कैसे लिखी जाती है, सवाल कैसे पूछे जाते हैं या रिपोर्टिंग कैसे की जाती है। ऐसे लोग सिर्फ झूठ फैलाने का काम कर रहे हैं।"
मुख्यमंत्री ने पारंपरिक पत्रकारिता और मौजूदा डिजिटल मीडिया के बीच अंतर बताते हुए कहा कि पहले किसी कार्यक्रम में एक-दो पत्रकार नजर आते थे, लेकिन अब 15-20 लोग अलग-अलग चैनलों और प्लेटफॉर्म्स के लोगो लेकर पहुंच जाते हैं।
उन्होंने कहा, "पहले किसी कार्यक्रम में एक पत्रकार होता था, अब 15-20 लोग दिखाई देते हैं। हर किसी के हाथ में कई-कई चैनलों के लोगो होते हैं। 10 पत्रकारों के साथ 40 लोगो नजर आते हैं, लेकिन कई लोग उन्हें ठीक से पकड़ना भी नहीं जानते, फिर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं।"
उमर अब्दुल्ला ने बिना किसी का नाम लिए कुछ डिजिटल न्यूज एग्रीगेटर्स और नई न्यूज एजेंसियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कई सोशल मीडिया चैनल खुद को पत्रकारिता का मंच बता रहे हैं, जबकि कुछ ऐसे संस्थान भी खुद को न्यूज एजेंसी कहते हैं जिनके पास कोई वास्तविक पाठक या दर्शक आधार नहीं है।
उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया चैनल खुद को पत्रकार बता रहे हैं और जिनके पास कोई सब्सक्राइबर नहीं है, वे भी खुद को न्यूज एजेंसी कह रहे हैं। लेकिन असली और भरोसेमंद खबर लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसका कोई समाधान निकालना होगा।"
जब उनसे पूछा गया कि उनकी सरकार मीडिया संस्थानों या पत्रकारों को इंटरव्यू और सरकारी कार्यक्रमों में पहुंच देने का फैसला कैसे करती है, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए पूरी जांच-पड़ताल की जाती है।
उन्होंने बताया, "हम किसी भी मीडिया संस्थान या पत्रकार की विश्वसनीयता, पृष्ठभूमि, पहुंच और स्वीकार्यता को देखते हैं। उनके पुराने काम और इंटरव्यू भी जांचते हैं कि उनका काम कितना गंभीर और जिम्मेदार है। ऐसा नहीं है कि सड़क पर किसी को देखकर इंटरव्यू के लिए बुला लिया जाए।"
मीडिया के बदलते स्वरूप पर उमर अब्दुल्ला ने कहा कि तकनीक और माध्यम भले बदल गए हों, लेकिन पत्रकारिता के मूल सिद्धांत आज भी वही हैं। उन्होंने कहा, "माध्यम बदल गया है, लेकिन पत्रकारिता का तरीका नहीं बदला है।"
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब जम्मू-कश्मीर समेत देशभर में डिजिटल कंटेंट के नियमन, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और गैर-पारंपरिक मीडिया की विश्वसनीयता को लेकर लगातार बहस चल रही है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा टेलीविजन ऑडियंस रेटिंग्स पर रोक लगाने के फैसले के बाद BARC को हर तिमाही 7.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के सीधे राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा टेलीविजन ऑडियंस रेटिंग्स (TV Ratings) पर रोक लगाने के फैसले के बाद ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को हर तिमाही 7.5 करोड़ रुपये से ज्यादा के सीधे रेवेन्यू नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। मंत्रालय ने यह फैसला तब तक के लिए लिया है, जब तक BARC सरकार की नई टेलीविजन रेटिंग एजेंसी (Television Rating Agencies) पॉलिसी के तहत अपना पंजीकरण (Registration) नहीं करा लेता।
फिलहाल BARC को होने वाला सीधा वित्तीय नुकसान इसलिए होगा क्योंकि मंत्रालय ने उसे निर्देश दिया है कि रेटिंग्स बंद रहने की अवधि के दौरान वह न्यूज चैनलों से किसी तरह का सब्सक्रिप्शन शुल्क न वसूले। हालांकि, इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि यह रोक लंबे समय तक जारी रहती है तो इसका असर सिर्फ BARC की कमाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मीडिया प्लानिंग, विज्ञापन डील और विज्ञापन अभियानों के प्रदर्शन को मापने की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होगी। साथ ही विज्ञापन बजट का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर जा सकता है।
बाद में मंत्रालय ने इस रोक का दायरा केवल न्यूज चैनलों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे सभी टीवी चैनलों और सभी जॉनर पर लागू कर दिया। यानी अब BARC के नए नियमों के तहत पंजीकरण होने तक किसी भी टीवी चैनल की रेटिंग जारी नहीं होगी।
इंडस्ट्री से जुड़े कई अधिकारियों का कहना है कि जब रेटिंग्स दोबारा शुरू होंगी, तब कई न्यूज ब्रॉडकास्टर्स BARC से अपने सब्सक्रिप्शन बिलों में समायोजन (Adjustment) की मांग कर सकते हैं। चूंकि मंत्रालय ने साफ निर्देश दिया है कि रेटिंग्स बंद रहने के दौरान न्यूज चैनलों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, इसलिए चैनल यह चाहेंगे कि उस अवधि की फीस भविष्य के तिमाही बिलों में समायोजित कर दी जाए, न कि नया बिल जारी किया जाए।
अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश न्यूज नेटवर्क उस अवधि का सब्सक्रिप्शन शुल्क नहीं देना चाहेंगे, जब रेटिंग्स उपलब्ध नहीं थीं। इसके बजाय वे आने वाले बिलों में उसी हिसाब से राशि कम करने की मांग करेंगे।
हालांकि, इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस रुकावट से देश में कुल विज्ञापन खर्च (Advertising Spend) में कोई बड़ी कमी नहीं आएगी। लेकिन विज्ञापन बजट का बंटवारा जरूर बदलेगा। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे टीवी चैनलों और विशेष श्रेणी (Niche) के चैनलों पर पड़ सकता है, जबकि बड़े टीवी नेटवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म को इसका फायदा मिल सकता है।
BARC के रेवेन्यू मॉडल पर बढ़ा दबाव
रेटिंग्स पर लगी रोक के बाद BARC का सब्सक्रिप्शन आधारित रेवेन्यू मॉडल भी चर्चा में आ गया है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए BARC की प्राइसिंग पॉलिसी के अनुसार, उसकी कमाई कई स्रोतों से होती है। इसमें ब्रॉडकास्टर्स से मिलने वाला सब्सक्रिप्शन शुल्क, विज्ञापन से जुड़ा सेस (Cess), प्रीमियम एनालिटिक्स सेवाएं और यूजर लाइसेंस शुल्क शामिल हैं।
इस मॉडल का सबसे अहम हिस्सा ड्यूल-थ्रेशोल्ड प्राइसिंग सिस्टम है। इसके तहत किसी भी ब्रॉडकास्टर को हर साल या तो अपनी नेट टीवी विज्ञापन आय का 0.8 फीसदी देना होता है या फिर प्रति चैनल 20 लाख रुपये, जो भी राशि अधिक हो। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जिन चैनलों की विज्ञापन आय कम है, वे भी कम से कम तय न्यूनतम शुल्क का भुगतान करें।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी चैनल की सालाना विज्ञापन आय 25 करोड़ रुपये है, तब भी उसे 20 लाख रुपये का न्यूनतम शुल्क देना होगा। वहीं यदि किसी नेटवर्क की विज्ञापन आय 100 करोड़ रुपये है, तो उसे 0.8 फीसदी के हिसाब से लगभग 80 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ेगा। सब्सक्रिप्शन फीस के अलावा BARC अपने प्रीमियम डेटा प्रोडक्ट्स के लिए भी अलग से शुल्क लेता है।
BARC के Prime Package में दर्शकों से जुड़े आंकड़े (Audience Analytics), कार्यक्रमों का विश्लेषण (Programme Analysis) और व्युअरशिप रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं शामिल होती हैं। वहीं, इससे ऊपर का Supreme Package और ज्यादा एडवांस एनालिटिक्स उपलब्ध कराता है। इसमें स्विचिंग-ग्रिड एनालिसिस (Switching Grid Analysis), बिहेवियरल टारगेटिंग (Behavioural Targeting) और व्यक्तिगत दर्शक विश्लेषण (Individual Viewership Analysis) जैसी सेवाएं शामिल हैं।
इसके अलावा BARC अपनी SpotTrek सेवाओं के जरिए भी कमाई करता है। इसके तहत किसी चैनल के कमर्शियल स्पॉट ट्रैकिंग के लिए सालाना 2 लाख रुपये और कमर्शियल के साथ प्रमोशनल स्पॉट ट्रैकिंग के लिए 3 लाख रुपये शुल्क लिया जाता है। इसके अलावा प्रति स्पॉट इस्तेमाल के आधार पर भी शुल्क लिया जाता है, जिसकी शुरुआत 7 रुपये प्रति स्पॉट से होती है।
BARC यूजर लाइसेंस (User Licence) के लिए भी अलग से शुल्क लेता है। यह शुल्क सब्सक्राइबर की कमाई के आधार पर तय होता है। यदि किसी संस्था को तय सीमा से अधिक यूजर जोड़ने होते हैं, तो प्रत्येक अतिरिक्त यूजर के लिए 60 हजार रुपये सालाना का शुल्क देना पड़ता है।
विज्ञापन खर्च कम नहीं होगा, लेकिन उसका बंटवारा बदल जाएगा
Thoth Advisors के मैनेजिंग पार्टनर और BARC इंडिया के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता का मानना है कि रेटिंग्स पर रोक लगने से देश में कुल विज्ञापन खर्च कम होने की संभावना नहीं है, लेकिन विज्ञापन का पैसा अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर नए तरीके से बंटेगा।
उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि कुल विज्ञापन खर्च में कोई कमी आएगी। हां, यह जरूर है कि विज्ञापन का पैसा एक जगह से दूसरी जगह जाएगा। सबसे ज्यादा फायदा बड़े खिलाड़ियों यानी डिजिटल और बड़े टीवी नेटवर्क को होगा, जबकि छोटे चैनलों और छोटे जॉनर को नुकसान उठाना पड़ेगा।"
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि BARC की अपनी आय जरूर प्रभावित होगी, क्योंकि उसकी कमाई सीधे तौर पर टीवी विज्ञापन और ब्रॉडकास्टर्स के सब्सक्रिप्शन शुल्क पर निर्भर करती है।
उन्होंने कहा, "जहां तक टीवी की कमाई और BARC की आय का सवाल है, क्योंकि BARC की कमाई टीवी विज्ञापन रेवेन्यू का एक प्रतिशत होती है, इसलिए बड़े खिलाड़ियों को फायदा होगा और छोटे खिलाड़ियों को नुकसान होगा। अगर सरकार न्यूज चैनलों की तरह सब्सक्रिप्शन पर रोक लगाए रखती है, तो इस दौरान BARC की कमाई पूरी तरह प्रभावित होगी। मुझे लगता है कि इस स्थिति का सबसे बड़ा फायदा बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म को मिलेगा।"
7.5 करोड़ रुपये का तिमाही नुकसान तो सिर्फ शुरुआत है
Chrome Data Analytics के फाउंडर पंकज कृष्णा के अनुसार, BARC की सालाना कमाई करीब 300 करोड़ रुपये है। इसमें न्यूज चैनलों की हिस्सेदारी लगभग 10 फीसदी, यानी करीब 30 करोड़ रुपये सालाना है।
उन्होंने कहा, "अगर BARC की रेटिंग्स एक तिमाही तक बंद रहती हैं, तो इसका असर दो स्तर पर देखा जाना चाहिए। पहला, BARC की अपनी सब्सक्रिप्शन आय पर और दूसरा, पूरे विज्ञापन इंडस्ट्री में मीडिया प्लानिंग को लेकर पैदा होने वाली अनिश्चितता पर।"
इन आंकड़ों के आधार पर सिर्फ न्यूज चैनलों से मिलने वाले सब्सक्रिप्शन पर रोक के कारण BARC को एक तिमाही में करीब 7.5 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान होगा।
पंकज कृष्णा ने कहा, "यह तो केवल तुरंत दिखाई देने वाला नुकसान है। लेकिन इसका असर इससे कहीं ज्यादा बड़ा होगा। अगर एक तिमाही तक रेटिंग्स उपलब्ध नहीं रहतीं, तो विज्ञापनदाता, मीडिया एजेंसियां और ब्रॉडकास्टर्स सभी को कैंपेन प्लानिंग, विज्ञापन दरें तय करने, बेंचमार्क बनाने और प्रदर्शन का मूल्यांकन करने में अनिश्चितता का सामना करना पड़ेगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का यह कदम मौजूदा टीवी ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों की ओर इशारा करता है।
पंकज कृष्णा ने कहा, "डेटा पर रोक लगाने का फैसला मौजूदा मेजरमेंट सिस्टम की विश्वसनीयता और मजबूती को लेकर उठी चिंताओं से जुड़ा हुआ लगता है। 'लैंडिंग पेज' विवाद लंबे समय से खासकर न्यूज चैनलों में चर्चा का विषय रहा है। ऐसे मामलों में चैनलों की जबरन दृश्यता (Forced Visibility) दर्शकों के देखने के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा इंडस्ट्री अभी भी पुराने हार्डवेयर आधारित मेजरमेंट सिस्टम पर निर्भर है, जो आज के मल्टी-प्लेटफॉर्म कंटेंट माहौल के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता।"
यह सिर्फ रेटिंग्स का संकट नहीं, भरोसे का संकट भी है
रेटिंग्स पर लगी रोक के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारत को दूसरी ऑडियंस मेजरमेंट एजेंसी की जरूरत है।
Sales Strategist LLP के फाउंडर और कनेक्टेड टीवी (CTV) विशेषज्ञ विशाल खन्ना का मानना है कि केवल दूसरी रेटिंग एजेंसी बना देने से इंडस्ट्री की मूल समस्याएं खत्म नहीं होंगी।
उन्होंने कहा, "क्या हमें दूसरी रेटिंग एजेंसी चाहिए? कागज पर देखें तो जवाब हां है। लेकिन हकीकत यह है कि पूरी दुनिया में ऑडियंस मेजरमेंट का कारोबार लगभग एकाधिकार (Monopoly) वाला रहा है। भारत में हम पहले A-MAP और TAM जैसी एजेंसियां भी देख चुके हैं। असली सवाल प्रतिस्पर्धा का नहीं है, बल्कि यह है कि दूसरी मेजरमेंट प्रणाली के लिए पैसा कौन देगा।"
विशाल खन्ना के अनुसार, असली समस्या इंडस्ट्री की गवर्नेंस व्यवस्था में है।
उन्होंने कहा, "यह सिर्फ रेटिंग्स का संकट नहीं है, बल्कि भरोसे की व्यवस्था (Trust Architecture) का संकट है, जो रेटिंग्स के रूप में दिखाई दे रहा है। BARC की असली समस्या कभी सिर्फ एक CEO या किसी एक नियम की नहीं रही। असली समस्या यह है कि जिन लोगों को मापा जा रहा है, वही लोग मापने वाले सिस्टम के मालिक भी हैं। यानी हर हाल में फायदा उन्हीं का होता है।"
उन्होंने सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था, "दुनिया के ज्यादातर देशों में सरकारें ऑडियंस मेजरमेंट का काम नहीं करतीं। यह सरकार का काम नहीं है कि वह इस कारोबार में सीधे दखल दे।"
भारत के मेजरमेंट सिस्टम को आधुनिक बनाने का मौका
इंडस्ट्री के कई अनुभवी लोगों का मानना है कि मौजूदा स्थिति भारत के टेलीविजन ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम को आधुनिक बनाने का बड़ा अवसर भी साबित हो सकती है। पार्थो दासगुप्ता ने बताया कि BARC ने 2017-18 के दौरान डिजिटल ऑडियंस मेजरमेंट का पायलट प्रोजेक्ट भी चलाया था, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया।
उन्होंने कहा, "इस समस्या का समाधान दो चरणों में हो सकता है। सबसे पहले BARC को मंत्रालय की सभी शर्तें पूरी करनी चाहिए और जल्द से जल्द नए नियमों के तहत पंजीकरण हासिल करना चाहिए। इसमें वे सभी बिंदु शामिल हैं जिनका उल्लेख सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने किया है। BARC ने 2017-18 में डिजिटल रेटिंग सर्विस का सफल पायलट भी किया था, लेकिन बाद में बोर्ड ने उस परियोजना को रोक दिया। अगर उस समय मिले अनुभवों को लागू किया गया होता तो आज स्थिति अलग हो सकती थी।"
उन्होंने कहा कि दूसरा चरण इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, अब भारत को ऐसे डेटरमिनिस्टिक (Deterministic) और आउटकम-आधारित (Outcome-Based) ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम की ओर बढ़ना चाहिए, जो टीवी, OTT और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बदलते दर्शकों के व्यवहार को सही तरीके से माप सके।
दासगुप्ता ने कहा, "अब मेजरमेंट सिस्टम को ज्यादा सटीक और नतीजों पर आधारित बनाना होगा। पूरी दुनिया इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे भारत के OTT और डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी फायदा होगा और सभी प्लेटफॉर्म के लिए समान अवसर (Level Playing Field) तैयार होगा। दुनिया में इस दिशा में बदलाव हो रहे हैं और अब भारत को भी अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ कदम मिलाना होगा।"
ब्रॉडकास्टर्स और विज्ञापनदाताओं पर पड़ेगा व्यापक असर
रेटिंग्स पर लगी रोक का असर केवल BARC की सब्सक्रिप्शन आय तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव पूरे टेलीविजन इंडस्ट्री और विज्ञापन बाजार पर भी पड़ेगा। टेलीविजन रेटिंग्स आज भी विज्ञापन इंडस्ट्री की साझा मुद्रा (Common Currency) मानी जाती हैं। विज्ञापन दरें तय करने, मीडिया प्लानिंग करने, विज्ञापन सौदों पर बातचीत करने और किसी कैंपेन की सफलता का आकलन करने के लिए इन्हीं रेटिंग्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) और बड़े टीवी नेटवर्क, जिनके विज्ञापनदाताओं के साथ पहले से मजबूत संबंध हैं, इस स्थिति का सामना अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
लेकिन छोटे ब्रॉडकास्टर्स और विशेष श्रेणी (Niche) के चैनलों पर इसका दबाव बढ़ सकता है। रेटिंग्स उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में विज्ञापनदाता अपने बजट का बड़ा हिस्सा उन डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर मोड़ सकते हैं, जहां अब भी रियल-टाइम परफॉर्मेंस मेजरमेंट उपलब्ध है।
इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो छोटे चैनलों के लिए विज्ञापन जुटाना और अपनी दर्शक संख्या साबित करना और भी मुश्किल हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह रोक सिर्फ कुछ समय के लिए लगाया गया एक नियामकीय (Regulatory) कदम साबित होगी या फिर यह भारत के ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम में बड़े बदलाव की शुरुआत बनेगी।
इसका जवाब काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि BARC नई Television Rating Agencies Policy के तहत कितनी जल्दी अपना पंजीकरण हासिल करता है और क्या इस दौरान पूरा इंडस्ट्री मिलकर लंबे समय से उठ रहे गवर्नेंस, पारदर्शिता (Transparency) और टीवी, OTT व डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए एकीकृत ऑडियंस मेजरमेंट जैसे मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ता है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि इस अवसर का सही इस्तेमाल किया गया, तो भारत का ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम पहले से ज्यादा आधुनिक, पारदर्शी और भरोसेमंद बन सकता है। वहीं, अगर सुधारों में देरी हुई तो इसका असर सिर्फ BARC तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे टेलीविजन और विज्ञापन इंडस्ट्री को लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
Panorama Studios International Limited और उसकी सहायक कंपनी ने शॉर्ट फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो अलग-अलग लाइसेंसिंग समझौते किए हैं।
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Vikas Saxena
पैनोरमा स्टूडियोज इंटरनेशनल (Panorama Studios International Limited) और उसकी सहायक कंपनी ने शॉर्ट फिल्मों के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को मजबूत करने के लिए दो अलग-अलग लाइसेंसिंग समझौते किए हैं। इन समझौतों के जरिए कंपनी दुनिया भर में, भारत सहित, अपनी कंटेंट पहुंच का विस्तार करेगी।
कंपनी की सहायक इकाई Panorama Studios Inflight LLP ने DMF Play Private Limited के साथ शॉर्ट फिल्म 'Ek Deewane Ki Deewaniyat' के एक्सक्लूसिव एयरबोर्न राइट्स (Airborne Rights) के लिए समझौता किया है। इस समझौते के तहत फिल्म को दुनिया भर में, भारत सहित, एयरलाइंस के इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म पर दिखाया जा सकेगा।
इस शॉर्ट फिल्म में हर्षवर्धन राणे, सोनम बाजवा समेत कई कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन मिलाप मिलन जावेरी ने किया है।
इसके अलावा Panorama Studios International ने आदित्य जनक जोशी के साथ शॉर्ट फिल्म 'Embrace the Hustle' के नॉन-थिएट्रिकल राइट्स के लिए भी लाइसेंसिंग समझौता किया है। यह समझौता 2 जुलाई 2026 को किया गया था और इसके तहत फिल्म के अधिकार भारत सहित पूरी दुनिया के लिए लागू होंगे।
कंपनी के मुताबिक, इस समझौते के जरिए फिल्म को सिनेमाघरों के अलावा विभिन्न डिजिटल और सिंडिकेशन प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया जा सकेगा। इस फिल्म में मोहम्मद फैजल खान मुख्य भूमिका में हैं, जबकि इसके निर्देशक आदित्य जनक जोशी हैं।
Panorama Studios ने बताया कि दोनों समझौते उसकी कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन रणनीति को मजबूत करेंगे और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर फिल्मों की पहुंच बढ़ाने में मदद करेंगे।
बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms) ने बताया है कि कंपनी 14 जुलाई 2026 को निवेशकों (Investors) और विश्लेषकों (Analysts) के साथ वन-ऑन-वन (One-on-One) बैठकें करेगी।
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Samachar4media Bureau
बालाजी टेलीफिल्म्स (Balaji Telefilms) ने बताया है कि कंपनी 14 जुलाई 2026 को निवेशकों (Investors) और विश्लेषकों (Analysts) के साथ वन-ऑन-वन (One-on-One) बैठकें करेगी। कंपनी ने यह जानकारी सेबी (SEBI) के लिस्टिंग नियमों के तहत स्वैच्छिक रूप से साझा की है।
कंपनी ने साफ किया है कि इन बैठकों के दौरान किसी भी तरह की अप्रकाशित मूल्य संवेदनशील जानकारी (Unpublished Price Sensitive Information - UPSI) साझा नहीं की जाएगी। यानी ऐसी कोई जानकारी नहीं दी जाएगी, जिसका असर कंपनी के शेयर मूल्य पर पड़ सकता हो।
कंपनी के कार्यक्रम के अनुसार, पहली बैठक Emkay Investment Managers Ltd. के साथ मुंबई में आमने-सामने (फिजिकल) होगी। वहीं दूसरी बैठक Sequent Investments के साथ वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएगी।
Balaji Telefilms ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर बैठक के समय या कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है।
कंपनी के अनुसार, इन बैठकों से जुड़ी जानकारी उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी। यह सूचना कंपनी की ओर से कंपनी सेक्रेटरी और कंप्लायंस ऑफिसर तनु शर्मा ने जारी की है।
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि भारत की ओर आ रहे एक एलपीजी (LPG) टैंकर पर ईरान ने मिसाइल हमला किया है।
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Samachar4media Bureau
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है कि भारत की ओर आ रहे एक एलपीजी (LPG) टैंकर पर ईरान ने मिसाइल हमला किया है। केंद्र सरकार ने इस दावे को पूरी तरह फर्जी बताया है।
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि यह भ्रामक जानकारी फैलाकर लोगों में डर और भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
PIB फैक्ट चेक के मुताबिक, सोशल मीडिया पर जिस तस्वीर को भारत आ रहे एलपीजी टैंकर पर हमले की तस्वीर बताकर शेयर किया जा रहा है, वह मौजूदा घटना की नहीं है। यह तस्वीर पिछले साल यमन के अदन (Aden) तट के पास कैमरून के झंडे वाले LPG टैंकर 'MV Falcon' में हुए विस्फोट और आग लगने की घटना की है। इसका भारत की ओर आ रहे किसी टैंकर या ईरानी मिसाइल हमले से कोई संबंध नहीं है।
⚠️ Fake News Alert!
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) July 9, 2026
?Pakistani propaganda accounts are circulating an image with the claim that an LPG tanker heading to India was hit in an Iranian missile strike. #PIBFactCheck:
❌ This claim is #Fake.
✅ The image being shared is old and relates to a fire that broke… pic.twitter.com/esoA0s7bJH
PIB ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी इस वायरल दावे को फर्जी बताते हुए लोगों से ऐसी भ्रामक पोस्ट पर भरोसा न करने की अपील की है। फैक्ट चेक यूनिट ने कहा कि कुछ प्रोपेगेंडा अकाउंट्स जानबूझकर पुरानी तस्वीरों और गलत दावों के जरिए अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील या वायरल खबर को शेयर करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें और केवल आधिकारिक व विश्वसनीय स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें।
रियल्टी+ कॉन्क्लेव एंड एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 में सरकार, रियल एस्टेट, वित्त और शहरी विकास क्षेत्र के दिग्गज जुटेंगे। निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट सिटी और भविष्य की विकास संभावनाओं पर चर्चा होगी।
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Samachar4media Bureau
इंदौर रियल एस्टेट के लिए एक नए विकास चरण की ओर बढ़ रहा है। स्वच्छता, बेहतर शहरी प्रबंधन और मजबूत आर्थिक आधार के कारण यह शहर अब देश के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर्स, संस्थागत निवेशकों और घर खरीदने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में 9 जुलाई को इंदौर के मैरियट होटल में रियल्टी+ कॉन्क्लेव एंड एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 के पहले संस्करण का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश सरकार के शहरी विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय होंगे।
दिनभर चलने वाले इस कॉन्क्लेव में इंदौर के रियल एस्टेट क्षेत्र की भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास, नए आवासीय कॉरिडोर, निवेश के अवसर, सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) और आध्यात्मिक पर्यटन का संपत्ति बाजार पर पड़ने वाला प्रभाव प्रमुख विषय रहेंगे।
कार्यक्रम का शुभारंभ एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) और बिजनेसवर्ल्ड (BusinessWorld) मीडिया समूह के एडिटर-इन-चीफ एवं चेयरमैन डॉ. अनुराग बत्रा के उद्घाटन संबोधन से होगा। इसके बाद शहरी नियोजन और स्मार्ट सिटी विकास के विशेषज्ञ डॉ. शुभाशीष बनर्जी मुख्य वक्तव्य देंगे, जिसमें इंदौर के बदलते शहरी परिदृश्य पर प्रकाश डाला जाएगा।
कॉन्क्लेव का प्रमुख आकर्षण "इंदौर रियल्टी चेक: द राइज ऑफ सेंट्रल इंडिया'ज़ नेक्स्ट रियल एस्टेट हॉटस्पॉट" विषय पर विशेष चर्चा होगी। इस सत्र में मोहित गोयल, तपन अग्रवाल, विवेक चुघ, संदीप श्रीवास्तव और विवेक दमानी जैसे उद्योग विशेषज्ञ बाजार की मांग, निवेश रुझानों और शहर की दीर्घकालिक संभावनाओं पर अपने विचार साझा करेंगे।
कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. जनक पाल्टा मैकगिलिगन का विशेष संबोधन भी होगा, जो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर अपने अनुभव साझा करेंगी। इसके अलावा तीन विशेष पावर पैनल में इंदौर को देश के सबसे आकर्षक आवासीय बाजारों में बदलने वाले कारकों, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, नए विकास कॉरिडोर और मध्य भारत में आध्यात्मिक पर्यटन की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की जाएगी।
केपीएमजी इंडिया (KPMG India) के पार्टनर एवं हेड इंडिया ग्लोबल नीरज बंसल भी रियल्टी+ रियल टॉक सत्र में भाग लेंगे। कार्यक्रम का समापन रियल्टी+ एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 – इंदौर के साथ होगा, जिसमें क्षेत्र के उत्कृष्ट डेवलपर्स, आर्किटेक्ट्स, कंसल्टेंट्स और रियल एस्टेट पेशेवरों को सम्मानित किया जाएगा। आयोजकों का मानना है कि यह कॉन्क्लेव इंदौर के रियल एस्टेट क्षेत्र में नए निवेश, साझेदारियों और विकास की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।
YAAP के साथ आठ साल से ज्यादा समय तक जुड़े रहे और फिलहाल ISB I-Venture में मेंटर की भूमिका निभा रहे सूरज नेडुंगडी ने दिवंगत अतुल हेगड़े को एक दूरदर्शी नेता और बेहतरीन मेंटर बताया है।
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YAAP के साथ आठ साल से ज्यादा समय तक जुड़े रहे और फिलहाल ISB I-Venture में मेंटर की भूमिका निभा रहे सूरज नेडुंगडी ने दिवंगत अतुल हेगड़े को एक दूरदर्शी नेता और बेहतरीन मेंटर बताया है। उन्होंने कहा कि अतुल हेगड़े का युवा प्रतिभाओं पर भरोसा सिर्फ लोगों का करियर ही नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी भी बदल देता था। अतुल हेगड़े के असामयिक निधन को याद करते हुए सूरज ने बताया कि जब वह बिल्कुल नए थे और उनके पास कोई अनुभव नहीं था, तब अतुल ने उन्हें मौका दिया, उनके विचारों को महत्व दिया और अपने मार्गदर्शन, धैर्य और अटूट विश्वास से उन्हें आज का प्रोफेशनल बनाया।
सूरज ने लिंक्डइन पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा:
"मैं आमतौर पर सोशल मीडिया पर किसी के निधन को लेकर पोस्ट नहीं लिखता। लेकिन आज मैं एक अपवाद कर रहा हूं, क्योंकि मेरे लिए यह बताना बेहद जरूरी है कि डॉ. अतुल हेगड़े ने मेरी जिंदगी पर कितना गहरा असर डाला है। उनके असामयिक निधन से मुझे गहरा दुख पहुंचा है।
मैं YAAP में लगभग एक फ्रेशर के तौर पर शामिल हुआ था। मेरे पास कोई अनुभव नहीं था और न ही ऐसा कुछ था जिससे मैं कंपनी को खास योगदान दे सकता। मैं पूरी तरह नया था। कोई दूसरा नेता शायद मेरे जैसे व्यक्ति की ओर दूसरी बार भी नहीं देखता। लेकिन अतुल ने मुझे अपने साथ काम करने का मौका दिया और फाउंडर्स ऑफिस का हिस्सा बनाकर मेरा मार्गदर्शन किया। यह ऐसा अवसर था जिसने मेरी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। इसे शब्दों में बयां करना मेरे लिए आसान नहीं है।
इतने बड़े कद के व्यक्ति होने के बावजूद उन्होंने हमेशा मुझे समय दिया, मेरा मार्गदर्शन किया और मेरे उन अजीबोगरीब आइडियाज को भी सुना, जो अक्सर 50 स्लाइड की प्रेजेंटेशन में छिपे रहते थे। इतना धैर्य और इतनी विनम्रता बहुत कम नेताओं में देखने को मिलती है। उन्होंने सिर्फ मेरी बातें नहीं सुनीं, बल्कि मेरे विचारों को गंभीरता से लिया, जैसे वे किसी बराबरी के सहयोगी के हों। वह हमेशा मुझे ईमानदार और रचनात्मक सुझाव देते थे। हमारी वन-टू-वन बैठकों में मेरी उम्र या अनुभव कभी मायने नहीं रखता था, सिर्फ मेरे विचारों की गुणवत्ता मायने रखती थी। यही सोच आगे चलकर YAAP की कार्य संस्कृति की नींव बनी, जहां कमरे में मौजूद सबसे अच्छा आइडिया ही जीतता है।
उन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मुझे ऐसे अवसर दिए, जो मेरी उम्र और अनुभव वाले किसी व्यक्ति को शायद कभी नहीं मिलते। उनकी वजह से मुझे दुनिया के कई देशों में जाने, उद्योग और सरकार के बड़े नेताओं से मिलने और उन बैठकों का हिस्सा बनने का मौका मिला, जहां शायद मेरा होना संभव ही नहीं था। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने मुझ पर भरोसा किया।
वह वास्तव में एक दूरदर्शी, अपने क्षेत्र के अग्रणी और अपने काम के माहिर थे। उन्होंने सिर्फ इंडस्ट्री को बेहतर बनाने में योगदान नहीं दिया, बल्कि मेरी तरह अनगिनत लोगों की जिंदगी भी बदल दी। पहले दिन से ही उनके मन में यह बिल्कुल साफ था कि वह YAAP को किस मुकाम तक ले जाना चाहते हैं। उस समय हम एक छोटी-सी टीम थे और हमें खुद अपनी क्षमता का अंदाजा नहीं था। लेकिन मैंने अपनी आंखों के सामने उनके उस विजन को सच होते देखा। मुझे गर्व है कि उन्होंने मुझे भी उस सफर का हिस्सा बनने का मौका दिया। और वह सफर अभी सिर्फ शुरू ही हुआ है।
YAAP में बिताए अपने आठ से ज्यादा वर्षों के दौरान मुझे उनके साथ बहुत करीब से काम करने का मौका मिला। मैंने उनके सोचने का तरीका बेहद करीब से देखा और हर दिन उनसे कुछ नया सीखा। सच कहूं तो अभी भी उनसे बहुत कुछ सीखना बाकी था। मैंने अपने करियर को लेकर उन पर आंख बंद करके भरोसा किया, क्योंकि मुझे हमेशा लगता था कि उन्होंने मेरे लिए मुझसे भी बड़ा सपना देखा है। हर साल उन्होंने यह साबित भी किया। आज मैं जो भी प्रोफेशनल और लीडर हूं, वह उनकी उदारता और मार्गदर्शन की वजह से हूं। अब मेरी कोशिश रहेगी कि मैं मनन कपूर, अंजन रॉय, अनुप कुमार, राज नायक और YAAP की पूरी शानदार टीम के साथ मिलकर उनके विजन को आगे बढ़ाऊं।
मैं हमेशा आपका ऋणी और आभारी रहूंगा कि आपने मेरे लिए इतना कुछ किया। मुझ पर भरोसा करने और मुझे मौका देने के लिए आपका दिल से धन्यवाद।"
यह प्रार्थना सभा शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक माही हॉल, जेडब्ल्यू मैरियट, जुहू में होगी। गौरतलब है कि अतुल हेगड़े का मंगलवार सुबह हृदयाघात के कारण निधन हो गया था।
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Samachar4media Bureau
भारत के विज्ञापन और डिजिटल मार्केटिंग जगत के दिग्गज उद्यमी तथा याप डिजिटल (YAAP Digital) के संस्थापक एवं चेयरमैन रहे अतुल हेगड़े (Atul Hegde) की स्मृति में 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को मुंबई में प्रार्थना सभा (Prayer Meeting) आयोजित की जाएगी। यह सभा शाम 5:00 बजे से 7:00 बजे तक माही हॉल, जेडब्ल्यू मैरियट, जुहू में होगी।
परिजनों की ओर से जारी सूचना के अनुसार, इस अवसर पर उद्योग जगत के सहयोगी, मित्र, शुभचिंतक और परिवार के सदस्य दिवंगत अतुल हेगड़े को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। प्रार्थना सभा का आयोजन हेगड़े एवं कौल परिवार, याप (YAAP) परिवार तथा उनके मित्रों एवं शुभचिंतकों की ओर से किया जा रहा है।
गौरतलब है कि अतुल हेगड़े का मंगलवार सुबह हृदयाघात के कारण निधन हो गया था। भारतीय विज्ञापन, डिजिटल मार्केटिंग और स्टार्टअप जगत में उन्हें एक दूरदर्शी उद्यमी और नवाचार को बढ़ावा देने वाले नेतृत्वकर्ता के रूप में जाना जाता था।
दो दशकों से अधिक लंबे करियर में उन्होंने डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस मॉडल को नई पहचान दिलाई। 'याप डिजिटल' की स्थापना कर उन्होंने उसे देश की अग्रणी इंटीग्रेटेड डिजिटल मार्केटिंग एवं टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल किया। उनके नेतृत्व में कंपनी ने कंटेंट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, डिजिटल मीडिया, डेटा एनालिटिक्स और टेक्नोलॉजी आधारित मार्केटिंग समाधानों के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई।
अतुल हेगड़े 'रेनमेकर वेंचर्स' (Rainmaker Ventures) के सह-संस्थापक भी थे और उन्होंने अनेक शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश करने के साथ युवा उद्यमियों का मार्गदर्शन किया।
उनके निधन से भारतीय विज्ञापन और डिजिटल मार्केटिंग उद्योग ने एक ऐसे दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता को खो दिया है, जिसने तकनीक और नवाचार के दम पर भारतीय एजेंसी जगत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का सपना देखा और उसे साकार करने की दिशा में लगातार काम किया।
संजीव पालीवाल और मीनाक्षी चौधरी द्वारा लिखित यह किताब एक ऐसी महिला की कहानी है, जो विश्वास, धैर्य और अटूट संकल्प की मिसाल पेश करती है।
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नई दिल्ली स्थित ‘इंडिया इंटरनेशनल सेंटर’ (IIC) में 7 जुलाई 2026 की शाम एक ऐसी कहानी के नाम रही, जो सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि एक ज़िंदा अनुभव है। वेस्टलैंड बुक्स द्वारा आयोजित इस विशेष समारोह में ‘सम्पा: विश्वास, धैर्य और संकल्प की अनूठी दास्तान’ पुस्तक का भव्य लोकार्पण हुआ। यह एक ऐसी महिला की कहानी है, जो विश्वास, धैर्य और अटूट संकल्प की मिसाल पेश करती है।
कार्यक्रम में साहित्य, मीडिया और समाज के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए, जिन्होंने इस किताब को सिर्फ एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि एक सामाजिक दस्तावेज़ के रूप में देखा। वक्ताओं ने एक स्वर में इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘सम्पा’ आज के समय में महिला सशक्तिकरण की एक बेहद ज़रूरी और प्रासंगिक आवाज़ है।
आजतक एवं इंडिया टुडे टीवी के न्यूज़ डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद ने कहा, “संजीव पालीवाल ने क्राइम फिक्शन की दुनिया से निकलकर एक सच्ची ज़िंदगी की कहानी को शब्द दिए हैं। यह किताब हर लड़की और हर महिला को पढ़नी चाहिए। यह किताब सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं है, बल्कि यह हिम्मत देने वाली किताब है—यह एहसास दिलाती है कि साधारण दिखने वाली एक लड़की भी असाधारण संघर्ष कर सकती है और अपने लिए रास्ता बना सकती है।”
इंडिया टुडे टीवी के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने बदलते मीडिया परिदृश्य का ज़िक्र करते हुए कहा, “एक समय था जब टेलीविजन पर इंसानी कहानियां प्रमुख होती थीं, लेकिन आज वो कम हो गई हैं। ‘सम्पा’ ऐसी ही एक कहानी है, जो हमें उस दौर की याद दिलाती है। यह सिर्फ किताब तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसे ओटीटी और बड़े प्लेटफॉर्म पर भी आना चाहिए, ताकि यह प्रेरणा अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।”
कार्यक्रम का संचालन करते हुए चर्चित मॉडरेटर ऋचा अनिरुद्ध ने ‘सम्पा’ को एक भावनात्मक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि इस किताब को पढ़ते हुए वे कई बार भीतर तक हिल गईं, लेकिन अंत तक पहुँचते-पहुँचते उनके भीतर एक नई ऊर्जा और साहस का संचार हुआ। उन्होंने ‘सम्पा’ के साहस और लेखकद्वय मीनाक्षी चौधरी एवं संजीव पालीवाल को इस कहानी को सामने लाने के लिए बधाई दी।
लेखिका मीनाक्षी चौधरी ने अपने पहले लेखन अनुभव को साझा करते हुए कहा, “यह मेरी पहली पुस्तक है और इसे लिखना मेरे लिए एक भावनात्मक यात्रा रही। मैंने इसे अपने छात्रों को भी पढ़ने के लिए कहा है, क्योंकि यह उन्हें सिखाएगी कि परिस्थितियाँ चाहे जितनी कठिन हों, अगर साहस है तो रास्ता जरूर निकलता है।”
वहीं लेखक संजीव पालीवाल ने कहा, “क्राइम फिक्शन से बाहर निकलकर वास्तविक जीवन की इस कहानी को लिखना मेरे लिए एक अलग और गहरा अनुभव रहा। यह किताब हर उस महिला को समर्पित है, जो विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए अपने लिए रास्ता बनाती है। इस कहानी को सामने लाना जरूरी था, क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि एक सोच है—एक प्रेरणा है।”
इस मौक़े पर सम्पा आर्या ने बेहद भावुक शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “यह किताब मेरी ज़िंदगी के उन पलों का दस्तावेज़ है, जिन्हें मैंने जिया है। यह सिर्फ मेरी कहानी नहीं है, यह हर उस स्त्री की कहानी है, जो हर दिन संघर्ष करती है, गिरती है, फिर उठती है और आगे बढ़ती रहती है।”
वेस्टलैंड बुक्स की भाषाई इकाई, एकदा, की प्रकाशक मिनाक्षी ठाकुर ने कहा, "यह रोमांच और संघर्ष की गाथा की तरह लिखी यह सच्ची घटना है—एक स्त्री की कहानी, जिसने सरकारी तंत्र से टकराकर अपने पति को बचाने का संकल्प लिया, जब उसका जहाज़ सोमाली समुद्री डाकुओं द्वारा अपहृत कर लिया गया था। यह दर्शाता है कि आज भी हमारे बीच सावित्री जैसी महिलाएँ मौजूद हैं, जो अपने सत्यवान को मृत्यु के पंजों से वापस लाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।"
कार्यक्रम का संचालन पल्लवी सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. संगीत रागी, शाज़ी ज़मा, अजीत अंजुम, आशुतोष, मिलिंद खांडेकर, गीता श्री, डॉ. सुनीता, वंदना वाजपेयी, रश्मि भारद्वाज, अमिताभ, नीरज गुप्ता, इकबाल रिज़वी, नीरज कुमार, अतुल अग्रवाल, पंकज भार्गव, अज़हर इकबाल, आलोक श्रीवास्तव, आलोक त्रिवेदी, आशुतोष अग्रिनहोत्री, राजीव कुमार और अकु श्रीवास्तव सहित साहित्य और पत्रकारिता जगत की अनेक हस्तियाँ उपस्थित रहीं।
यह आयोजन केवल एक पुस्तक विमोचन नहीं, बल्कि एक विचार, एक अनुभव और एक प्रेरणा का उत्सव बन गया—जहाँ ‘सम्पा’ सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि साहस का पर्याय बनकर उभरी।
कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां आप यहां इन तस्वीरों में देख सकते हैं।






