जी मीडिया (Zee Media) के वरिष्ठ प्रबंधन में बड़ा बदलाव हुआ है। कंपनी के फाइनेंस व अकाउंट्स के डिप्टी वाइस प्रेजिडेंट और सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल मयंक अग्रवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
by
Vikas Saxena
जी मीडिया (Zee Media) के वरिष्ठ प्रबंधन में बड़ा बदलाव हुआ है। कंपनी के फाइनेंस व अकाउंट्स के डिप्टी वाइस प्रेजिडेंट और सीनियर मैनेजमेंट पर्सनल मयंक अग्रवाल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
कंपनी ने मयंक अग्रवाल का इस्तीफा मंजूर कर लिया है, जोकि 10 जुलाई की शाम से प्रभावी हो गया है। मयंक अग्रवाल मई 2010 से इस कंपनी के साथ जुड़े हुए थे।
कंपनी के अनुसार, मयंक अग्रवाल ने संगठन से बाहर अपने करियर में नए अवसरों की तलाश के लिए इस्तीफा दिया है। इस्तीफे के साथ भेजे गए अपने पत्र में मयंक अग्रवाल ने कहा कि कंपनी के साथ उनका कार्यकाल बेहद सीखने वाला और संतोषजनक रहा। हालांकि, काफी सोच-विचार के बाद उन्होंने अपने प्रोफेशनल ग्रोथ (Professional Growth) के लिए नए अवसरों की तलाश करने का फैसला लिया है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके इस्तीफे के पीछे नए करियर अवसरों की तलाश के अलावा कोई अन्य कारण नहीं है।
अपने पत्र में उन्होंने कंपनी का आभार जताते हुए कहा कि कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग, प्रोत्साहन और अवसरों के लिए वह जी मीडिया के प्रति आभारी हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी का हिस्सा बनना और उसके विकास में योगदान देना उनके लिए सम्मान की बात रही है।
कंपनी ने फिलहाल उनके स्थान पर किसी नई नियुक्ति की घोषणा नहीं की है।
वह इस संस्थान के साथ साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से जुड़ी हुई हैं और इस प्रमोशन से पहले डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं।
by
Samachar4media Bureau
दैनिक जागरण के डिजिटल विंग जागरण.कॉम (Jagran.com) की एडिटोरियल टीम से जुड़ी दीप्ति मिश्रा को प्रमोशन मिला है। उन्हें अब एसोसिएट एडिटर की जिम्मेदारी दी गई है। वह इस संस्थान के साथ साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से जुड़ी हुई हैं और इस प्रमोशन से पहले डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रही थीं।
दीप्ति के प्रोफेशनल सफर की बात करें तो उनके पास पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन में 11 साल से ज्यादा का अनुभव है। उनके अनुभव में न्यूज एडिटिंग, रिपोर्टिंग, कंटेंट प्लानिंग और डिजिटल पब्लिशिंग जैसे काम शामिल हैं। उन्होंने हिंदी मीडिया के कई प्रमुख संस्थानों में काम किया है।
उनका करियर अधुनिक टाइम्स से शुरू हुआ, जहां उन्होंने न्यूज कोऑर्डिनेटर के तौर पर काम किया। इसके बाद वह दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, अमर उजाला वेब सर्विसेज और दैनिक भास्कर जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी जिम्मेदारियां संभालीं।
एडिटोरियल प्लानिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, डिजिटल जर्नलिज्म, न्यूज एडिटिंग, डेस्क ऑपरेशंस, रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग उनकी प्रमुख विशेषज्ञताओं में शामिल हैं। हिंदी कंटेंट राइटिंग-एडिटिंग और एडिटोरियल क्वालिटी कंट्रोल में भी उनका अनुभव है।
दीप्ति ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से हिंदी में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके अलावा उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता एवं जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से बीएससी (बायोलॉजी) की पढ़ाई की है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके काम को कई पुरस्कार और सम्मानों से भी नवाजा गया है। इनमें सर्वश्रेष्ठ डिजिटल मीडिया पत्रकार पुरस्कार-2025, कलम के सिपाही पुरस्कार-2025, इंडियन मीडिया वॉरियर पुरस्कार-2025, समन्विता-2025 सम्मान, देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार-2024 और कुलदीप नैयर समर्पण समाज गौरव पुरस्कार-2024 शामिल हैं। इसके अलावा इस साल समाचार4मीडिया 40अंडर40 के विजेताओं की लिस्ट में भी उनका नाम शामिल था। यही नहीं, वर्ष 2023 में वह जागरण न्यू मीडिया, गूगल और आईआईटी कानपुर के हैकाथॉन में प्रथम पुरस्कार भी जीत चुकी हैं। समाचार4मीडिया की ओर से दीप्ति मिश्रा को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
इससे पहले अजय सिंह इस संस्थान में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अजय सिंह ने करीब चार वर्ष पहले डिप्टी एडिटर के तौर पर जागरण.कॉम के साथ अपने सफर की शुरुआत की थी।
by
Samachar4media Bureau
पत्रकार अजय सिंह को दैनिक जागरण के डिजिटल विंग जागरण. कॉम का एडिटर (न्यूज) बनाया गया है। नई जिम्मेदारी के तहत उन्हें न्यूज, हाइपरलोकल के साथ-साथ जागरण समूह की अन्य वेबसाइटों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी भी दी गई है। इससे पहले अजय सिंह इस संस्थान में एसोसिएट एडिटर के पद पर कार्यरत थे।
अजय सिंह ने करीब चार वर्ष पहले डिप्टी एडिटर के तौर पर जागरण.कॉम के साथ अपने सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने एसोसिएट एडिटर के रूप में जिम्मेदारी संभाली और अब उन्हें एडिटर की नई भूमिका सौंपी गई है।
मूल रूप से बिहार के आरा के रहने वाले अजय सिंह ने पटना विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर किया है। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें करीब 19 वर्षों का अनुभव है। उनके करियर के शुरुआती दो वर्ष प्रिंट मीडिया में बीते, जबकि करीब आठ वर्षों तक उन्होंने टेलीविजन मीडिया में काम किया। पिछले नौ वर्षों से वह डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं।
‘दैनिक जागरण’ से पहले अजय सिंह ‘अमर उजाला’ के साथ जुड़े रहे, जहां उन्होंने नेशनल-इंटरनेशनल डेस्क इंचार्ज के साथ-साथ होम पेज की जिम्मेदारी भी संभाली। इससे पहले वह ‘प्रभात खबर’, ‘फोकस टीवी’, ‘साधना न्यूज’, ‘जी न्यूज’ और ‘इंडिया न्यूज’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
अजय सिंह ने वर्ष 2016 में टेलीविजन इंडस्ट्री से अलग होकर डिजिटल मीडिया की ओर रुख किया। अमर उजाला में उन्होंने करीब पांच वर्षों तक काम किया। इसके बाद वह दैनिक जागरण के डिजिटल समूह से जुड़े। डिजिटल पत्रकारिता के दौरान उन्होंने देश-विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरों पर विशेष रूप से काम किया है।
समाचार4मीडिया से बातचीत में अजय सिंह का कहना था कि खबरों के प्रति उनका जुड़ाव बचपन से ही रहा है। वह कहते हैं, ‘बचपन में चुपके-चुपके अखबार पलटने और रेडियो पर समाचार सुनने का जो शौक था, आज वही सपना हकीकत बन गया है। 7-8 साल की उम्र में ही दो-तीन अखबारों को कुरेद डालता था। रात में पढ़ाई के बहाने पिताजी से छिपकर रेडियो पर समाचार सुनना, आज भी रूह तक को रोमांचित कर देता है।’
समाचार4मीडिया की ओर से अजय सिंह को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।
‘जी’ ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन एमेरिटस डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही से जुड़े मामले में कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर कोई कर्ज नहीं लिया था।
by
Samachar4media Bureau
‘जी’ ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन एमेरिटस डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपनी व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही से जुड़े मामले में विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर कोई कर्ज नहीं लिया था। उनके मुताबिक, उनके खिलाफ किए गए दावे उन विभिन्न संस्थाओं की ओर से जुटाई गई रकम से जुड़े हैं, जिनके लिए उन्होंने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।
डॉ. सुभाष चंद्रा के कार्यालय की ओर से 30 अगस्त को जारी बयान सोशल मीडिया पर #PaisaWapasKaro हैशटैग के साथ किए जा रहे पोस्ट के जवाब में आया। बयान में कहा गया कि इस मामले को लेकर लोगों के बीच ‘गलत धारणा और समझ’ बनी हुई है।
₹22,000 करोड़ की गारंटी, व्यक्तिगत उधारी शून्य: बयान के अनुसार, डॉ. सुभाष चंद्रा ने कुल करीब ₹22,000 करोड़ की व्यक्तिगत गारंटी पर हस्ताक्षर किए थे। इनमें से करीब ₹4,800 करोड़ की गारंटी उस समय दी गई थी, जब संबंधित संस्थाओं ने रकम उधार ली थी। बाकी गारंटियां डिफॉल्ट होने के बाद दी गई थीं। बयान में साफ तौर पर कहा गया है, ‘मेरे द्वारा उधार लिया गया धन शून्य है।’ इसमें जोर दिया गया कि मूल कर्ज अलग-अलग कंपनियों ने लिया था और डॉ. चंद्रा ने अपनी व्यक्तिगत क्षमता में यह रकम उधार नहीं ली थी।
कर्जदाताओं ने दाखिल किए ₹5,311 करोड़ के दावे: बयान में इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड की ओर से शुरू की गई डॉ. चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में दाखिल किए गए दावों का कर्जवार ब्योरा भी दिया गया है। डॉ. चंद्रा के कार्यालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, बयान में शामिल कर्जदाताओं ने मिलकर उधार लेने वाली संस्थाओं को ₹4,808 करोड़ वितरित किए थे।
इनमें से उधार लेने वाली संस्थाओं ने ₹3,803 करोड़ वापस कर दिए। बयान के अनुसार, इसके बाद ₹998 करोड़ का बैलेंस बचा था। हालांकि, डॉ. चंद्रा के व्यक्तिगत गारंटर होने के आधार पर उनके खिलाफ कुल ₹5,311 करोड़ के दावे दाखिल किए गए। इनमें से ₹1,049 करोड़ के दावों का भुगतान या निपटारा होने के बाद शेष दावों की राशि ₹4,262 करोड़ रह गई।
इन कर्जदाताओं के नाम भी बताए: बयान में कहा गया कि इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस और एक्सिस बैंक समूह के दावों का निपटारा हो चुका है या उनका भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा बयान में एचडीएफसी समूह, केनरा बैंक, एडेलवाइस, फ्रैंकलिन टेम्पलटन, इंडसइंड बैंक, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, आरबीएल बैंक और यूनियन बैंक का भी नाम लिया गया है। डॉ. चंद्रा का कहना है कि देय बताई गई रकम और कर्जदाताओं की ओर से दाखिल किए गए दावों के बीच अंतर का संबंधित कर्जदाताओं और उधार लेने वाली संस्थाओं के बीच मिलान किया जाना जरूरी है।
उधार लेने वाली संस्थाओं ने दिया ₹4,262 करोड़ चुकाने का भरोसा: बयान के मुताबिक, डॉ. चंद्रा ने संबंधित उधार लेने वाली संस्थाओं के साथ इस मामले पर चर्चा की है। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि कर्जदाताओं के साथ खातों के मिलान के बाद बची हुई ₹4,262 करोड़ की राशि का निपटारा किया जाएगा। बयान में इस मामले में नियुक्त रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल की ओर से तैयार की गई पुनर्भुगतान योजना का भी जिक्र किया गया है। इसमें डॉ. चंद्रा की उपलब्ध संपत्तियों और धनराशि को ध्यान में रखा गया है।
2016 में घोषित संपत्तियों का मूल्य घटकर ₹31.79 करोड़: बयान के अनुसार, डॉ. चंद्रा ने 2016 में संसद में जिन संपत्तियों की कीमत ₹39.08 करोड़ घोषित की थी, उनका मूल्य घटकर ₹31.79 करोड़ रह गया है। इसमें ₹25 करोड़ मूल्य की गिरवी रखी गई आवासीय संपत्ति शामिल है। इसके बाद तरल संपत्तियों का मूल्य ₹6.79 करोड़ बताया गया है।
बयान में यह भी कहा गया कि उधार लेने वाली संस्थाओं ने विदेशी फंड, घरेलू फंड, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और कॉरपोरेट्स से भी रकम जुटाई थी। डॉ. चंद्रा के कार्यालय के मुताबिक, इनमें से ज्यादातर उधारी या तो चुकाई जा चुकी है या फिर उसे चुकाने की प्रक्रिया चल रही है।
कर्जदाताओ से उधार लेने वाली संस्थाओं के साथ सीधे हिसाब मिलाने की अपील: डॉ. सुभाष चंद्रा ने कर्जदाताओं से अपील की है कि वे सीधे संबंधित उधार लेने वाली संस्थाओं के साथ बातचीत करें, बकाया खातों का मिलान करें और उनसे संबंधित रकम की वसूली करें। उनका कहना है कि इसी प्रक्रिया के बाद बकाया राशि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
‘जी’ ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन एमेरिटस डॉ. सुभाष चंद्रा इन दिनों अपने बारे में उठ रहे सवालों और चर्चाओं के बीच लोगों से सीधे संवाद करने जा रहे हैं।
by
Samachar4media Bureau
‘जी’ ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन एमेरिटस डॉ. सुभाष चंद्रा इन दिनों अपने बारे में उठ रहे सवालों और चर्चाओं के बीच लोगों से सीधे संवाद करने जा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि इस सोमवार से वह हर सुबह 9 बजे Instagram पर LIVE आएंगे और लोगों के सवालों का सीधे जवाब देंगे।
सुभाष चंद्रा ने फेसबुक पर साझा किए अपने संदेश में कहा कि अक्सर दो लोगों के बीच दूरी तब आने लगती है, जब उनके बीच की बात कोई तीसरा करने लगता है। उन्होंने कहा, ‘तो क्यों न इस दूरी को खत्म किया जाए?’
उन्होंने आगे कहा, ‘आपके सवाल हैं, तो जवाब भी मुझसे ही होने चाहिए।” सुभाष चंद्रा ने यह भी कहा कि वह सही हैं या गलत, इसका फैसला भी सीधी बातचीत के बाद ही होना चाहिए।’
इसी सोच के साथ उन्होंने सीधे संवाद की शुरुआत करने का फैसला किया है। उन्होंने लोगों से कहा, ‘आप सवाल पूछिए। मैं जवाब दूँगा।” सुभाष चंद्रा ने अपने संदेश में बातचीत की प्रकृति भी साफ करते हुए कहा, “कोई बीच में नहीं। बस आप और मैं।’
वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज एंकर गरिमा सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नई शुरुआत की जानकारी दी।
by
Samachar4media Bureau
हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज24’ (News24) से विदाई के बाद वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज एंकर गरिमा सिंह ने अपने नए सफर की शुरुआत कर दी है। उन्होंने अपना यूट्यूब चैनल 'भारत की गरिमा' शुरू किया है और इसकी पहली वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए साझा की है।
गरिमा सिंह ने फेसबुक पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नई शुरुआत की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, ‘प्रणाम मैं गरिमा सिंह। जो लिंक नीचे आपको दिख रहा है, ये नए पते पर मेरी शुरुआत का पहला क़दम है, मेरी पहली video।” इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अपनी पहली वीडियो देखने और इसे आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने लिखा, “आपका साथ भी चाहिए और प्यार भी।’
गौरतलब है कि गरिमा सिंह ने जुलाई 2026 में ‘न्यूज24’ से इस्तीफा दे दिया था। वह करीब तीन साल तक इस चैनल से जुड़ी रहीं और यहां सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर के तौर पर जिम्मेदारी संभालने के साथ ‘सबसे बड़ा सवाल’ शो को होस्ट करती थीं।
इससे पहले गरिमा सिंह ‘भारत एक्सप्रेस’ में एग्जिक्यूटिव एडिटर और ‘सत्य’ शो की एंकर रह चुकी हैं। वह ‘सहारा मीडिया’ में चैनल हेड की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। उनके करियर में ‘दैनिक जागरण’, ‘टोटल टीवी’, ‘लाइव इंडिया’, ‘पी7 न्यूज’, ‘नेटवर्क18’, ‘समाचार प्लस’ और ‘जी न्यूज’ जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अनुभव शामिल है।
गरिमा सिंह ने वर्ष 2003 में ‘दैनिक जागरण’ से रिपोर्टर के तौर पर पत्रकारिता की शुरुआत की थी। दो दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने रिपोर्टिंग, एंकरिंग और संपादकीय जिम्मेदारियों के साथ अपनी अलग पहचान बनाई है। वह ‘द कैपिटल पोस्ट’ में एडिटर-इन-चीफ की भूमिका भी निभा चुकी हैं।
अब उनकी नई डिजिटल पारी किस दिशा में आगे बढ़ती है और उनके यूट्यूब चैनल पर किस तरह का कंटेंट देखने को मिलता है, इस पर उनके दर्शकों की नजर रहेगी।
उर्वशी कपूर एक अवॉर्ड विनिंग पत्रकार हैं और मीडिया व AI लिटरेसी, फैक्ट-चेकिंग, साइबर सिक्योरिटी और पत्रकारिता में जिम्मेदार तकनीक के इस्तेमाल के क्षेत्र में काम करती हैं।
by
Samachar4media Bureau
जागरण न्यू मीडिया (Jagran New Media) ने उर्वशी कपूर को प्रमोट कर एग्जिक्यूटिव एडिटर और जनरल मैनेजर बनाया है। वह कंपनी में Literacy vertical का नेतृत्व जारी रखेंगी।
उर्वशी कपूर एक अवॉर्ड विनिंग पत्रकार हैं और मीडिया व AI लिटरेसी, फैक्ट-चेकिंग, साइबर सिक्योरिटी और पत्रकारिता में जिम्मेदार तकनीक के इस्तेमाल के क्षेत्र में काम करती हैं। वह Google News Initiative (GNI) India Training Network की सर्टिफाइड ट्रेनर भी हैं।
उर्वशी ने बड़े स्तर पर मीडिया और AI लिटरेसी से जुड़े कई अभियानों और डिजिटल लिटरेसी वर्कशॉप्स का नेतृत्व किया है। उन्होंने Google, Meta और International Fact-Checking Network (IFCN) जैसी ग्लोबल टेक्नोलॉजी और मीडिया संस्थाओं के साथ भी काम किया है। इन पहलों का फोकस डिजिटल सशक्तिकरण, गलत सूचनाओं के प्रति जागरूकता और ऑनलाइन सुरक्षा पर रहा है।
उर्वशी के पास भारत की बड़ी मीडिया लिटरेसी पहलों में से एक का कॉपीराइट भी है।
पत्रकारिता और डिजिटल लिटरेसी के क्षेत्र में उर्वशी के व्यक्तिगत योगदान को भी सम्मान मिला है। उन्हें ‘40 Under 40 in Journalism’ सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान उन्हें इंडस्ट्री में उनके योगदान के लिए केरल के राज्यपाल की ओर से प्रदान किया गया था।
उर्वशी East-West Center, National Press Foundation और Sunway Fellow भी रही हैं। उन्होंने नॉर्वे, दक्षिण कोरिया, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, सिंगापुर, नेपाल और तुर्की में आयोजित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और वर्कशॉप्स में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्पीकर के तौर पर हिस्सा लिया है।
वह फिलहाल Trusted Information Alliance की Governing Council में भी शामिल हैं, जहां वह AI, ट्रस्ट, सेफ्टी और डिजिटल लिटरेसी से जुड़े राष्ट्रीय और वैश्विक विमर्श में योगदान दे रही हैं।
उर्वशी कपूर ने दैनिक जागरण में सितंबर 2011 में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की और सितंबर 2015 तक वहां काम किया। इसके बाद वह जी मीडिया में सीनियर करेसपॉन्डेंट रहीं। सितंबर 2015 से अगस्त 2017 तक यहां काम करने के बाद उन्होंने BW Businessworld में सीनियर सब एडिटर की जिम्मेदारी संभाली।
अप्रैल 2019 में वह जागरण न्यू मीडिया से चीफ सब एडिटर के तौर पर जुड़ीं। अप्रैल 2021 में उन्हें एसोसिएट एडिटर बनाया गया। सितंबर 2023 में उन्होंने सीनियर एडिटर की जिम्मेदारी संभाली और अब अगस्त 2026 में उन्हें एग्जिक्यूटिव एडिटर और जनरल मैनेजर के पद पर प्रमोशन मिला है।
इस दौरान वह भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), Delhi में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर भी जुड़ी रहीं। उन्होंने अक्टूबर 2024 से अगस्त 2026 तक यहां अपनी सेवाएं दीं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नेपाल पहुंच चुके विदेशी पत्रकारों को भी रिपोर्टिंग से पहले प्रेस पास लेना अनिवार्य होगा। बिना प्रेस पास रिपोर्टिंग को निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जाएगा।
by
Samachar4media Bureau
नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ के बाद आपदा की रिपोर्टिंग कर रहे घरेलू और विदेशी पत्रकारों के लिए सरकार ने प्रेस पास से जुड़ी प्रक्रिया स्पष्ट कर दी है। विदेशी संवाददाताओं को रिपोर्टिंग शुरू करने से पहले निर्धारित दस्तावेज जमा कर प्रेस पास हासिल करना होगा।
नेपाल के सूचना तथा संचार मंत्रालय के तहत सूचना विभाग ने विदेशी पत्रकारों से पासपोर्ट, वैध वीजा और संबंधित मीडिया संस्थान का नियुक्ति पत्र या समझौता पत्र मांगा है। इसके अलावा पत्रकार को अपने संस्थान का पहचान पत्र, वेतन और मिलने वाली अन्य सुविधाओं की जानकारी भी देनी होगी।
विदेशी संवाददाताओं को अपने मीडिया संस्थान की सिफारिश के साथ संबंधित देश के विदेश मंत्रालय या नेपाल स्थित उसके दूतावास अथवा कांसुलर कार्यालय की सिफारिश भी जमा करनी होगी। सभी दस्तावेज देने के बाद ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
आवेदन मंजूर होने पर पत्रकार को व्यक्तिगत रूप से सूचना विभाग पहुंचकर प्रेस प्रतिनिधि प्रमाणपत्र और पत्रकार पहचान पत्र लेना होगा। इसके लिए निर्धारित प्रारूप में दो पासपोर्ट साइज फोटो भी जमा करनी होंगी।
विभाग के प्रवक्ता गोविंदा प्रसाद पांडे ने कहा कि यह कोई नई नीति नहीं है, बल्कि विदेशी पत्रकारों के लिए पहले से चली आ रही प्रक्रिया को ही जारी रखा गया है। हालांकि, मौजूदा व्यवस्था का उद्देश्य भोटेकोशी बाढ़ की रिपोर्टिंग को व्यवस्थित करना भी बताया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नेपाल पहुंच चुके विदेशी पत्रकारों को भी रिपोर्टिंग से पहले प्रेस पास लेना अनिवार्य होगा। बिना प्रेस पास रिपोर्टिंग को निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जाएगा। नेपाली पत्रकारों के लिए भी ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है। उन्हें नागरिकता प्रमाणपत्र, मीडिया संस्थान का नियुक्ति पत्र और संस्थान की सिफारिश सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज देने होंगे।
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका उनके समर्थन में सामने आए हैं।
by
Samachar4media Bureau
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका उनके समर्थन में सामने आए हैं। हर्ष गोयनका ने कहा है कि डॉ. सुभाष चंद्रा को लेकर कई ऐसी बातें सामने आ रही हैं, जो पूरी तरह सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले सुभाष चंद्रा का पक्ष भी सुना जाना चाहिए।
यह मामला डॉ. सुभाष चंद्रा के कर्ज और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में चल रही कार्यवाही से जुड़ा है।
'99 फीसदी से ज्यादा कर्ज माफी' के दावे पर सवाल
हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए उन खबरों पर सवाल उठाया, जिनमें कहा जा रहा है कि डॉ. सुभाष चंद्रा ने बैंकों से 99 फीसदी से ज्यादा का हेयरकट हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि करीब ₹22,000 करोड़ की रकम को लेकर भी गलतफहमी पैदा हो रही है। गोयनका के मुताबिक, इस पूरे मामले को सिर्फ एक पक्ष से देखने के बजाय डॉ. सुभाष चंद्रा की बात भी सुनी जानी चाहिए।
गोयनका ने अपनी पोस्ट में कहा कि जब लगातार यह सुर्खियां दिखाई जा रही हैं कि डॉ. सुभाष चंद्रा को बैंकों से 99 फीसदी से ज्यादा का हेयरकट मिला है, तो उनके पक्ष को भी सुनना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ₹22,000 करोड़ की रकम को बड़े पैमाने पर गलत तरीके से समझा जा रहा है और कई तथ्य गलत तरीके से पेश किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि किसी भी कहानी के हमेशा दो पक्ष होते हैं और फैसला करने से पहले दोनों पक्षों को सुनना चाहिए।
With all the headlines screaming that Subhash Chandra got a 99%+ haircut from banks, it is worth listening to his side of the story too. The ₹22,000 crore figure is being widely misunderstood and several facts being circulated are simply wrong. There are always two sides to a… pic.twitter.com/wJTClahlvu
— Harsh Goenka (@hvgoenka) August 28, 2026
₹22,000 करोड़ के कर्ज पर क्या है विवाद?
दरअसल, डॉ. सुभाष चंद्रा की वित्तीय देनदारियों और NCLT से जुड़ी कार्यवाही को लेकर हाल में कई रिपोर्ट सामने आई हैं। इन रिपोर्टों में करीब ₹22,000 करोड़ के कर्ज और उसके निपटारे को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
डॉ. सुभाष चंद्रा ने इन दावों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यह गलत धारणा बनाई जा रही है कि उनका करीब ₹22,000 करोड़ का कर्ज NCLT के जरिए महज ₹6.5 करोड़ में सेटल हो गया। डॉ. चंद्रा का कहना है कि मामले को जिस तरह पेश किया जा रहा है, उससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होती। उन्होंने इन रिपोर्टों के जवाब में अपना पक्ष सामने रखा है और कहा है कि आखिरकार सच्चाई सामने आएगी।
हर्ष गोयनका के बयान से मामला फिर चर्चा में
हर्ष गोयनका के समर्थन के बाद यह विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। गोयनका ने सीधे तौर पर यह नहीं कहा कि डॉ. सुभाष चंद्रा से जुड़े सभी आरोप गलत हैं, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि मामले में सामने आ रही कई जानकारियां गलत हैं और बिना पूरा पक्ष सुने किसी निष्कर्ष पर पहुंचना ठीक नहीं है।
ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि डॉ. सुभाष चंद्रा की ओर से इस पूरे मामले में आगे क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है और NCLT की कार्यवाही में इस कर्ज और उसके निपटारे को लेकर वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।
उन्हें डिजिटल मीडिया रणनीति और प्लानिंग के क्षेत्र में अनुभव है। उनके काम का दायरा सर्च, सोशल, डिस्प्ले और प्रोग्रामेटिक के साथ-साथ बिजनेस एनालिसिस और क्लाइंट रिलेशनशिप तक रहा है।
by
Samachar4media Bureau
अभिषेक माथुर (Abhishek Mathur) को पब्लिसिस ग्रुप (Publicis Groupe) में 'डिजिटल बाइंग' (Digital Buying) के डायरेक्टर के पद पर प्रमोट किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
माथुर ने 2024 में Publicis Groupe के साथ 'डिजिटल बाइंग' के एसोसिएट डायरेक्टर के तौर पर अपनी पारी शुरू की थी। करीब दो साल के कार्यकाल के बाद उन्हें अब बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
उन्हें डिजिटल मीडिया रणनीति और प्लानिंग के क्षेत्र में अनुभव है। उनके काम का दायरा सर्च, सोशल, डिस्प्ले और प्रोग्रामेटिक के साथ-साथ बिजनेस एनालिसिस और क्लाइंट रिलेशनशिप तक रहा है।
Publicis Groupe में शामिल होने से पहले माथुर करीब तीन साल तक माइंडशेयर (Mindshare) के साथ जुड़े रहे। इससे पहले उन्होंने ओएमडी वर्ल्डवाइड (OMD Worldwide), परफॉर्मिक्स कन्वोनिक्स (Performics.Convonix) और साइबेज (Cybage) जैसी कंपनियों में भी काम किया है।
नई भूमिका में माथुर डिजिटल बाइंग से जुड़े कार्यों और रणनीति को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे। डिजिटल मीडिया के अलग-अलग क्षेत्रों में उनका अनुभव इस जिम्मेदारी में अहम भूमिका निभाएगा।
कर्ज के दबाव से जूझ रही Vodafone Idea (Vi) ने अपने ऊपर बकाया स्पेक्ट्रम देनदारी को कम करने की दिशा में बड़ा प्लान तैयार किया है।
by
Samachar4media Bureau
कर्ज के दबाव से जूझ रही Vodafone Idea (Vi) ने अपने ऊपर बकाया स्पेक्ट्रम देनदारी को कम करने की दिशा में बड़ा प्लान तैयार किया है। कंपनी अगले तीन साल में करीब ₹49,000 करोड़ का स्पेक्ट्रम बकाया चुकाने की योजना बना रही है। कंपनी के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने यह जानकारी शेयरधारकों के साथ साझा की है।
कंपनी की 31वीं Annual General Meeting (AGM) में बिड़ला ने कहा कि अगले तीन साल में तय सभी स्पेक्ट्रम भुगतान को कंपनी की बिजनेस योजना में शामिल किया गया है। कंपनी का मकसद स्पेक्ट्रम बकाये के बड़े बोझ को कम करके अपनी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना है।
तीन साल में कैसे चुकाएगी रकम?
Vodafone Idea के लिए करीब ₹49,000 करोड़ का स्पेक्ट्रम बकाया आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी वित्तीय जिम्मेदारियों में से एक है। मौजूदा योजना के अनुसार कंपनी को वित्त वर्ष 2026-27 में करीब ₹7,000 करोड़, वित्त वर्ष 2027-28 में ₹15,000 करोड़ और वित्त वर्ष 2028-29 में करीब ₹27,000 करोड़ का भुगतान करना होगा।
यानी कुल मिलाकर तीन साल में करीब ₹49,000 करोड़ का भुगतान किया जाना है।
अब और मोरेटोरियम नहीं लेने की योजना
कंपनी ने संकेत दिया है कि वह स्पेक्ट्रम भुगतान के लिए आगे किसी और मोरेटोरियम की मांग नहीं करेगी। इसके बजाय भुगतान के लिए EBITDA में बढ़ोतरी, कंपनी के आंतरिक कैश फ्लो और नए बैंक कर्ज जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब Vodafone Idea नए बैंक फंडिंग की कोशिश भी कर रही है। कंपनी को उम्मीद है कि स्पेक्ट्रम बकाये के भुगतान का स्पष्ट रोडमैप कर्जदाताओं का भरोसा बढ़ाने में मदद करेगा।
नेटवर्क विस्तार पर भी जारी रहेगा खर्च
Vodafone Idea सिर्फ पुराने बकाये चुकाने पर ही ध्यान नहीं दे रही है। कंपनी ने अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए करीब ₹45,000 करोड़ का कैपेक्स प्लान भी बनाया है। इसके तहत 4G नेटवर्क का विस्तार और 5G सेवाओं को तेजी से बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के अंत तक उसके पास करीब 19.28 करोड़ ग्राहक थे। इनमें करीब 12.9 करोड़ 4G और 5G यूजर्स शामिल थे। कंपनी ने 4G कवरेज को भी बढ़ाया है और 5G सेवाएं 200 से ज्यादा शहरों और कस्बों में उपलब्ध हो चुकी हैं।
AGR का बोझ भी हुआ कम
Vodafone Idea पर लंबे समय से AGR यानी Adjusted Gross Revenue से जुड़ी देनदारियों का भी बड़ा दबाव रहा है। इस साल सरकार की ओर से AGR देनदारी में राहत मिलने के बाद स्पेक्ट्रम का करीब ₹49,000 करोड़ का बकाया कंपनी की सबसे बड़ी बाकी वित्तीय जिम्मेदारियों में शामिल हो गया है।
बिड़ला ने यह भी कहा है कि कंपनी को अब अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर पहले के मुकाबले ज्यादा स्पष्टता है और आने वाले समय में नेटवर्क निवेश, बाजार में प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों व कमाई में बढ़ोतरी पर ध्यान दिया जाएगा।
कंपनी के सामने अभी भी बड़ी चुनौती
हालांकि ₹49,000 करोड़ का भुगतान करने की योजना सामने आ गई है, लेकिन इतनी बड़ी रकम जुटाना Vodafone Idea के लिए आसान नहीं होगा। कंपनी को एक तरफ स्पेक्ट्रम बकाया चुकाना है, वहीं दूसरी तरफ नेटवर्क विस्तार के लिए भी बड़ी रकम खर्च करनी है।
इसी वजह से कंपनी के लिए कैश फ्लो बढ़ाना, EBITDA में सुधार करना और नए बैंक फंड हासिल करना बेहद महत्वपूर्ण होगा। बाजार विश्लेषकों और कर्जदाताओं की नजर अब इस बात पर रहेगी कि Vodafone Idea इस भुगतान योजना को कितनी प्रभावी तरीके से लागू कर पाती है।