मेटा वन में मिलेंगे 50 से ज्यादा फीचर्स : AI इस्तेमाल से लेकर बिजनेस टूल्स तक का फायदा

मेटा ने Meta One सब्सक्रिप्शन सेवा पेश की है, जिसमें Instagram, Facebook, WhatsApp और Meta AI के लिए 50 से ज्यादा प्रीमियम फीचर्स और अतिरिक्त AI टूल्स मिलेंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 16 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2026
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मेटा (Meta) ने सोशल मीडिया और एआई (AI) इस्तेमाल करने वाले यूजर्स के लिए नई सब्सक्रिप्शन सेवा (Subscription Service) मेटा वन (Meta One) पेश की है। इसके तहत इंस्टाग्राम (Instagram), फेसबुक (Facebook), व्हाट्सऐप (WhatsApp) और मेटा एआई (Meta AI) में कई अतिरिक्त सुविधाएं मिलेंगी। कंपनी के मुताबिक, सेवा में 50 से ज्यादा फीचर्स होंगे, जबकि सामान्य ऐप और एआई सुविधाएं पहले की तरह मुफ्त रहेंगी।

मेटा वन के तहत इंस्टाग्राम प्लस (Instagram Plus) में कस्टम फॉन्ट (Custom Font), स्टोरी नोटिफिकेशन (Story Notifications) और डीएम प्रीव्यू (DM Preview) जैसे फीचर्स मिलेंगे। व्हाट्सऐप प्लस (WhatsApp Plus) में खास थीम, नए आइकन, स्पेशल स्टिकर और ज्यादा चैट पिन करने की सुविधा दी जाएगी।

फेसबुक प्लस (Facebook Plus) में कस्टम ऐप आइकन, सुपर हार्ट और दूसरे पर्सनलाइजेशन (Personalization) विकल्प मिलेंगे। सब्सक्राइबर्स मेटा एआई की मदद से ज्यादा इमेज और वीडियो भी बना सकेंगे। इसके अलावा इंस्टाग्राम रेस्टाइल (Instagram Restyle) फीचर का ज्यादा इस्तेमाल करने की सुविधा भी मिलेगी।

मेटा वन के क्रिएटर और बिजनेस प्लान (Creator and Business Plan) में बेहतर प्रोफाइल, वेरिफाइड बैज (Verified Badge) और इम्पर्सोनेशन प्रोटेक्शन (Impersonation Protection) जैसे फीचर्स मिलेंगे। व्हाट्सऐप पर मेटा बिजनेस एजेंट (Meta Business Agent) का ज्यादा इस्तेमाल भी किया जा सकेगा।

एडवांस्ड प्लान (Advanced Plan) में 30 दिनों तक स्टोरी शेड्यूल करने, पोस्ट और रील्स में लिंक जोड़ने, एक्सपोर्टेबल एनालिटिक्स (Exportable Analytics) और बेहतर ऑडियंस इनसाइट्स (Audience Insights) जैसे टूल्स शामिल हैं। इसके साथ अतिरिक्त लिंक्ड डिवाइसेज और बिजनेस ब्रॉडकास्ट क्रेडिट (Business Broadcast Credits) भी मिलेंगे।

मेटा वन की अलग-अलग सेवाओं की कीमत 79 रुपये प्रति महीने से शुरू होगी। व्हाट्सऐप प्लस की कीमत 79 रुपये और इंस्टाग्राम प्लस व फेसबुक प्लस की शुरुआती कीमत 99 रुपये प्रति महीने होगी। कोर बंडल (Core Bundle) 549 रुपये और प्रीमियम प्लान (Premium Plan) 1,950 रुपये प्रति महीने का होगा।

क्रिएटर और बिजनेस प्लान की शुरुआती कीमत 639 रुपये होगी। वहीं एडवांस्ड, एक्सपर्ट और मैक्स प्लान (Advanced, Expert and Max Plans) की कीमत क्रमशः 2,099 रुपये, 6,399 रुपये और 20,990 रुपये प्रति महीने होगी।

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पीएम मोदी के पुराने इंटरव्यू साझा करेंगे दीपक चौरसिया : बताया ‘मोदी आर्काइव्स’ का प्लान

वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने पुराने इंटरव्यू की झलकियां साझा करने की जानकारी दी है। यह सिलसिला अगले 15 दिनों तक चलेगा।

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
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वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया (Deepak Chaurasia) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के साथ किए गए अपने पुराने इंटरव्यू (Interview) की खास झलकियां साझा करने की घोषणा की है। उन्होंने सोशल मीडिया (Social Media) पोस्ट में बताया कि अगले 15 दिनों तक वह इन दुर्लभ इंटरव्यू की झलकियां दर्शकों के साथ साझा करेंगे।

दीपक चौरसिया ने अपनी पोस्ट में लिखा कि राजनीतिक पत्रकारिता (Political Journalism) के सफर में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई ऐतिहासिक इंटरव्यू किए हैं। अब वह इन्हीं इंटरव्यू से जुड़ी खास झलकियां ‘मोदी आर्काइव्स’ (Modi Archives) के नाम से लेकर आएंगे।

उन्होंने बताया कि इन इंटरव्यू में गुजरात दंगों से जुड़े तीखे सवालों के साथ कई दिलचस्प बातचीत भी शामिल होंगी। उन्होंने लोगों से ‘मोदी आर्काइव्स’ के लिए इंतजार करने को कहा है।

अपनी पोस्ट में दीपक चौरसिया ने #DeepakChaurasiaModiTalk का भी इस्तेमाल किया। उन्होंने इसके लिए मिले प्यार और समर्थन का धन्यवाद देते हुए दावा किया कि इस हैशटैग को ग्लोबली नंबर दो (Globally No. 2) पर ट्रेंड कराया गया।

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सोशल मीडिया के ‘एडिक्टिव डिजाइन’ पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

दिल्ली HC ने केंद्र से पूछा, क्या सोशल मीडिया के ‘एडिक्टिव’ फीचर्स पर नीति बनाने का विचार है?

Last Modified:
Thursday, 17 September, 2026
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सोशल मीडिया पर लगातार स्क्रॉल करते रहने की आदत को लेकर अब मामला अदालत तक पहुंच गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ऐसे डिजाइन फीचर्स को लेकर कोई नीति बनाने पर विचार कर रही है, जो यूजर्स को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। खास तौर पर बच्चों और किशोरों पर इसके असर को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और अमित शर्मा की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से केंद्र सरकार से इस बारे में जानकारी लेने को कहा है। सुनवाई के दौरान शर्मा ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे पर उनके पास फिलहाल सरकार की ओर से कोई विशेष निर्देश नहीं हैं। मामले की अगली सुनवाई करीब तीन सप्ताह बाद होगी।

यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है। याचिका में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ऐसे फीचर्स की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाने की मांग की गई है, जो यूजर्स की लगातार भागीदारी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। याचिका में ऐसे फीचर्स के लिए नियामकीय सुरक्षा उपाय सुझाने की भी मांग की गई है।

Infinite Scrolling और Autoplay पर सवाल

याचिका में खास तौर पर Infinite Scrolling, Autoplay और Personalised Feeds जैसे फीचर्स का जिक्र किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन फीचर्स की मदद से यूजर्स को लगातार नया कंटेंट दिखाया जाता है, जिससे वे बार-बार प्लेटफॉर्म पर वापस आते हैं और लंबे समय तक ब्राउजिंग करते रहते हैं।

याचिका में Meta Platforms, Alphabet, X और Telegram को भी पक्षकार बनाया गया है। इसके साथ ही यूजर्स को कथित तौर पर हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग भी की गई है।

याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया की लत और लगातार स्क्रॉल करने की आदत से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर वित्त वर्ष 2026 के Economic Survey में भी चिंता जताई गई थी। याचिका के मुताबिक, इसमें सोशल मीडिया की लत को चिंता, डिप्रेशन, कम आत्मसम्मान और साइबरबुलिंग से जुड़े तनाव जैसी समस्याओं के साथ जोड़ा गया है। इसमें युवाओं को खास तौर पर संवेदनशील बताया गया है।

Meta के अमेरिकी मामले का भी जिक्र

याचिका में Meta से जुड़े शोध का भी हवाला दिया गया है और कहा गया है कि किशोर ऐसे फीचर्स के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं, जिन्हें यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।

इस बहस के बीच अमेरिका में Meta के खिलाफ बच्चों और किशोरों पर Facebook और Instagram के कथित प्रभाव से जुड़े मामले का भी जिक्र सामने आया है। अगस्त में Meta ने अमेरिका के लगभग सभी राज्यों से जुड़े एक समझौते के तहत अगले 10 साल में 18 अरब डॉलर तक भुगतान करने और किशोरों के इस्तेमाल पर अतिरिक्त प्रतिबंध लागू करने पर सहमति जताई थी।

समझौते के तहत Facebook और Instagram पर किशोरों के लिए डिफॉल्ट रूप से दो घंटे की दैनिक उपयोग सीमा का प्रावधान है, हालांकि माता-पिता के कंट्रोल से इसमें बदलाव किया जा सकता है। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक किशोरों की पहुंच पर भी रोक का प्रावधान है। इसके अलावा स्कूल के समय नोटिफिकेशन डिफॉल्ट रूप से बंद रखने की बात कही गई है।

Meta ने 13 साल से कम उम्र के यूजर्स की पहचान के लिए अपनी Age Assurance व्यवस्था को मजबूत करने पर भी सहमति जताई है। अमेरिकी राज्यों ने आरोप लगाया था कि Meta ने बच्चों के बीच प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले डिजाइन अपनाए और इससे जुड़े जोखिमों को पर्याप्त तरीके से नहीं संभाला। हालांकि, समझौते के तहत Meta ने किसी गलत काम को स्वीकार नहीं किया है।

अब नजर सोशल मीडिया के डिजाइन पर

दिल्ली हाई कोर्ट में चल रही यह कार्यवाही ऐसे समय में हो रही है, जब सोशल मीडिया के इस्तेमाल, प्लेटफॉर्म डिजाइन, यूजर की पसंद और बच्चों की सुरक्षा के बीच नियमन की सीमा को लेकर चर्चा बढ़ रही है।

कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध या रोक से जुड़े मामलों में कहा था कि ऐसे फैसलों में नीतिगत पहलू शामिल होते हैं और इन्हें सरकार पर छोड़ना बेहतर है। मौजूदा याचिका हालांकि सोशल मीडिया पर सीधे प्रतिबंध की बजाय प्लेटफॉर्म के डिजाइन और यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने वाले फीचर्स की औपचारिक जांच पर जोर देती है।  

अभी दिल्ली हाई कोर्ट ने केवल केंद्र का रुख जानने के लिए निर्देश दिया है। इस स्तर पर सोशल मीडिया के इन फीचर्स पर किसी तरह का प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया गया है।

 

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जियो और Canva की साझेदारी : चुनिंदा यूजर्स को मुफ्त मिलेगा Pro और Pro Lite

जियो ने Canva के साथ साझेदारी की है। चुनिंदा रिचार्ज प्लान वाले यूजर्स को Canva Pro या Pro Lite का मुफ्त एक्सेस 12 महीने तक मिलेगा, बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के।

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Published - Wednesday, 16 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 16 September, 2026
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जियो (Jio) ने कैनवा (Canva) के साथ साझेदारी की है। इसके तहत कुछ यूजर्स को उनके रिचार्ज प्लान के आधार पर कैनवा के प्रीमियम डिजाइन और एआई टूल्स (Premium Design and AI Tools) का 12 महीने तक मुफ्त एक्सेस मिलेगा। यह ऑफर 16 सितंबर से अलग-अलग चैनल्स (Channels) पर उपलब्ध होगा।

इस ऑफर के लिए यूजर्स को कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा और कंपनी के मुताबिक कोई हिडन चार्ज (Hidden Charge) भी नहीं लगाया जाएगा। 399 रुपये वाले जियो प्लान से रिचार्ज करने वाले यूजर्स को कैनवा प्रो (Canva Pro) मिलेगा। वहीं 349 रुपये वाले प्लान और 349 रुपये से ज्यादा कीमत वाले पात्र 2 जीबी प्रतिदिन (2GB/Day) प्लान पर कैनवा प्रो लाइट (Canva Pro Lite) का फायदा मिलेगा।

यूजर्स मायजियो ऐप (MyJio App) के जरिए इस ऑफर का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए ऐप में Canva ऑफर खोलकर सब्सक्रिप्शन (Subscription) एक्टिवेट करना होगा।

कैनवा प्रो लाइट में प्रीमियम टेम्पलेट्स (Premium Templates), फोटो, वीडियो और फॉन्ट्स के साथ वन-टैप बैकग्राउंड रिमूवल (One-Tap Background Removal), बेसिक ब्रांड किट (Basic Brand Kit), प्रिंट-रेडी एक्सपोर्ट (Print-Ready Export), मैजिक रिसाइज (Magic Resize) और मैजिक इरेजर (Magic Eraser) जैसे फीचर्स मिलते हैं।

कैनवा प्रो में इसके अलावा कंटेंट प्लानर (Content Planner), कैनवा एआई का कन्वर्सेशनल चैट-टू-डिजाइन फीचर (Conversational Chat-to-Design) और एडवांस्ड एआई टूल्स (Advanced AI Tools) के लिए ज्यादा लिमिट्स मिलती हैं।

कैनवा पर एआई आधारित टूल्स की मदद से विजुअल कंटेंट (Visual Content) तैयार और एडिट किया जा सकता है। प्लेटफॉर्म पर लाखों डिजाइन एसेट्स (Design Assets) भी उपलब्ध हैं। दोनों कंपनियों के मुताबिक, इस साझेदारी से छात्रों, क्रिएटर्स, प्रोफेशनल्स, उद्यमियों और छोटे कारोबारों के लिए इन टूल्स तक पहुंच आसान होगी।

यह साझेदारी हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में कंटेंट क्रिएशन (Content Creation) को भी सपोर्ट करेगी। कंपनियों के मुताबिक, जियो की डिजिटल पहुंच और कैनवा की डिजाइन व एआई क्षमताओं को मिलाकर ज्यादा यूजर्स तक इन सुविधाओं को पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

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बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट पर मेटा का कदम : जांच एजेंसियों को देगी जानकारी

भारत में बच्चों की सुरक्षा को लेकर मेटा ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों के साथ जानकारी साझा करने पर सहमति जताई है। सरकार प्लेटफॉर्म की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रही है।

Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
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मेटा (Meta) भारत में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी कानून लागू करने वाली एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) के साथ साझा करने पर सहमत हो गई है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platforms) पर बच्चों के लिए नुकसानदायक कंटेंट (Harmful Content) को लेकर जांच तेज कर रही है।

अधिकारियों ने सोशल मीडिया कंपनियों से बच्चों की सुरक्षा के लिए मजबूत सेफ्टी सिस्टम (Safety System) तैयार करने को कहा है। नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

मेटा पर अपने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री के प्रचार और प्रसार को रोकने में लापरवाही के आरोप लगे हैं। इन मामलों के सामने आने के बाद कंपनी पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का दबाव बढ़ा है। सरकार अब यह भी जांच रही है कि सोशल मीडिया कंपनियां ऐसे कंटेंट की पहचान कैसे करती हैं और उसे हटाने के बाद उससे जुड़ी जानकारी कानून लागू करने वाली एजेंसियों को देती हैं या नहीं।

मेटा इंडिया (Meta India) के प्रतिनिधि 9 सितंबर को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights) के सामने पेश हुए। आयोग बच्चों के यौन शोषण और गलत इस्तेमाल से जुड़े कंटेंट वाले विज्ञापनों के आरोपों की जांच कर रहा है।

एक रिपोर्ट के सामने आने के बाद आयोग ने जुलाई में मेटा से जवाब मांगा था। कंपनी की ओर से जवाब मिलने के बाद आयोग ने मामले की आगे जांच करने का फैसला किया और मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जानकारी देने के लिए बुलाया।

सरकार दूसरे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से भी बातचीत कर रही है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि कंपनियां बच्चों के लिए खतरनाक कंटेंट की पहचान, उसे हटाने और संबंधित मामलों की रिपोर्टिंग (Reporting) किस तरह करती हैं।

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नगमा सहर का नया YouTube चैनल हुआ बंद : वजह को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं

करीब 23 साल बाद NDTV से विदाई लेकर डिजिटल वेंचर शुरू करने वाली नगमा सहर का नया YouTube चैनल पहले वीडियो के कुछ समय बाद उपलब्ध नहीं रहा, वजह अब तक साफ नहीं है।

Last Modified:
Tuesday, 15 September, 2026
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करीब 23 साल तक एनडीटीवी (NDTV) से जुड़ी रहीं वरिष्ठ पत्रकार और एंकर नगमा सहर (Nagma Sehar) ने नई डिजिटल पारी की शुरुआत अपना डिजिटल वेंचर (Digital Venture) शुरू करके की थी। हालांकि, शुरुआत के कुछ ही समय बाद उनके नए यूट्यूब चैनल (YouTube Channel) के बंद होने की जानकारी सामने आई है। नगमा सहर ने 31 अगस्त को एनडीटीवी से अपनी विदाई की घोषणा की थी।

नगमा सहर के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) पर पहला वीडियो 11 सितंबर की सुबह सामने आया था। इसका टाइटल था- “बेलगाम भीड़, बेरहम शहर- The Killing of Vikram Singh.” इस वीडियो में मणिपुर मूल के संगीतकार चोंगथम विक्रम सिंह की मौत से जुड़े मामले को उठाया गया था।

11 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, विक्रम सिंह की दिल्ली में कथित हमले के बाद मौत हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर शारीरिक चोटों के कारण अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि नगमा सहर के इस पहले वीडियो को कुछ लोगों ने देखा था, लेकिन अब यह यूट्यूब पर उपलब्ध नहीं है। चैनल के लिंक पर जाने पर “This channel is no longer available” का नोटिफिकेशन दिखाई दे रहा है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चैनल किस वजह से बंद हुआ है। यह भी साफ नहीं है कि चैनल को यूट्यूब ने हटाया है या इसे नगमा सहर की टीम ने खुद बंद किया है। इस संबंध में नगमा सहर या यूट्यूब की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

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रजत शर्मा के डीपफेक वीडियो हटाए जाएं : दिल्ली हाईकोर्ट का मेटा-गूगल को आदेश

7 नवंबर 2025 को अदालत में गूगल (Google) ने बताया था कि शिकायत की समीक्षा के बाद THE REAL REPORT और JSR NEWS के यूट्यूब अकाउंट 30 अक्टूबर 2024 को बंद कर दिए गए थे।

Last Modified:
Saturday, 12 September, 2026
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दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने इंडिया टीवी (India TV) के चेयरमैन रजत शर्मा (Rajat Sharma) के डीपफेक वीडियो मामले में मेटा (Meta) और गूगल (Google) को कई फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल हटाने का निर्देश दिया है।

जस्टिस ज्योति सिंह (Justice Jyoti Singh) की ओर से 24 अगस्त 2026 को जारी स्थायी निषेधाज्ञा (Permanent Injunction) में कहा गया कि संबंधित प्लेटफॉर्म अनुरोध मिलने के 24 घंटे के भीतर उसे स्वीकार करें और इसके बाद 36 घंटे के अंदर जरूरी कार्रवाई करें। आदेश में यह भी कहा गया कि कार्रवाई नहीं होने पर रजत शर्मा और इंडिया टीवी अदालत से उचित निर्देश मांग सकते हैं।

अदालत के आदेश के मुताबिक, जिन फेसबुक पेजों पर कार्रवाई की गई है, उनमें TAMARA DOC, Indian Medical Association, New Convivio, Travinin, The Hope of Your Joints, LEGEND MAP 62 और MESONERO SOTO शामिल हैं। वहीं यूट्यूब (YouTube) के THE INDIAN NEWS TODAY और Sone Chandi Ka Bhav चैनलों को भी हटाने का निर्देश दिया गया है।

अदालत ने रजत शर्मा को एक प्रतिष्ठित पत्रकार बताते हुए कहा कि वह दो दशक से ज्यादा समय से भारतीय टेलीविजन का प्रमुख चेहरा रहे हैं। आदेश में उनके पत्रकारिता योगदान और 2015 में पद्म भूषण (Padma Bhushan) से सम्मानित किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। वह पिछले 29 वर्षों से ‘आप की अदालत’ (Aap Ki Adalat) की मेजबानी कर रहे हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपित पक्षों की ओर से एआई (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर रजत शर्मा की छेड़छाड़ और बदली हुई तस्वीरों, आवाज और अन्य व्यक्तित्व संबंधी विशेषताओं वाले वीडियो के जरिए गलत सूचना फैलाई जा रही थी। अदालत ने इसे उनके पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स के साथ-साथ इंडिया टीवी के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क और कॉपीराइट के उल्लंघन से भी जोड़ा।

मामले में अदालत ने 18 दिसंबर 2024 के एक एक्स-पार्टी आदेश के जरिए शुरुआती आठ पक्षों को ऐसे कंटेंट के प्रसार से रोक दिया था। बाद में मुकदमे की सुनवाई के दौरान चार यूट्यूब चैनलों को भी पक्षकार बनाया गया, जिन पर रजत शर्मा की पहचान और व्यक्तित्व से जुड़े तत्वों का इस्तेमाल करते हुए डीपफेक वीडियो प्रसारित करने का आरोप था।

7 नवंबर 2025 को अदालत में गूगल (Google) ने बताया था कि शिकायत की समीक्षा के बाद THE REAL REPORT और JSR NEWS के यूट्यूब अकाउंट 30 अक्टूबर 2024 को बंद कर दिए गए थे, जबकि THE INDIAN NEWS TODAY और Sone Chandi Ka Bhav के अकाउंट समीक्षा के अधीन थे।

अब अदालत ने गूगल को इन दोनों यूट्यूब चैनलों को आदेश अपलोड होने के 36 घंटे के भीतर हटाने और उपलब्ध बीएसआई (Basic Subscriber Information), आईपी लॉग्स (IP Logs) तथा अन्य एक्सेस और कॉन्टैक्ट डिटेल्स साझा करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने यह भी कहा कि आगे अगर रजत शर्मा की तस्वीर, नाम, आवाज, वीडियो या व्यक्तित्व से जुड़े किसी अन्य कंटेंट या यूआरएल (URL) का दुरुपयोग सामने आता है, तो इंडिया टीवी और रजत शर्मा संबंधित जानकारी और दस्तावेजों के साथ मेटा और गूगल से संपर्क कर सकते हैं।

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स्नीकर्स ब्रांड कॉमेट ने जुटाई 100 करोड़ रुपये की सीरीज बी फंडिंग

भारतीय स्नीकर्स ब्रांड कॉमेट ने वर्लिनवेस्ट की अगुवाई में 100 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जिसका इस्तेमाल रिटेल विस्तार, उत्पाद विकास, तकनीकी क्षमताओं और अनुसंधान को मजबूत करने में होगा।

Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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भारतीय स्नीकर्स ब्रांड कॉमेट (Comet) ने सीरीज बी फंडिंग दौर में 100 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस निवेश दौर का नेतृत्व वर्लिनवेस्ट (Verlinvest) ने किया। कंपनी के मौजूदा निवेशकों एलिवेशन कैपिटल (Elevation Capital) और नेक्सस वेंचर पार्टनर्स (Nexus Venture Partners) ने भी इसमें हिस्सा लिया है। इसके अलावा अभिराज सिंह भाल, अजीत मोहन और आनंद आहूजा जैसे एंजेल निवेशकों ने भी कंपनी का समर्थन किया है।

नई पूंजी के जरिए कॉमेट अपने खुदरा कारोबार के विस्तार पर जोर देने की योजना बना रहा है। कंपनी उत्पादों और तकनीकी क्षमताओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में भी निवेश बढ़ाएगी। इसमें नए फुटवियर डिजाइन तैयार करने और उन्हें बाजार में उतारने के लिए कंपनी के अपने सोल मोल्ड और जरूरी टूलिंग विकसित करने पर भी खर्च किया जाएगा।

कॉमेट इस महीने तक अपने स्टोर की संख्या बढ़ाकर 10 करने की तैयारी में है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के अंत तक देश में 20 स्टोर का नेटवर्क खड़ा करना है। इस विस्तार के जरिए ब्रांड अपनी ऑफलाइन मौजूदगी को मजबूत करना चाहता है।

कंपनी की रणनीति केवल भौतिक स्टोर तक सीमित नहीं है। कॉमेट भारत में अपने कारोबार को व्यापक ओम्नीचैनल (Omnichannel) नेटवर्क के रूप में विकसित करने पर भी काम कर रहा है, ताकि ग्राहकों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से ब्रांड तक पहुंच मिल सके।

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सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया पोस्ट पर लग सकती है लगाम, केंद्र कर रहा तैयारी

सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया पर अगली पोस्ट करने से पहले अब थोड़ा ज्यादा सोचना पड़ सकता है।

Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए सोशल मीडिया पर अगली पोस्ट करने से पहले अब थोड़ा ज्यादा सोचना पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सरकारी कर्मचारियों के लिए आचार संहिता (Code of Conduct) लाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद यह तय करना है कि सरकारी कर्मचारी X, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर क्या पोस्ट कर सकते हैं और किन चीजों से उन्हें बचना होगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव पर सरकार के वरिष्ठ स्तर पर चर्चा हो चुकी है। अगर इसे लागू किया जाता है तो सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर ज्यादा स्पष्ट सीमाएं तय की जा सकती हैं। यह फ्रेमवर्क अलग-अलग रैंक्स के ऑफिसर्स और स्टाफ पर लागू होने की उम्मीद है। हालांकि, इसे कब लागू किया जाएगा और इसमें कौन-कौन से नियम होंगे, इस पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

सोशल मीडिया बना ऑफिशियल लाइफ का हिस्सा

पिछले कुछ समय में सोशल मीडिया सरकारी कर्मचारियों की ऑफिशियल लाइफ का भी एक अहम हिस्सा बन गया है। अधिकारी और कर्मचारी अपने काम, Official Activities और Public Positions से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं।

हालांकि, कुछ मामलों में ऐसे पोस्ट्स से Official Role और Personal सोशल मीडिया एक्टिविटी के बीच की सीमा धुंधली हो सकती है। सरकार अब इसी अंतर को स्पष्ट करना चाहती है, ताकि यह तय रहे कि कोई व्यक्ति सरकारी पद पर रहते हुए सोशल मीडिया पर अपनी Personal Opinion किस सीमा तक रख सकता है।

पीएम मोदी ने वरिष्ठ अधिकारियों से गाइडलाइंस पर विचार करने को कहा

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीनियर ब्यूरोक्रेट्स से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ऐसी गाइडलाइंस बनाने की संभावना तलाशने को कहा है। मौजूदा नियम उस दौर में बनाए गए थे, जब सोशल मीडिया आज की तरह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा नहीं था। इसलिए इन नियमों में सरकारी अधिकारियों की ऑनलाइन एक्टिविटी को लेकर विशेष प्रावधान नहीं हैं।

ऐसे में केंद्र सरकार के स्तर पर एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करने पर विचार हो रहा है, जो सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दे सके।

बिहार पहले ही कर चुका है नियम सख्त

केंद्र का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ राज्य सरकारें पहले ही सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नियम कड़े कर चुकी हैं। बिहार ने इस साल की शुरुआत में ऐसे नियम लागू किए थे, जिनके तहत सरकारी अधिकारियों को गवर्मेंट पॉलिसीज और पॉलिटिकल मैटर्स पर अपने पर्सनल व्यूज सोशल मीडिया पर साझा करने को लेकर प्रतिबंध लगाए गए हैं।

इसके अलावा बिना मंजूरी के Workplace से जुड़े Reels, Videos और Livestreams पोस्ट करने पर भी रोक लगाई गई है।

ऑनलाइन कंटेंट को लेकर भी सख्त हुआ केंद्र

एक तरफ सरकार सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए नियम बनाने पर विचार कर रही है, वहीं दूसरी तरफ ऑनलाइन कंटेंट को लेकर भी रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को सख्त किया जा रहा है।

फरवरी में केंद्र सरकार ने Information Technology Rules, 2021 में बदलाव किए थे। इन बदलावों के तहत Synthetically Generated Information, यानी डीपफेक और AI-Generated Content को लेकर प्लेटफॉर्म्स पर ज्यादा जिम्मेदारियां डाली गई हैं।

इन बदलावों के बाद कुछ मामलों में Content Removal की समयसीमा भी कम की गई है। कुछ निर्धारित Unlawful-Content Notices पर प्लेटफॉर्म्स को तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी, जबकि कुछ संवेदनशील शिकायतों के मामलों में यह समयसीमा दो घंटे रखी गई है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए अलग स्तर का रेगुलेशन

प्रस्तावित सोशल मीडिया कोड सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अलग तरह का रेगुलेशन होगा। इसका मकसद सामान्य तौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स या ऑनलाइन कंटेंट को रेगुलेट करना नहीं होगा, बल्कि यह तय करना होगा कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किस तरह करें।

खास तौर पर यह स्पष्ट किया जा सकता है कि किसी सरकारी कर्मचारी की Official Identity और उसकी व्यक्तिगत सोशल मीडिया प्रोफाइल के बीच सीमा कहां तक होगी।

सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मोबाइल फोन अब वर्कप्लेस और पर्सनल लाइफ दोनों का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में अगर केंद्र यह कोड लागू करती है तो एक बात साफ हो सकती है- जब किसी सोशल मीडिया प्रोफाइल के साथ सरकारी पद और पहचान जुड़ी हो, तो वहां की हर पोस्ट को पूरी तरह पर्सनल नहीं माना जाएगा।

 

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फ्लिपकार्ट ने शुरू किया माइक्रोड्रामा फीचर: खरीदारी के साथ मनोरंजन का भी अनुभव

फ्लिपकार्ट ने माइक्रोड्रामा क्षेत्र में कदम रखते हुए प्रतिलिपि और टीटीटी के साथ साझेदारी की है। अब ऐप के ‘प्ले’ सेक्शन में यूजर्स को छोटे नाटकीय शो देखने मिलेंगे।

Last Modified:
Friday, 04 September, 2026
flipcart

ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट (Flipkart) ने तेजी से बढ़ते माइक्रोड्रामा सेगमेंट में कदम रखा है। द इकोनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने प्रतिलिपि (Pratilipi) और मीडिया कंपनी टेरिबली टाइनी टेल्स (Terribly Tiny Tales) के साथ साझेदारी की है।

इस नई पेशकश को फ्लिपकार्ट के मुख्य ई-कॉमर्स ऐप के ‘प्ले’ सेक्शन में शामिल किया गया है। इसी सेक्शन में कंपनी का कंटेंट आधारित शॉपिंग डिस्कवरी प्लेटफॉर्म ‘एक्सप्लोर’ और माइक्रोड्रामा के लिए अलग वर्टिकल ‘ड्रामा’ भी मौजूद है।

इस पहल का मकसद आगामी त्योहारी खरीदारी सीजन से पहले प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की भागीदारी और उनके द्वारा बिताए जाने वाले समय को बढ़ाना है। भारत में ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए त्योहारी सीजन कारोबार की दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है।

फिलहाल माइक्रोड्रामा फीड में टेरिबली टाइनी टेल्स और प्रतिलिपि के इन-हाउस माइक्रोड्रामा स्टूडियो डबल टैप फिल्म्स (Double Tap Films) का कंटेंट शामिल है। माइक्रोड्रामा छोटे और कम अवधि वाले पटकथा आधारित मनोरंजन का प्रारूप है, जिसने दुनियाभर में तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। खासतौर पर मोबाइल फोन पर मनोरंजन देखने वाले युवा दर्शकों के बीच इसकी मांग बढ़ी है।

फ्लिपकार्ट के लिए यह कदम उसकी व्यापक कंटेंट-कॉमर्स रणनीति का हिस्सा है। वॉलमार्ट (Walmart) समर्थित कंपनी मनोरंजन और खरीदारी के अनुभव को एक ही डिजिटल मंच पर जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। छोटे नाटकीय धारावाहिकों को अपने ई-कॉमर्स ऐप में शामिल करके कंपनी उत्पाद खोजने और खरीदारी से आगे यूजर्स के साथ जुड़ने के नए अवसर तैयार करना चाहती है।

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वॉट्सऐप का नया फीचर: अब मैसेजिंग ऐप से ही कर सकेंगे बिल का भुगतान

वॉट्सऐप ने भारत में बिल भुगतान सुविधा शुरू की है। इसके जरिए यूजर्स बिजली, गैस, पानी, बीमा और कर्ज समेत 30 श्रेणियों के बिल सीधे ऐप से भर सकेंगे।

Last Modified:
Friday, 04 September, 2026
WhatsApp

वॉट्सऐप (WhatsApp) ने भारत में बिल भुगतान की सुविधा शुरू कर दी है। इसके जरिए यूजर्स मैसेजिंग ऐप से बाहर गए बिना रोजमर्रा के उपयोगिता बिल खोज, प्रबंधित और भुगतान कर सकेंगे। यह सुविधा भारत कनेक्ट (Bharat Connect) यानी बीबीपीएस (BBPS) नेटवर्क के जरिए उपलब्ध कराई गई है।

कंपनी के मुताबिक, इस सुविधा के तहत यूजर्स को 30 श्रेणियों में 22,722 बिलर उपलब्ध होंगे। इनमें बिजली, गैस, पानी, फास्टैग, बीमा, क्रेडिट कार्ड भुगतान और कर्ज की किस्त जैसे बिल शामिल हैं। बिल भुगतान सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को वॉट्सऐप की होम स्क्रीन के ऊपर दिखाई देने वाले रुपये के निशान पर टैप करना होगा। इसके बाद बिल की श्रेणी और संबंधित बिलर चुनना होगा।

यूजर को अपने खाते से जुड़ी जानकारी दर्ज करने के बाद सेवा के जरिए प्राप्त बिल की राशि दिखाई देगी। इसके बाद भुगतान पूरा किया जा सकेगा। भुगतान के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है।

वॉट्सऐप ने बिल भुगतान को आसान बनाने के लिए घर के बिलों का सारांश भी जोड़ा है। पहले भुगतान किए गए बिलर भुगतान होम स्क्रीन पर दिखाई देंगे, जिससे अगली बार उन तक जल्दी पहुंचा जा सकेगा। यूजर्स एक ही बिलर के साथ कई खाते भी प्रबंधित कर सकेंगे। इससे घर, कार्यालय या परिवार के अलग-अलग बिलों को एक ही जगह संभालना संभव होगा।

मेटा इंडिया (Meta India) के प्रबंध निदेशक और कंट्री हेड अरुण श्रीनिवास (Arun Srinivas) ने कहा कि इस सुविधा का उद्देश्य बिल भुगतान को संदेश भेजने जितना आसान बनाना और देशभर के यूजर्स तक डिजिटल भुगतान की सुविधा पहुंचाना है।

वॉट्सऐप पर बिल भुगतान की सुविधा फिलहाल पूरे भारत में चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही है। आने वाले हफ्तों में इसके सभी एंड्रॉयड (Android) और आईओएस (iOS) यूजर्स तक पहुंचने की उम्मीद है।

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