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पतंजलि जल्द ही इंटरनैशनल ब्रैंड बनेगा, बोले आचार्य बालकृष्ण...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। आचार्य बालकृष्ण आयुर्वेद के आचार्य और योग गुरु बाबा रामदेव के सहयोगी हैं। वह पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के सीईओ भी हैं। पतंजलि आयुर्वेद के माध्यम से आयुर्वेद को घर-घर तक पहुंचाने में उनका बड़ा योगदान है। हाल
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आचार्य बालकृष्ण आयुर्वेद के आचार्य और योग गुरु बाबा रामदेव के सहयोगी हैं। वह पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के सीईओ भी हैं। पतंजलि आयुर्वेद के माध्यम से आयुर्वेद को घर-घर तक पहुंचाने में उनका बड़ा योगदान है। हाल ही में हमारी सहयोगी पत्रिका इम्पैक्ट(IMPACT) की वरिष्ठ पत्रकार नीता नायर ने उनसे विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। इस बातचीत में आचार्य बालकृष्ण ने कंपनी के विस्तार की योजनाओं के साथ ही, इसे मल्टीनेशनल कंपनी बनाने और विभिन्न विवादों के बारे में बड़ी ही बेबाकी से जवाब दिए। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश...
सबसे पहले तो यह बताएं कि आपने नेपाल में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने का फैसला क्यों किया और क्या आप बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी इसकी प्लानिंग कर रहे हैं ?
हाल ही में नेपाल में खोली गई यूनिट में हमने प्रॉडक्शन का अच्छा स्तर रखने का प्रबंध किया है। हम पतंजलि आयुर्वेद को धीरे-धीरे दूसरे देशों तक भी ले जाना चाहते हैं। अब तक हम अपने देश के लोगों की बढ़ती मांग को पूरा करने का काम कर रहे थे। इसलिए हमने यहां पर कई मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाई हैं। अब हम दूसरे देशों पर भी फोकस कर रहे हैं।
भारत में पतंजलि आयुर्वेद का हमेशा से ‘स्वेदशी’ पर जोर रहा है और इसने बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) की खिलाफत की है। ऐसे में आपको क्या लगता है कि जब आप पतंजलि को भारत से बाहर ले जाएंगे तो आपकी कथनी और करनी में अंतर नहीं होगा ?
यहां मैं आपसे दो चीजें कहना चाहूंगा। पहली तो यह कि यदि हम भारत से बाहर पतंजलि की प्रॉडक्शन यूनिट लगाते हैं, जैसे हमने नेपाल में लगाई है तो वहां से हमें जो भी प्रॉफिट मिलेगा, उसका पूरा इस्तेमाल हम उस देश की बेहतरी में करेंगे। हम उन देशों में अपनी कंपनी ले जाएंगे जहां पर पर्याप्त संसाधन नहीं है। ऐसे में हम वहां के लोगों की शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतरी में अपना योगदान दे सकते हैं। यदि बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में ऐसा करती हैं तो हमें उनसे कोई आपत्ति नहीं है और हम उनका स्वागत करते हैं। वास्तव में हम तो यह चाहते हैं कि वे भारत में ऐसा करें। पतंजलि के माध्यम से हमने अभी सिर्फ भारत के लोगों को विकल्प उपलब्ध कराए हैं। इससे पहले लोगों के पास कोई चॉइस नहीं होती थी और उन्हें मजबूरी में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रॉडक्ट ही खरीदने पड़ते थे।
तो क्या आप यह कहना चाहते हैं कि भारत में कार्यरत बहुराष्ट्रीय कंपनियां यहां के लोगों के लिए कुछ भी नहीं करती हैं?
बिल्कुल, वे टैक्स का भुगतान करती हैं और लोग अक्सर यह बात कहते हैं कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां हमारे देश के रेवेन्यू में योगदान दे रही हैं लेकिन ऐसा तो सभी करते हैं, भारतीय कंपनियां भी ऐसा करती हैं। लेकिन हम जिस देश में अपनी यूनिट लगा रहे हैं, वहां के लोगों की बेहतरी के लिए हम विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चला रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि हम लोगों को उनकी परंपराओं से दूर नहीं कर रहे हैं। हम तो वहां की परंपराओं को सहेजने का काम करेंगे।
आप पतंजलि के सामानों को चीन को एक्सपोर्ट करने की प्लानिंग भी कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि ये प्रॉडक्ट वहां पर सफल होंगे और वहां के लोगों को पसंद आएंगे ?
एक बहुत ही दिलचस्प बात मैं आपको बताता हूं। अभी कुछ दिन पहले की ही बात है जब मैंने देखा के पतंजलि के कई प्रॉडक्ट्स अवैध रूप से चीन ले जाए जा रहे हैं। इसका मतलब वहां पर पतंजलि के प्रॉडक्ट्स की डिमांड है। चीन में पतंजलि के प्रॉडक्ट्स का क्रेज है। ये प्रॉडक्ट वहां पर नेपाल व अन्य रास्तों से भेजे गए हैं। चीन अपने कई घटिया उत्पादों को भारत में खपा रहा है। लेकिन हम अपने अच्छी क्वालिटी के प्रॉडक्ट को वहां भेज रहे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि चीन के लोग हमारे प्रॉडक्ट्स का दिल से स्वागत करेंगे।
लेकिन पतंजलि के प्रॉडक्ट्स की क्वालिटी को लेकर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में प्रॉडक्ट्स की मिसब्रैंडिंग को लेकर हरिद्वार की अदालत ने आपकी कंपनी पर 11 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था...
जहां तक मिसब्रैंडिंग की बात है तो यह कोई मुद्दा नहीं था। उन्हें पैकेट पर लगाए जाने वाले लेबल को लेकर दिक्कत थी। उदाहरण के लिए- उनका कहना था कि हम अपने ‘Patanjali lychee honey’ प्रॉडक्ट पर ‘lychee’ शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। खास बात यह है कि इसी तरह के पांच मामलों में से तीन को तो क्लीन चिट दे दी गई लेकिन दो प्रॉडक्ट को सरकार के दबाव में रोक दिया गया। हमारे प्रॉडक्ट की क्वालिटी सही थी और उसमें कुछ भी खराबी नहीं थी। पतंजलि के पास एक रिसर्च लैब है, जिसमें 250 से ज्यादा साइंटिस्ट काम करते हैं। इसके अलावा हमारे पास बॉयो सेफ्टी लेवल 3 की लैब है, जिसमें अत्याधुनिक उपकरण लगे हुए हैं। ऐसे में कोई भी हमारे प्रॉडक्ट की क्वालिटी को लेकर सवाल नहीं उठा सकता है।
उसी कोर्ट के आदेश के अनुसार, आपकी कंपनी को पाल नाम के तहत दूसरी कंपनियों द्वारा तैयार प्रॉडक्ट्स की बिक्री के लिए भ्रामक ऐडवर्टाइजमेंट करने का दोषी पाया गया था। उस बारे में आपका क्या कहना है ?
आपको किसी ने गलत जानकारी दी है। आप हमारी यूनिट का दौरा कर सकती हैं, जहां पर 20000 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं। यह सिर्फ पुरानी अफवाह है और इन बातों में कोई दम नहीं था।
आपने करीब एक दशक पहले पतंजलि आयुर्वेद की शुरुआत की थी लेकिन ऐडवर्टाइजिंग 2015 के आखिर में शुरू की, जिसके बाद पतंजलि ब्रैंड बन गया। अपनी सफलता में आप ऐडवर्टाइजिंग को कितना क्रेडिट देते हैं ?
ऐडवर्टाइजिंग के दो प्रकार होते हैं। पहली वो जो कंपनी की खातिर की गई है और दूसरी जो प्रॉडक्ट के बारे में सूचना देती है। हमारी स्ट्रेटजी हमेशा से यह रही है कि हम सिर्फ इंफोर्मेशनल ऐडवर्टाइजमेंट देते हैं, जिनका फोकस प्रॉडक्ट के फायदे को लेकर होता है। लोगों के लिए ये जानना जरूरी है कि पतंजलि अब इतने सारे प्रॉडक्ट्स बनाती है और ऐसे में ऐडवर्टाइजिंग की इसमें बड़ी भूमिका होती है लेकिन हम कोई भी ऐसा ऐड नहीं बनाते हैं जो लोगों को प्रॉडक्ट के बारे में भ्रामक जानकारी दे अथवा झूठे सपने दिखाए। हम कभी भी ऐसे विज्ञापन नहीं करेंगे जो हमारे कंज्यूमर्स को धोखा दें।
आप अपने रेवेन्यू का कितने प्रतिशत हिस्सा ऐडवर्टाइजिंग पर खर्च करते हैं ?
हम ऐडवर्टाइजिंग पर ज्यादा खर्च नहीं करते हैं। हम अपने वार्षिक टर्नओवर का सिर्फ दो-तीन प्रतिशत हिस्सा ही ऐडवर्टाइजिंग पर खर्च करते हैं।
पिछले साल आपने दावा किया था कि आप अपने रेवेन्यू को दोगुना कर देंगे। यहां तक कि वर्ष 2016 के आखिर तक ‘कोलगेट’ को भी पीछे छोड़ देंगे। क्या आप उस दिशा में काम कर रहे हैं ?
मुझे जानकारी नहीं है कि इस साल कोलगेट का रेवेन्यू कितना रहा है। लेकिन हम साल के आखिर तक दस हजार करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करने का प्रयास कर रहे थे और मुझे लगता है कि हम इस आंकड़े के नजदीक ही है।
ऐडवर्टाइजिंग के मामले में टेलिविजन पर पतंजलि ने हमेशा आक्रामकता दिखाई है लेकिन अब आपका फोकस डिजिटल की ओर होता जा रहा है। ऐसा क्यों ?
युवाओं में पतंजलि की काफी अच्छी पैठ है। युवा पतंजलि को काफी पसंद करते हैं और हम डिजिटल माध्यम से उन तक पहुंच बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
पतंजलि की सफलता के बाद कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भी अपने प्रॉडक्ट्स में हर्बल लाइन का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। क्या आपको लगता है कि वे अपने मकसद में सफल होंगे ?
इन बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने देश को बहुत सारा केमिकल खिलाकर लोगों की सेहत के साथ बहुत खिलवाड़ किया है। अब जड़ी-बूटियां खिलाकर उसी सेहत को ठीक करना चाहते हैं तो खुशी की बात है। मुझे यह कहते हुए काफी खुशी हो रही है कि हमने एक परिपाटी बनाई और आज की तारीख में हम सफल हैं। कई लोग हमारे द्वारा सेट किए गए ट्रेंड का अनुसरण कर रहे हैं।
क्या आपको लगता है कि किसी सेलिब्रिटी को ब्रैंड एंबेसडर बनाने से उस ब्रैंड को आगे बढ़ने में मदद मिलती है। क्या इसलिए पहलवान सुशील कुमार और अभिनेत्री हेमा मालिनी पतंजलि के प्रॉडक्ट्स को प्रमोट कर रहे हैं ?
हेमा मालिनी ने हमारे प्रॉडक्ट्स का मुफ्त में विज्ञापन किया है, जबकि पहलवान सुशील कुमार ने हमसे खुद संपर्क किया था और इसमें रुचि दिखाई थी। हमने उनसे कहा था कि आप पहलवान हैं, जिनके लिए घी बहुत जरूरी है। ऐसे में आप पतंजलि घी का प्रचार क्यों नहीं करते हैं लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमें अपने प्रॉडक्ट बेचने के लिए सेलिब्रिटी की जरूरत है।
क्या आपको लगता है कि विवादों (controversies) से किसी ब्रैंड को सहायता मिलती है। बाबा रामदेव ने कई ऐसे बयान दिए हैं जैसे, ‘नेस्ले की चिडि़या को पतंजलि उड़ा देगा और यह कोलगेट का गेट बंद कर देगा।’ ?
इस सवाल के बारे में तो मुझसे ज्यादा आप बेहतर जवाब दे सकती हैं।
किसी भी प्रॉडक्ट को लॉन्च करने से पहले पतंजलि ज्यादा मार्केट रिसर्च नहीं करती है, क्या कभी इसका विपरीत प्रभाव भी हुआ है ?
अब तक हमारा कोई भी प्रॉडक्ट मार्केट में फेल नहीं हुआ है।
हमें अपने कुछ नए प्रॉडक्ट्स के बारे में बताएं जो जल्द ही लॉन्च होने वाले हैं...
इस समय हम मौजूदा प्रॉडक्ट्स की मजबूती पर काम कर रहे हैं। हां, कुछ नए प्रॉडक्ट जैसे हर्बल चाय और पतंजलि जीन्स लॉन्च करने की भी हमारी योजना है। लेकिन अभी इनको लेकर रिसर्च चल रही है और इसमें अभी समय लगेगा।
अब पतंजलि का काफी विस्तार हो चुका है। ऐसे में आप कंपनी के दैनिक कार्यों में कितना समय दे पाते हैं और क्या करते हैं ?
मेरे पास और कोई काम नहीं है और मैं कंपनी के सभी कामों में व्यस्त रहता हूं। जैसे- पॉलिसी बनाने के साथ-साथ इसके रोजाना के कामों में भी मेरी सहभागिता रहती है। मेरा पूरा प्रयास रहता है कि मैं अपनी कंपनी के प्रत्येक कर्मचारी से बातचीत करूं और उनके विचारों को जानूं।
आज के समय में आपकी गिनती सफल सीईओ में होती है, ऐसे में भी आप इतनी सादगी से क्यों रहते हैं ?
आदमी जमीन पर रहता है तो जमीन से नीचे नहीं गिर सकता। ऊपर होता है तो गिर सकता है, इसलिए जमीन पर रहना अच्छा होता है।
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