होम / साक्षात्कार / TOI के सबस्क्रिप्शन मॉडल के पीछे यह रही बड़ी वजह: शिवकुमार सुंदरम

TOI के सबस्क्रिप्शन मॉडल के पीछे यह रही बड़ी वजह: शिवकुमार सुंदरम

बीसीसीएल की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन बोले, अधिकतर लोग अखबार के प्रिंट संस्करण को देते हैं प्राथमिकता, जबकि ई-पेपर अंतरिम विकल्प है

समाचार4मीडिया ब्यूरो 5 years ago

देश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ (The Times of India) ने पिछले हफ्ते अपने ई-पेपर को पढ़ने के लिए इस पर सबस्क्रिप्शन मॉडल लागू किया है। यानी अब इस अखबार का ई-पेपर पढ़ने के लिए पाठकों को इसे सबस्क्राइब करना होगा, जिसके लिए शुल्क भी चुकाना होगा। ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ द्वारा यह फैसला लिए जाने के बाद इंडस्ट्री में यह चर्चा जोरों पर उठने लगी है कि क्या अन्य प्रिंट प्लेयर्स भी इसका अनुसरण करेंगे और गिरते रेवेन्यू को बचाने के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाएंगे। अखबार द्वारा उठाए गए कदम और इंडस्ट्री में चल रहीं इस तरह की चर्चाओं के बीच तमाम सवालों को लेकर हमारी सहयोगी वेबसाइट ‘एक्सचेंज4मीडिया’ (exchange4media) ने ‘बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड’ (BCCL) की एग्जिक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन शिवकुमार सुंदरम से बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:

आपने पिछले दिनों सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाने का फैसला लिया है। इसके पीछे क्या कारण रहा, इस बारे में कुछ बताएं

कोरोनावायरस (कोविड-19) ने हमारे जीने के अंदाज और लोगों से संपर्क करने के तरीकों को बदल दिया है। कोरोनावायस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन के कारण लोग इन दिनों अपने घरों पर ही हैं। इस दौरान किए गए तमाम सर्वेक्षणों से पता चला है कि लोगों द्वारा अखबार पढ़ने में बिताए जाने वाले औसत समय में काफी बढ़ोतरी हुई है। हमने नोटिस किया है कि प्रिंट वर्जन को काफी प्राथमिकता मिल रही है, लेकिन महामारी के दौर में कुछ मार्केट्स में डिस्ट्रीब्यूशन संबंधित चुनौतियां सामने आ रही हैं, ऐसे में ई-पेपर/डिजिटल पीडीएफ वर्जन बेहतर विकल्प के रूप में सामने आया है और डिस्ट्रीब्यूशन अस्थायी रूप से उस ओर शिफ्ट हो गया है। महामारी के इस दौर में विश्वसनीय खबरें सिर्फ आवश्यक ही नहीं है, बल्कि इनकी बहुत ज्यादा जरूरत है। लॉकडाउन के कारण हमारे अखबार की डिलीवरी हमारे सभी पाठकों तक सुनिश्चित नहीं हो पा रही है, ऐसे में हमारी ड्यूटी है कि लोगों तक हम प्रमाणिक खबरें पहुंचाएं। ऐसे में मुफ्त में ई-पेपर उपलब्ध होने पर शरारत करने वाले तत्व समाचारों को डाउनलोड कर उनसे साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं अथवा फेक न्यूज को प्रसारित कर सकते हैं। ई-पेपर के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल अपनाकर हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जो पाठक न्यूज का ऑरिजिनल वर्जन पढ़ना चाहते हैं वे इसकी प्रमाणिकता पर पूरा भरोसा कर सकते हैं।     
इस तरह हम अखबार के डाउनलोड किए गए और फॉरवर्ड किए गए वर्जन की खपत (consumption) को हतोत्साहित करते हैं, क्योंकि इस नाजुक समय में यह हमारे समाज के लिए भ्रामक और खतरनाक हो सकता है। वॉट्सऐप ग्रुप्स पर जो भी मुफ्त में और फॉरवर्ड होकर मिलता है, उसका कोई महत्व नहीं है। कंटेंट को तैयार करने और उसे सहेजने में हम काफी समय, श्रम और पैसा खर्च करते हैं। ऐसे में अपने ई-पेपर के लिए सबस्क्रिप्शन मॉडल को अपनाने के पीछे हमारा मकसद इस प्रयास को प्रदर्शित करना और इसे वह सम्मान देना है, जिसका वह हकदार है।

क्या यह कदम सीधा लॉकडाउन से जुड़ा हुआ है या पहले से ही इसकी तैयारी थी?

यह कदम लॉकडाउन में जरूर उठाया गया है, लेकिन लंबे समय से यह एक अनिवार्यता थी। हमारा मानना है कि अखबार का प्रिंट वर्जन अभी भी सबसे बेहतर है। इसके बाद ई-पेपर का नंबर आता है। अखबारों का प्रिंट संस्करण ऐसी आदत है जो पूरे दिन को एक आकार देती है। यह उन समाचारों का एक क्यूरेटेड फीड है जो हमारे द्वारा रोजाना दुनिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी की आवश्यकता को पूरा करता है। हमारा कोई भी मीडिया प्लेटफॉर्म चाहे प्रिंट हो, टीवी हो, आउट ऑफ होम (OOH) हो या रेडियो अथवा डिजिटल हो, उसकी अपनी एक अलग वैल्यू है, अलग अपील है और अपना खुद का बिजनेस मॉडल है। इन सभी प्लेटफॉर्म्स ने ऑडियंस के लिए अपने कंटेंट को बेहतर तरीके से तैयार किया है और उसके द्वारा ऑडियंस के बीच अपना भरोसा स्थापित किया है। बिना सोचे समझे वॉट्सऐप ग्रुप्स पर ई-पेपर्स को फॉरवर्ड किया जा रहा है। यह भी एक कारण है कि इंडस्ट्री अपने अखबार को सबस्क्रिप्शन मॉडल पर रख रही है और वॉट्सऐप पर ई-पेपर्स को फॉरवर्ड करने को गैरकानूनी बता रही है।     

यह फैसला लॉकडाउन खत्म होने के बाद आपके बिजनेस की गतिशीलता (dynamics) को किस प्रकार बदल देगा?

अपने पाठकों की न्यूज पढ़ने की आदतों के बारे में हमारे द्वारा कराए गए शोध के कई हालिया नतीजों से स्पष्ट पता चलता है कि उनमें से 90 प्रतिशत से अधिक पाठक अखबार के प्रिंट वर्जन को प्राथमिकता देते हैं। ई-पेपर अंतरिम विकल्प है और मेरा अनुमान है कि लॉकडाउन के बाद परिदृश्य लॉकडाउन के पहले जैसी स्थिति में वापस आ जाएगा।  

भारतीय बाजार के लिए इस सबस्क्रिप्शन आधारित मॉडल के बारे में आपका क्या कहना है? इस दिशा में मार्केट की गतिशीलता के बारे में आपको क्या उम्मीद है?

अपने देश में अखबारों समेत विभिन्न मीडिया में सबस्क्रिप्शन मॉडल प्रचलन में रहा है। यह नई बात नहीं है। आगे जाकर संभवत: यह इसी दिशा में आगे बढ़ेगा। अधिकांश न्यूज मीडिया रेवेन्यू के मुख्य सोर्स के रूप में एडवर्टाइजिंग पर भरोसा रखना जारी रखेंगे। एडवर्टाइजर्स के नजरिये से देखें तो अखबार उपभोक्ताओं के प्रोफाइल, तत्काल पहुंच का प्रभाव, प्रामाणिकता और विश्वसनीयता का अनूठा संयोजन है। यह विस्तृत जानकारी देने का अवसर प्रदान करता है। निकट भविष्य में भी अखबार के ये एडवांटेज बने रहेंगे। मुझे मुझे कोविड-19 के वर्तमान दौर में इस तरह के बदलाव की उम्मीद नहीं है।

इस दृष्टिकोण से निकट भविष्य में और लंबे समय के लिए आप कितने प्रतिशत रेवेन्यू प्राप्त होने की उम्मीद कर रहे हैं?

जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि यह कवायद रेवेन्यू जुटाने के मकसद से शुरू नहीं की गई है। रही बात रेवेन्यू  की तो मेरा मानना है कि ई-पेपर का रेवेन्यू अभी और भविष्य में भी मामूली ही रहेगा।

क्या आप इंडस्ट्री से उम्मीद करते हैं कि वह इस बिजनेस मॉडल को सर्वसम्मति से अपनाने के लिए मिलकर एक साथ आए?

यह बिजनेस मॉडल में बदलाव नहीं है। हां, सबस्क्रिप्शन मॉडल पर इंडस्ट्री निश्चित रूप से एक साथ है और मुझे पूरा विश्वास है कि प्रत्येक प्रिंट पब्लिकेशन जल्द ही अपनी योजनाओं की घोषणा करेगा। अधिकांश तो ऐसा कर भी चुके हैं।  


टैग्स टाइम्स ऑफ इंडिया प्रिंट इंडस्ट्री बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड बीसीसीएल शिवकुमार सुंदरम कोविड-19 ई-पेपर
सम्बंधित खबरें

सिर्फ सत्ता नहीं, बदलाव की कहानी है ‘Revolutionary Raj’: आलोक मेहता

वरिष्ठ संपादक (पद्मश्री) और जाने-माने लेखक आलोक मेहता ने अपनी कॉफी टेबल बुक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

19-February-2026

पत्रकारिता में इन बातों पर फोकस जरूरी, बाकी सब अपने आप संभल जाएगा: संकेत उपाध्याय

समाचार4मीडिया से बातचीत में जाने-माने पत्रकार संकेत उपाध्याय का कहना था- ईको सिस्टम बंटोरने के इस सिस्टम में जागरूक हो जाना ही एक ईको सिस्टम है।

17-February-2026

अब ‘मैड मेन’ नहीं, ‘मशीन माइंड्स’ का है जमाना: सर मार्टिन सोरेल

S4 Capital के फाउंडर व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन सर मार्टिन सोरेल ने डॉ. अनुराग बत्रा से बातचीत में बताया कि एआई के दौर में विज्ञापन जगत में कैसे आगे बढ़ें और कौन-सी बड़ी कंपनियां पिछड़ रही हैं।

17-February-2026

टीवी व डिजिटल में मुकाबले की बहस गलत, प्लेटफॉर्म की सीमाओं से आगे बढ़ें: आशीष सहगल

टाइम्स टेलीविजन नेटवर्क के नए CEO और मीडिया व एंटरटेनमेंट के चीफ ग्रोथ ऑफिसर आशीष सहगल ने कहा कि टीवी और डिजिटल के बीच मुकाबले की चर्चा एक गलत धारा है।

18-December-2025

सफलता के लिए बदलाव की रफ्तार पकड़नी होगी: उदय शंकर

जियोस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने CII बिग पिक्चर समिट में भारतीय मीडिया के भविष्य पर SPNI के एमडी व सीईओ गौरव बनर्जी से बातचीत की।

03-December-2025


बड़ी खबरें

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में अनिल अग्रवाल: भारत में संसाधनों की कमी नहीं

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत के पास सोना, कॉपर, बॉक्साइट और तेल-गैस जैसे संसाधनों की कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ उत्पादन बढ़ाने की है।

1 day ago

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोले अमेरिकी राजदूत: भारत अहम साझेदार

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को असाधारण बताया। उन्होंने कहा कि मोदी और ट्रंप के व्यक्तिगत तालमेल से समझौते को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

1 day ago

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में जॉर्डन के राजदूत: पश्चिम एशिया का नक्शा बदलने की बातें बकवास

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में जॉर्डन के राजदूत यूसुफ अब्दुल गनी ने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता केवल संवाद से ही संभव है। उन्होंने क्षेत्र का नक्शा बदलने की चर्चाओं को बकवास बताया।

1 day ago

क्या ‘जी मीडिया’ में जारी रहेगा अनुराग मुस्कान का सफर? जानिए क्यों हो रही है चर्चा

अनुराग मुस्कान ने मई 2024 में ‘जी मीडिया’ जॉइन किया था। वह लंबे समय से ‘जी न्यूज’ पर शाम पांच बजे प्रसारित होने वाले चर्चित डिबेट शो ‘ताल ठोक के’ और रात आठ बजे ‘देशहित’ को होस्ट कर रहे हैं।

1 day ago

‘लक्ष्य पिच बेस्ट CMO अवॉर्ड्स 2026’ में मार्केटिंग जगत के दिग्गजों को मिला सम्मान

मार्केटिंग, मीडिया और ऐडवर्टाइजिंग की दुनिया के बड़े-बड़े नाम एक जगह जमा हुए, ताकि उन मार्केटिंग लीडर्स को सम्मान दिया जाए जिन्होंने ब्रैंड्स को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

1 day ago