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ट्रायल से पहले सोशल मीडिया एडिक्शन मामले में Snapchat की पैरेंट कंपनी ने किया समझौता
'स्नैपचैट' (Snapchat) की पैरेंट कंपनी Snap Inc. ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में चल रहे सोशल मीडिया एडिक्शन से जुड़े एक सिविल मुकदमे को ट्रायल शुरू होने से ठीक पहले आपसी समझौते के जरिए निपटा लिया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
'स्नैपचैट' (Snapchat) की पैरेंट कंपनी Snap Inc. ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में चल रहे सोशल मीडिया एडिक्शन से जुड़े एक सिविल मुकदमे को ट्रायल शुरू होने से ठीक पहले आपसी समझौते के जरिए निपटा लिया है। इस मामले में Snap के सीईओ इवान स्पीगल को भी गवाही देनी थी, लेकिन अब कंपनी ने केस से बाहर निकलने का रास्ता चुन लिया है।
Snap ने BBC को बताया कि सभी पक्ष इस बात से खुश हैं कि मामला आपसी सहमति से सुलझ गया। हालांकि, इस केस में शामिल बाकी बड़ी टेक कंपनियां- Meta, TikTok और YouTube अब भी इस मुकदमे का सामना करेंगी और उनके खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा।
यह मुकदमा K.G.M. नाम की एक 19 साल की युवती ने दायर किया था। युवती का आरोप है कि सोशल मीडिया ऐप्स की एडिक्शन लगने के बाद उसे मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। Snap भी उन कंपनियों में शामिल थी, जिन पर यह आरोप लगाया गया था।
कैलिफोर्निया में चल रहा यह मामला तीन “बेलवेदर ट्रायल्स” में से पहला है, जिनमें हजारों ऐसे मुकदमों को एक साथ जोड़ा गया है। पिछले साल लॉस एंजेलिस की एक अदालत ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के डिजाइन और फीचर्स भी नुकसान के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं, न कि सिर्फ यूजर्स द्वारा डाले गए कंटेंट।
अब तक टेक कंपनियां अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका के सेक्शन 230 कानून का सहारा लेती रही हैं, जो प्लेटफॉर्म्स को यूजर कंटेंट के लिए कानूनी जिम्मेदारी से काफी हद तक बचाता है। हालांकि, इस मामले में अदालत का रुख कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। पहला ट्रायल 27 जनवरी से जूरी चयन के साथ शुरू होने वाला है।
Snap भले ही इस केस में समझौता कर चुकी हो, लेकिन वह बाकी दो मामलों में अब भी आरोपी बनी रहेगी।
वादी पक्ष की ओर से जुड़े लॉ फर्म बीज़ली एलन का कहना है कि इन मुकदमों के नतीजे बहुत बड़े हो सकते हैं। अगर कंपनियां दोषी पाई गईं तो उन्हें अरबों डॉलर का हर्जाना देना पड़ सकता है, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के डिजाइन में बदलाव करने पड़ सकते हैं और बच्चों व किशोरों को लेकर नए नियम भी बनाए जा सकते हैं।
लॉ फर्म ने इन मामलों की तुलना तंबाकू और ओपिओइड कंपनियों के खिलाफ चले ऐतिहासिक मुकदमों से की है, जहां लंबे समय बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य को हुए नुकसान के लिए कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया गया था।
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