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...इस किताब में है नेटवर्क18 का सफर और इससे जुड़े लोगों के संघर्ष की कहानी
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। दिल्ली के इंडिया इंटरनेशलन सेंटर में इसी हफ्ते ‘नेटवर्क 18: द ऑडेसियस स्टोरी ऑफ अ स्टार्टअप दैट बिकेम अ मीडिया एंपायर’ नाम की किताब लॉन्च की गई। इस किताब क
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली के इंडिया इंटरनेशलन सेंटर में इसी हफ्ते ‘नेटवर्क 18: द ऑडेसियस स्टोरी ऑफ अ स्टार्टअप दैट बिकेम अ मीडिया एंपायर’ नाम की किताब लॉन्च की गई। इस किताब को इंदिरा कन्नन ने लिखा है। बता दें कि कन्नन नेटवर्क-18 के साथ करीब 15 साल से ज्यादा समय तक जुड़ी रही हैं।
किताब लॉन्चिंग के मौके पर नेटवर्क 18 के फाउंडर राघव बहल, को-फाउंडर संजय रॉय चौधरी और वंदना मलिक के अलावा रितू कपूर, संजय पुगलिया, राजदीप सरदेसाई, शिरीन भान, ऋचा अनिरुद्ध और आशुतोष (पूर्व पत्रकार) आदि कई अन्य वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे।
इस किताब में नेटवर्क 18 का सफर और उससे जुड़े तमाम सवालों के जवाब है। साथ ही उन लोगों के संघर्ष की कहानी भी बताई गई है जो इससे जुड़े और जिन्होंने नेटवर्क 18 को खड़ा किया।
इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार इंदिरा कन्नन ने कहा, ‘हर पत्रकार को खुद से यह सवाल हमेशा करना चाहिए कि अपने काम के जरिए वो क्या कहानी कहने वाला है। यह सवाल उसे हमेशा अपने काम के प्रति जिम्मेदार बनाए रखता है। मेरी किताब न सिर्फ किसी बिजनेसमैन की कहानी पर आधारित है, बल्कि एक शख्स की असमान्य कहानी है, जो अपने सपनों को लेकर दुस्साहसी रहा है।
नेटवर्क 18 के फाउंडर राघव बहल ने कहा, 'साफ सुथरे अंत के लिए एक साफ सुथरी शुरुआत की जरूरत होती है, लेकिन जब आप शुरुआत करते हैं, तो आत्मविश्लेषण करना सबसे जरूरी होता है। क्विंट के जरिए हम एक बार फिर इतिहास रचने की कोशिश कर रहे हैं। युवा और नए सपनों के साथ काम करने वाली एक बेहतरीन टीम के साथ। आज जब आप क्विंट की एडिट मीटिंग देखेंगे, तो आप देखेंगे कि उस मीटिंग में वही एनर्जी होती है, जो नेटवर्क-18 की शुरुआत में हमारी टीम में हुआ करती थी। यह सच है कि मैं खुद को ‘अंग्रेजी ग्रामर का आयतुल्लाह’ मानता हूं। एक फाउंडर के लिए उसकी कंपनी का उससे अलग हो जाना, एक बच्चे का अपने मां-बाप से अलग हो जाने बराबर होता है।
कार्यक्रम के दौरान इंडिया टुडे (India Today) के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई ने कहा, ‘राघव जैसी महत्वाकांक्षी लोगों के साथ काम करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वो क्रिएटिव लोगों पर कोई बंदिश नहीं रखते। रही बात मेरे वेब जर्नलिज्म में जाने की, तो मैं हमेशा से ही एक मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट बनना चाहता हूं। बशर्ते कोई दमदार प्लेटफॉर्म मिले। टीवी के स्वर्णिम दिन बीत चुके हैं। अब इसकी क्वॉलिटी पर बहुत काम किए जाने की गुंजाइश है।
इस किताब में राजदीप ने सीएनएन-आईबीएन में अपने कार्यकाल और टीवी18 के फाउंडर राघव बहल के साथ अपने रिश्ते के बारे में खुल कर बताया है।
‘नेटवर्क 18: द ऑडेसियस स्टोरी...’ पोर्टफोलियो पेंगुइन ने प्रकाशित की है। ये किताब एडवांस तौर पर बुक स्टोर के साथ-साथ ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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