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अरनब बोले, जो लोग मेरी विदाई का जश्न मना रहे वो बहुत पछताएंगे...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। राजस्थान में दैनिक भास्कर अपनी 20वीं सालगिराह की ऐतिहासिक सफलता का जश्न मना रहा है। ‘भास्कर उत्सव’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में सातवें दिन यानी 21 दिसंबर की शाम जाने-माने जर्नलिस्ट अरनब गोस्वामी जयपुर के लोगों से रूबरू हुए। यह कार्यक्रम मानसरोवर स्थित टैगोर इंटरनेशन
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राजस्थान में दैनिक भास्कर अपनी 20वीं सालगिराह की ऐतिहासिक सफलता का जश्न मना रहा है। ‘भास्कर उत्सव’ नाम से आयोजित इस कार्यक्रम में सातवें दिन यानी 21 दिसंबर की शाम जाने-माने जर्नलिस्ट अरनब गोस्वामी जयपुर के लोगों से रूबरू हुए। यह कार्यक्रम मानसरोवर स्थित टैगोर इंटरनेशनल स्कूल के दीप स्मृति ऑडिटोरियम शाम 4 बजे से शुरू हुआ। अपने संबोधन में अरनब ने कहा, ‘मैं इसलिए चिल्लाता हूं क्योंकि इस देश में चिल्लाओगे नहीं तो आपकी कोई सुनेगा नहीं।'अपने वेंचर का नाम ‘रिपब्लिक’ रखने के पीछे की वजह बताते हुए अरनब ने कहा, ‘लोगों ने मुझसे पूछा- तुम क्या करोगे, तुम बिजनेसमैन नहीं हो और न ही बहुत ज्यादा पैसे हैं। मैंने उन्हें बताया कि मैंने देश के लोगों में अपना विश्वास बनाए रखा है और यही वजह है कि मैंने अपने वेंचर का नाम रिपब्लिक रखा है और जब तक मैं इस पेशे में हूं, मैं इस विश्वास को कभी नहीं तोड़ूंगा।'
पत्रकारिता में अपने शुरुआती दिनों के बारे में अबने अनुभवों को साझा करते हुए अरनब ने कहा, ‘जब मैंने शुरुआत की तो कई नेता यह पसंद नहीं करते थे कि कुछ रिपोर्टर उनसे भी वैसा ही व्यवहार कर रहे थे जैसा कि किसी अन्य नागरिक से करते थे और इसलिए वे मुझे सबक सिखाना चाहते थे। मैंने अपने दिल में कुछ यादें सहज कर रखी है और चाहता हूं कि आप जानें कि मैं किन जगहों से गुजरा हूं। मुझे अदालतों में घसीटा गया, मुझे राजनेताओं से धमकियां मिली और वे राजनेता जो न्यूज चैनल को ऐड देते थे, वे कहते थे कि वे ऐड रुकवा दूंगा यदि मैंने उनसे और अधिक सवाल किए तो।
अबने संबोधन में अरनब ने आगे कहा, 'मैं एक निजी चैनल का जर्नलिस्ट था। मैं जो भी सवाल पूछता था, सीधे पूछता था। एक बार मुझे लॉ मिनिस्टर से सॉरी बोलने को कहा गया। यह बेहद शर्म की बात है। इसी तरह ज्योति बसु से माफी मांगने के लिए भी कहा गया था। पॉलिटीशियंस ने मुझे काफी प्रताड़ित किया है। इसलिए इन सारी चीजों ने मुझे ‘रिपब्लिक’ लाने के लिए प्रोत्साहित किया। जर्नलिज्म के नजरिए को बदलने की सोच है ‘रिपब्लिक’।
कैसे वे अपने नए वेंचर से पत्रकारिता में एक नए युग की शुरुआत करेंगे और कैसे वे प्रतिस्पर्धा की रेस में शामिल होंगे, इस पर अरनब बोले, ‘न तो मैं यहां किसी चैनल से प्रतिस्पर्धा करने आया हूं और न ही किसी को पीछे छोड़ने आया हूं लेकिन यहां इसलिए आया हूं ताकि हम इस पूरे सिस्टम को चुनौती दे सकें और उन लोगों को बदल सके जो खुद को देश की मीडिया कहते हैं।’
टाइम्स नाउ में अपनी पारी खत्म करने के बारे में अरनब ने कहा, 'मेरे टाइम्स नाउ से जाने पर सेलिब्रेट करने वाले अब अफसोस मनाएंगे, क्यों मैं गया ही हूं मजबूती के साथ वापस आने लिए और अब मैं पूरी तरह स्वतंत्र होउंगा।
अपने करियर के बारे में अरनब ने बताया कि उनकी लाइफ नाकामियों से भरी हुई है। उन्होंने कहा कि जब वे अपना करियर शुरुआती पड़ाव पर थे तो उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना है।
अरनब ने बताया, 'मैं 90 के दशक का स्टूडेंट हूं। हिंदू कॉलेज में एंटर नहीं करने दिया गया क्योंकि मेरे नाम में गोस्वामी है। कॉलेज के पहले साल में हम इंडिविजुअल नहीं थे, हम सिर्फ कास्ट थे। सेकेंड ईयर में चाणक्य थियेटर से मूवी देखकर आ रहा था और चांदनी चौक के बाहर रुका। पूछा तो लोगों ने बताया कि बाबरी ढांचा तोड़ दिया। यानी कॉलेज के पहले साल में जाना कि आपकी कास्ट क्या है और सेकेंड ईयर में जाना आपका धर्म क्या है। उसके बाद मेरी बैच के 70% लोग विदेश चले गए और लौटे नहीं। मैं यहीं रुक गया।'
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अरनब के फैन्स मौजूद थे। अरनब ने जैसे ही स्कूल में अपनी स्पीच खत्म की, उनके फैन्स स्टेज पर पहुंच गए। फैन्स अपने बीच अपने फेवरेट न्यूज एंकर को देख खुश दिख रहे थे। सभी ने अरनब के साथ सेल्फी खिंचवाई और उनके ऑटोग्राफ्स लिए।
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