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वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत की किताब के विमोचन पर क्या कहा साहित्यकारों ने...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘इंडिया न्यूज’ के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत की कविताओं का पहले संग्रह का विमोचन गुरुवार (29 सितबंर) को हुआ। इस किताब का शीर्षक है ‘अंधेरी गली का चांद’। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार केदारनाथ सिंह ने दिल्ली
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार और ‘इंडिया न्यूज’ के मैनेजिंग एडिटर राणा यशवंत की कविताओं का पहले संग्रह का विमोचन गुरुवार (29 सितबंर) को हुआ। इस किताब का शीर्षक है ‘अंधेरी गली का चांद’। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार केदारनाथ सिंह ने दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इस कविता संग्रह का विमोचन किया। उनके साथ मंच पर हिंदी के चार और बड़े साहित्यकार अरुण कमल, उदय प्रकाश, मंगलेश डबराल, और दिनेश कुशवाह मौजूद थे।
इस मौके पर साहित्यकार केदारनाथ सिंह ने कहा कि राणा यशवंत सिंह की कविता कई बार चकित करती है और उनमें एक विलक्षण कवि होने की ताकत है। अपने संबोधन के दौरान केदारनाथ ने राणा यशवंत की कविताओं को पढ़कर ये बताया कि इन कविताओं में कितने बड़े सवालों को कितनी सहजता से और जादुई भाषा में पिरोकर रखा गया है।
वहीं हिंदी के बेहतरीन कवियों में गिने जाने वाले अरुण कमल ने माना कि राणा यशवंत कविताओं को नई भाषा और नया शिल्प दे रहे हैं। उन्होंने इस काव्य संग्रह में ‘चिट्ठी वाले मुंशी जी’ कविता का जिक्र करते हुए कहा कि यह बहुत ही मार्मिक कविता है। उन्होंने कहा कि ‘चिट्ठी वाले मुंशी जी’ पुराने जमाने की बात है लेकिन नए जमाने की बात तो टेलिविजन चैनल और फेसबुक है। उन्होंने कहा कि राणा यशवंत की कविता कई स्तर पर चलती है लेकिन जब गांव की तरफ मुड़ती है तो देशज शब्दों को साथ वो आबाद हो जाती है।
जबकि, साहित्यकार मंगलेश डबरवाल को लगता है कि राणा यशवंत की कविताओं में दो दुनिया साथ-साथ चलते हैं, जिसमें एक शहर और उसके साथ चलते सवाल, तो दूसरा गांव और गांव के भीतर के मुश्किलात।
दिनेश कुशवाहा के मुताबिक तो राणा यशवंत की कविताओं मे कई रंग, कई प्रसंग और कई प्रश्न साथ-साथ दिखते हैं और तो और वे मानते हैं कि राणा की कविताओं में एक अलग तरह की गरिमा है। उन्होंने कहा कि कबीर ने जिन शब्दों का प्रयोग किया, रघुवीर सहाय और केदारनाथ ने जिन शब्दों का प्रयोग किया उन्हीं शब्दों का प्रयोग राणा यशवंत ने भी है ‘अंधेरी गली का चांद’ में किया है, लेकिन वे शब्द हूबहू वैसे नहीं रहते बल्कि उनका बर्ताव बदल जाता है और यही कवि की निजी पहचान होती है।
इस मौके पर राणा यशवंत ने कहा केदारनाथ सिंह जैसे महान कवियों के बारे में इतना कुछ कहा जाना उनके लिए बड़ा सम्मान है और कविताओं के प्रति उनका योगदान सार्थक हो गया है। उन्होंने कहा कि मेरी कविताओं की जो शक्लों सूरत है उनमें आपको सिक्वेंस ऑफ इंसीडेंस दिखती होंगी, और वह इसलिए क्योंकि हम पत्रकार हैं और रोजाना जिंदगी को कई तरह से देखते हैं। जिंदगी के जितने भी हालात हैं फिर चाहे वह अच्छे हों या बुरे हों उससे हमारा साथ लगातार बना रहता है। इसलिए शायद हम समाज को, देश को ज्यादा नजदीक से देखते हैं और बेहतर तरीके से समझते हैं।
बता दें कि वरिष्ठ टीवी पत्रकार राणा यशवंत इस समय भारत के शीर्ष न्यूज चैनलों में से एक ‘इंडिया न्यूज’ के मैनेजिंग एडिटर हैं। उनकी अगुवाई में इंडिया न्यूज आगे की पंक्ति के चैनलों में लगातार बना हुआ है। वे ‘अर्धसत्य’ और ‘संघर्ष’ कार्यक्रमों की एंकरिंग भी करते हैं।
राणा यशवंत मूलत: बिहार के छपरा जिले के रामपुर कला गांव के रहने वाले हैं, और यहां रहकर ही उन्होंने दसवीं तक पढ़ाई की है। इसके बाद की पढ़ाई उन्होंने पटना में रहकर ही की है और बाद में वे बनारस आ गए और यहां रहकर उन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण की। वे आईआईएमसी के 1996-97 बैच के छात्र रह चुके हैं और कई जाने-माने चैनलों में भी विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं, जी न्यूज, आजतक और महुआ न्यूज चैनल शामिल है।
उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। ‘अर्धसत्य’ कार्यक्रम के लिए उन्हें साल रेक इंक अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। साल 2012 में उन्हें राजीव गांधी ग्लोबल एक्सिलेंस अवॉर्ड भी मिला।
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