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आज मीडिया के पास किस चीज के लिए टाइम नहीं है, बताया पीएम मोदी ने...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। नरेंद्र मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री बनने के बाद दूसरी बार किसी निजी नेटवर्क को अपना इंटरव्यू दिया है। ये एक्सक्लूसिव इंटरव्यू नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी ने किया। बता दें कि इससे पहले उन्होंने अपना इंटरव्यू टाइम्स नाउ के एडिटर-इन-ची
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नरेंद्र मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री बनने के बाद दूसरी बार किसी निजी नेटवर्क को अपना इंटरव्यू दिया है। ये एक्सक्लूसिव इंटरव्यू नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर राहुल जोशी ने किया। बता दें कि इससे पहले उन्होंने अपना इंटरव्यू टाइम्स नाउ के एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी को दिया था। 75 मिनट के इस इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कई सवालों पर जवाब दिए।
मीडिया से रिश्ते को लेकर जब राहुल जोशी ने उनसे पूछा कि मोदी जी, मीडिया सर्किल्स में ये चर्चा है कि अगर आपकी टीआरपी रेटिंग या व्युअरशिप रेटिंग्स डाउन है तो सीधे मोदी जी की रैली में चले जाओ रेटिंग्स बढ़ जाएगी, फिर भी आपका मीडिया के संग रिश्ता कुछ बिटर स्वीट सा रहा है, कभी हां...ज्यादातर ना, इंडियन मीडिया के बारे में आपकी क्या राय है?
इस पर नरेंद्र मोदी ने जवाब दिया कि मैं आज जो कुछ भी हूं उसमें मीडिया का बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है, और इसलिए मैं...मेरे विषय में जो छवि है वो सही नहीं है। मेरे लिए ये शिकायत हो सकती है कि मोदी जी चलते-फिरते बाइट नहीं देते हैं... मोदी जी विवादास्पद मसाला नहीं देते हैं। तो ये शिकायत बहुत स्वाभाविक है, क्योंकि मैं ज्यादातर काम में लगा रहता हूं। इसलिए ये शिकायत करना उनका हक भी है
उन्होंने कहा कि मीडिया जगत से मेरी बहुत दोस्ती रही है। मीडिया में जितने नाम दिखते हैं शायद ही कोई ऐसा नाम रहा होगा, जिनके साथ बैठकर मैंने गप्पे न मारी हों, चाय न पी हो, हंसी-मजाक न की हो...तो मैं उन्हीं के बीच में से पला-बढ़ा निकला हूं। इसलिए उनके और मेरे बीच में कोई मार्जिन नहीं है।
उन्होंने कहा कि ज्यादातर मीडिया ने जो प्रधानमंत्री देखे हैं वो बहुत बड़े व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनते देखा है। मेरा केस ऐसा है कि मैं मीडिया के दोस्ताना तरीके में से निकला हुआ एक प्रधानमंत्री हूं। आज शायद इतने सारे मीडिया को नाम से बुलाने वाला भी शायद मैं पहला प्रधानमंत्री रहा हूं। तो उनकी अपेक्षाएं बहुत स्वाभाविक हैं। मीडिया अपना काम करता है, वो करता रहेगा और मेरा ये स्पष्ट मत है कि सरकारों की, सरकार के कामकाज का कठोर से कठोर एनालिसिस होना चाहिए। क्रिटिसिज्म होना चाहिए, वर्ना लोकतंत्र चल ही नहीं सकता।
मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य ये है कि आज मीडिया में इतनी आपाधापी है, टीआरपी के लिए उसे इतना दौड़ना पड़ता है कि उसके पास रिसर्च करने का टाइम बहुत कम बचा है, और रिसर्च किए बिना क्रिटिसिज्म संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि अगर आपको दस मिनट भी क्रिटिसिज्म करना है तो उसके लिए दस घंटे रिसर्च करना पड़ता है और आज मीडिया के पास समय ही नहीं बचा है। वो भी दौड़ते हैं कैमरा ले-लेकर... और क्रिटिसिज्म ना होने के कारण आरोपों की तरफ चले जाते हैं सब लोग। तू-तू, मैं-मैं की तरफ चले जाते हैं और उससे लोकतंत्र का भी नुकसान होता है और सरकारों में सुधार होना चाहिए जो, एक डर पैदा होना चाहिए... वो डर भी निकल जाता है। तो ये डर अगर सरकारों में से निकल जाएगा तो देश का नुकसान बहुत होगा। इसलिए मैं तो चाहता हूं कि मीडिया बहुत ही क्रिटिकल हो, मीडिया तथ्यों के आधार पर क्रिटिसिज्म करे। इससे देश का भला होगा।
मोदी ने कहा कि मैं मानता हूं कि मीडिया की कुछ मजबूरियां हैं, उनको भी इस कॉम्पटीशन में टिके रहना है, ज्यादातर मीडिया हाउस घाटे में चल रहे हैं तो उनकी चिंता तो बहुत स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि मैंने देखा है कि शायद मुझको गाली देने वालों को मैदान में लाकर आजकल टीआरपी बढ़ाने का प्रयास हो रहा है। तो रैली से ज्यादा गाली काम आ जाती है। उन्होंने कहा कि अगर रैली के जरिए मीडिया को टीआरपी मिलती है तो मुझे क्या परेशानी होगी।
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