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'फर्जी अखबारों' पर लगाम की तैयारी
हिंदी दैनिक अखबार नवभारत टाइम्स में महिला पत्रकार पूनम पांडे की एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिसमें बताया गया है कि केंद्र सरकार अब जल्द ही ऐसे अखबारों पर लगाम लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जोसिर्फ सरकार से विज्ञापन लेने के लिए ही खुले हैं। पढ़िए ये पूरी रिपोर्ट ऐसे अखबार जो सिर्फ के
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
हिंदी दैनिक अखबार नवभारत टाइम्स में महिला पत्रकार पूनम पांडे की एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है, जिसमें बताया गया है कि केंद्र सरकार अब जल्द ही ऐसे अखबारों पर लगाम लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जोसिर्फ सरकार से विज्ञापन लेने के लिए ही खुले हैं। पढ़िए ये पूरी रिपोर्ट
ऐसे अखबार जो सिर्फ केंद्र सरकार से विज्ञापन लेने के लिए ही खुले हैं, अब उनपर सूचना और प्रसारण मंत्रालय सख्ती की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय ने इस संबंध में प्रेस इन्फर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) के अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है। जल्द ही लोकल पीआईबी यूनिट को अपने इलाके से छप रहे फर्जी अखबारों को रेगुलेट करने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। मिनिस्ट्री के एक अधिकारी के मुताबिक, डायरेक्टरेट ऑफ एडवर्टाइजिंग ऐंड विजुअल पब्लिसिटी (डीएवीपी) से जिन अखबारों को विज्ञापन मिलता है, उनमें से बहुत सारे अखबार ऐसे हैं जिनका कोई सर्कुलेशन ही नहीं हैं। ऐसे अखबार महज विज्ञापन लेने के लिए खुले हैं और वह जिस दिन विज्ञापन छापना होता है, उसी दिन कुछ कॉपी छापते हैं। ऐसे में वह धोखे से सरकारी विज्ञापन ले रहे हैं। अब मंत्रालय इन्हें लेकर सख्ती बरतने के मूड में है। सही सिस्टम नहीं : अधिकारी ने बताया कि ऐसा नोटिस किया गया है कि ऐसे अखबार मनोनयन के समय जरूरी बातें किसी तरह पूरी कर देते हैं, उसके बाद महज विज्ञापन लेने का धंधा चलाते हैं। उन्होंने बताया कि अभी इन्हें रेगुलेट करने के लिए कोई सही सिस्टम नहीं हैं। आरएनआई अखबारों के सर्कुलेशन पर नजर तो रखता है और नियम पूरे न करने वालों के खिलाफ पेनल्टी का प्रावधान भी है, लेकिन पूरा सिस्टम न हो पाने की वजह से यह मुमकिन नहीं हो पाता। अधिकारियों की बैठक
मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, अब पीआईबी की लोकल यूनिट को जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पीआईबी के 8 रीजनल ऑफिस हैं और करीब 32 ब्रांच ऑफिस हैं। इन्हें यह जिम्मा दिया जा सकता है कि ये ऐसे अखबारों के बारे में जानकारी लें और रेगुलेट करें। इससे फर्जी अखबारों पर लगाम लगेगी और विज्ञापन का खर्चा भी कम होगा। अभी विज्ञापन का काफी पैसा बिना सर्कुलेशन वाले 'फर्जी अखबारों' के पास भी चला जाता है। अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में पीआईबी अधिकारियों की मीटिंग बुलाई गई है।
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