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NBT ने बताया, मोदी राज में कैसे हर निगेटिव न्यूज पर बजती है सेक्रेटरी की घंटी
हिंदी दैनिक अखबार नवभारत टाइम्स ने बताया कि कैसे मोदी सरकार ने निगेटिव न्यूज की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया हुआ है, जो मिनिस्ट्री के टॉप अधिकारियों को निगेटिव न्यूज को इग्नोर नहीं करने देता बल्कि उसी दिन क्लेरिफिकेशन की दरकार रखता है। पढ़िए ये रिपोर्ट... हर निगेटि
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
हिंदी दैनिक अखबार नवभारत टाइम्स ने बताया कि कैसे मोदी सरकार ने निगेटिव न्यूज की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया हुआ है, जो मिनिस्ट्री के टॉप अधिकारियों को निगेटिव न्यूज को इग्नोर नहीं करने देता बल्कि उसी दिन क्लेरिफिकेशन की दरकार रखता है। पढ़िए ये रिपोर्ट...
हर निगेटिव न्यूज पर बजती है सेक्रेटरी की घंटी
मोदी सरकार में अगर किसी मिनिस्ट्री से जुड़ी कोई निगेटिव खबर मीडिया में छपती है तो उस मंत्रालय के सेक्रेटरी को सुबह 9 बजे ही कॉल आ जाती है और उसे दोपहर 2 बजे तक संबंधित खबर पर स्पष्टीकरण भी देना होता है।
यूपीए सरकार के दौर से उलट मोदी सरकार ने निगेटिव न्यूज की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम बनाया हुआ है। यह सिस्टम लोगों के बीच सरकार को लेकर अवधारणा बनाने का काम करता है। यह सिस्टम मिनिस्ट्री के टॉप अधिकारियों को निगेटिव न्यूज को इग्नोर नहीं करने देता बल्कि उसी दिन क्लेरिफिकेशन की दरकार रखता है।
पीएम मोदी ने जब यह सिस्टम लागू किया था तो कहा था - गलती है तो सुधार करो, खबर गलत है तो खंडन करो। इसी के बाद नए सूचना एवं प्रसारण मंत्री एम वेंकैया नायडू ने पदभार संभालते ही अधिकारियों को सबसे पहले यही निर्देश दिया था कि कुछ भी अगर गलत है तो उसे दुरुस्त किया जाए, न कि जस का तस छोड़ा जाए। इस सिस्टम के तहत डेली ऐक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) बनती हैं जिनमें निगेटिव न्यूज आइटम और मिनिस्ट्री की ओर से मिले जवाब को आउटकम के रूप में दर्ज किया जाता है। इन रोजाना बनने वाली रिपोर्ट को आईएंडबी मिनिस्ट्री के सेक्रेटरी के पास रिव्यू के लिए भेजा जाता है। यही नहीं मासिक एटीआर कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजी जाती है।
कई बार मामले में मंत्री तक को जवाब देना पड़ता है। ऐसी ही एटीआर पर एक बार रक्षा मंत्री को जवाब देना पड़ा था कि यह मसला इतना सेंसिटिव है कि इसमें कोई स्पष्टीकरण दिए जाने की जरूरत नहीं। एक सेक्रेटरी के मुताबिक, निगेटिव न्यूज आइटम को इग्नोर करना या स्पष्टीकरण न देना अब आपकी मर्जी की बात नहीं रही। यह जरूरी चीज बन गई है और खुद कैबिनेट सेक्रेटेरियट लेवल पर इसकी मॉनिटरिंग हो रही है।
(साभार: नवभारत टाइम्स)
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