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पहले ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ को समझिए और क्यों मत कीजिए इस पर चर्चा, बताया ‘डिफेंस मॉनिटर’ के संपादक ने...

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सैन्य शिविर पर हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए 18 सैनिक और उसके बाद पाकिस्त

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।

जम्मू-कश्मीर के उड़ी में सैन्य शिविर पर हुए आतंकवादी हमले में शहीद हुए 18 सैनिक और उसके बाद पाकिस्तान में की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। इसी तनाव को लेकर आए दिन मीडिया में जो बहस हो रही है उसे लेकर जब समाचार4मीडिया ने हिंदी में रक्षा, आंतरिक सुरक्षा, विदेशनीति और नागरिक उड्डयन जैसे विषयों पर केन्द्रित द्विमासिक पत्रिका ‘डिफेंस मॉनिटर’ के संपादक सुशील शर्मा से बात की। पेश हैं इस बातचीत के मुख्य अंश:

क्या इससे पहले भी भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की है?

देखिए सबसे पहले आपको समझना होगा  कि सर्जिकल स्ट्राइक होती क्या है? पाकिस्तान ने उधर से हमला किया और जवाब में भारत ने हमला किया ये सर्जिकल स्ट्राइक नहीं है और वैसे भी घुसपैठ की कोशिश दोनों तरफ से होती रहती है। सर्जिकल स्ट्राइक सेना के उस हमले को कहा जाता है जो अचानक हो और किसी एक तय इलाके या ठिकाने को नष्ट करने के लिए किया जाए और इसके बाद एक देश दूसरे देश को सार्वजनिक तौर पर ये खुलासा भी करे कि उसने ऐसा क्यों किया।

भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम क्यों दिया, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उरी के हमले के बाद आतंकवादियों द्वारा की जा रही घुसपैठ रोकने के लिए देश की सेना ने ये कदम उठाए और टेरर कैंप्स को अपना निशाना बनाया।

जिस तरह आज विपक्ष कह रहा है कि इस तरह की सर्जिकल स्ट्राइक उसने भी अपने शासन के दौरान कई बार की है, कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला की ओर से कहा गया है कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में भी पाकिस्तान में चरमपंथियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की है, लेकिन कभी इसका राजनीतिक फायदा नहीं उठाया। उन्होंने इन सर्जिकल स्ट्राक्स की तारीखें भी बताई हैं- 1 सितंबर 2011, 28 जुलाई 2013 और 14 जनवरी 2014।

इस पर सुशील कहते हैं कि अगर कांग्रेस पार्टी ने ये दावा किया है कि उसने अपने शासनकाल में पाकिस्तान में चरमपंथियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की है, लेकिन कभी इसका राजनीतिक फायदा नहीं उठाया, तो मैं यहां पूछना चाहूंगा कि उन्होंने इसका खुलासा सार्वजनिक तौर पर क्यों नहीं किया? यहां ये भी कहूंगा कि जब अमेरिका ने पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक कर लादेन को मारा था, तो उसने सार्वजनिक तौर पर इसकी जानकारी दी थी, जैसा कि अब भारत ने दी है। अमेरिका ने इस सर्जिकल स्ट्राइक न तो विडियो सार्वजनिक किए और न ही फोटो।

क्या भारत सरकार सेना का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है?

मुझे ऐसा नहीं लगता, क्योंकि डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिटरी ऑपरेशन्स (DGMO) लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात का खुलासा किया था कि सर्जिकल स्ट्राइक हुई है और जब वे इस बात की जानकारी दे रहे थे, तो वहां कोई पॉलीटिकल लीडर नहीं था। इसलिए ये सवाल ही नहीं उठता कि भारत सरकार सेना का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है। वहीं दूसरे राजनीतिक पार्टी को ये डर है कि इसका लाभ भाजपा को मिलेगा, क्योंकि वर्तमान माहौल में ऐसा ही लग रहा है और यहां ये बता दूं कि ये लाभ ज्यादा दिनों तक नहीं रहता है क्योंकि 1971 में हुए भारत-पाक युद्ध में भी देखा गया था कि इंदिरा गांधी को इसका फायदा मिला था, लेकिन यह ज्यादा दिनों तक नहीं रहा और कुछ सालों बाद उन्हें इमरजेंसी लगानी पड़ी थी।

क्या सर्जिकल स्ट्राइक की खुले तौर पर बहस होनी चाहिए?

देखिए, मेरा मानना है कि इसकी नौबत नहीं आनी चाहिए। जो लोग सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत की मांग कर रहे हैं तो मैं कहता हूं कि अगर विडियो को सबूत के तौर पर सार्वजनिक किया गया है तो उसका गलत प्रभाव पड़ेगा और वह इसलिए क्योंकि विडियो के जरिए पाकिस्तान अपनी गलतियों से सीख लेगा और फिर अगली बार वह उन गलतियों से बचने की कोशिश करेगा। और यही हमने पठानकोट में भी किया, जिसकी तस्वीरे और विडियो सार्वजनिक किए गए, और गलती से बचते हुए उरी हमले को अंजाम दिया।

दूसरा, ये कि पाकिस्तान की सरकार पर बहुत अधिक प्रेशर में आ जाएगी। वहां की आवाम और विरोधी पार्टियां सरकार पर इस कदर दबाब बना देंगी कि वह बौखलाहट में कुछ भी गलत निर्णय लेने पर बाध्य हो जाएगा।

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