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जानिए, इस साल दुनियाभर में मारे गए पत्रकारों की सूची में कहां है भारत
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। नए साल का आगाज करने के लिए पूरी दुनिया इन दिनों जश्न के मूड में तैयार खड़ी है। यानी नए साल के दस्तक देते ही साल 2016 की तमाम खट्टी-मीठी यादें इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएंगी। लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसी यादें भी हैं, जिन्हें भूले से
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नए साल का आगाज करने के लिए पूरी दुनिया इन दिनों जश्न के मूड में तैयार खड़ी है। यानी नए साल के दस्तक देते ही साल 2016 की तमाम खट्टी-मीठी यादें इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएंगी। लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसी यादें भी हैं, जिन्हें भूले से भी भूलाया नहीं जा सकेगा। यहां एक ऐसी रिपोर्ट का जिक्र कर रहे हैं, जो यह बता रही है कि साल 2016, पत्रकारों के लिहाज से कैसा रहा।
हाल ही में समाचार4मीडिया ने ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ की एक रिपोर्ट का जिक्र किया था, जिसमें बताया था कि दुनियाभर में कम से कम 57 पत्रकार अपना दायित्व निभाते हुए मारे गए। लेकिन अब एक और रिपोर्ट सामने आई है, जो यह बताती है कि विश्व में इस साल 48 पत्रकारों की हत्या की गई और सीरिया लगातार पांचवे साल पत्रकारिता के लिहाज से सबसे खतरनाक देशों में शीर्ष पर बना हुआ है। लेकिन भारत के लिहाज से साल 2016 कैसा रहा, इस रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है।
अमेरिका के गैर-लाभकारी संगठन ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट'(CPJ) द्वारा सोमवार को जारी किए गए अध्ययन के नतीजों से पता चलता है कि केवल सीरिया में 14 पत्रकार मारे गए। पत्रकारों के लिए अन्य खतरनाक देश भी मध्य पूर्व के ही रहे।
बता दें कि भारत पिछले साल इस रिपोर्ट में 10 घातक देशों में से एक था और इस साल भी भारत इस सूची में दसवें नंबर पर है। साल 2016 की इस सूची में दो पत्रकारों का जिक्र किया गया है, जिन्हें अपने काम के दौरान जान गंवानी पड़ी।
इस रिपोर्ट में ‘हिन्दुस्तान’ के पत्रकार राजदेव रंजन और ‘जनसंदेश टाइम्स’ के करुण मिश्रा का जिक्र किया गया है, जिनकी हत्या साल 2016 में की गई। रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई है कि इनकी हत्या दोनों के कामों के प्रति उत्पन्न हुए ‘प्रतिशोध’ की वजह से की गई है।
वहीं जब 1992 से अबतक का जिक्र किया गया तो इस सूची में भारत 9वें पर है और तब से लेकर अब तक 40 पत्रकारों की हत्या उनके कामों की वजह से की जा चुकी है, जबकि 27 पत्रकारों की हत्याओं की वजह कुछ भी नहीं थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 1992 से अब तक मारे गए कुल पत्रकारों में से आधे पत्रकारों की हत्या राजनीति या करप्शन या फिर दोनों की वजह से की गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इनमें से एक चौथाई पत्रकार बिजनेस की रिपोर्टिंग करते थे।
इराक, यमन, अफगानिस्तान, सोमालिया और लीबिया ने इस सूची में दूसरे से छठा स्थान हासिल किया है। निर्धारित उद्देश्य के साथ मारे गए 48 पत्रकारों में 26 संघर्ष या गोलीबारी में मारे गए, 18 की हत्या कर दी गई और 3 खतरनाक कार्य के दौरान मारे गए। रिपोर्ट में एक अन्य की स्थिति का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त अज्ञात इरादों के तहत 27 पत्रकारों की हत्या हुई है।
‘कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ की इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में इन अपराधों को अंजाम देने वालों के बारे में 96 प्रतिशत लोग आजाद हैं और उन्हें सजा ही नहीं हुई है, जबकि कुछ मामलों में थोड़ा बहुत न्याय हुआ है।
वहीं वैश्विक स्तर पर भी पत्रकारों की हत्याओं के मामले में सिर्फ 4 प्रतिशत ही न्याय हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पत्रकारों का सबसे खराब वर्ष 1997 था, तब सात पत्रकारों की हत्या उनके कामों के चलते की गई थी। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो साल 2012 सबसे खराब रहा, जब सबसे ज्यादा 74 पत्रकारों की हत्या की गई थी, और इनके हत्याओं के पीछे की वजह भी साफ थी।
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