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विवादों में घिर गया सरकार द्वारा 25 पत्रकारों की नियुक्ति का मामला...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री के कार्यों की पब्लिसिटी के लिए 25 पत्रकारों को हायर करने का फैसला विवादों में घिर गया है। दरअसल, इस बाबत सरकार ने 7 दिसंबर, 2016 को एक शासनादेश (GO Rt No. 2497) जारी
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा मुख्यमंत्री के कार्यों की पब्लिसिटी के लिए 25 पत्रकारों को हायर करने का फैसला विवादों में घिर गया है।
दरअसल, इस बाबत सरकार ने 7 दिसंबर, 2016 को एक शासनादेश (GO Rt No. 2497) जारी कर ये जानकारी दी थी कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने 25 पत्रकारों की विशेष टीम आउटसोर्सिंग के आधार पर रिक्रूट की थी, जो 1 सितंबर 2016 से काम कर रही है।
इसमें कहा गया था कि प्रत्येक पत्रकार को 51,468 रुपए का मासिक वेतन दिया जाएगा और इससे सरकारी खजाने पर कुल बोझ 12,86,700 रुपए प्रति माह पड़ेगा, जिसका भुगतान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के बजट से किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आंध्र प्रदेश सरकार के इस कदम को रिश्वतखोरी (official bribery) से जोड़ दिया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने अपने ट्वीट में कहा, ‘आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय ने 25 पत्रकारों को पीआर और सार्वजनिक कार्यों के लिए हायर किया है!’
आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा जारी किया गया यह शासनादेश अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और मीडिया समूहों द्वारा इसकी आलोचना शुरू हो गई है। तेलुगु न्यूज वेब पोर्टल चलाने वाले वरिष्ठ पत्रकार श्रीनिवासा राव मनचला ने अंग्रेजी अखबार ‘द हिन्दुस्तान’ से कहा, ‘यदि पत्रकारों को मुख्यमंत्री के कार्यों के प्रचार-प्रसार के लिए लगाया है तो सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की क्या जरूरत है, जो खुद राज्य सरकार के प्रचार-प्रसार की निगरानी करने के लिए जानी जाती है? फिर तो नायडू को इस विभाग को समाप्त कर देना चाहिए।’
हालांकि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के कमिश्नर एस. वेंकटेश्वर ने सरकार के इस आदेश का बचाव किया है। उन्होंने कहा, ‘आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद से विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी थी। हमने सीएमओ या अन्य मंत्रालयों में किसी भी नियमित पीआरओ की नियुक्ति नहीं की है। इसलिए, हमें आउटसोर्सिंग के जरिए अनुभवी पत्रकारों को लेना पड़ा और इन सभी को सैलरी दी गई है, तो फिर कैसे कोई सैलरी को रिश्वत कह सकता है?’
वेंकटेश्वर ने बताया कि तेलंगाना सरकार में कुछ लोग रिटायर हो गए हैं, इसलिए सीएमओ और अन्य विभागों में वरिष्ठ पत्रकार कॉन्ट्रैक्ट आधार पर रखे गए हैं।
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