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कुछ इस तरह झलका ऑल इंडिया रेडियो (AIR) के कर्मचारियों का दर्द...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। सार्वजनिक प्रसारणकर्ता दूरदर्शन (DD) और ऑल इंडिया रेडियो (AIR) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसी का परिणाम है कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी इनका प्रदर्शन अपेक्षित नहीं हो पा रहा है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सार्वजनिक प्रसारणकर्ता दूरदर्शन (DD) और ऑल इंडिया रेडियो (AIR) में इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसी का परिणाम है कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी इनका प्रदर्शन अपेक्षित नहीं हो पा रहा है।
दरअसल, दूरदर्शन व रेडियो के बारे में माना जाता था कि ये अपने बेहतरीन कंटेंट उत्पादन और उसके प्रसारण से लोगों का ज्ञानवर्द्धन करने के साथ ही उन्हें जागरूक भी करेंगे। ऐसे में बेहतर कंटेंट तैयार करना ही इनका प्रमुख काम था। लेकिन आज हालत यह है कि विभिन्न कारणों से कई अनुभवी कंटेंट तैयार करने वाले (content creators) इनसे लगातार दूर होते जा रहे हैं। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि DD और AIR लगातार नीचे की ओर जाते जा रहे हैं और रेवेन्यू के साथ ही दर्शकों की संख्या पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है।
इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि विभिन्न वजहों से प्रोग्रामिंग स्टाफ में कुछ शिथिलता आ गई है और वह आगे नहीं आ रहा है। लेकिन यदि प्रोग्रामिंग स्टाफ की बात करें तो यहां ऐसे कई लोग हैं जो 30 वर्षों से अधिक समय से काम कर रहे हैं और वहीं के वहीं हैं, जिससे वे यहां की कार्यप्रणाली को लेकर काफी आक्रोशित है।
ऑल इंडिया रेडियो में कार्यरत एक प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव का कहना है कि लोग जिस पोस्ट पर यहां आते हैं, वर्षों बाद उसी पोस्ट से रिटायर हो जाते हैं लेकिन तरक्की नहीं मिल पाती है। इसके बावजूद कहीं कोई सुनवाई नहीं होती है। जबकि यदि यहां के लोगों को आगे बढ़ाया जाए तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
वहीं एक अन्य प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव का कहना था कि यदि नियम की बात करें तो एक प्रसारण अधिकारी को आठ साल में प्रोग्राम एग्जीक्यूटिव बन जाना चाहिए और 11 साल में असिस्टेंट डायरेक्टर लेकिन इन सबका यहां कोई मतलब नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी इंजीनियर को संपादक बना दिया जाए और वहां कार्यरत पत्रकार को उसके अंडर में रख दिया जाए तो क्या होगा जबकि वह पत्रकार भी सक्षम हो। उनका कहना था कि दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो में टैलेंट की कोई कमी नहीं है लेकिन उसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है अर्थात उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ही नहीं सौंपी जा रही है। ऐसे में प्रतिभा वहीं की वहीं दबकर रह जाती है। खाली सिस्टम को अपडेट करने से ही काम नहीं चलेगा बल्कि यहां के लोगों को भी अपडेट कर आगे बढ़ाना होगा तभी दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो आगे बढ़ सकते हैं।
यहां इंजीनियर्स और एडमिमिनस्ट्रेशन के लोगों को तो आगे बढ़ाया जाता है लेकिन जो इसकी रीढ़ हैं अर्थात जो प्रोग्राम बनाने वाले हैं, जब उन्हें ही साइडलाइन कर दिया जाएगा तो इसकी साख गिरना तो लाजिमी है। यहां बाहर से प्रोग्रामर बुलाए जाते हैं लेकिन यहां कार्यरत लोगों को ही जिम्मेदारी नहीं दी जाती है जबकि वे भी सक्षम हैं तो संस्था की परफॉर्मेंस तो घटेगी ही।
नवंबर के आखिरी हफ्ते में हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 26वें ‘मन की बात’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए उनका कहना था कि इस कार्यक्रम को सभी प्रमुख भाषाओं में प्रसारित किया गया था, जिसकी जिम्मेदारी यहीं के स्टाफ को दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यहां के लोग इस कार्यक्रम को सफल बना सकते हैं तो जिम्मेदारी मिलने पर वह अन्य कार्यों को भी इसी तरह से अंजाम दे सकते हैं लेकिन उन्हें जिम्मेदारी ही नहीं दी जाती है।
दूरदर्शन की आय को बढ़ाने के लिए कंसल्टेंट की नियुक्ति करने के सवाल पर यहां कार्यरत कई कर्मचारियों का कहना है कि सिर्फ जान-पहचान के लोगों को ही इसका अवसर दिया जाता है। ऐसे में इनमें से कई लोग जान-पहचान का लाभ उठाकर काम नहीं करते हैं। वहीं जो काबिल और काम करने वाले लोग हैं, उन्हें किनारे कर दिया जाता है।
इसके साथ ही उन्होंने इस बात की आशंका भी जताई कि यदि यही हाल रहा है तो हो सकता है कि कई सारे स्टेशन बंद कर दिए जाएं अथवा किसी और को संचालन के लिए आउटसोर्स पर दे दिए जाएं।
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