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एडवर्टाइजर्स और न्यूज चैनलों पर कुछ इस तरह पड़ रहा है नोटबंदी का प्रभाव

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।। देश में पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने की घोषणा का असर एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। यह इंडस्ट्री इन दिनों कंज्यूमर की कमी से जूझ रही है और इसका परिणाम यह निकल रहा है कि कई एडवर्टाइ

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।

देश में पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने की घोषणा का असर एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री पर दिखाई देने लगा है। यह इंडस्ट्री इन दिनों कंज्यूमर की कमी से जूझ रही है और इसका परिणाम यह निकल रहा है कि कई एडवर्टाइजर्स अपनी योजनाओं को या तो रद (cancelling)  अथवा स्थगित (postponing) कर रहे हैं। टीवी चैनलों और मीडिया एजेंसियों पर भी इसका असर दिखाई देना शुरू हो गया है और माना जा रहा है कि प्रिंट इंडस्ट्री पर भी जल्द ही इसका गहरा असर दिखाई देने लगेगा।

इस बारे में ‘साउथ एशिया ग्रुपएम’ (South Asia GroupM) के सीईओ सीवीएल श्रीनिवास का कहना है, ‘कुछ एडवर्टाइजर्स अपनी योजनाओं को कैंसल कर रहे हैं। खासकर एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर में यह ज्यादा हो रहा है। आज जो स्थिति दिखाई दे रही है उसके अनुसार अगले कुछ हफ्तों में कुल विज्ञापन खर्च (total ad spend) का 20-25 प्रतिशत भाग प्रभावित हो सकता है। ज्यादातर मामलों में इस तरह की योजनाओं की तिथि आगे बढ़ाई जाएगी। हालांकि यह अनुमान लगाना अ‍भी मुश्किल है कि इस स्थिति में कितना नुकसान होगा।’

श्रीनिवास का कहना है, ‘एफएमसीजी के अलावा अन्‍य सेक्‍टरों में दीपावली के बाद विज्ञापन खर्च में कमी आई है इसलिए हमें ज्‍यादा प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में पेमेंट वॉलेट, BFSI आदि इस्‍तेमाल बढ़ा है और अगले कुछ हफ्तों तक यही स्थिति रहने की संभावना है।’

एक ओर नोटबंदी के सरकार के फैसले से जहां एडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री परेशान है वहीं न्यूज चैनलों की व्युअरशिप बढ़ गई है। इस बारे में ‘Zee News’ के एडिटर सुधीर चौधरी का कहना है, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी की घोषणा के बाद से न्‍यूज व्युअरशिप में  वृद्धि हुई है। हालांकि व्युअरशिप में तो इजाफा हुआ है लेकिन आने वाले समय में एड रेवेन्यू में कमी आ सकती है क्योंकि कई कंपनियां इससे प्रभावित हो रही हैं।’

‘South Asia Dentsu Aegis Network’ के चेयरमैन व सीईओ तथा ‘Posterscope & MKTG - Asia Pacific’ के चेयरमैन आशीष भसीन का कहना है, ‘यह कैंसल के कारण नहीं हो रहा है बल्कि इसका कारण दूसरा है। जैसा कि कहा जा रहा है कि यह काफी खराब समय है क्योंकि आखिरी तिमाही में त्योहारों के कारण 35-40 प्रतिशत विज्ञापन खर्च होता है। सौभाग्‍य से यह काम दीपावली के बाद हुआ है। इस निर्णय से सामान्‍य विज्ञापन (general advertising) पर थोड़े समय के लिए ही प्रभाव पड़ेगा। लेकिन यदि हम लंबे समय की बात करें तो एडवर्टाइजिंग पर इसका काफी सकारात्‍मक प्रभाव होगा क्‍योंकि एडवर्टाइजिंग जीडीपी (GDP) ग्रोथ पर निर्भर करता है और इस कदम से काला धन (black money) बाहर निकलकर आ जाएगा, जिससे ब्‍याज दर भी घटेगी और उसी आधार पर ग्रोथ में इजाफा होगा।’ इस समय बाजार में खरीदारों का संकट है और एफएमसीजी, रियल एस्‍टेट तथा ज्‍वेलरी आदि पर इसका काफी प्रभाव पड़ रहा है।

वहीं ‘EENADU’ के मैनेजर (सेल्‍स एंड मार्केटिंग)  राजीव चड्ढा का मानना है, ‘पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद करने के सरकार के फैसले का असर 31 दिसंबर तक ही पड़ेगा। इसके बाद मार्केट में फिर उछाल आएगा। हालांकि एड रेवेन्‍यू (ad- revenues) पर इसका असर दिखने लगा है लेकिन आने वाले समय में यह प्रभाव कम हो जाएगा।’

‘आउटलुक ग्रुप’ (Outlook Group) के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर इंद्रानिल रॉय का कहना है कि सरकार के फैसले से आम आदमी की खरीदारी की क्षमता काफी कम हो गई है। उनका मानना है कि इस फैसले का प्रभाव मीडिया इंडस्‍ट्री पर भी पड़ेगा।  इंद्रानिल के अनुसार, ‘हमें 15-20 दिनों तक देखो और इंतजार करो (wait and watch) करना है और देखना है कि इन दिनों में क्‍या होता है।’

वहीं ‘एचटी मीडिया’ (HT Media) के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर बिनॉय राय चौधरी का कहना है कि इस निर्णय से लोगों की खरीदारी क्षमता में कमी का मामला एचटी मीडिया में भी उठाया गया था। बाजार में नकदी का संकट (liquidity) बना हुआ है क्‍योंकि ग्राहकों ने अपनी खरीदारी की योजना स्‍थगित कर दी है। लेकिन एक बार मार्केट में जब नकदी का फ्लो होने लगेगा तो यह स्थिति बदल जाएगी। बिनॉय रॉय चौधरी के अनुसार वर्तमान हालात में एक नया अवसर भी प्राप्‍त हुआ है जिसमें मोबाइल पेमेंट सर्विस काफी तेजी से आगे बढ़ रही है और वे अपना एडवर्टाइजमेंट भी कर रही है। रियल एस्टेट से रेवेन्‍यू के बारे में उनका कहना था कि काफी लंबे समय से इस सेक्टर की हालत ठीक नहीं है। लेकिन आशा है कि आने वाले समय में यह काफी आगे बढ़ेगा और यह एडवर्टाइजमेंट शुरू करेगा क्‍योंकि बड़ी संख्या में अपार्टमेंट्स बने हुए हैं और वे इन्‍हें बेचना चाहेंगे।

‘साकाल मीडिया ग्रुप’ (Sakal Media Group) के सीईओ प्रदीप द्विवेदी का कहना है कि जैसी हम चिंता कर रहे थे, वैसी स्थिति दिखाई नहीं दे रही है। द्विवेदी का कहना है कि बाजार में इस समय जो शांति दिखाई दे रही है, वह दीपावली के बाद की है। उनका कहना है कि पिछले 15-20 वर्षों से यही स्थिति रहती है। उनका कहना है, ‘दीपावली के बाद लोग खरीदारी पर कम खर्च करते हैं। यही कारण है कि इसके बाद विज्ञापनदाता (advertisers) भी इस दौरान कम खर्च करते हैं।’ उन्‍होंने कहा कि बड़े नोटबंदी का दो तरह से असर पड़ रहा है। एक तो कंज्‍यूमर के पास इतना कैश नहीं है दूसरा वे दीपावली पर खरीदारी कर चुके हैं।

प्रदीप द्विवेदी का यह भी कहना था कि प्रिंट पर इतना प्रभाव नहीं पड़ा है, जितना टीवी पर। उन्‍होंने बाजार में चल रही इस तरह की बातों से अहसमति जताई कि ऐसा सरकार के फैसले के कारण हुआ है। द्विवेदी ने कहा, ‘हमें अभी यह तलाशना होगा कि दीपावली बीत जाने के कारण यह स्थिति है अथवा सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद ऐसा हो रहा है।’

इस बारे में ‘दिल्ली प्रेस’ (Delhi Press) के पब्लिशर परेश नाथ भी मानना है कि नोटबंदी के निर्णय का प्रिंट न्‍यूज इंडस्‍ट्री और रियल एस्‍टेट पर काफी प्रभाव पड़ा है। यह पूछे जाने पर कि रियल एस्‍टेट के एडवर्टाइजमेंट तो अखबारों के स्‍थानीय संस्‍करणों (editions) में दिखाई दे रहे हैं, परेश नाथ का कहना था कि कोई भी बिल्‍डर अखबार के सभी एडिशंस में अपने विज्ञापन नहीं देता है।

‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) के हेड (Investor & Media Relations) प्रसून पांडेय का कहना है कि कई लोगों के पास इन दिनों अखबार खरीदने के लिए खुले चार-पांच रुपये भी नहीं हो सकते हैं, जो काफी चिंता की बात है और इससे बिक्री भी कम होगी। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्‍दबाजी होगी और इस बारे में कोई भी नहीं बता सकता है। आने वाले समय में किस तरह की स्थिति होगी, यह इस पर निर्भर करेगा।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर को जब से पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने की घोषणा की है, बैंकों के बाहर लंबी-लंबी लाइन लगी है। हालत यह है कि कई एटीएम भी खाली पड़े हैं और लोगों को पैसों की काफी कमी हो रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोग पुराने समय की तरह की काम कर रहे हैं। जैसे कि वे सामान खरीदने के बदले में मोबाइल रिचार्ज कर रहे हैं अर्थात मिलजुलकर उन्‍होंने इस समस्‍या का अस्‍थायी समाधान निकाल लिया है। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि शुरुआत में ही इस तरह की स्थिति हो रही है और आने वाले समय में इसमें जरूर सुधार होगा।

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