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तेलंगाना CM का तीखा वार: राजनीतिक दलों की मीडिया में घुसपैठ ने पत्रकारिता की नींव हिला दी
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को मीडिया के राजनीतिक उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि कुछ दल अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए मीडिया संस्थानों का संचालन कर रहे हैं
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 6 months ago
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मीडिया की गिरती साख और उसमें बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कुछ राजनीतिक दल अपने निजी हितों की रक्षा के लिए मीडिया संस्थान चला रहे हैं, जिससे पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सीधा आघात हो रहा है।
एक प्रमुख तेलुगू अख़बार की 10वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के समय से लेकर किसानों और सामाजिक आंदोलनों तक, समाचार पत्रों की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पहले राजनीतिक दल अपनी विचारधारा को जनता तक पहुंचाने के लिए अखबार प्रकाशित करते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आज कई ऐसे मीडिया संस्थान खड़े हो गए हैं जो सिर्फ नेताओं के भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने, अवैध संपत्तियों को बचाने और आलोचकों की छवि बिगाड़ने के औजार बन चुके हैं।
रेड्डी ने आगे कहा, “आज पत्रकारिता के नाम पर जो कुछ चल रहा है, उसमें कई बार यह पहचानना भी मुश्किल हो जाता है कि सामने बैठा व्यक्ति सचमुच पत्रकार है या किसी राजनीतिक पार्टी का प्रतिनिधि। कुछ लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर खुद को पत्रकार घोषित कर देते हैं, भले ही उन्हें खबर लिखने का बुनियादी ज्ञान न हो।”
युवा पत्रकारों की नई पीढ़ी पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ पत्रकारों के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “वो लोग जो बीते वर्षों में समाज के जमीनी सवालों को उठाते रहे, अपने स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन को दांव पर लगाकर दूर-दराज़ इलाकों में रिपोर्टिंग करते रहे, आज उन्हें नई पीढ़ी पहचानती तक नहीं। जब ऐसे वरिष्ठ पत्रकार किसी कार्यक्रम में आते हैं, तो नौजवान पत्रकार उनके लिए खड़े होना तो दूर, उन्हें पहचानते भी नहीं।”
मुख्यमंत्री ने एक निजी अनुभव साझा करते हुए कहा, “कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब मैं मंच पर आता हूं, तो युवा पत्रकार मुझे इस तरह घूरते हैं जैसे मैं उनका अभिवादन नहीं कर रहा, और मुझे सिर झुकाना चाहिए। कभी-कभी मन होता है कि उन्हें थप्पड़ जड़ दूं, लेकिन फिर यह सोचकर रुक जाता हूं कि मैं मुख्यमंत्री हूं।”
रेवंत रेड्डी ने बताया कि आज की स्थिति इतनी विकृत हो गई है कि ईमानदार पत्रकारों को बाकायदा सेमिनार आयोजित करने पड़ रहे हैं ताकि वे लोगों को समझा सकें कि असली पत्रकार कौन है। उन्होंने कहा, “पत्रकारिता को लेकर एक नई परिभाषा गढ़ने की जरूरत आ गई है, क्योंकि राजनीतिक दलों ने इसे अपने हितों का उपकरण बना लिया है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत कुछ सोशल मीडिया प्रभावशाली लोगों की गिरफ्तारी, जिन पर पाकिस्तान समर्थित गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप है, इस बात का प्रमाण है कि मीडिया का कुछ हिस्सा किस हद तक रास्ते से भटक चुका है।
रेड्डी ने दो टूक कहा, “पत्रकारिता संस्था को कमजोर करने की सोची-समझी रणनीति चल रही है। जैसे राजनीति में नैतिकता का संकट है, वैसे ही पत्रकारिता भी आज विश्वसनीयता के गहरे संकट में है। वक्त आ गया है कि सच्चे पत्रकार एक स्पष्ट रेखा खींचें और दिखावे की पत्रकारिता करने वालों से स्वयं को अलग करें।”
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