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निधि राजदान समेत कई महिला पत्रकारों को स्कैमर्स ने बनाया था निशाना: रिपोर्ट
प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में नौकरी के नाम पर फर्जी वादा करने वाले ऑनलाइन स्कैमर्स ने भारतीय मीडिया की प्रख्यात महिला शख्सियतों को अपना निशाना बनाया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 4 years ago
प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में नौकरी के नाम पर फर्जी वादा करने वाले ऑनलाइन स्कैमर्स ने भारतीय मीडिया की प्रख्यात महिला शख्सियतों को अपना निशाना बनाया है। यह दावा गुरुवार को प्रकाशित हुई न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में किया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट में भारत में कई पत्रकारों और मीडिया हस्तियों को निशाना बनाने वाले ऑनलाइन स्कैमर्स की विस्तृत जांच को प्रकाशित किया है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, इन साइबर अपराधियों ने जिन्हें अपना शिकार बनाने की कोशिश की, उनमें एनडीटीवी की पूर्व एंकर निधि राजदान समेत मीडिया की अन्य महिला शख्सियतें भी शामिल हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, निधि राजदान के अलावा इन साइबर अपराधियों ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रवक्ता निघत अब्बास से भी संपर्क किया था और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में नौकरी के नाम पर उनके पासपोर्ट की और कुछ अन्य निजी जानकारियां मांगी थीं, लेकिन शक होने पर उन्होंने हार्वर्ड के एक प्रशासक से सीधे संपर्क किया था, जिनकी ई-मेल आईडी नौकरी के नाम पर भेजे गए उस ईमेल में दी गई थी। इसके बाद पूरी सच्चाई सामने आई गई थी।
इस पर प्रशासक बेली पेन ने उन्हें बताया कि उनकी हार्वर्ड के ईमेल पते से भेजा गया आधिकारिक नियंत्रण फर्जी है। पेन हॉर्वर्ड के वाइस प्रोवोस्ट के कार्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के लिए प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर हैं। जब पेन ने अब्बास से और जानकारियां साझा करने को कहा तो निघत अब्बास ने उनके साथ अपराधी से मिला यूएई का एक फोन नंबर, सभी ईमेल, फर्जी दस्तावेजों के स्क्रीनशॉट और होटल बुकिंग के रिकॉर्ड साझा किए।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह साफ नहीं है कि निघत अब्बास ने जो जानकारी साझा की उस पर हार्वर्ड प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई की गई है या नहीं। बेली पेन की ओर से इस मामले को लेकर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक प्रवक्ता जेसन न्यूटन ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि अब्बास की ओर से दी गई जानकारी को लेकर यूनिवर्सिटी ने क्या कदम उठाए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन साइबर अपराधियों की ओर से निशाना बनाए जाने का पहला मामला भारतीय पत्रकार रोहिणी सिंह का था। उन्हें अगस्त 2019 में ट्विटर पर एक यूजर्स की ओर से मैसेज प्राप्त हुआ था, जिसने अपनी पहचान तौसीफ अहमद बताई थी। अहमद ने उन्हें एक उच्च स्तरीय मीडिया कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया था। अहमद ने यह भी कहा था कि इसका पूरा खर्च हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से उठाया जाएगा।
वहीं, इसके तुरंत बाद एक अन्य महिला पत्रकार जैनब सिकंदर को निशाना बनाया गया था। उन्हें भी ट्विटर पर ही अब्बास से 22 अगस्त 2019 को ऐसा मैसेज मिला था, जिसमें उन्हें भी एक मीडिया कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए न्योता दिया गया था, लेकिन जब उन्होंने डीन से औपचारिक निमंत्रण की मांग की, लेकिन वह कभी नहीं आया। इसके बाद स्कैमर के यूएई फोन नंबर के बारे में संदेह होने के बाद सिकंदर ने बातचीत को बीच में ही खत्म कर दिया था।
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