राहुल जैन बने IMF में भारत के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के वरिष्ठ सलाहकार

मध्य प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी राहुल जैन (Rahul Jain) को वॉशिंगटन डीसी स्थित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में भारत के Executive Director के Senior Adviser के रूप में नियुक्त किया गया है।

Last Modified:
Thursday, 06 August, 2026
rahuljain


मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) कैडर के वर्ष 2005 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service-IAS) अधिकारी राहुल जैन (Rahul Jain) को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund-IMF) में भारत के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (Executive Director) के वरिष्ठ सलाहकार (Senior Adviser) के पद पर नियुक्त किया गया है। वह वॉशिंगटन डीसी (Washington DC) स्थित IMF मुख्यालय में अपनी नई जिम्मेदारियां संभालेंगे।

राहुल जैन वर्तमान में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) के पद पर कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs), वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के तहत प्रतिनियुक्ति (Deputation) के आधार पर संयुक्त सचिव स्तर के पद पर तीन वर्ष के लिए की गई है।

नियुक्ति आदेश के अनुसार, राहुल जैन IMF में भारत के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को आर्थिक और वित्तीय मामलों पर सलाह देंगे। साथ ही वह वैश्विक वित्तीय संस्थान के साथ भारत की रणनीतिक भागीदारी और समन्वय को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

दो दशक से अधिक के प्रशासनिक अनुभव वाले राहुल जैन ने मध्य प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर कार्य किया है। वर्तमान में वह कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) और नियामकीय नीतियों (Regulatory Policies) से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। नई भूमिका में वह IMF में भारत के हितों का प्रतिनिधित्व करने और आर्थिक नीतियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहयोग प्रदान करेंगे।

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एआईपीएल से जुड़े मनीष कुमार : बने डिप्टी जनरल मैनेजर

एआईपीएल (AIPL) ने मनीष कुमार (Manish Kumar) को Deputy General Manager – Marketing & Corporate Communications नियुक्त किया है। वह 15 वर्षों से अधिक का अनुभव लेकर कंपनी से जुड़े हैं।

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Thursday, 06 August, 2026
manishkumar

एआईपीएल (AIPL) ने मनीष कुमार (Manish Kumar) को डिप्टी जनरल मैनेजर–मार्केटिंग एंड कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस (Deputy General Manager – Marketing & Corporate Communications) नियुक्त किया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई पेशेवर पारी की जानकारी साझा की।

मनीष कुमार के पास मार्केटिंग (Marketing), ब्रांड रणनीति (Brand Strategy), कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस (Corporate Communications) और पब्लिक रिलेशंस (Public Relations) के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने विभिन्न उद्योगों में ब्रांड्स की पहचान मजबूत करने और प्रभावी संचार रणनीतियां तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

AIPL से पहले मनीष कुमार स्पाइसजेट (SpiceJet) में असिस्टेंट जनरल मैनेजर (Assistant General Manager) के पद पर कार्यरत थे। करीब नौ वर्षों के दौरान उन्होंने रणनीतिक मार्केटिंग, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस, मीडिया रिलेशंस (Media Relations) और क्राइसिस कम्युनिकेशन (Crisis Communication) से जुड़े कार्यों का नेतृत्व किया।

इससे पहले वह आरके स्वामी बीबीडीओ (RK Swamy BBDO), मैक्कैन एरिक्सन (McCann Erickson) और ओगिल्वी एंड मेदर (Ogilvy & Mather) जैसी प्रमुख कंपनियों में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुके हैं। नई जिम्मेदारी में वह AIPL की मार्केटिंग, ब्रांड कम्युनिकेशन और कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा को मजबूत करने पर फोकस करेंगे।

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अमिश देवगन ने 'नेटवर्क18' को सौंपा इस्तीफा, कई विकल्पों पर कर रहे मंथन

सूत्रों के मुताबिक, अमिश देवगन करीब एक सप्ताह पहले इस्तीफा दे चुके हैं। उन्हें रोकने की कोशिशें भी जारी हैं, जबकि वह कई विकल्पों के साथ-साथ अपने वेंचर की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं।

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Thursday, 06 August, 2026
Amish Devgan

टीवी न्यूज इंडस्ट्री के जाने-माने एंकर और नेटवर्क18 समूह के सबसे प्रमुख चेहरों में शुमार अमिश देवगन ने नेटवर्क18 से इस्तीफा दे दिया है। वह न्यूज18 यूपी/यूके/बिहार/राजस्थान में बतौर मैनेजिंग एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने करीब एक सप्ताह पहले मैनेजमेंट को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सूत्रों के अनुसार, नेटवर्क18 प्रबंधन अमिश देवगन को अपने साथ बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। वहीं, अमिश देवगन अपने अगले कदम को लेकर विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। चर्चा है कि वह कई बड़े मीडिया संस्थानों के प्रस्तावों पर मंथन कर रहे हैं और जल्द ही अपनी नई पारी को लेकर फैसला ले सकते हैं।

इसके साथ ही, वह उद्यमी (Entrepreneur) के रूप में अपनी नई पारी शुरू करने की संभावना भी तलाश रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि यदि वह इस दिशा में आगे बढ़ते हैं तो उनके नए वेंचर को समर्थन देने के लिए कुछ निवेशक भी तैयार हैं। हालांकि, इन सभी जानकारियों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बता दें कि अमिश देवगन पिछले कई वर्षों से न्यूज18 इंडिया का एक बड़ा चेहरा हैं। अपने लोकप्रिय प्राइम टाइम शो 'आर-पार' और बेबाक एंकरिंग शैली के चलते उन्होंने दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई। यही वजह है कि उनके अगले कदम को लेकर मीडिया इंडस्ट्री में खासी जिज्ञासा देखी जा रही है।

करीब दो दशक से अधिक के पत्रकारिता अनुभव वाले अमिश देवगन ने अपने करियर में हिन्दुस्तान टाइम्स, जी मीडिया और नेटवर्क18 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। मई 2014 से नवंबर 2015 तक वह जी बिजनेस के चीफ एडिटर रहे। इससे पहले उन्होंने उसी समूह में डिप्टी एडिटर, एडिटर आउटपुट और एडिटर स्पेशल प्रोजेक्ट्स जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में काम किया।

जी बिजनेस में उनके कार्यकाल के दौरान चर्चित डिबेट शो 'बिग स्टोरी बिग डिबेट' को नई पहचान मिली। वहीं, उनके इंटरव्यू शो 'बिग एनकाउंटर' में देश की कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने देवेंद्र फड़णवीस, मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह, जयराम रमेश, आनंद शर्मा और कमलनाथ सहित अनेक नेताओं के साक्षात्कार भी किए हैं।

अपनी आक्रामक और बेबाक पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले अमिश देवगन ने कोयला घोटाला, ओडिशा खनन घोटाला और हवाला कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े मामलों पर भी उल्लेखनीय रिपोर्टिंग की है। पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए उन्हें पावर ब्रैंड 2016 ट्रेंडसेटर अवॉर्ड, ENBA 2015 बेस्ट बिजनेस चैनल अवॉर्ड, IMF यंग इमर्जिंग एडिटर्स अवॉर्ड 2015 और बिजनेस जर्नलिज्म के लिए सृष्टि अवॉर्ड समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।

समाचार4मीडिया की टीम ने इस संबंध में नेटवर्क18 और अमिश देवगन से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी थी। ऐसे में उनके अगले कदम को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।

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‘डीडी न्यूज’ हिंदी की टीम में शामिल हुईं पत्रकार सरिता तिवारी

इससे पहले वह करीब चार साल से ‘आजतक’ में यूपी तक और उत्तराखंड तक में बतौर एंकर कम रिपोर्टर काम कर रही थीं।

Last Modified:
Wednesday, 05 August, 2026
Sarita Tiwari

पत्रकार सरिता तिवारी ने मीडिया के क्षेत्र में अपनी नई पारी की शुरुआत की है। समाचार4मीडिया से बातचीत में सरिता तिवारी ने बताया कि उन्होंने दूरदर्शन (डीडी न्यूज) हिंदी में बतौर कॉपी एडिटर जॉइन किया है। इससे पहले वह करीब चार साल से ‘आजतक’ में यूपी तक और उत्तराखंड तक में बतौर एंकर कम रिपोर्टर काम कर रही थीं।

मूल रूप से बुंदेलखंड झांसी की रहने वाली सरिता तिवारी को मीडिया में काम करने का एक दशक से ज्यादा का अनुभव है। सरिता तिवारी ने वर्ष 2013 में मीडिया में अपने करियर की शुरुआत ‘टीवी100’ न्यूज चैनल से की थी।

मीडिया में अपने अब तक के सफर में वह ‘न्यूजवर्ल्ड’, ‘इंडिया न्यूज’ और ‘न्यूज नेशन’ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी भूमिकाएं निभा चुकी हैं। सरिता तिवारी उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी केस में अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के लिए चर्चित रही हैं। इन्होंने इस केस में कई अहम खुलासे किए थे।

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो सरिता तिवारी ने उत्तराखंड की हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पत्रकारिता और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन (BJMC) किया है। इसके साथ ही उन्होंने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई भी की है।

समाचार4मीडिया की ओर से सरिता तिवारी को उनकी नई पारी के लिए ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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JioStar: सेल्स टीम में फेरबदल, पवित्रा केआर को मिली प्रशांत शेट्टी की जिम्मेदारी

हाल ही में प्रशांत शेट्टी के ZEEL जाने के बाद JioStar ने उठाया बड़ा कदम, बदली सेल्स टीम की जिम्मेदारियां

Last Modified:
Tuesday, 04 August, 2026
Pavithra KR

एंटरटेनमेंट क्षेत्र की प्रमुख मीडिया कंपनी ‘जियोस्टार’ (JioStar) ने अपनी एंटरटेनमेंट एडवरटाइजिंग सेल्स टीम में अहम बदलाव किए हैं। यह फेरबदल कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी प्रशांत शेट्टी के इस्तीफे के बाद किया गया है। प्रशांत शेट्टी हाल ही में ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) में हेड- एडवरटाइजमेंट रेवेन्यू (ब्रॉडकास्ट एंड डिजिटल) के रूप में शामिल हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, पवित्रा केआर (Pavithra KR), जो अभी तक एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेजिडेंट, एंटरटेनमेंट एड सेल्स- हिंदी मूवीज, किड्स और यूथ म्यूजिक एंटरटेनमेंट (YME) की जिम्मेदारी संभाल रही थीं, अब उन्हें प्रशांत शेट्टी का पोर्टफोलियो भी सौंप दिया गया है। उनकी नई जिम्मेदारियों में अब फ्री-टू-एयर (FTA) जनरल एंटरटेनमेंट चैनल (GEC) सेल्स भी शामिल होगी। इससे JioStar के एंटरटेनमेंट नेटवर्क में उनकी भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

इसी के साथ कंपनी ने एक और बदलाव करते हुए सीतालक्ष्मी अय्यर (Seethalakshmi Iyer) को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। वह फिलहाल सीनियर वाइस प्रेजिडेंट, एंटरटेनमेंट एड सेल्स- तमिल और मलयालम के पद पर हैं। अब वह अपने मौजूदा कार्यभार के साथ-साथ किड्स, मूवीज और MTV बिजनेस के विज्ञापन कारोबार की जिम्मेदारी भी संभालेंगी।

प्रशांत शेट्टी के जियोस्टार छोड़ने के बाद कंपनी ने किसी बाहरी नियुक्ति के बजाय अपने अनुभवी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां देकर नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखने का फैसला किया है।

उधर, ZEEL में शामिल होने के बाद प्रशांत शेट्टी चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर- एडवरटाइजमेंट रेवेन्यू संदीप मेहरोत्रा को रिपोर्ट करेंगे। उनकी जिम्मेदारी कंपनी के टेलीविजन चैनलों और Zee5 प्लेटफॉर्म पर ब्रॉडकास्ट और डिजिटल विज्ञापन राजस्व बढ़ाने की होगी। साथ ही वह विज्ञापन राजस्व में वृद्धि, रणनीतिक ग्राहकों के साथ साझेदारी मजबूत करने, बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने और ब्रॉडकास्ट व डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए एकीकृत मोनेटाइजेशन रणनीति तैयार करने पर काम करेंगे।

जियोस्टार का यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब कंपनी डिज्नी स्टार (Disney Star) और वायकॉम18 (Viacom18) के विलय के बाद अपने कमर्शियल ऑपरेशंस को लगातार व्यवस्थित कर रही है। कंपनी सेल्स स्ट्रक्चर को एकीकृत करने, रिपोर्टिंग सिस्टम को बेहतर बनाने और विभिन्न बिजनेस यूनिट्स को एक मंच पर लाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि टीवी, डिजिटल और स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म पर विज्ञापनदाताओं को एकीकृत सेवाएं दी जा सकें।

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि यह फेरबदल विज्ञापनदाताओं के साथ निरंतरता बनाए रखने और एंटरटेनमेंट एड सेल्स की रफ्तार को बरकरार रखने के उद्देश्य से किया गया है। जियोस्टार के पास हिंदी और क्षेत्रीय जनरल एंटरटेनमेंट चैनलों, मूवीज, किड्स प्रोग्रामिंग, म्यूजिक, इन्फोटेनमेंट और स्पोर्ट्स का बड़ा नेटवर्क है। ऐसे में प्रमुख विज्ञापन सीजन और बड़े एंटरटेनमेंट लॉन्च से पहले सेल्स नेतृत्व में स्थिरता कंपनी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वहीं, ZEEL के लिए प्रशांत शेट्टी की नियुक्ति कंपनी की विज्ञापन आय बढ़ाने की स्ट्रैटेजी का अहम हिस्सा मानी जा रही है। कंपनी ब्रॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच बढ़ते तालमेल का लाभ उठाते हुए भविष्य के लिए मजबूत विज्ञापन राजस्व मॉडल तैयार करने पर जोर दे रही है।

खबर लिखे जाने तक जियोस्टार ने इस आंतरिक फेरबदल पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, ZEEL पहले ही प्रशांत शेट्टी की नियुक्ति की औपचारिक घोषणा कर चुका है।

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GetVantage ने जुटाए 63 करोड़ रुपये, छोटे कारोबारों तक आसान पूंजी पहुंचाने पर फोकस

कंपनी ने इस फंडिंग राउंड को 'Scale Capital' राउंड का नाम दिया है। कंपनी का लक्ष्य देशभर के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) तक आसान और तेज़ कार्यशील पूंजी (Working Capital) उपलब्ध कराना है।

Last Modified:
Tuesday, 04 August, 2026
Getvantage

देश के प्रमुख B2B फिनटेक प्लेटफॉर्म GetVantage ने Series A1 फंडिंग राउंड में 63 करोड़ रुपये (इक्विटी और डेट) जुटाने की घोषणा की है। इस नई फंडिंग के साथ मुंबई स्थित कंपनी की कुल प्रतिबद्ध फंडिंग क्षमता 700 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। कंपनी का लक्ष्य देशभर के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) तक आसान और तेज़ कार्यशील पूंजी (Working Capital) उपलब्ध कराना है।

कंपनी ने इस फंडिंग राउंड को 'Scale Capital' राउंड का नाम दिया है। इसके जरिए GetVantage अब केवल Revenue-Based Financing तक सीमित न रहकर छोटे कारोबारों के लिए एक व्यापक और एंबेडेड कैश-फ्लो फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करेगी।

इस निवेश राउंड का नेतृत्व बैंकिंग और फिनटेक क्षेत्र के अनुभवी राजीव आहूजा, पूर्व एमडी, RBL Bank, और ऑपरेटर-आधारित निवेश फर्म SanRaj Group ने किया। इसके अलावा मौजूदा निवेशकों Chiratae Ventures, Varanium Fintech Fund और VCMint ने भी कंपनी पर अपना भरोसा बनाए रखा।

कंपनी के अनुसार, इस नई पूंजी से उसके वित्तीय संस्थान साझेदारों के माध्यम से परिचालन ऋण (Operational Debt Capital) के रूप में सैकड़ों करोड़ रुपये की अतिरिक्त फंडिंग उपलब्ध कराने का रास्ता खुलेगा।

इस निवेश का उपयोग GetVantage अपने Capital Gateway के विस्तार और उसे और मजबूत बनाने में करेगी। यह एक प्लग-एंड-प्ले API आधारित इकोसिस्टम है, जिसकी मदद से B2B ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, मार्केटप्लेस और लॉजिस्टिक्स कंपनियां अपने मर्चेंट नेटवर्क में सीधे फाइनेंसिंग सेवाएं जोड़ सकती हैं। कंपनी के मुताबिक, जिस तरह पेमेंट गेटवे डिजिटल भुगतान को आसान बनाता है ठीक उसी तरह Capital Gateway छोटे कारोबारों को तुरंत और सहज तरीके से कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने का माध्यम बनेगा, ठीक वैसे ही जैसे पेमेंट गेटवे डिजिटल भुगतान स्वीकार करने में मदद करता है।

GetVantage के संस्थापक भाविक वासा ने कहा कि कंपनी ने भारत में कैश-फ्लो आधारित फाइनेंसिंग की शुरुआत की थी, लेकिन उसका लक्ष्य हमेशा इससे कहीं बड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी का विकास अब उसे भारत के Capital Gateway के रूप में स्थापित कर रहा है, जहां छोटे कारोबारों को बिना जटिल प्रक्रिया के कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि राजीव आहूजा, राजदीप गुप्ता और Chiratae Ventures जैसे निवेशकों का साथ कंपनी के इस मिशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कंपनी का कहना है कि जहां पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था में ऋण देने के लिए अक्सर संपार्श्विक (Collateral) और पुराने वित्तीय रिकॉर्ड पर अधिक निर्भरता होती है, वहीं GetVantage वैकल्पिक डेटा (Alternate Data) और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स के आधार पर कारोबार के वास्तविक कैश फ्लो का आकलन कर फाइनेंसिंग उपलब्ध कराती है। इससे उद्यमियों और MSMEs के लिए पूंजी जुटाने की प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है।

निवेशक राजीव आहूजा ने कहा कि भारत की अगली विकास यात्रा लाखों MSMEs तक ऋण पहुंचाने पर निर्भर करेगी, जिसे केवल पारंपरिक बैंकिंग मॉडल से पूरा नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, GetVantage ने तकनीक आधारित मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जो इस अंतर को प्रभावी ढंग से भरने में सक्षम है।

GetVantage छोटे कारोबारों के लिए कैश-फ्लो आधारित फाइनेंसिंग, टर्म लोन, बिजनेस लोन और मर्चेंट कैश एडवांस जैसी विभिन्न वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी का दावा है कि डेटा-आधारित वितरण मॉडल के जरिए वह भारत के लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के MSME क्रेडिट गैप को कम करने में योगदान दे रही है।

कंपनी ने यह भी कहा कि उसका विस्तार सरकार द्वारा कैश-फ्लो आधारित अंडरराइटिंग, को-लेंडिंग और डिजिटल क्रेडिट इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के अनुरूप है। उसका Capital Gateway संस्थागत पूंजी को छोटे कारोबारों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है।

SanRaj Group के राजदीप गुप्ता ने कहा कि छोटे कारोबारों के लिए लचीली पूंजी तक पहुंच आज भी एक बड़ी चुनौती है। उनके अनुसार, GetVantage का API आधारित Capital Gateway डिजिटल मर्चेंट इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है और इसी सोच के साथ उनकी कंपनी ने इस निवेश में भागीदारी की है।

कंपनी ने कहा कि आने वाले महीनों में वह कई प्रमुख डिजिटल इकोसिस्टम्स के साथ Seller Financing से जुड़ी रणनीतिक साझेदारियों की घोषणा करेगी, जिससे एंबेडेड फाइनेंस के क्षेत्र में उसकी स्थिति और मजबूत होगी।

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निर्विक सिंह: एजेंसी और बिजनेस लीडरशिप की दुनिया में भारत की मजबूत पहचान

AAAI लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड को लेकर शुरू हुई चर्चा ने भारतीय विज्ञापन जगत के सामने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है- आखिर भारत का विज्ञापन उद्योग किस तरह की उपलब्धियों का सम्मान करता है?

Last Modified:
Tuesday, 04 August, 2026
NirvikSingh521

डॉ. अनुराग बत्रा, चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।

AAAI लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड को लेकर शुरू हुई चर्चा ने भारतीय विज्ञापन जगत के सामने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है- आखिर भारत का विज्ञापन उद्योग किस तरह की उपलब्धियों का सम्मान करता है?

हम अच्छे विचारों, शानदार कैंपेन और उन्हें बनाने वाले क्रिएटिव लोगों का सम्मान करते हैं, और यह बिल्कुल सही भी है। लेकिन विज्ञापन एजेंसियां सिर्फ क्रिएटिव संस्थान नहीं होतीं, वे बड़े कारोबार भी होती हैं। उन्हें ऐसे लीडर्स की जरूरत होती है, जो प्रतिभा को बड़े स्तर तक ले जा सकें, रचनात्मक महत्वाकांक्षा को मजबूत आर्थिक आधार दे सकें, ग्राहकों के लिए नई क्षमताएं विकसित कर सकें और भारतीय मैनेजमेंट की सोच और नेतृत्व को दुनिया भर में स्थापित कर सकें।

यही वजह है कि निर्विक सिंह का सम्मान भारतीय विज्ञापन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी और योग्य लीडर का योगदान कम है। सम्मान किसी एक के हिस्से की चीज नहीं होता। बल्कि यह योगदान की व्यापक और अधिक न्यायपूर्ण परिभाषा को स्वीकार करने की बात है। अगर भारतीय एजेंसी कारोबार के आधुनिक इतिहास और उसे बेहतर ढांचा, व्यावसायिक अनुशासन तथा वैश्विक महत्वाकांक्षा देने वाले भारतीय लीडर्स की चर्चा होगी, तो निर्विक सिंह का नाम उसके बिना अधूरा रहेगा।

मेरा निर्विक सिंह के साथ कई वर्षों का जुड़ाव रहा है और कई महत्वपूर्ण मौकों पर हमारे बीच भरोसे का रिश्ता बना। उनके प्रति मेरा सम्मान सिर्फ इसलिए नहीं है कि उन्होंने बड़े-बड़े पद संभाले। मैंने यह भी देखा है कि जिन लोगों और संस्थानों पर उन्हें भरोसा होता है, उन्हें आगे बढ़ाने के लिए वह अपनी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा लगाने से भी पीछे नहीं हटते।

साल 2009 में जब एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ने भारत में उस समय क्रेन कम्युनिकेशंस के स्वामित्व वाली प्रतिष्ठित पत्रिका Advertising Age के साथ कंटेंट पार्टनरशिप की थी, तब निर्विक सिंह और प्रसून जोशी ने इस साझेदारी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। निर्विक ने उस समय क्रेन कम्युनिकेशंस के अध्यक्ष और Advertising Age के एडिटर-इन-चीफ रेंस क्रेन से हमारे बारे में सकारात्मक बात की। उनकी सिफारिश का काफी महत्व था और उसने बड़ा फर्क पैदा किया।

ऐसा ही उनका स्वभाव साल 2013 के आखिर में भी देखने को मिला, जब मैं ABP से BW बिजनेसवर्ल्ड के अधिग्रहण की प्रक्रिया में था। उस समय निर्विक सिंह ने मेरा समर्थन किया और ABP के प्रमोटर्स से मेरे बारे में सकारात्मक बात की। ऐसा करना उनकी कोई मजबूरी नहीं थी। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि गंभीर और दूरदर्शी लीडर जानते हैं कि उद्योग तभी आगे बढ़ता है, जब भरोसेमंद लोग दूसरे भरोसेमंद लोगों का साथ देते हैं और अपने संगठन से आगे बढ़कर भी संस्थाओं को मजबूत बनाने में योगदान करते हैं।

ये भले ही मेरी निजी यादें हों, लेकिन इनसे मिलने वाला सबक पूरी तरह पेशेवर है। नेतृत्व सिर्फ इस बात का नाम नहीं है कि कोई व्यक्ति अपने लिए क्या बनाता है। असली नेतृत्व यह भी है कि वह दूसरों के लिए क्या संभव बनाता है।

विज्ञापन कारोबार को नई दिशा देने वाले लीडर

निर्विक सिंह ने अपने करियर की शुरुआत लिप्टन इंडिया से की। इसके बाद उन्होंने HTA में काम किया और फिर उनका सबसे महत्वपूर्ण सफर त्रिकाया और ग्रे (Grey) के साथ जुड़ा।

रवि गुप्ता ने जब त्रिकाया का नया कोलकाता कार्यालय खोला, तब केवल 26 वर्ष की उम्र में उसकी जिम्मेदारी निर्विक सिंह को सौंपी गई। उनके नेतृत्व में यह कार्यालय तेजी से आगे बढ़ा और लगातार चार वर्षों तक एजेंसी ऑफ द ईयर का खिताब जीतने में सफल रहा।

इन उपलब्धियों ने उनके उस गुण को सामने ला दिया, जिसने आगे चलकर उनके पूरे करियर को परिभाषित किया- लोगों, ग्राहकों, नए विचारों और व्यावसायिक प्रदर्शन को एक साथ जोड़ने की उनकी क्षमता।

साल 1997 में रवि गुप्ता के निधन के बाद निर्विक सिंह को त्रिकाया ग्रे की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली, जब कंपनी आर्थिक रूप से बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही थी। आसान रास्ता यह था कि एजेंसी की बड़ी बिलिंग्स को बनाए रखा जाए और यह दिखाया जाए कि आकार ही ताकत है। लेकिन उन्होंने कठिन रास्ता चुना।

उन्होंने ग्राहकों का भरोसा कायम रखा, खर्चों में कटौती की, कर्मचारियों की संख्या कम की और उन दर्जनों खातों (Accounts) को छोड़ दिया, जिनसे एजेंसी को लाभ नहीं हो रहा था। इसका परिणाम यह हुआ कि साल 2000 तक कंपनी घाटे से बाहर निकल आई।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि इसने भारतीय विज्ञापन उद्योग को एक नई सोच दी। अगर बिलिंग्स से वास्तविक मूल्य नहीं बनता, तो उनका कोई मतलब नहीं है। कमजोर आर्थिक आधार पर कोई एजेंसी लंबे समय तक बेहतरीन काम नहीं कर सकती, अच्छे लोगों को आकर्षित नहीं कर सकती और नई क्षमताओं में निवेश भी नहीं कर सकती। निर्विक सिंह ने विज्ञापन को हमेशा एक गंभीर कारोबार की तरह देखा, लेकिन उसे केवल आंकड़ों और स्प्रेडशीट तक सीमित नहीं किया।

वे टोटल कम्युनिकेशंस कंपनी की अवधारणा के शुरुआती समर्थकों में भी थे। उनका मानना था कि विज्ञापन, पब्लिक रिलेशंस, डायरेक्ट मार्केटिंग, इंटरएक्टिव, इवेंट्स, हेल्थकेयर और अन्य विशेषज्ञ सेवाएं अलग-अलग हिस्सों में नहीं रह सकतीं, क्योंकि ग्राहकों की जरूरतें लगातार जटिल होती जा रही थीं।

उनके इस दृष्टिकोण ने भारतीय विज्ञापन उद्योग को संस्थापक-आधारित एजेंसियों से आगे बढ़ाकर आधुनिक और एकीकृत कम्युनिकेशन ग्रुप्स की दिशा में ले जाने में मदद की। यही कारण है कि उन्हें केवल एजेंसी लीडर नहीं, बल्कि एक सच्चा बिजनेस लीडर भी कहा जाता है। वे उत्पाद को भी समझते थे और उस उत्पाद के पीछे खड़े पूरे कारोबार को भी।

भारतीय लीडर से वैश्विक नेतृत्व तक का सफर

महज 33 वर्ष की उम्र में निर्विक सिंह ग्रे इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बन गए। इसके बाद उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं और उन्होंने दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, एशिया-प्रशांत, मध्य पूर्व और अफ्रीका जैसे क्षेत्रों का नेतृत्व किया।

साल 2019 में उन्हें ग्रे ग्रुप का नए पद ग्लोबल चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) बनाया गया। बाद में उन्होंने प्रेसिडेंट इंटरनेशनल की जिम्मेदारी भी संभाली, जिसके तहत यूरोप, लैटिन अमेरिका, मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया-प्रशांत जैसे बड़े बाजार उनके नेतृत्व में आए।

उनका यह सफर सिर्फ व्यक्तिगत पदोन्नति की कहानी नहीं है। उन्होंने साबित किया कि भारत में विकसित व्यावसायिक समझ और रणनीतिक नेतृत्व दुनिया की अलग-अलग संस्कृतियों में भी सफल हो सकता है, बड़े ग्राहकों के साथ काम कर सकता है और कई महाद्वीपों में नई क्षमताओं का निर्माण कर सकता है।

उन्होंने चीन, भारत, दक्षिण कोरिया, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों में अधिग्रहण (Acquisitions) का नेतृत्व किया। इससे ग्रे की डिजिटल, ई-कॉमर्स, डेटा, शॉपर मार्केटिंग और मार्केटिंग टेक्नोलॉजी जैसी क्षमताएं और मजबूत हुईं।

उन्होंने ऐसे समय में ग्रे के बॉर्डरलेस और इंटीग्रेटेड मॉडल को आगे बढ़ाया, जब ग्राहक और उपभोक्ता एजेंसियों की भौगोलिक सीमाओं और पारंपरिक कार्यक्षेत्रों को महत्व देना छोड़ चुके थे।

भारतीय विज्ञापन जगत ने पियूष पांडे और प्रसून जोशी को वैश्विक स्तर पर भारतीय रचनात्मक नेतृत्व के शानदार उदाहरण के रूप में सम्मान दिया है। निर्विक सिंह इस कहानी के दूसरे और उतने ही महत्वपूर्ण पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उन्होंने यह साबित किया कि भारत सिर्फ विश्वस्तरीय क्रिएटिव लीडर ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर के एजेंसी और बिजनेस लीडर भी तैयार कर सकता है। वे वैश्विक विज्ञापन और मार्केटिंग सेवाओं के क्षेत्र में भारत के सबसे महत्वपूर्ण प्रतिनिधियों में से एक हैं।

उनका नेतृत्व सिर्फ संगठनात्मक ढांचे तक सीमित नहीं रहा। निर्विक हमेशा लोगों से जुड़कर काम करने वाले लीडर रहे हैं। वे दृढ़ फैसले लेने की क्षमता को आत्मीयता के साथ जोड़ते हैं और बड़ी महत्वाकांक्षा के साथ यह भी सुनिश्चित करते हैं कि उनके सहयोगियों को लगे कि वे भी उसी यात्रा का हिस्सा हैं।

बड़े संगठन सिर्फ आदेश देकर नहीं बढ़ते। वे तब आगे बढ़ते हैं, जब कोई लीडर प्रतिभाओं को आकर्षित करे, लोगों में विश्वास पैदा करे और जवाबदेही तय करते हुए भी संगठन की ऊर्जा को बनाए रखे।

उन्हें कई महत्वपूर्ण सम्मान मिले हैं, जिनमें Advertising Club Calcutta Hall of Fame में शामिल किया जाना और कई APAC Agency of the Year सम्मान शामिल हैं। लेकिन ये पुरस्कार उनके प्रभाव का प्रमाण भर हैं, उनकी उपलब्धियों का सार नहीं। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि वे लोग, कारोबार और बाजार हैं, जिन्हें उन्होंने विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अभी भी बाकी है बहुत कुछ

ग्रे और WPP के साथ उनका लंबा सफर साल 2024 में जरूर समाप्त हुआ, लेकिन उनकी भूमिका और प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई।

आज दुबई में रहते हुए निर्विक सिंह Shoppers Stop और Hype Luxury के चेयरमैन हैं। वे S4Capital में स्वतंत्र गैर-कार्यकारी निदेशक (Independent Non-Executive Director) हैं और उसकी Nomination and Remuneration Committee के चेयरमैन भी हैं। इसके अलावा वे Gulf Oil Lubricants India के स्वतंत्र निदेशक भी हैं।

यह किसी औपचारिक सेवानिवृत्ति का दौर नहीं है। Shoppers Stop में वे अपने दशकों के ब्रांड, उपभोक्ता और बोर्ड स्तर के अनुभव को भारत के प्रमुख रिटेल संस्थानों में से एक के साथ साझा कर रहे हैं।

Hype Luxury में वे भारत, UAE और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार की महत्वाकांक्षा रखने वाले डिजिटल-फर्स्ट लग्जरी मोबिलिटी प्लेटफॉर्म की रणनीति और व्यावसायिक साझेदारियों का नेतृत्व कर रहे हैं।

S4Capital में WPP, एशिया और मध्य पूर्व में अपने लंबे संचालन अनुभव के आधार पर वे नई पीढ़ी की मार्केटिंग सर्विसेज कंपनी के कॉरपोरेट गवर्नेंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

वहीं Gulf Oil में वे ब्रांड निर्माण, ग्राहक-केंद्रित सोच और परिवर्तन (Transformation) के अपने अनुभव का उपयोग एक स्थापित कंपनी को और मजबूत बनाने में कर रहे हैं।

दूसरे शब्दों में कहें तो निर्विक सिंह दुनिया के सबसे बड़े एजेंसी नेटवर्क में से एक का संचालन करने के बाद अब रिटेल, लग्जरी, मोबिलिटी, कंज्यूमर ब्रांड्स और नई पीढ़ी की मार्केटिंग सर्विसेज कंपनियों में अपने अनुभव का उपयोग कर रहे हैं। यह उनके योगदान का अंत नहीं, बल्कि उसका अगला अध्याय है।

लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड किसी व्यक्ति के पूरे जीवन के काम का सम्मान जरूर करता है, लेकिन इसका मतलब यह कभी नहीं होना चाहिए कि उसके सबसे महत्वपूर्ण योगदान अब पीछे छूट चुके हैं।

निर्विक सिंह का करियर अपने आप में सम्मान के योग्य है। उन्होंने भारत में एजेंसी कारोबार को अधिक पेशेवर बनाया, इंटीग्रेटेड मॉडल को उस समय अपनाया जब यह लोकप्रिय नहीं था, अलग-अलग बाजारों में कारोबार और प्रतिभाओं को विकसित किया और यह साबित किया कि एक भारतीय लीडर वैश्विक विज्ञापन उद्योग के सर्वोच्च स्तर पर भी प्रभावी नेतृत्व कर सकता है।

उन्हें सम्मानित करने की एक और बड़ी वजह भी है। युवा पेशेवरों को ऐसे उदाहरणों की जरूरत होती है, जो सफलता की उनकी सोच को और व्यापक बनाएं। नेतृत्व केवल किसी पद का नाम नहीं है। नेतृत्व वह क्षमता है, जिससे मजबूत और टिकाऊ कारोबार खड़े किए जाएं, लोगों को साथ लेकर चला जाए, अपनी प्रतिष्ठा का उपयोग अच्छे संस्थानों को मजबूत करने में किया जाए और बदलती दुनिया में भी लगातार उपयोगी बने रहा जाए।

निर्विक सिंह ने यह सब करके दिखाया है। और मेरा मानना है कि उनका सबसे बेहतरीन दौर अभी आना बाकी है।

 

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पिडिलाइट इंडस्ट्रीज के प्रेसिडेंट बने कश्यप गाला

पिडिलाइट इंडस्ट्रीज (Pidilite Industries) ने कश्यप गाला (Kashyap Gala) को प्रेसिडेंट नियुक्त किया है। वह अप्रैल 2026 से नई जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

Last Modified:
Tuesday, 04 August, 2026
kashyap

पिडिलाइट इंडस्ट्रीज (Pidilite Industries) ने कश्यप गाला (Kashyap Gala) को कंपनी का प्रेसिडेंट (President) नियुक्त किया है। उनके लिंक्डइन (LinkedIn) प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने अप्रैल 2026 में यह नई जिम्मेदारी संभाली।

नई नियुक्ति से पहले कश्यप गाला (Kashyap Gala) अक्टूबर 2022 से मार्च 2026 तक कंपनी में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (Senior Vice President) के पद पर कार्यरत थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न रणनीतिक और कारोबारी पहलों का नेतृत्व किया।

कश्यप गाला उपभोक्ता उत्पाद (Consumer Products) उद्योग के अनुभवी पेशेवर हैं। पिडिलाइट इंडस्ट्रीज (Pidilite Industries) से जुड़ने से पहले उन्होंने जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson) में लगभग 12 वर्षों तक विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाओं में काम किया।

नई भूमिका में कश्यप गाला कंपनी की विकास रणनीति, कारोबार विस्तार और परिचालन उत्कृष्टता (Operational Excellence) को आगे बढ़ाने के साथ-साथ पिडिलाइट इंडस्ट्रीज की दीर्घकालिक कारोबारी योजनाओं को गति देने पर फोकस करेंगे।

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मेनस्ट्रीम मीडिया को नकारना समाधान नहीं, जंतर-मंतर आंदोलन पर राणा यशवंत की दो-टूक

समाचार4मीडिया के प्रतिष्ठित 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने पत्रकारिता के मौजूदा दौर, मीडिया की बदलती सोच और संवाद की घटती संस्कृति पर विस्तार से अपनी बात रखी।

Last Modified:
Tuesday, 04 August, 2026
RanaYashwant5421

समाचार4मीडिया के प्रतिष्ठित 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने पत्रकारिता के मौजूदा दौर, मीडिया की बदलती सोच और संवाद की घटती संस्कृति पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज पत्रकारिता का सबसे बड़ा संकट यह नहीं है कि लोग बोल नहीं रहे, बल्कि यह है कि लोग सुनना ही नहीं चाहते। हर व्यक्ति को लगता है कि वही जो कह रहा है, वही सही है। यही सोच आज मीडिया और समाज दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

अपने संबोधन की शुरुआत में राणा यशवंत ने कहा कि सुनना बहुत जरूरी है, क्योंकि आज सबसे बड़ा संकट यही है कि कोई किसी की बात सुनना नहीं चाहता। हर व्यक्ति अपनी बात को ही अंतिम सच मान बैठा है। उन्होंने बारिश का जिक्र करते हुए कहा कि बाहर इतनी तेज बारिश हो रही थी कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। इसी दौरान किसी ने उनसे कहा कि आंखों को बरसात देखे हुए भी काफी समय हो गया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मौसम की बात नहीं है, बल्कि हमारे समय की भी एक तस्वीर है, जहां धुंध इतनी बढ़ गई है कि चीजें साफ दिखाई देना बंद हो गई हैं।

राणा यशवंत ने कहा कि आज हम लगातार टकराव (कॉन्फ्लिक्ट) के दौर में जी रहे हैं। समाज और मीडिया दोनों एक तरह की वैचारिक खींचतान, द्वंद्व और बाइनरी सोच में फंस गए हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह हो गई है कि हम पहले अपने मन में सवाल खड़े करते हैं और फिर उन्हीं सवालों के जवाब भी खुद ही तलाशने लगते हैं। इतना ही नहीं, हम अपने हर फैसले और हर काम को सही साबित करने के लिए दलीलें भी खुद ही तैयार कर लेते हैं। उनके मुताबिक, यह केवल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी मीडिया इंडस्ट्री और पत्रकार बिरादरी की स्थिति बन चुकी है।

उन्होंने कहा कि वह पूरे कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं की बातें ध्यान से सुन रहे थे। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ पत्रकार विनोद जी ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता में कंटेंट पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है और इसमें कोई दो राय नहीं कि "Content is King"। इसके बाद जगदीश जी ने कहा कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता (क्रेडिबिलिटी) होती है और हर पत्रकार के लिए यह जरूरी है कि उसकी पहचान एक भरोसेमंद चेहरे के रूप में हो।

राणा यशवंत ने आगे कहा कि कार्यक्रम में संकेत ने भी एक महत्वपूर्ण बात कही कि आज के दौर में ओपिनियन यानी राय पूरी तरह हावी हो गई है, जबकि तथ्य (फैक्ट) पीछे छूटते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी बातें बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अगर कार्यक्रम का विषय "कल, आज और कल" है, तो फिर हमें उस सबसे बड़े संकट पर भी खुलकर बात करनी चाहिए, जिससे आज पूरी पत्रकार बिरादरी जूझ रही है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के सामने एक ऐसा गंभीर संकट खड़ा है, जिसका सामना करने से हम लगातार बचने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि हम कोई ऐसा रास्ता या गलियारा तलाश रहे हैं, जहां हमें इस कठिन सवाल का सामना ही न करना पड़े। लेकिन अब समय आ गया है कि इस चुनौती से आंखें चुराने के बजाय उसका सीधे सामना किया जाए।

राणा यशवंत ने कहा कि इस पूरे संदर्भ में उनके लिए सबसे बड़ा संदर्भ बिंदु इस बार का जंतर-मंतर आंदोलन है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को लेकर कई लोगों ने कहा कि यह Gen Z का आंदोलन था। लोगों ने एक-दूसरे को इंस्टाग्राम के जरिए जाना, आंदोलन के बारे में जानकारी हासिल की और धीरे-धीरे यही प्लेटफॉर्म इतना प्रभावशाली बन गया कि देश के प्रधानमंत्री को भी पहली बार इंस्टाग्राम पर आना पड़ा। उन्होंने कहा कि इससे यह साफ होता है कि आज सोशल मीडिया केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गया, बल्कि वह जनमत तैयार करने और लोगों को एकजुट करने की बड़ी ताकत बन चुका है।

राणा यशवंत ने कहा कि वह वर्ष 2023 से लगातार एक पत्रकार के तौर पर NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के कामकाज पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना था कि NTA जैसी संस्था, जिसके जिम्मे देश के लगभग सभी बड़े प्रोफेशनल कोर्स और विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षाएं हैं, क्या केवल सीमित संसाधनों और बेहद कम लोगों के सहारे इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभा सकती है? उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को लेकर छात्रों के भीतर जो असंतोष था, वह धीरे-धीरे आक्रोश में बदल गया। जब उन्हें सोशल मीडिया के रूप में एक साझा मंच मिला, तो बड़ी संख्या में छात्र वहां एकत्र हुए और आंदोलन की मांग करने लगे।

उन्होंने कहा कि इस आंदोलन का श्रेय किसे दिया जाए, यह बहस का विषय हो सकता है। कोई इसे किसी राजनीतिक दल से जोड़ सकता है और कोई इसे छात्रों के स्वाभाविक आक्रोश का परिणाम मान सकता है। लेकिन उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्रों का सवाल पूरी तरह जायज था और उस आंदोलन का होना भी जरूरी था। 

वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत ने जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन, मेनस्ट्रीम मीडिया की भूमिका और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन का मुद्दा पूरी तरह जायज था, लेकिन इसके साथ यह भी समझना जरूरी है कि मीडिया की भूमिका को केवल सोशल मीडिया और मेनस्ट्रीम मीडिया में बांटकर नहीं देखा जा सकता।

राणा यशवंत ने कहा कि जब जंतर-मंतर के आंदोलन को देखा जाता है तो अक्सर कहा जाता है कि अब मेनस्ट्रीम मीडिया की भूमिका खत्म हो गई है। लेकिन वह इस सोच से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अखबार और टेलीविजन चैनल आज भी मेनस्ट्रीम मीडिया हैं और उनकी अपनी एक अलग अहमियत है। अगर ऐसा नहीं होता तो जिन चैनलों और पत्रकारों का कुछ लोग विरोध करते हैं, उन्हीं चैनलों पर राजनीतिक दलों के प्रवक्ता जाकर अपनी बात भी नहीं रखते। इससे साफ है कि मेनस्ट्रीम मीडिया की उपयोगिता आज भी बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि आज एक नई प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। लोग जिस मंच पर होते हैं, उसी को सबसे मजबूत और सबसे प्रभावशाली बताने लगते हैं और बाकी सभी मंचों को खारिज करने की कोशिश करते हैं। यही कारण है कि उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा था कि आज सबसे ज्यादा जरूरत एक-दूसरे को सुनने की है। अगर हम केवल अपने मंच को सही और बाकी सबको गलत मानेंगे तो पत्रकारिता का संतुलन बिगड़ जाएगा।

राणा यशवंत ने कहा कि अगर इस पूरे आंदोलन को समझना है तो इसकी शुरुआत केवल आज से नहीं, बल्कि वर्ष 2011 से देखनी होगी। उन्होंने कहा कि अन्ना हजारे का आंदोलन देश का पहला बड़ा सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन था, जो सोशल मीडिया के जरिए तेजी से लोगों तक पहुंचा। लेकिन उस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत केवल सोशल मीडिया नहीं थी, बल्कि मेनस्ट्रीम मीडिया भी उसके साथ मजबूती से खड़ा था।

उन्होंने कहा कि उस समय टीवी चैनलों ने अपने स्टूडियो तक आंदोलन स्थल पर लगा दिए थे। रिपोर्टर लगातार मौके से रिपोर्टिंग कर रहे थे। पूरे देश में जो माहौल बना और जिस तरह सरकार पर दबाव बढ़ा, उसमें मेनस्ट्रीम मीडिया की बहुत बड़ी भूमिका थी। लेकिन आज, वर्ष 2026 में, जब जंतर-मंतर पर इतना बड़ा आंदोलन हुआ तो सवाल यह उठता है कि आखिर मेनस्ट्रीम मीडिया वहां से दूर क्यों दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब तलाशना बेहद जरूरी है।

राणा यशवंत ने कहा कि अगर कोई आंदोलन किसी राजनीतिक दल का हो, उसका अपना चुनावी एजेंडा हो, किसी राज्य में सत्ता हासिल करने का लक्ष्य हो या किसी राजनीतिक यात्रा और प्रदर्शन का हिस्सा हो, तो उस राजनीति को समझा जा सकता है। लेकिन जब कोई मुद्दा देश के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हो, जिसे लगभग हर व्यक्ति सही मान रहा हो और जिस पर अखबारों और टीवी चैनलों ने भी लगातार आवाज उठाई हो, तब उस आंदोलन के दौरान मेनस्ट्रीम मीडिया को घेरना और उसका विरोध करना समझ से परे है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस मुद्दे पर मीडिया खुद लगातार बहस कर रहा था, उसी मुद्दे पर जब पत्रकार मैदान में पहुंचे तो उन्हें वहां खड़ा तक नहीं होने दिया गया। पत्रकारों से सबसे पहले यह पूछा गया कि वे किस तरफ हैं। उन्होंने कहा कि यही आज की सबसे बड़ी बाइनरी है—या तो आप इस तरफ हैं या फिर उस तरफ। बीच का रास्ता जैसे खत्म होता जा रहा है।

राणा यशवंत ने कहा कि इसका सबसे खतरनाक असर यह है कि अगर कोई पत्रकार आम लोगों के जरूरी मुद्दों को लेकर भी मैदान में उतरता है, तब भी उसकी पहले से बनी हुई पहचान उसके खिलाफ इस्तेमाल की जाती है। लोगों के लिए उसे किसी एक खांचे में डाल देना आसान हो जाता है। फिर कहा जाता है कि यह तो उसी विचारधारा का पत्रकार है, इसलिए इसकी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि असलियत यह है कि जिस मुद्दे पर पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहा होता है, वह केवल उसका मुद्दा नहीं होता, बल्कि पूरे समाज का मुद्दा होता है। इसलिए पत्रकार को पहले से तय खांचों में बांधकर देखना पत्रकारिता के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

राणा यशवंत ने आगे कहा कि आज राजनीतिक दल मीडिया के साथ एक अलग तरह का खेल खेल रहे हैं। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि जंतर-मंतर पर एक रात करीब 12 बजे कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन लोगों को लगा कि शायद वह "गोदी मीडिया" से जुड़े हैं। उनसे कहा गया कि पहले यह बताइए कि आप गोदी मीडिया नहीं हैं। उन्होंने बार-बार यही कहा कि वह केवल एक पत्रकार हैं और उनके लिए यही पहचान पर्याप्त होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें घेरा हुआ था, उन्हें देखकर उन्हें नहीं लगा कि उनका पढ़ने-लिखने या छात्रों के आंदोलन से कोई सीधा संबंध है। उनके मुताबिक, ऐसा महसूस हो रहा था कि कुछ लोग केवल माहौल बनाने और भीड़ बढ़ाने के लिए वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा कि जो भी लोग उस आंदोलन में गए होंगे, उन्होंने यह जरूर महसूस किया होगा कि वहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी थे, जिनका मकसद छात्रों के मुद्दे से ज्यादा भीड़ बनाए रखना और कुछ खास तरह के पत्रकारों का विरोध करना था। 

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WPP प्रोडक्शन इंडिया के CEO कार्तिक नागराजन ने दिया इस्तीफा

फिलहाल उन्होंने अपने अगले कदम या नई जिम्मेदारी के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है।

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
Karthik Nagarajan

WPP प्रोडक्शन इंडिया (WPP Production India) के सीईओ कार्तिक नागराजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में जानकारी उन्होंने खुद लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक पोस्ट के जरिए साझा की।

कार्तिक नागराजन ने अपनी पोस्ट में लिखा कि WPP प्रोडक्शन (पूर्व में Hogarth) में इंडिया CEO के रूप में करीब साढ़े तीन साल का उनका कार्यकाल बेहद संतोषजनक रहा। अब वह नए अवसरों और नई चुनौतियों की ओर बढ़ रहे हैं।

उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि यह उनके प्रोफेशनल जीवन के सबसे परिवर्तनकारी चरणों में से एक रहा। इस दौरान उनके साथ काम करने वाली पूरी टीम को उन्होंने इसका श्रेय दिया। नागराजन ने लिखा कि उन्हें ऐसे सहयोगियों के साथ काम करने का अवसर मिला, जो रचनात्मकता (Craft) और तकनीक (Technology) के संगम पर शानदार काम कर रहे हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी बाकी है।

गौरतलब है कि कार्तिक नागराजन ने WPP प्रोडक्शन इंडिया के CEO के रूप में करीब चार वर्षों तक जिम्मेदारी निभाई। फिलहाल उन्होंने अपने अगले कदम या नई जिम्मेदारी के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है।

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एस्सेल ग्रुप ने पूरे किए 100 साल, मुंबई में आयोजित हुआ भव्य जश्न

एस्सेल ग्रुप ने अपनी 100 साल की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर ली है। इस खास उपलब्धि का जश्न बड़े ही भव्य अंदाज में मनाया गया।

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
ZeeGroup854

एस्सेल ग्रुप ने अपनी 100 साल की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर ली है। इस खास उपलब्धि का जश्न बड़े ही भव्य अंदाज में मनाया गया। एक सदी के इस सफर को दूरदृष्टि, नवाचार (इनोवेशन) और मजबूत रिश्तों की मिसाल बताते हुए ग्रुप ने अपने सहयोगियों, शुभचिंतकों और वर्षों से साथ जुड़े लोगों के साथ इस उपलब्धि को साझा किया।

इस विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए हिंदी Z5 की ओर से एक खास समारोह का आयोजन किया गया। यह शाम यादों, आभार और उत्सव को समर्पित रही, जिसमें उन सभी मेहमानों और शुभचिंतकों को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने एस्सेल ग्रुप की इस शानदार यात्रा में किसी न किसी रूप में योगदान दिया है।

1 अगस्त को मुंबई में आयोजित इस समारोह में एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा मुख्य रूप से मौजूद रहे। उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी मेहमानों का स्वागत किया और वर्षों से मिले उनके सहयोग, विश्वास और शुभकामनाओं के लिए दिल से आभार व्यक्त किया।

यह आयोजन केवल पिछले 100 वर्षों की उपलब्धियों का जश्न नहीं था, बल्कि भविष्य की नई योजनाओं, नए संकल्प और आगे की यात्रा के प्रति समूह की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक रहा। समारोह के दौरान एस्सेल ग्रुप की एक सदी लंबी विरासत, उसके योगदान और आने वाले समय के विजन को भी साझा किया गया।

कार्यक्रम में मौजूद मेहमानों ने एस्सेल ग्रुप की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं और समूह की भविष्य की सफलता के लिए अपनी शुभेच्छाएं व्यक्त कीं।

यहां देखें, कार्यक्रम की कुछ खास झलकियां:

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