प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का वीडियो Facebook से हटने के मामले में संसदीय समिति ने Meta को तीन दिन का समय दिया है। समिति ने सेफ हार्बर क्लॉज हटाने की भी चेतावनी दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का वीडियो फेसबुक (Facebook) से हटाए जाने के मामले में दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय समिति (Parliamentary Standing Committee on Communications and Information Technology) ने कड़ा रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समिति ने मेटा (Meta) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) को तीन दिन के भीतर जवाब देने और माफी मांगने का समय दिया है।
समिति के अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद निशिकांत दुबे (Nishikant Dubey) ने कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाया जाना लोकतंत्र पर हमला है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि Meta इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तो कंपनी से 'सेफ हार्बर क्लॉज' (Safe Harbour Clause) का संरक्षण हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि माफी नहीं मांगने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई और मामला दर्ज करने पर भी विचार किया जाएगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, संसदीय समिति ने सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (Child Sexual Exploitative and Abuse Material-CSAM) और महिलाओं से संबंधित आपत्तिजनक यौन सामग्री तीन दिनों के भीतर हटाने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
यह निर्देश गूगल (Google), यूट्यूब (YouTube), एक्स (X), फेसबुक (Facebook), व्हाट्सऐप (WhatsApp), इंस्टाग्राम (Instagram) और स्नैपचैट (Snapchat) सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लागू होगा।
MeitY के साथ हुई बैठक में मेटा (Meta) ने कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी चूकों पर खेद जताया। सरकार ने एल्गोरिदम आधारित कंटेंट चयन पर सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया।
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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) और मेटा (Meta) की वैश्विक नेतृत्व टीम के बीच हुई दो दिवसीय बैठक में कंटेंट मॉडरेशन (Content Moderation), बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM), डीपफेक (Deepfake) और भारतीय कानूनों के पालन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) की ओर से कंपनी ने कंटेंट मॉडरेशन में हुई चूकों पर खेद व्यक्त किया।
सूत्रों के मुताबिक, मेटा ने स्वीकार किया कि उसके प्लेटफॉर्म पर हानिकारक कंटेंट के प्रबंधन में कुछ कमियां रही हैं। साथ ही कंपनी ने यह भी माना कि कुछ विशेष प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी राशि खर्च की गई थी और इस फैसले पर भी खेद जताया।
सरकारी अधिकारियों ने बैठक में स्पष्ट किया कि मेटा के एल्गोरिदम (Algorithms) सक्रिय रूप से यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा। ऐसे में कंपनी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act-IT Act) के तहत इंटरमीडियरी (Intermediary) को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकती। अधिकारियों का कहना था कि एल्गोरिदम आधारित कंटेंट चयन कंपनी को एक निष्क्रिय मध्यस्थ की श्रेणी से अलग करता है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से जुड़े किसी वीडियो को हटाए जाने का मुद्दा नहीं उठाया गया। चर्चा का मुख्य फोकस प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट गवर्नेंस, हानिकारक सामग्री पर नियंत्रण और भारतीय कानूनों के अनुपालन को मजबूत बनाने पर रहा।
ओमनीकॉम मीडिया (Omnicom Media) में कार्तिक शर्मा (Kartik Sharma) ने छह वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर उन्होंने सहयोगियों, क्लाइंट्स और बिजनेस पार्टनर्स का आभार व्यक्त किया।
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कार्तिक शर्मा (Kartik Sharma) ने ओमनीकॉम मीडिया (Omnicom Media) में अपने छह वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा करते हुए अपने सहयोगियों, क्लाइंट्स और बिजनेस पार्टनर्स के प्रति आभार व्यक्त किया।
अपने संदेश में कार्तिक शर्मा ने कहा कि ओमनीकॉम मीडिया में बीते छह वर्ष उनके लिए यादगार और सीख से भरपूर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहयोगियों, ग्राहकों और साझेदारों के विश्वास, सहयोग और समर्थन ने इस यात्रा को सफल और प्रेरणादायक बनाया।
उन्होंने लिखा कि हर अनुभव, बातचीत और चुनौती ने उन्हें कुछ नया सिखाया और उनके व्यक्तिगत तथा पेशेवर विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके अनुसार, प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम करने का अवसर उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाने में बेहद अहम साबित हुआ।
भविष्य को लेकर कार्तिक शर्मा ने कहा कि वह आगे भी सीखने, बेहतर प्रदर्शन करने और अपनी टीम तथा साझेदारों के साथ मिलकर सार्थक योगदान देने के लिए उत्साहित हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भी यह सफर नई उपलब्धियों और अनुभवों से भरपूर रहेगा।
पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के Facebook वीडियो पर लगी अस्थायी रोक के बाद Meta की वैश्विक टीम 5-6 अगस्त को MeitY अधिकारियों से कंटेंट मॉडरेशन और AI सुरक्षा उपायों पर चर्चा करेगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के फेसबुक (Facebook) वीडियो पर अस्थायी रोक लगने के विवाद के बाद मेटा (Meta) की वैश्विक टीम 5 और 6 अगस्त को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात करेगी। बैठक में इस घटना के साथ-साथ कंटेंट मॉडरेशन (Content Moderation), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) से तैयार सामग्री और डिजिटल सुरक्षा उपायों पर चर्चा होने की संभावना है।
विवाद तब शुरू हुआ था, जब 23 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा फेसबुक पर साझा किया गया एक वीडियो भारत में कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं रहा। बाद में Meta ने वीडियो को बहाल करते हुए कहा कि यह उसके कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में हुई तकनीकी त्रुटि के कारण हुआ था।
इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने Meta से स्पष्टीकरण मांगा और विशेष रूप से वेरिफाइड (Verified) तथा हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। इसी सिलसिले में MeitY ने Meta की वैश्विक टीम को विस्तृत चर्चा के लिए बुलाया है।
बैठक में AI-जनित भ्रामक सामग्री (AI-generated Misinformation), चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (Child Sexual Abuse Material-CSAM) की पहचान और उसे प्लेटफॉर्म से हटाने की प्रक्रिया पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा Meta के कंटेंट गवर्नेंस सिस्टम और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों की भी समीक्षा की जाएगी।
लिंक्डइन (LinkedIn) ने AI-Generated और Low-Quality कंटेंट पर रोक लगाने के लिए नए मॉडरेशन टूल्स पेश किए हैं। यूजर्स अब संदिग्ध AI पोस्ट और कमेंट्स की रिपोर्ट भी कर सकेंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन (LinkedIn) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) से तैयार किए गए कम गुणवत्ता वाले कंटेंट (Low-Quality Content) पर लगाम लगाने के लिए नए मॉडरेशन टूल्स (Moderation Tools) लॉन्च किए हैं। कंपनी का उद्देश्य प्लेटफॉर्म पर मौलिक विचारों, पेशेवर अनुभव और वास्तविक विशेषज्ञता को बढ़ावा देना है।
नए अपडेट के तहत यूजर्स अब ऐसे पोस्ट और कमेंट्स की रिपोर्ट कर सकेंगे, जो अत्यधिक AI पर आधारित या गैर-प्रामाणिक (Inauthentic) प्रतीत होते हैं। लिंक्डइन के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर (Chief Product Officer) हरी श्रीनिवासन (Hari Srinivasan) ने कहा कि यूजर्स से मिलने वाला फीडबैक कंपनी को AI-Generated और कम गुणवत्ता वाले कंटेंट की पहचान करने वाली प्रणालियों को और बेहतर बनाने में मदद करेगा।
कंपनी ने AI क्लासिफायर्स (AI Classifiers) भी अपडेट किए हैं, जो मशीन से तैयार या निम्न गुणवत्ता वाले पोस्ट की पहचान करेंगे। ऐसे पोस्ट यूजर्स की फीड और रिकमेंडेशन (Recommendations) में कम दिखाई देंगे, खासकर उन पोस्ट में जो उनके नेटवर्क से बाहर के होंगे।
LinkedIn ने स्पष्ट किया है कि AI का इस्तेमाल केवल लेखन सुधारने, व्याकरण (Grammar) ठीक करने या भाषा को बेहतर बनाने के लिए किया गया हो और पोस्ट में लेखक के अपने विचार मौजूद हों, तो ऐसे कंटेंट की पहुंच कम नहीं की जाएगी।
इसके अलावा, प्लेटफॉर्म अब हर दिन लाखों ऑटोमेटेड कमेंट्स (Automated Comments) को ब्लॉक कर रहा है और हाल के महीनों में अरबों संदिग्ध ऑटोमेटेड गतिविधियों (Automated Activities) पर रोक लगा चुका है। कंपनी प्रोफाइल और पेज वेरिफिकेशन (Profile & Page Verification) फीचर्स का भी विस्तार कर रही है, ताकि प्लेटफॉर्म पर भरोसेमंद और प्रामाणिक प्रोफेशनल नेटवर्क तैयार किया जा सके।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB) ने 'Gems of India Challenge' के पायलट चरण की शुरुआत की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB) ने 'जेम्स ऑफ इंडिया चैलेंज' (Gems of India Challenge) के पायलट चरण की शुरुआत की है। इस राष्ट्रीय पहल का उद्देश्य देशभर के डिजिटल क्रिएटर्स (Digital Creators) को अपने-अपने जिलों की संस्कृति, विरासत, इतिहास और विशिष्ट पहचान को शॉर्ट वीडियो के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर पर ₹5 लाख तक का पुरस्कार दिया जाएगा।
यह प्रतियोगिता वेव्स ओटीटी (WAVES OTT) के अंतर्गत मायवेव्स (MyWAVES) प्लेटफॉर्म पर आयोजित की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, यह पहल स्थानीय स्तर के कंटेंट क्रिएटर्स को पहचान दिलाने और हाइपरलोकल स्टोरीटेलिंग (Hyperlocal Storytelling) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रतियोगिता के लिए प्रविष्टियां 1 अगस्त से 31 अगस्त तक स्वीकार की जाएंगी। पायलट चरण की सफलता के बाद इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।
प्रतिभागियों को MyWAVES सेक्शन के माध्यम से 1 से 3 मिनट की अवधि का वीडियो अपलोड करना होगा, जिसमें उनके जिले की विशेष पहचान, सांस्कृतिक धरोहर, परंपराएं, पर्यटन स्थल या अन्य विशिष्ट पहलुओं को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया हो।
फिलहाल पायलट चरण में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar Islands), अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh), चंडीगढ़ (Chandigarh), दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव (Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu), गोवा (Goa) और लद्दाख (Ladakh) को शामिल किया गया है।
मंत्रालय ने तीन-स्तरीय पुरस्कार प्रणाली की घोषणा की है। प्रत्येक जिले से चुने गए अधिकतम 20 क्रिएटर्स को ₹50,000-₹50,000 का पुरस्कार मिलेगा। इसके बाद राज्य स्तर पर विजेताओं को ₹2 लाख दिए जाएंगे। वहीं, देशभर में योजना लागू होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ क्रिएटर्स को ₹5 लाख तक का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने वकीलों, कानून के छात्रों और इंटर्न के लिए नए दिशा-निर्देशों को तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने वकीलों, कानून के छात्रों और इंटर्न के लिए नए दिशा-निर्देशों को तत्काल लागू करने के आदेश दिए हैं। BCI ने सभी राज्य बार काउंसिलों और देश के लॉ कॉलेजों व विश्वविद्यालयों से कहा है कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
17 जुलाई 2026 को जारी निर्देश में BCI ने साफ कहा कि इस सर्कुलर को सामान्य सलाह नहीं माना जाए। सभी संस्थानों की जिम्मेदारी होगी कि वे हर वकील, छात्र और अन्य संबंधित लोगों तक इन नियमों की जानकारी प्रभावी तरीके से पहुंचाएं।
BCI के नए दिशा-निर्देश सोशल मीडिया के जिम्मेदार उपयोग, डिजिटल नैतिकता, अदालत की गरिमा, गोपनीयता और पेशेवर आचरण से जुड़े हैं। इनमें कोर्ट परिसर के गलत इस्तेमाल, अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग की क्लिप साझा करने, भ्रामक कानूनी जानकारी फैलाने, मुवक्किल से जुड़ी गोपनीय जानकारी सार्वजनिक करने, वकील की पहचान का दुरुपयोग करने और एआई से तैयार किए गए फर्जी वीडियो, डीपफेक, वॉयस क्लोन तथा अन्य छेड़छाड़ किए गए कंटेंट के इस्तेमाल जैसे मामलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बार काउंसिल ने सभी लॉ कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे इन नियमों की जानकारी शिक्षकों, छात्रों, इंटर्न और कर्मचारियों तक पहुंचाएं। इसके लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, छात्रों से दाखिले के समय और इंटर्नशिप शुरू करने से पहले लिखित सहमति ली जाए तथा नियमों के पालन की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
BCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल सर्कुलर को वेबसाइट पर डाल देना या व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग ग्रुप में भेज देना पर्याप्त नहीं होगा। संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी संबंधित लोग इन नियमों को समझें और उनका पालन करें।
राज्य बार काउंसिलों को भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां पंजीकृत सभी वकीलों और मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशनों तक यह सर्कुलर पहुंचाएं। साथ ही बार एसोसिएशनों से कहा गया है कि वे इसे प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करें, शिकायतें प्राप्त करने की व्यवस्था बनाएं, डिजिटल एथिक्स कमेटी या नोडल अधिकारी नियुक्त करें और नियमों के पालन की रिपोर्ट भी जमा करें।
BCI ने कहा है कि इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और भविष्य में होने वाली गलतियों को रोकना है। इनका पालन एडवोकेट्स एक्ट, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप किया जाएगा।
साथ ही BCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन नियमों का इस्तेमाल किसी से व्यक्तिगत बदला लेने, वैध आलोचना को दबाने या बिना जांचे-परखे आरोपों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी संबंधित संस्थानों से इन निर्देशों को तत्काल और पूरी तरह लागू करने की अपेक्षा जताई है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने WAVES 2027 के तहत Create in India Challenge (CIC) Season 2 के लिए उद्योग संगठनों और संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information & Broadcasting-MIB) ने वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट (World Audio Visual and Entertainment Summit-WAVES) 2027 के प्रमुख कार्यक्रम 'क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (Create in India Challenge-CIC) Season 2' के तहत उद्योग संगठनों, संस्थाओं और एसोसिएशनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
प्रस्तावों की प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाने के लिए मंत्रालय ने एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल (Unified Online Portal) भी शुरू किया है। इसी पोर्टल के माध्यम से प्रस्ताव जमा किए जाएंगे और उनका मूल्यांकन किया जाएगा।
मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य भारत के मीडिया और एंटरटेनमेंट (Media & Entertainment) क्षेत्र में युवाओं के बीच रचनात्मकता (Creativity), नवाचार (Innovation), कौशल विकास (Skill Development) और नई प्रतिभाओं की पहचान को बढ़ावा देना है।
चयनित चुनौतियां उद्योग के नेतृत्व में संचालित होंगी, जबकि सरकार उनका सहयोग करेगी। इनमें मेंटरशिप (Mentorship), प्रशिक्षण (Training), अपस्किलिंग (Upskilling) और सहयोगात्मक सीख (Collaborative Learning) पर विशेष जोर रहेगा।
क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (CIC) Season 2 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI), AVGC-XR, डिजिटल मीडिया (Digital Media), गेमिंग (Gaming), ई-स्पोर्ट्स (E-Sports), एनीमेशन (Animation), विजुअल इफेक्ट्स (VFX), कॉमिक्स (Comics), फिल्म (Films), ब्रॉडकास्टिंग (Broadcasting), संगीत (Music), नृत्य (Dance), एआर/वीआर (AR/VR) और अन्य उभरते मीडिया क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
इच्छुक संस्थाएं 31 जुलाई 2026 तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपने प्रस्ताव जमा कर सकती हैं। सरकार चयनित चुनौतियों के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक चुनौती पर अधिकतम ₹1 करोड़ की एकमुश्त वित्तीय सहायता (One-time Grant) उपलब्ध कराएगी। यह सहायता तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन, परिणाम आधारित योजना, जमीनी स्तर तक पहुंच और कौशल विकास कार्यक्रमों के आधार पर प्रदान की जाएगी।
मंत्रालय का लक्ष्य CIC Season 2 के तहत 50 से अधिक उद्योग-नेतृत्व वाली चुनौतियां आयोजित करना है। इनमें विशेष रूप से AI, डिजिटल एवं सोशल मीडिया (Digital & Social Media) तथा AVGC-XR जैसे उभरते क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा।
कार्यक्रम का समापन WAVES 2027 के दौरान आयोजित 'क्रिएटोस्फीयर (CreatoSphere)' में होगा, जहां विजेताओं और उनके प्रोजेक्ट्स को राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को इंस्टाग्राम (Instagram) पर CSAM से जुड़े विज्ञापनों के मामले में मेटा (Meta) का जवाब मिल गया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम (Instagram) पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े कथित विज्ञापनों के मामले में मेटा (Meta) ने भारत सरकार को अपना स्पष्टीकरण सौंप दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) फिलहाल कंपनी के जवाब की विस्तृत समीक्षा कर रहा है।
सूचना प्रौद्योगिकी (IT) सचिव एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मंत्रालय को मेटा (Meta) का जवाब प्राप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि जवाब के प्रत्येक पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है और समीक्षा पूरी होने के बाद ही सरकार अपने अगले कदम पर फैसला करेगी।
एस. कृष्णन (S. Krishnan) ने कहा, "CSAM कंटेंट को लेकर हमने मेटा को जो नोटिस जारी किया था, उसका जवाब हमें मिल गया है। वर्तमान में यह हमारे परीक्षण के अधीन है। इस जवाब के गहन मूल्यांकन के आधार पर ही उचित कार्रवाई की जाएगी।"
हाल ही में सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया था कि इंस्टाग्राम (Instagram) पर कुछ प्रायोजित विज्ञापन ऐसे थे, जो 'चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेटिव एंड एब्यूज मटेरियल' (Child Sexual Exploitative and Abuse Material-CSEAM) तक पहुंच को आसान बना रहे थे या उसका प्रचार कर रहे थे।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए MeitY ने मेटा (Meta) को नोटिस जारी किया था। मंत्रालय ने कंपनी को निर्देश दिया था कि ऐसे सभी विज्ञापनों और संबंधित सामग्री को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। साथ ही निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा गया था।
आईटी सचिव ने बताया कि मेटा (Meta) ने शनिवार को अपना जवाब दाखिल किया, जो मंत्रालय द्वारा निर्धारित समय-सीमा का अंतिम दिन था। अब सरकार इस जवाब का कानूनी और तकनीकी पहलुओं से परीक्षण कर रही है। समीक्षा पूरी होने के बाद यह तय किया जाएगा कि मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाए।
उम्मीद है कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) सितंबर में अपने वार्षिक 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (State of the Union) संबोधन के दौरान इस पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यूरोपीय संघ (European Union-EU) 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया (Social Media) इस्तेमाल पर सख्त नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित नियमों के तहत 27 सदस्य देशों (27-member bloc) में छोटे बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर आयु-आधारित (Age-based) प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं।
यूरोपीय आयोग (European Commission) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने सोमवार को दो विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई सिफारिशें पेश कीं। इन सिफारिशों में बच्चों के लिए आयु के आधार पर सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित करने का सुझाव दिया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार, 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को केवल सीमित समय के लिए और माता-पिता, अभिभावकों (Caregivers) या शिक्षकों (Teachers) की निगरानी में ही सोशल मीडिया का उपयोग करने की अनुमति होगी। जैसे-जैसे बच्चों की उम्र बढ़ेगी, इन प्रतिबंधों में चरणबद्ध तरीके से ढील दी जाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) ने कहा कि अब इस बात पर व्यापक सहमति बन चुकी है कि बच्चों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनकी उम्र के अनुरूप अधिक सुरक्षा (Age-appropriate Protection) की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अब चर्चा इस बात पर नहीं है कि ऑनलाइन जोखिम मौजूद हैं या नहीं, बल्कि इस पर है कि सरकारें बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित डिजिटल माहौल कैसे सुनिश्चित करें।
यूरोपीय आयोग (European Commission) गर्मियों के बाद इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव पेश करेगा। उम्मीद है कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन (Ursula von der Leyen) सितंबर में अपने वार्षिक 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (State of the Union) संबोधन के दौरान इस पहल की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगी।
यह प्रस्ताव बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा (Online Safety) को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आयोग का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम (Screen Time), हानिकारक कंटेंट (Harmful Content) और प्लेटफॉर्म्स की लत लगाने वाली विशेषताओं (Addictive Features) को देखते हुए ऐसे कदम जरूरी हो गए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित नियम केवल पारंपरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन अन्य ऑनलाइन सेवाओं पर भी लागू हो सकते हैं, जिनमें उम्र के अनुरूप नहीं मानी जाने वाली या लत बढ़ाने वाली सुविधाएं मौजूद हैं।
आईबीएम (IBM) ने तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) को एशिया पैसिफिक (Asia Pacific) के लिए वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग (Vice President, Marketing) नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आईबीएम (IBM) ने तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) को एशिया पैसिफिक (Asia Pacific) के लिए वाइस प्रेसिडेंट, मार्केटिंग (Vice President, Marketing) की नई जिम्मेदारी सौंपी है। इससे पहले वह डायरेक्टर APAC कम्युनिकेशंस एंड मार्केटिंग, इंडिया एंड साउथ एशिया (Director APAC Communications & Marketing, India and South Asia) के पद पर कार्यरत थीं।
तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) ने अपनी नई भूमिका की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा करते हुए कहा, "यह भूमिका हमारे ग्राहकों की प्राथमिकताओं के केंद्र में है। इसमें आईबीएम (IBM) की पूरी क्षमताओं को एक साथ लाकर ग्राहकों की सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों का समाधान करना और क्षेत्रभर में प्रभाव को बढ़ाने के लिए साझेदारों के साथ मिलकर काम करना शामिल है।"
तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) वर्ष 2020 में आईबीएम (IBM) से हेड ऑफ कम्युनिकेशंस, इंडिया एंड साउथ एशिया (Head of Communications, India and South Asia) के रूप में जुड़ी थीं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी की कम्युनिकेशंस और मार्केटिंग रणनीतियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आईबीएम (IBM) से पहले वह टेक महिंद्रा (Tech Mahindra) में ग्लोबल कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस एंड पब्लिक अफेयर्स (Global Corporate Communications and Public Affairs) का नेतृत्व कर चुकी हैं।
नई भूमिका में तुहिना पांडे (Tuhina Pandey) एशिया पैसिफिक क्षेत्र में आईबीएम (IBM) की मार्केटिंग रणनीति को आगे बढ़ाने, ग्राहकों के साथ जुड़ाव मजबूत करने और क्षेत्रीय स्तर पर बिजनेस ग्रोथ को गति देने पर काम करेंगी।