एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप और BW बिजनेसवर्ल्ड के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि बदलते दौर में भी मीडिया समाज की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है।
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Vikas Saxena
समाचार4मीडिया के 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए dउन्होंने कहा कि आज का दिन पत्रकारिता की कमियों पर चर्चा करने का नहीं, बल्कि उन युवा पत्रकारों की उपलब्धियों का सम्मान करने का है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने काम से पहचान बनाई है।
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए डॉ. अनुराग बत्रा ने सभी अतिथियों, जूरी सदस्यों और विजेताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि वे समाचार4मीडिया के 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' के चौथे संस्करण में सभी के बीच मौजूद हैं।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक का विशेष रूप से स्वागत करते हुए कहा कि वह इस आयोजन के मुख्य अतिथि हैं और लगातार तीसरी बार इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह समाचार4मीडिया परिवार के लिए गर्व की बात है कि बृजेश पाठक हर बार समय निकालकर इस मंच पर आते हैं और युवा पत्रकारों का उत्साह बढ़ाते हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से बृजेश पाठक के लिए तालियां बजाने का आग्रह भी किया।
डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि उन्होंने बहुत कम ऐसे जनप्रतिनिधि देखे हैं, जो हर व्यक्ति से सहजता से मिलते हों। उन्होंने कहा कि उन्होंने बृजेश पाठक के साथ काम करने वाले अधिकारियों से भी यही सुना है कि वह सभी से आत्मीयता के साथ संवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के बीच भी बृजेश पाठक की अच्छी छवि है और लगभग हर पत्रकार उनके व्यवहार की सराहना करता है। उनके अनुसार किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए यह सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
उन्होंने कहा कि आज जब कई नेता मीडिया के सवालों का सामना करने से बचते हैं, ऐसे समय में बृजेश पाठक का इस कार्यक्रम में आना और पत्रकारों के बीच खुलकर मौजूद रहना सराहनीय है। इसके लिए उन्होंने उनका आभार व्यक्त किया।
इसके बाद डॉ. अनुराग बत्रा ने कार्यक्रम के जूरी चेयरमैन और हिन्दुस्तान के प्रधान संपादक शशि शेखर का विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जब पहली बार 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' पुरस्कार शुरू करने का विचार आया, तो सबसे पहला नाम उनके मन में शशि शेखर का ही आया था। उन्होंने कहा कि शशि शेखर जिस भी जिम्मेदारी को स्वीकार करते हैं, उसे पूरी ईमानदारी, जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि इस पुरस्कार की गरिमा बढ़ाने में शशि शेखर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके साथ ही उन्होंने जूरी के अन्य सदस्यों का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने निष्पक्षता के साथ विजेताओं का चयन किया।
डॉ. अनुराग बत्रा ने इंडियन ब्रॉडकास्ट एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) के महासचिव अविनाश पांडे का भी उल्लेख करते हुए कहा कि मीडिया इंडस्ट्री की उनकी समझ बेहद गहरी है। उन्होंने बताया कि अविनाश पांडे पहले एबीपी न्यूज के ग्रुप सीईओ रह चुके हैं और कई प्रतिष्ठित जूरी का हिस्सा भी रहे हैं।
उन्होंने मंच संचालन कर रहे वरिष्ठ पत्रकार अनुराग मुस्कान की भी विशेष प्रशंसा की। डॉ. बत्रा ने कहा कि अनुराग मुस्कान की दमदार आवाज, प्रभावशाली व्यक्तित्व और मीडिया इंडस्ट्री की गहरी समझ ने पूरे कार्यक्रम की गंभीरता और गुणवत्ता को और बढ़ाया है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अनुराग मुस्कान के लिए भी तालियां बजाने का आग्रह किया।
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि आज पत्रकारिता को लेकर अलग-अलग तरह की बातें हो रही हैं। कोई कहता है कि पत्रकारों को अपनी पहचान छिपानी पड़ रही है, तो कोई गर्व के साथ पत्रकार कहलाने की बात करता है। लेकिन उनका मानना है कि पत्रकारिता को उसके बदलते परिवेश में समझने की जरूरत है और इस पेशे से जुड़े लोगों को अपने काम पर गर्व होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज बदल गया है, राजनीति बदल गई है और लोगों की प्राथमिकताएं भी बदल गई हैं। ऐसे में पत्रकारिता का बदलना भी स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि वह यह नहीं कहेंगे कि यह बदलाव अच्छा है या बुरा, क्योंकि हर बदलाव का मूल्यांकन समय के साथ होता है। लेकिन इतना जरूर है कि मीडिया आज पहले की तुलना में कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण माहौल में काम कर रहा है।
डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि उनके लिए पत्रकार, मीडिया मालिक और संपादक केवल पेशेवर साथी नहीं, बल्कि एक परिवार की तरह हैं। उन्होंने कहा कि वह पूरी मीडिया बिरादरी को एक समुदाय के रूप में देखते हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद पत्रकार और मीडिया संस्थान अपना काम पूरी निष्ठा से कर रहे हैं। उन्होंने उपस्थित सभी पत्रकारों से कहा कि वे खुद अपने लिए तालियां बजाएं, क्योंकि आज का दिन उनके योगदान और उपलब्धियों का जश्न मनाने का दिन है।
उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से मीडिया पहले से बेहतर काम कर सकता है और उसे लगातार बेहतर करने की जरूरत भी है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पत्रकारों की उपलब्धियों को नजरअंदाज कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि आज का दिन आत्मालोचना का नहीं, बल्कि उन पत्रकारों का सम्मान करने का है, जिन्होंने अपने काम से पहचान बनाई है।
अपने संबोधन में डॉ. बत्रा ने एक दिलचस्प प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बड़े उद्योगपति ने उनसे पूछा था कि आखिर पत्रकारों को पुरस्कार देने की जरूरत क्या है, वे ऐसा कौन-सा काम करते हैं? इस सवाल के जवाब में उन्होंने उद्योगपति से कहा कि कोई भी उद्योगपति, कारोबारी, संस्था या नेता अपनी मेहनत से काम जरूर करता है, लेकिन उसकी पहचान, उसकी छवि और उसके ब्रांड को मजबूत बनाने में मीडिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
उन्होंने कहा कि पत्रकार लोगों के काम को समाज के सामने लाते हैं। वे उनकी उपलब्धियों को प्रकाशित करते हैं, उनकी कहानियां बताते हैं और उनकी सार्वजनिक छवि को मजबूत बनाने में योगदान देते हैं। उन्होंने उद्योगपति से कहा कि मीडिया केवल खबरें नहीं लिखता, बल्कि समाज में व्यक्तियों, संस्थाओं और ब्रांडों की विश्वसनीयता को भी स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए पत्रकारों के काम का सम्मान होना चाहिए।
डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि उन्होंने यह बात देश के शीर्ष उद्योगपतियों में शामिल उस व्यक्ति से पूरी विनम्रता के साथ कही थी। उनका मानना है कि जिस तरह दूसरे क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वालों को सम्मानित किया जाता है, उसी तरह पत्रकारों को भी उनके योगदान के लिए सम्मान मिलना चाहिए।
इसके बाद उन्होंने 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया और आयोजन की पारदर्शिता पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि पहले इन पुरस्कारों के लिए एंट्री फीस ली जाती थी, क्योंकि यह एक प्रोफेशनल और लाभकारी कंपनी का आयोजन था और इसमें कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि एक्सचेंज4मीडिया पिछले 26 वर्षों से मीडिया इंडस्ट्री पर काम कर रहा है और उसे हमेशा पाठकों तथा मीडिया समुदाय का सहयोग मिला है।
उन्होंने बताया कि जब पहले वर्ष का आयोजन हुआ, तब उन्होंने महसूस किया कि एंट्री फीस होने की वजह से बड़े मीडिया संस्थान अधिक संख्या में आवेदन भेज पाते थे, क्योंकि उनके पास संसाधन अधिक होते थे। वहीं छोटे संस्थानों या व्यक्तिगत पत्रकारों के लिए यह उतना आसान नहीं था। इसी अनुभव से सीख लेते हुए समाचार4मीडिया ने पिछले दो संस्करणों से एंट्री फीस पूरी तरह समाप्त कर दी।
उन्होंने कहा कि अब इस आयोजन के लिए प्रायोजकों का सहयोग लिया जाता है और भविष्य में और भी प्रायोजक जुड़ सकते हैं। लेकिन उनका उद्देश्य केवल आयोजन करना नहीं, बल्कि इसे देश का सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता सम्मान बनाना है।
अपने संबोधन के अंतिम चरण में डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि इस पुरस्कार का उद्देश्य केवल सम्मान देना नहीं, बल्कि इसे देश का सबसे विश्वसनीय और प्रतिष्ठित पत्रकारिता मंच बनाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में इस आयोजन को और बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा, ताकि देशभर के अधिक से अधिक पत्रकार इसमें शामिल हो सकें।
उन्होंने पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया पर भी विस्तार से बात की और कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें स्वयं यह तक पता नहीं होता कि कौन विजेता बनने वाला है। जूरी की बैठक होती है, जिसमें जूरी चेयरमैन शशि शेखर और अन्य सदस्य सभी आवेदनों का मूल्यांकन करते हैं। अंतिम सूची तैयार होने के बाद उसे मंजूरी दी जाती है और तभी विजेताओं को सूचना भेजी जाती है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं होता और यही इस सम्मान की सबसे बड़ी ताकत है।
डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि आज पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की चर्चा कर रही है और मीडिया इंडस्ट्री भी इससे अछूता नहीं है। लेकिन उनका मानना है कि एआई पत्रकारों की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि तकनीक चाहे जितनी भी विकसित हो जाए, ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग, जमीनी रिपोर्टिंग और मानवीय दृष्टिकोण की जरूरत हमेशा बनी रहेगी। यही पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत है और भविष्य में इसकी अहमियत और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि नए दौर की पत्रकारिता को एआई के साथ चलना होगा, लेकिन अपनी मौलिकता कभी नहीं छोड़नी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वह मीडिया की आलोचना करने के लिए मंच पर नहीं आए हैं। उनका मानना है कि आज भी देश के पत्रकार बेहद कठिन परिस्थितियों में शानदार काम कर रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद युवा पत्रकारों की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण ही पत्रकारिता के भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद है।
डॉ. बत्रा ने यह देखकर खुशी जताई कि कार्यक्रम में केवल पत्रकार ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्य भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि कई विजेताओं के माता-पिता, पति-पत्नी, भाई-बहन और परिवार के अन्य सदस्य भी उन्हें सम्मानित होते देखने आए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी पत्रकार की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि उसके पूरे परिवार की मेहनत और त्याग का परिणाम होती है।
अपने संबोधन में उन्होंने युवा पत्रकारों को स्वास्थ्य का भी विशेष ध्यान रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मीडिया पेशे में काम का दबाव बहुत अधिक होता है, लेकिन इसके बीच स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत आज उन देशों में शामिल है, जहां लोग औसतन केवल साढ़े पांच घंटे की नींद लेते हैं, जबकि एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए कम से कम आठ घंटे की नींद जरूरी है। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे अपने स्वास्थ्य और जीवनशैली का विशेष ध्यान रखें।
डॉ. अनुराग बत्रा ने मीडिया जगत की एक और कमजोरी की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि इस इंडस्ट्री में लोग एक-दूसरे की तारीफ बहुत कम करते हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपने सहयोगियों, दोस्तों और यहां तक कि प्रतिस्पर्धियों के अच्छे काम की भी खुलकर सराहना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसे बहुत लोग हैं, जो आपको नीचे खींचने की कोशिश करेंगे, इसलिए मीडिया के लोगों को कम से कम आपस में एक-दूसरे का हौसला बढ़ाना चाहिए, न कि एक-दूसरे को पीछे खींचना चाहिए।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (Karoline Leavitt) महीने के अंत में पद छोड़ेंगी। वह परिवार और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताना चाहती हैं।
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Samachar4media Bureau
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। व्हाइट हाउस (White House) की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट (Karoline Leavitt) इस महीने के अंत में अपना पद छोड़ देंगी। उन्होंने यह फैसला परिवार और बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए लिया है।
कैरोलिन लेविट 28 साल की उम्र में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनी थीं और इस पद पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद उनकी विदाई की जानकारी दी और उन्हें अपने प्रशासन की एक महत्वपूर्ण नेता बताया।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि लेविट महीने के अंत में प्रेस सचिव की जिम्मेदारी छोड़ेंगी, ताकि वह अपने छोटे बच्चों और परिवार के साथ ज्यादा समय बिता सकें। उन्होंने कहा कि वह इस फैसले को समझते और इसका सम्मान करते हैं।
प्रेस सचिव पद छोड़ने के बाद भी लेविट ट्रंप के साथ जुड़ी रहेंगी। ट्रंप के मुताबिक, वह उनकी सीनियर एडवाइजर (Senior Adviser) के तौर पर काम करेंगी और रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) में भी प्रभावशाली भूमिका निभाती रहेंगी।
कैरोलिन लेविट ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी प्रेस टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। इसके बाद ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में उन्हें व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव बनाया गया। प्रेस सचिव के तौर पर उन्होंने ट्रंप प्रशासन की नीतियों और फैसलों को मीडिया के सामने रखने में अहम भूमिका निभाई। अब पद छोड़ने के बाद भी उनका ट्रंप प्रशासन से जुड़ाव बना रहेगा।
ट्रंप ने यह भी कहा कि लेविट उनके साथ आगामी मिडटर्म चुनाव (Midterm Elections) की रणनीति में काम करेंगी। उनके जाने के बाद व्हाइट हाउस में प्रेस सचिव की जिम्मेदारी कौन संभालेगा, इसे लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
भारतीय टेलीविजन न्यूज की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे हैं, जिनकी पहचान किसी एक चैनल या किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। वक्त के साथ वे खुद न्यूज इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप का हिस्सा बन जाते हैं।
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Samachar4media Bureau
भारतीय टेलीविजन न्यूज की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे हैं, जिनकी पहचान किसी एक चैनल या किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। वक्त के साथ वे खुद न्यूज इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप का हिस्सा बन जाते हैं। जाने-माने पत्रकार और लोकप्रिय न्यूज एंकर अमिश देवगन का करीब ढाई दशक का पत्रकारिता सफर भी कुछ ऐसा ही है।
वर्ष 2002 से अब तक उन्होंने प्रिंट से टेलीविजन तक, बिजनेस जर्नलिज्म से प्राइम टाइम एंकरिंग तक और रिपोर्टिंग से एडिटोरियल लीडरशिप तक कई महत्वपूर्ण पड़ाव तय किए हैं और अब भी वह नए पड़ावों की ओर अग्रसर हैं।
अब तक के सफर की बात करें तो ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) से शुरू हुई उनकी यात्रा ‘जी मीडिया’ (Zee Media) के लंबे अध्याय से गुजरते हुए ‘नेटवर्क18’ (Network18) तक पहुंची, जहां उन्होंने एंकर के साथ-साथ संपादकीय जिम्मेदारियां भी संभालीं। हालांकि, करीब एक दशक तक नेटवर्क18 से जुड़े रहने के बाद अमिश देवगन ने हाल ही में यहां से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद अब मीडिया इंडस्ट्री में उनकी अगली पारी को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
सूत्रों के मुताबिक, नेटवर्क18 प्रबंधन उन्हें अपने साथ बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। वहीं, अमिश देवगन भी अपने अगले कदम को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। उनके सामने मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े कुछ प्रस्ताव और अन्य प्रोजेक्ट्स हैं, जिन पर वह मंथन कर रहे हैं। इसके अलावा, वह अपने किसी नए वेंचर के जरिए उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने की संभावना पर भी विचार कर रहे हैं।
ऐसे में करीब 24 साल की पत्रकारिता यात्रा के बाद अमिश देवगन की अगली पारी किस रूप में सामने आती है, इस पर इंडस्ट्री की नजर है। उनके लंबे अनुभव, मजबूत ऑन-स्क्रीन पहचान और एडिटोरियल लीडरशिप के अनुभव को देखते हुए उनकी अगली भूमिका को लेकर स्वाभाविक रूप से काफी दिलचस्पी बनी हुई है।
दरअसल, अमिश देवगन हिंदी टेलीविजन न्यूज के उन प्रमुख चेहरों में शामिल हैं, जिनकी अपनी एक विशिष्ट ऑन-स्क्रीन पहचान है। खास तौर पर उनका शो ‘आर-पार’ लंबे समय से उनकी पत्रकारिता की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
अमिश देवगन ने वर्ष 2002 में ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने टेलीविजन की ओर रुख किया और ‘जी मीडिया’ (Zee Media) से जुड़े। वर्ष 2005 में वह ‘जी बिजनेस’ से जुड़े, जहां आगे चलकर उनके करियर का एक लंबा और महत्वपूर्ण अध्याय बना।
यह वह दौर था जब भारतीय मीडिया तेजी से बदल रहा था। प्रिंट मीडिया के साथ-साथ 24x7 न्यूज चैनलों का विस्तार हो रहा था और टेलीविजन पत्रकारिता के लिए नए अवसर बन रहे थे। इसी बदलते मीडिया माहौल में अमिश देवगन ने अपने करियर को नई दिशा दी।
‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के बाद ‘जी मीडिया’ से जुड़ना अमिश देवगन के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। यहां उनकी करीब 13 साल की पारी ने उन्हें बिजनेस जर्नलिज्म और टेलीविजन एंकरिंग की दुनिया में स्थापित किया। उन्होंने ‘जी बिजनेस’ में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह डिप्टी एडिटर, एडिटर (आउटपुट) और एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) जैसे पदों पर रहे और मई 2015 में चैनल के चीफ एडिटर बने।
एक रिपोर्टर के तौर पर शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे उन्हें एडिटोरियल और एंकरिंग की बड़ी जिम्मेदारियों तक ले गया। बिजनेस न्यूज की दुनिया में उन्होंने कमोडिटी और एग्रीकल्चर से जुड़े विषयों पर भी विशेष रूप से काम किया। उन्होंने ‘Mandi Live’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए कमोडिटी मार्केट से जुड़े विषयों को दर्शकों तक पहुंचाया और इस क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई।
‘जी बिजनेस’ में उनके कार्यकाल का एक प्रमुख कार्यक्रम ‘Big Story Big Debate’ रहा। इस शो में राजनीति, अर्थव्यवस्था, वित्तीय बाजार और देश-दुनिया से जुड़े बड़े मुद्दों पर बहस होती थी। बिजनेस न्यूज की पृष्ठभूमि से आने वाले अमिश देवगन ने इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए अपने दायरे को व्यापक बनाया। वह केवल बाजार और कारोबार की खबरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर भी चर्चा करने वाले एंकर के तौर पर अपनी पहचान मजबूत करते गए।
उनके इंटरव्यू कार्यक्रमों में देश के कई प्रमुख राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े चेहरे शामिल हुए। अलग-अलग मौकों पर उन्होंने देवेंद्र फडणवीस, मनोहर लाल खट्टर, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह, जयराम रमेश, आनंद शर्मा और कमलनाथ जैसे प्रमुख नेताओं से बातचीत की। इंटरव्यू और डिबेट का यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक और प्राइम टाइम एंकरिंग का मजबूत आधार बना।
अमिश देवगन की पहचान केवल स्टूडियो एंकर के रूप में नहीं बनी। उनके पत्रकारिता करियर में रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उनके प्रमुख पत्रकारिता कार्यों में कोयला घोटाला, ओडिशा का माइनिंग स्कैम और हवाला कारोबारी मोईन कुरैशी से जुड़े खुलासे शामिल हैं।
यानी कैमरे के सामने दिखाई देने वाले प्राइम टाइम एंकर के पीछे एक ऐसा पत्रकार भी है, जिसने अपने करियर में जटिल और महत्वपूर्ण मुद्दों पर काम किया। रिपोर्टिंग का यही अनुभव बाद में उनकी एंकरिंग और इंटरव्यू शैली में भी दिखाई देता है।
‘जी मीडिया’ में करीब 13 साल की लंबी पारी के बाद अमिश देवगन ने वर्ष 2016 में नेटवर्क18 का रुख किया। जून 2016 में उनके नेटवर्क18 से जुड़ने की खबर सामने आई। उस समय वह IBN7 (अब न्यूज18 इंडिया) के एग्जिक्यूटिव एडिटर और एंकर बने थे और चैनल की हिंदी स्ट्रैटेजी से जुड़ी जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई थी। यह उनके करियर का बड़ा मोड़ था। ‘जी बिजनेस’ के बिजनेस न्यूज स्पेस में अपनी पहचान बनाने के बाद अब वह राष्ट्रीय हिंदी न्यूज के बड़े मंच पर थे। यहीं से उनकी पहचान का एक नया अध्याय शुरू हुआ- ‘आर-पार’ के साथ।
अगर अमिश देवगन के टेलीविजन करियर के सबसे चर्चित कार्यक्रम की बात की जाए तो ‘आर-पार’ का नाम सबसे पहले आता है। इस शो के जरिए उन्होंने राजनीति, अर्थव्यवस्था और देश से जुड़े प्रमुख मुद्दों को प्राइम टाइम बहस का हिस्सा बनाया। सवाल पूछने का सीधा अंदाज, विषय की पृष्ठभूमि पर पकड़ और बहस को तेज गति से आगे बढ़ाने की शैली उनकी ऑन-स्क्रीन पहचान का हिस्सा बनी।
समय के साथ ‘आर-पार’ उनकी व्यक्तिगत एंकरिंग पहचान का एक मजबूत ब्रैंड बन गया। टेलीविजन के साथ डिजिटल ऑडियंस के बीच भी इस शो के जरिये उन्होंने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। नेटवर्क18 में अमिश देवगन की जिम्मेदारियां समय के साथ लगातार बढ़ती गईं। वह केवल प्राइम टाइम एंकर नहीं रहे, बल्कि न्यूज ऑपरेशन और एडिटोरियल मैनेजमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभालते रहे।
वर्ष 2019 में नेटवर्क18 ने उन्हें न्यूज18 (यूपी, मध्यप्रदेश और राजस्थान) का मैनेजिंग एडिटर बनाया। इस भूमिका के साथ उनकी जिम्मेदारी केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रही, बल्कि न्यूज रूम और एडिटोरियल फैसलों तक भी पहुंची। इस तरह उनकी भूमिका एक प्राइम टाइम एंकर से आगे बढ़कर न्यूज ऑपरेशन और एडिटोरियल लीडरशिप तक पहुंच गई।
अमिश देवगन की इस पूरी यात्रा की सबसे खास बात यही है कि उनकी कहानी किसी एक शो या किसी एक संस्थान की कहानी नहीं, बल्कि बदलते भारतीय न्यूज मीडिया के साथ एक पत्रकार के लगातार विकसित होते जाने की कहानी है। 2002 में शुरू हुआ यह सफर 24 साल पूरे कर चुका है, लेकिन यात्रा अभी जारी है और कहानी अभी बाकी है।
मिल चुके हैं कई सम्मान: करीब ढाई दशक के पत्रकारिता सफर में अमिश देवगन को विभिन्न मंचों पर सम्मान भी मिला है। उनके नाम IMF Young Emerging Editors Award 2015, Srishti Award for Business Journalism और Power Brand Trendsetter Award 2016 जैसे सम्मान दर्ज हैं।
इसके अलावा नेटवर्क18 में उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें ‘एक्सचेंज4मीडिया न्यूज ब्रॉडकास्टिंग अवॉर्ड्स’(enba) में भी महत्वपूर्ण पहचान मिली। enba के मंच पर उन्हें एंकरिंग और एडिटोरियल लीडरशिप के लिए भी सम्मान मिला है। ये सम्मान उनके करियर के अलग-अलग पहलुओं जैसे- बिजनेस जर्नलिज्म, एंकरिंग और एडिटोरियल लीडरशिप को रेखांकित करते हैं।
चंद्रहास शेट्टी (Chandrahas Shetty) ने मैग्नाइट (Magnite) में हेड ऑफ डिमांड, इंडिया (Head of Demand, India) का पद छोड़ दिया है। वह 2023 में कंपनी से जुड़े थे।
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मैग्नाइट (Magnite) के हेड ऑफ डिमांड, इंडिया (Head of Demand, India) चंद्रहास शेट्टी (Chandrahas Shetty) ने कंपनी से अलग होने का फैसला किया है। वह मैग्नाइट इंडिया की शुरुआती टीम का हिस्सा रहे हैं और 2023 में कंपनी से जुड़े थे।
चंद्रहास शेट्टी ने स्वतंत्र विज्ञापन प्लेटफॉर्म (Independent Advertising Platform) मैग्नाइट में करीब तीन साल काम किया। अपने कार्यकाल के दौरान वह भारत में डिमांड साइड बिजनेस को आगे बढ़ाने से जुड़े रहे।
मैग्नाइट से पहले शेट्टी ने मीडिया मैथ (MediaMath) में भी काम किया था। डिजिटल विज्ञापन के क्षेत्र में उन्हें 14 साल से ज्यादा का अनुभव है।
अपने करियर के दौरान उन्होंने डिजिटल एडवरटाइजिंग (Digital Advertising) से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया है। मैग्नाइट इंडिया की शुरुआती टीम का हिस्सा होने के कारण कंपनी के भारत में कारोबार के शुरुआती दौर में भी उनकी अहम भूमिका रही।
डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूजलॉन्ड्री (Newslaundry) पर उसके कुछ पूर्व एम्प्लॉयीज की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है।
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न्यूजलॉन्ड्री पर पूर्व एम्प्लॉयीज के आरोपों से उठे सवाल, संस्था ने कहा- 2017 से POSH नियमों का कर रहे पालन
डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूजलॉन्ड्री (Newslaundry) पर उसके कुछ पूर्व एम्प्लॉयीज की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है। इन आरोपों के बीच न्यूजलॉन्ड्री ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि वह 2017 से POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून के तहत नियमों का पालन कर रहा है और उसके यहां इंटर्नल कम्प्लेंट्स कमेटी (ICC) भी मौजूद है।
संस्था के मुताबिक, अब तक यौन उत्पीड़न से जुड़ी चार शिकायतों पर ICC के जरिए कार्रवाई की गई है। इन मामलों में अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर एम्प्लॉयीज की बर्खास्तगी और निलंबन जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
न्यूजलॉन्ड्री ने कहा- हमसे भी सवाल पूछे जाने चाहिए
न्यूजलॉन्ड्री ने अपने बयान में कहा कि POSH नियमों का पालन करने का यह मतलब नहीं है कि संस्था बेहतर करने की कोशिश नहीं कर सकती। उसने अपने साथ जुड़े लोगों, जिसमें पूर्व एम्प्लॉयी भी शामिल हैं, से अपनी बात और शिकायतें सीधे संस्था तक पहुंचाने की अपील की है।
संस्था ने कहा कि वह पिछले पांच दिनों से न्यूजलॉन्ड्री और उसके एम्प्लॉयीज को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर नजर रख रही है। उसके मुताबिक, इस दौरान कुछ बिना आधार और गलत आरोप भी लगाए गए हैं।
न्यूजलॉन्ड्री ने यह भी कहा कि उसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और एम्प्लॉयीज या संस्था की ओर से हर आरोप का जवाब नहीं देना किसी तरह की कमजोरी या बचाव की कोशिश के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
‘हमने कभी खुद को परफेक्ट नहीं बताया’
अपने बयान में न्यूजलॉन्ड्री ने कहा कि उसने कभी खुद को परफेक्ट होने का दावा नहीं किया। संस्था के मुताबिक, वह लगातार सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती रही है।
न्यूजलॉन्ड्री ने अपनी उस पुरानी सोच को भी दोहराया कि किसी को भी जांच-पड़ताल और आलोचना से ऊपर नहीं होना चाहिए, खुद न्यूजलॉन्ड्री भी नहीं। यही बात अब मौजूदा विवाद के केंद्र में आ गई है।
‘सबकी धुलाई’ के सिद्धांत की अब खुद पर कसौटी
पिछले एक दशक से ज्यादा समय में न्यूजलॉन्ड्री ने मीडिया संस्थानों, न्यूजरूम की कार्यशैली और पत्रकारिता से जुड़े नैतिक सवालों पर खुलकर बात की है। उसका चर्चित विचार रहा है कि मीडिया समेत किसी भी संस्था को सवालों और आलोचना से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
लेकिन पूर्व एम्प्लॉयीज के आरोपों के बाद अब यही सवाल न्यूजलॉन्ड्री के अपने न्यूजरूम को लेकर उठ रहे हैं। विवाद ने पारदर्शिता, शिकायतों की प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है।
मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि न्यूजलॉन्ड्री को अपने बचाव में जवाब देने का अधिकार है या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि जिस पारदर्शिता, जवाबदेही और कड़ी जांच-पड़ताल की मांग संस्था लंबे समय से दूसरे मीडिया संस्थानों, कंपनियों और सार्वजनिक संस्थाओं से करती रही है, क्या वही कसौटी अब उस पर भी लागू होनी चाहिए?
फिलहाल न्यूजलॉन्ड्री ने अपनी ओर से POSH अनुपालन और चार शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी दी है। हालांकि, उपलब्ध बयान में पूर्व एम्प्लॉयीज की ओर से लगाए गए विशिष्ट आरोपों का विस्तृत जवाब नहीं दिया गया है। इसलिए मौजूदा विवाद में संस्था के बयान और पूर्व एम्प्लॉयीज के आरोपों के बीच तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि का सवाल अभी बना हुआ है।
एबीडी मेस्ट्रो (ABD Maestro) ने बिक्रम बसु (Bikram Basu) को वाइस चेयरमैन (Vice Chairman) नियुक्त किया है। वह मार्केटिंग और इनोवेशन की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।
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एबीडी मेस्ट्रो (ABD Maestro) ने बिक्रम बसु (Bikram Basu) को वाइस चेयरमैन (Vice Chairman) नियुक्त किया है। इसके साथ ही वह एबीएल ग्रुप (ABDL Group) के चीफ मार्केटिंग एंड इनोवेशन ऑफिसर (Chief Marketing and Innovation Officer) की मौजूदा जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।
बिक्रम बसु अप्रैल 2025 से एबीडी मेस्ट्रो में मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) के पद पर हैं। नई जिम्मेदारी के बाद भी वह कंपनी के कामकाज की देखरेख करेंगे और एबीडीएल (ABDL) तथा एबीडी मेस्ट्रो के अलग-अलग ब्रांड्स के लिए मार्केटिंग और इनोवेशन से जुड़े काम को आगे बढ़ाएंगे।
नई लीडरशिप व्यवस्था के तहत बिक्रम बसु एबीडीएल के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer) प्रदीप्ता बसु (Pradipta Basu) और एबीडी मेस्ट्रो के डायरेक्टर–मार्केटिंग एंड स्पेशल अकाउंट्स–ऑन ट्रेड (Director – Marketing and Special Accounts – On Trade) अरविंद हंगल (Arvind Hangal) के साथ मिलकर काम करेंगे।
कंपनी के मुताबिक, नई व्यवस्था से ग्रुप की मार्केटिंग टीमों के बीच बेहतर तालमेल होगा। इसके साथ मार्केटिंग क्षमताओं को एक साथ लाने, इनोवेशन को तेज करने और अलग-अलग टीमों के अच्छे तरीकों को साझा करने में मदद मिलेगी।
बिक्रम बसु ने मार्च 2015 में एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स (Allied Blenders & Distillers) में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer) के तौर पर करियर शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने ग्रुप में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं।
बाद में वह एबीडी मेस्ट्रो से जुड़े, जो कंपनी की सुपर-प्रीमियम और लग्जरी स्पिरिट्स (Super-premium and Luxury Spirits) के कारोबार पर फोकस करने वाली सब्सिडियरी है। अप्रैल 2025 में उन्हें एबीडी मेस्ट्रो का मैनेजिंग डायरेक्टर बनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी।
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी। राम रहीम फिलहाल दो महिला अनुयायियों से यौन शोषण के मामले में 20 साल की सजा काट रहा है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने राम रहीम के वकील आर. बसंत की उस दलील को नहीं माना, जिसमें उन्होंने कहा था कि यह बरी किए जाने का मामला है और राज्य ने इस फैसले के खिलाफ कोई अपील भी दाखिल नहीं की है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर विचार किए जाने की जरूरत है। अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट की ओर से दर्ज की गई सजा को पलटा गया है। यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें हाई कोर्ट ने पहले से बरकरार रखे गए बरी होने के फैसले को फिर से पलटा हो। अदालत ने यह भी कहा कि उसे इस बात की जानकारी है कि राज्य यानी CBI इस बरी किए जाने के खिलाफ अपील नहीं करेगी।
2019 में ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
सिरसा के पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में जनवरी 2019 में ट्रायल कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
अब पत्रकार के बेटे और इस मामले में शिकायतकर्ता अरिंदम छत्रपति ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर राम रहीम को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट से मामले से जुड़े रिकॉर्ड मंगवाए हैं। इनमें गवाहों के बयान भी शामिल हैं। अदालत अब इस मामले की अंतिम सुनवाई नवंबर के आखिरी सप्ताह में करेगी।
मुख्य गवाह की गवाही पर उठे सवाल
राम रहीम की ओर से पेश वकील आर. बसंत ने अदालत में कहा कि हाई कोर्ट ने साफ तौर पर माना था कि मामले के मुख्य गवाह पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं किया जा सकता।
इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि वह मुख्य गवाह की गवाही से जुड़े विशेष परिस्थितियों और इस बात की जांच करेगी कि उसकी गवाही का सही तरीके से मूल्यांकन किया गया था या नहीं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जिस मुख्य गवाह का जिक्र कर रहा है, वह राम रहीम का पूर्व ड्राइवर है।
याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि हाई कोर्ट ने राम चंद्र छत्रपति की हत्या की साजिश के अस्तित्व को लेकर ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष को बरकरार रखा था। साथ ही, तीन अन्य आरोपियों को IPC की धारा 120-B और धारा 302 के तहत दोषी ठहराए जाने को भी बरकरार रखा गया था।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद हाई कोर्ट इस नतीजे पर पहुंच गया कि बाबा गुरमीत सिंह यानी गुरमीत राम रहीम की हत्या की साजिश में भागीदारी साबित नहीं हुई है। याचिकाकर्ता ने इसी निष्कर्ष को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
स्थानीय पुलिस की जांच पर उठे थे सवाल
राम चंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में स्थानीय पुलिस की जांच में कुछ कमियां सामने आने के बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने नवंबर 2003 में मामले की जांच CBI को सौंप दी थी। यह हत्या होने के करीब एक साल बाद का मामला था।
CBI ने इसके बाद मामले की जांच की और आगे की कानूनी कार्रवाई हुई।
अब सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि गुरमीत राम रहीम को बरी किए जाने के हाई कोर्ट के फैसले में कोई कानूनी या तथ्यात्मक गलती हुई थी या नहीं। मामले की अगली और अंतिम सुनवाई नवंबर के आखिरी सप्ताह में होने की उम्मीद है।
संसदीय स्थायी समिति ने फर्जी खबरों पर रोक के लिए स्वतंत्र निगरानी निकाय बनाने की सिफारिश की है। समिति ने AI जनित कंटेंट और सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी की जरूरत बताई।
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संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on Communications and Information Technology) ने केंद्र सरकार से फर्जी खबरों (Fake News) से निपटने के लिए एक स्वतंत्र और केंद्रीकृत संस्थागत व्यवस्था बनाने की मांग दोहराई है। 6 अगस्त को संसद में पेश अपनी 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (Action Taken Report) में समिति ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य के लिए पर्याप्त नहीं है।
समिति ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of Information and Broadcasting-MIB), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY), मीडिया संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों को शामिल करते हुए एक विशेष निगरानी निकाय या टास्क फोर्स गठित करने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि यह निकाय फर्जी खबरों की जांच कर आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश करने में सक्षम होना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि फर्जी खबरें अब प्रिंट, टेलीविजन, डिजिटल मीडिया, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) से तैयार कंटेंट के जरिए तेजी से फैल रही हैं। ऐसे में केवल प्रेस सूचना ब्यूरो (Press Information Bureau-PIB) की फैक्ट चेक यूनिट (Fact Check Unit-FCU) पर निर्भर रहने के बजाय बहु-एजेंसी व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। समिति ने PIB FCU के कामकाज में अधिक पारदर्शिता लाने की भी मांग की है और वर्ष 2019 से अब तक प्राप्त शिकायतों, उनके निपटान और सफलता दर का विस्तृत ब्यौरा मांगा है।
समिति ने AI जनित फर्जी सामग्री को उभरती हुई बड़ी चुनौती बताते हुए ऐसी सामग्री की अनिवार्य लेबलिंग, संभावित लाइसेंसिंग व्यवस्था, मीडिया संस्थानों में फैक्ट-चेकिंग तंत्र, आंतरिक लोकपाल, मीडिया साक्षरता कार्यक्रम और सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही बढ़ाने जैसे कई संरचनात्मक सुधारों की भी सिफारिश की है। समिति का कहना है कि भविष्य में फर्जी खबरों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्थायी और बहु-एजेंसी नियामकीय ढांचे की आवश्यकता होगी।
यह जानकारी लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने सांसद अधिवक्ता प्रिया सरोज और पुष्पेंद्र सरोज के सवाल के लिखित जवाब में दी।
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केंद्र सरकार ने कहा है कि पिछले एक वर्ष के दौरान प्रसार भारती की संपादकीय स्वतंत्रता (Editorial Autonomy), नियुक्तियों या सार्वजनिक प्रसारण सेवाओं के कामकाज को लेकर पत्रकारों, कर्मचारियों या किसी मीडिया संगठन की ओर से कोई शिकायत या औपचारिक प्रस्तुति (Representation) प्राप्त नहीं हुई है।
यह जानकारी लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने सांसद अधिवक्ता प्रिया सरोज और पुष्पेंद्र सरोज के सवाल के लिखित जवाब में दी।
BIND योजना को 2027 तक बढ़ाया गया
सरकार ने बताया कि देश में प्रसार भारती के प्रसारण ढांचे के विकास, आधुनिकीकरण और उन्नयन के लिए Broadcasting Infrastructure and Network Development (BIND) योजना चलाई जा रही है। यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना वर्ष 2021-26 के लिए मंजूर की गई थी, जिसे अब 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है।
सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत आवंटित बजट, वास्तविक खर्च और राजस्व से जुड़ी जानकारी प्रसार भारती की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
संपादकीय मामलों की नियमित समीक्षा
सरकार ने कहा कि समाचारों की गुणवत्ता, सटीकता, निष्पक्षता और प्रस्तुति सुनिश्चित करने के लिए संपादकीय मामलों की नियमित समीक्षा Editor-in-Chief और वरिष्ठ संपादकीय टीम करती है। जरूरत पड़ने पर समाचारों की गुणवत्ता सुधारने और प्रसार भारती की संपादकीय नीति तथा प्रोग्राम कोड का पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश और सुधारात्मक कदम भी उठाए जाते हैं।
सरकार ने बताया कि दर्शकों की ओर से मिलने वाली शिकायतों और सुझावों, जिनमें संपादकीय सामग्री से जुड़ी शिकायतें भी शामिल होती हैं, उन्हें संबंधित संपादकीय टीम के पास भेजा जाता है, जहां निर्धारित नीति के अनुसार कार्रवाई की जाती है।
नियुक्तियों से जुड़ी 7 शिकायतें मिलीं
सरकार के अनुसार, पिछले एक वर्ष में संपादकीय स्वतंत्रता या कार्यप्रणाली से जुड़ी कोई शिकायत नहीं मिली, लेकिन नियुक्तियों से संबंधित 7 शिकायतें आवेदकों की ओर से प्राप्त हुई थीं।
आकाशवाणी की पहुंच 98% आबादी तक
सरकार ने बताया कि आकाशवाणी (Akashvani) की पहुंच देश की लगभग 98 प्रतिशत आबादी और 90 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र तक है। वहीं, DD Free Dish देश के किसी भी हिस्से में बिना किसी सब्सक्रिप्शन शुल्क के देखा जा सकता है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया के आधार पर होता है सुधार
सरकार ने कहा कि प्रसार भारती नियमित रूप से दर्शकों की संख्या (Viewership Data), लोगों की प्रतिक्रिया और सोशल मीडिया एनालिटिक्स की समीक्षा करता है। इन आंकड़ों और सुझावों के आधार पर समाचारों की गुणवत्ता, कंटेंट और प्रस्तुति में लगातार सुधार किया जाता है, ताकि दर्शकों को बेहतर और संतुलित समाचार उपलब्ध कराए जा सकें।
प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशन लिमिटेड (Pritish Nandy Communications Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी का नाम बदलने के प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है।
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Vikas Saxena
प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशन लिमिटेड (Pritish Nandy Communications Limited) के शेयरधारकों ने कंपनी का नाम बदलने के प्रस्ताव को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। अब कंपनी का नया नाम PNC Media and Entertainment Limited होगा। 5 अगस्त 2026 को इस फैसले पर मुहर लगने के साथ ही कंपनी ने अपनी नई पहचान की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा दिया है। कंपनी का कहना है कि नया नाम उसके मीडिया और मनोरंजन कारोबार को पहले से बेहतर तरीके से दर्शाएगा।
कंपनी के अनुसार, नाम बदलने के प्रस्ताव के पक्ष में 99.98 फीसदी वैध वोट पड़े। इस भारी समर्थन को निवेशकों के कंपनी की नई रणनीति और भविष्य की योजनाओं पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
यह मतदान SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015 के तहत पोस्टल बैलेट और रिमोट ई-वोटिंग के जरिए कराया गया। ई-वोटिंग प्रक्रिया 7 जुलाई 2026 से शुरू हुई थी और 5 अगस्त 2026 को समाप्त हुई। पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रैक्टिसिंग कंपनी सेक्रेटरी विनायक एन. देवधर ने स्क्रूटिनाइजर के रूप में की।
इस दौरान शेयरधारकों के सामने तीन विशेष प्रस्ताव रखे गए। इनमें कंपनी का नाम बदलकर PNC Media and Entertainment Limited करना, मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में नाम से जुड़े क्लॉज में संशोधन करना और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AOA) में भी नए नाम को शामिल करना शामिल था। तीनों प्रस्ताव लगभग समान समर्थन के साथ पारित हो गए।
कंपनी की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, कट-ऑफ तारीख तक उसके कुल 10,730 शेयरधारक थे। इनमें से 76 शेयरधारकों ने मतदान में हिस्सा लिया। वोटिंग करने वाले निवेशकों के पास कुल 96.73 लाख शेयर थे, जिनमें से 99.98 फीसदी यानी 96,71,518 शेयर नाम बदलने के पक्ष में रहे। केवल 1,685 शेयर, यानी 0.02 फीसदी, प्रस्ताव के विरोध में पड़े। कोई भी वोट अमान्य घोषित नहीं हुआ।
कंपनी के प्रमोटर और प्रमोटर समूह, जिनके पास 86.39 लाख शेयर हैं, ने भी सर्वसम्मति से नाम बदलने के प्रस्ताव का समर्थन किया। वहीं, सार्वजनिक निवेशकों का भी लगभग पूरा समर्थन कंपनी को मिला।
स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट में पुष्टि की गई है कि सभी प्रस्ताव आवश्यक बहुमत से पारित हो चुके हैं। इसके बाद कंपनी ने इस फैसले की जानकारी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को भी दे दी है, जहां कंपनी PNC सिंबल के तहत सूचीबद्ध है।
अब शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद कंपनी नाम परिवर्तन से जुड़ी सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करेगी। इसके तहत वैधानिक रिकॉर्ड में संशोधन किया जाएगा और संबंधित नियामक संस्थाओं को इसकी जानकारी दी जाएगी।
कंपनी का मानना है कि PNC Media and Entertainment Limited नाम अपनाने से उसकी ब्रैंड पहचान और मजबूत होगी तथा मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में उसकी मौजूदगी को नई पहचान मिलेगी। साथ ही, इससे कंपनी की कारोबारी दिशा और सार्वजनिक छवि उसके मुख्य व्यवसाय के अनुरूप और स्पष्ट दिखाई देगी।
सावन के पावन महीने में भगवान शिव और काशी की महिमा पर आधारित भोजपुरी भक्ति गीत 'हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs' तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।
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सावन के पावन महीने में भगवान शिव और काशी की महिमा पर आधारित भोजपुरी भक्ति गीत 'हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs' तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। Bhojpuri IT Cell के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुए इस गीत को पहले ही दिन पांच लाख से ज्यादा बार देखा गया। यह गीत बनारस को केवल एक शहर नहीं, बल्कि भक्ति, आध्यात्मिक चेतना और मुक्ति के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है।
इस गीत के बोल भोजपुरी के प्रसिद्ध साहित्यकार और गीतकार मनोज भावुक ने लिखे हैं। इसे सुरभि कश्यप और अर्जुन पांडेय ने अपनी आवाज दी है। संगीत भोजपुरी फिल्म जगत के चर्चित संगीतकार रजनीश मिश्रा का है। गीत की परिकल्पना आस्था द्विवेदी ने की है। वीडियो का निर्देशन सुमित तिवारी ने किया है, जबकि छायांकन सुधांशु सिंह ने किया है। वीडियो का निर्माण वन शॉट फिल्म्स के बैनर तले हुआ है और इसके निर्माता शैलेंद्र द्विवेदी हैं।
गीत के बारे में बात करते हुए मनोज भावुक ने कहा कि यह सिर्फ एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि बनारस की उस जीवन-दृष्टि को समर्पित रचना है, जहां शिवत्व, करुणा, वैराग्य और जीवन का उत्सव एक साथ दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि इस गीत के माध्यम से महादेव से प्रार्थना की गई है कि हर व्यक्ति के भीतर भी ऐसा 'बनारस' बस जाए, जहां मन को शांति, संतुलन और आत्मिक आनंद मिल सके।
गीत का मुखड़ा है—
"हे भोले बाबा, हे शंभु बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs,
दुख हो या सुख हो, मस्ती में राखs, जिनगी के नइया पार लगा दs..."
गीत के अंतरों में काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष जैसे भारतीय दर्शन के मूल तत्वों का उल्लेख किया गया है। साथ ही लंका चौराहे के प्रतीक के जरिए जीवन के संघर्ष और आध्यात्मिक मार्ग को सरल भोजपुरी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
मनोज भावुक का कहना है कि बनारस केवल एक शहर नहीं, बल्कि मनुष्य की आंतरिक चेतना की वह अवस्था है, जहां भक्ति और वैराग्य का संतुलन मिलता है। उनका मानना है कि भोजपुरी में बनारस की आध्यात्मिक परंपरा पर अपेक्षाकृत कम गीत लिखे गए हैं और यह रचना उसी दिशा में एक विनम्र प्रयास है।
मनोज भावुक और संगीतकार रजनीश मिश्रा की जोड़ी इससे पहले 'तोर बउरहवा रे माई', 'आपन कहाये वाला के बा', 'दुलहिनिया नाच नचावे' और 'मेरे राम' जैसे कई चर्चित गीत दे चुकी है।
मनोज भावुक ने कहा कि भोजपुरी संगीत की पहचान सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को नए गीतों के जरिए सामने लाना समय की जरूरत है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह गीत शिवभक्तों के साथ-साथ साहित्य और संगीत के गंभीर श्रोताओं के दिलों को भी जरूर छुएगा।