रील्स और स्पीड से नहीं, भरोसे से जीतेगी पत्रकारिता: जगदीश शर्मा

दैनिक भास्कर के मैनेजिंग एडिटर जगदीश शर्मा ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, पत्रकारों की भूमिका और मीडिया के भविष्य पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 06 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 06 August, 2026
Jagdish Sharma


समाचार4मीडिया के 'पत्रकारिता 40 अंडर 40' कार्यक्रम में दैनिक भास्कर के मैनेजिंग एडिटर जगदीश शर्मा ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, पत्रकारों की भूमिका और मीडिया के भविष्य पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने बेहद सहज अंदाज में की।

जगदीश शर्मा ने कहा कि अगर पत्रकारिता के भविष्य की बात करनी है तो केवल मीडिया के कल, आज और कल की नहीं, बल्कि पत्रकारों के कल, आज और कल की भी चर्चा जरूरी है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पत्रकारिता का वह दौर भी देखा है, जब किसी शहर का पत्रकार सबसे बड़ा प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता था। खासकर किसी बड़े अखबार का ब्यूरो चीफ उस शहर में इतनी मजबूत स्थिति रखता था कि उसका प्रभाव कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (एसपी), सांसद, विधायक और यहां तक कि जिले के प्रभारी मंत्री से भी अधिक माना जाता था।

उन्होंने कहा कि उस समय पत्रकार ही सबसे बड़ा 'इन्फ्लुएंसर' हुआ करता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। अब सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फॉलोअर्स, व्यूज या मिलियन ऑडियंस रखने वाले व्यक्ति को बड़ा पत्रकार मान लिया जाता है। यानी पत्रकार और इन्फ्लुएंसर की परिभाषा बदल गई है।

अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इंसान का स्वभाव हमेशा से जानने और दूसरों को बताने का रहा है। हर व्यक्ति नई जानकारी हासिल करना चाहता है और जो जानकारी उसे मिलती है, उसे दूसरों तक भी पहुंचाना चाहता है। यही पत्रकारिता का मूल उद्देश्य भी है- समाज तक सही सूचनाएं पहुंचाना।

उन्होंने कहा कि पहले पत्रकारिता केवल सूचना देने तक सीमित नहीं थी। जब भी कोई खबर प्रकाशित होती थी, उसके साथ कोई संदेश, कोई विचार या समाज के लिए कोई सकारात्मक दिशा देने का प्रयास भी किया जाता था।

जगदीश शर्मा ने बताया कि उन्हें अखबार उद्योग में काम करते हुए 36 वर्ष हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने संपादकीय, प्रबंधन, मार्केटिंग, प्रोडक्शन और सर्वे जैसे लगभग सभी विभागों में काम किया है। उन्होंने बताया कि 65 में से 57 संस्करणों की लॉन्चिंग उनके नेतृत्व में हुई है। इस लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप को बहुत करीब से देखा है।

उन्होंने कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों में मीडिया की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। पहले खबर के साथ संदेश देने पर जोर होता था, लेकिन धीरे-धीरे पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित हो गया कि पाठक की जरूरत क्या है। अब यह समझना जरूरी हो गया कि पाठक किस तरह की जानकारी चाहता है और कौन-सी खबर उसके लिए उपयोगी साबित होगी। यदि खबर उसकी जरूरत पूरी करेगी, तभी वह उसे पढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि अब पत्रकारिता एक और बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। आने वाले समय में केवल खबर या उसकी उपयोगिता पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि खबर के साथ मनोरंजन का तत्व भी जोड़ना पड़ेगा। अगर खबर आकर्षक और रोचक ढंग से प्रस्तुत नहीं की जाएगी तो लोगों का ध्यान उस पर नहीं जाएगा।

उन्होंने पत्रकारिता के इस बदलाव को तीन चरणों में समझाया। उनके मुताबिक पहले दौर में खबर के साथ संदेश देने पर जोर था। दूसरे दौर में खबर के साथ उसकी उपयोगिता सबसे महत्वपूर्ण हो गई। अब आने वाला दौर खबर के साथ मनोरंजन का होगा। यानी पत्रकारिता का उद्देश्य तो वही रहेगा, लेकिन खबरों की प्रस्तुति समय के अनुसार बदलनी पड़ेगी।

जगदीश शर्मा ने स्पष्ट कहा कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पत्रकारिता खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि दुनिया में कभी पत्रकारिता खत्म नहीं होगी, न सूचनाएं खत्म होंगी और न ही लोगों की जानकारी पाने की इच्छा। बदलेंगे तो केवल माध्यम और खबरों को लोगों तक पहुंचाने के तरीके।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की मूल भावना हमेशा जीवित रहेगी, लेकिन जो संस्थान और पत्रकार समय के साथ खुद को बदलेंगे, वही भविष्य में भी लोगों के बीच अपनी जगह बनाए रख पाएंगे।

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए जगदीश शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता का भविष्य कभी समाप्त नहीं होगा, लेकिन समय के साथ उसके माध्यम और प्रतिस्पर्धा का स्वरूप लगातार बदलता रहेगा।

उन्होंने कहा कि एक समय था जब अखबारों का मुकाबला केवल दूसरे अखबारों से होता था। हर पत्रकार को पता होता था कि उसके शहर में कितने पत्रकार हैं और कौन-कौन से अखबार काम कर रहे हैं। प्रतिस्पर्धा सिर्फ इस बात की होती थी कि किसके पास बेहतर और ज्यादा खबरें हैं।

इसके बाद मीडिया में बड़ा बदलाव आया और अखबारों का मुकाबला टेलीविजन से होने लगा। उन्होंने कहा कि पहले जो खबर अखबार अगले दिन सुबह प्रकाशित करने वाले होते थे, वह लोगों तक दिन में ही टीवी के जरिए पहुंच जाती थी। ऐसे में अखबारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि जब पाठक रात तक टीवी पर सारी घटनाएं देख चुका है, तब अगले दिन उसे अखबार पढ़ने के लिए क्या नया दिया जाए।

उन्होंने कहा कि इसी वजह से अखबारों ने खबरों में अतिरिक्त जानकारी, विश्लेषण और ऐसी बातें जोड़नी शुरू कीं, जो टीवी पर नहीं मिल पाती थीं। उद्देश्य यही था कि पाठक को अगले दिन भी अखबार पढ़ने की जरूरत महसूस हो।

जगदीश शर्मा ने कहा कि अब पत्रकारिता एक और बड़े बदलाव के दौर में है। आज अखबार और टीवी दोनों का मुकाबला डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया से है। सोशल मीडिया ने खबरों की रफ्तार को कई गुना बढ़ा दिया है और यह पारंपरिक मीडिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

हालांकि उन्होंने कहा कि इस चुनौती के बावजूद पारंपरिक मीडिया के पास एक ऐसी ताकत है, जो सोशल मीडिया के पास आज भी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति से कोई खबर दोहराने को कहा जाए तो वह आज भी यह नहीं कहता कि "मैंने सोशल मीडिया पर देखा, इसलिए यह सही है।" लोग सोशल मीडिया पर मिली जानकारी को अक्सर संदेह की नजर से देखते हैं, जबकि अखबार और विश्वसनीय मीडिया संस्थानों में प्रकाशित खबरों पर आज भी भरोसा करते हैं।

उन्होंने कहा कि यही कारण है कि पत्रकारिता का भविष्य अंधकारमय नहीं है। बल्कि वर्तमान समय मीडिया के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म चाहे जितना मजबूत हो जाए, लेकिन उसकी सबसे बड़ी कमी विश्वसनीयता है। यही वह ताकत है जो पारंपरिक मीडिया के पास मौजूद है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपनी इसी मूल ताकत को बनाए रखते हुए समय के अनुसार खुद को बदलना होगा। सोशल मीडिया जिस तरह खबरों को तेज, आकर्षक और नए तरीके से प्रस्तुत कर रहा है, उसी तरह की प्रस्तुति पारंपरिक मीडिया को भी अपनानी होगी। लेकिन खबरों की सत्यता और तथ्यों की जांच से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए।

जगदीश शर्मा ने कहा कि पत्रकारिता की आत्मा विश्वसनीयता है और यह वर्षों की मेहनत से बनी है। लोगों का भरोसा ही मीडिया की सबसे बड़ी पूंजी है। इसलिए पत्रकारों को अपनी इसी पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक तकनीक और नए प्रस्तुतीकरण के तरीकों को अपनाना चाहिए।

उन्होंने पत्रकारिता में आए एक और बदलाव की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि पहले लोग केवल इस बात से खुश हो जाते थे कि उनका पक्ष या बयान खबर में शामिल हो गया। इसके बाद समय बदला और लोग यह चाहने लगे कि यदि खबर उनके पक्ष में है तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाए और यदि उनके खिलाफ है तो उसे छोटा करके छापा जाए।

उन्होंने कहा कि अब स्थिति इससे भी आगे निकल चुकी है। आज कई लोग सीधे यह कहने लगे हैं कि खबर छापी ही न जाए। कुछ लोग तो यह भी तय करने की कोशिश करते हैं कि खबर किस पेज पर छपे, कितने कॉलम में प्रकाशित हो और उसकी जगह क्या हो। यह भी पत्रकारिता के बदलते दौर का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि इन सभी बदलावों के बावजूद पत्रकार का मूल दायित्व नहीं बदला है। भगवान ने पत्रकार को समाज तक सही जानकारी पहुंचाने का माध्यम बनाया है। चाहे वह अखबार में काम करे, टीवी में, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर या सोशल मीडिया पर, उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी लोगों तक विश्वसनीय सूचना पहुंचाना ही है।

उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया के विस्तार का एक सकारात्मक पक्ष भी है। अब पत्रकार कभी पूरी तरह रिटायर नहीं होगा। पहले नौकरी छोड़ने के बाद पत्रकारिता से दूरी बन जाती थी, लेकिन अब कोई भी पत्रकार अपने घर से ही सोशल मीडिया, यूट्यूब, इंस्टाग्राम या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी पत्रकारिता जारी रख सकता है। आज कई वरिष्ठ पत्रकार अपने-अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाकर सक्रिय रूप से लोगों तक खबरें पहुंचा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह पत्रकारों के लिए एक बड़ा अवसर है। यदि वे अपनी मूल ताकत यानी विश्वसनीयता को बनाए रखते हुए नए माध्यमों का सही उपयोग करेंगे तो कोई भी चुनौती उनके सामने टिक नहीं पाएगी। लेकिन यदि वे भी बिना तथ्यों की पुष्टि किए केवल सोशल मीडिया की तरह काम करने लगेंगे, तो उनकी सबसे बड़ी ताकत खत्म हो जाएगी।

अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में जगदीश शर्मा ने कहा कि यदि पत्रकार अपनी मूल पहचान और मूल्यों को बनाए रखेंगे तो दुनिया की कोई ताकत उनके लिए चुनौती नहीं बन सकती। लेकिन यदि वे भी सोशल मीडिया की तरह बिना विश्वसनीयता के काम करने लगेंगे, तो पत्रकारिता अपनी सबसे बड़ी ताकत खो देगी।

उन्होंने कहा कि आज जिन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को लोग बड़ी ताकत के रूप में देख रहे हैं, कभी वही ताकत मीडिया के पास हुआ करती थी। उस समय मीडिया बेबाक था, निर्भीक था और बिना किसी दबाव के अपनी बात कहता था। हालांकि समय के साथ पत्रकारिता में व्यावसायिक पहलू भी मजबूत हुआ है और मीडिया संस्थानों को कारोबार की जरूरतों के हिसाब से भी काम करना पड़ता है।

इसी संदर्भ में उन्होंने व्यापार और मिशन का अंतर समझाते हुए एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी गांव में राजा रहते हैं तो वहां हाथियों का व्यापार करना पड़ेगा, क्योंकि वहीं उनकी मांग होगी। वहीं यदि कुम्हारों के गांव में व्यापार करना है तो वहां गधों का व्यापार करना होगा, क्योंकि वहां वही बिकेंगे। यानी किसी भी व्यापार में लोगों की जरूरत और पसंद के अनुसार काम करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि मीडिया भी अब एक व्यवसाय है, इसलिए लोगों की रुचि और जरूरतों को समझना जरूरी है। पाठक और दर्शक जो पढ़ना और देखना चाहते हैं, उसे भी ध्यान में रखना होगा। लेकिन इसके साथ यह भी याद रखना होगा कि पत्रकारिता केवल व्यापार नहीं है। यह समाज तक सही और भरोसेमंद जानकारी पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

जगदीश शर्मा ने कहा कि लोगों का मीडिया पर भरोसा ही उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया की बात करें तो आज भी करोड़ों लोगों की सुबह अखबार पढ़ने से शुरू होती है। यदि किसी दिन अखबार समय पर नहीं पहुंचता तो लोग तुरंत उसकी शिकायत करते हैं। इससे साफ है कि अखबार आज भी लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि भारत में प्रिंट मीडिया का भविष्य अभी भी सुरक्षित है और इसके पीछे तीन बड़े कारण हैं।

पहला कारण यह है कि आज भी लोगों के मन में यह विश्वास कायम है कि यदि कोई खबर अखबार में छपी है तो वह सही और तथ्यों पर आधारित होगी। सोशल मीडिया की तुलना में अखबारों की विश्वसनीयता आज भी कहीं अधिक है।

दूसरा कारण अखबारों की वितरण व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि देशभर में अखबार बांटने वाले अधिकांश लोग पार्ट-टाइम काम करते हैं। वे दिन में दूसरा काम भी करते हैं, इसलिए अखबारों का वितरण अपेक्षाकृत कम लागत में हो जाता है। यही वजह है कि अखबार आज भी कम कीमत पर पाठकों तक पहुंच पाते हैं।

तीसरा कारण उन्होंने अखबार की रद्दी का आर्थिक मूल्य बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में कागज फेंकने के लिए भी पैसा देना पड़ता है, लेकिन भारत में पुराने अखबार बेचने पर पैसे मिल जाते हैं। इससे अखबार की खरीद पर होने वाला खर्च काफी हद तक वापस मिल जाता है। यही वजह है कि लोग आज भी नियमित रूप से अखबार खरीदते हैं।

उन्होंने कहा कि इन सभी कारणों से प्रिंट मीडिया निकट भविष्य में खत्म होने वाला नहीं है। जरूरत सिर्फ इस बात की है कि मीडिया समय के साथ खुद को बदलता रहे और नई तकनीक तथा नए प्रस्तुतीकरण को अपनाए।

अपने संबोधन का समापन करते हुए जगदीश शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया के पास गति है, मनोरंजन है, रील्स हैं और खबरों को आकर्षक ढंग से पेश करने के कई आधुनिक तरीके हैं। लेकिन उसके पास सबसे महत्वपूर्ण चीज-  विश्वसनीयता नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि पारंपरिक मीडिया अपनी इसी विश्वसनीयता को बनाए रखते हुए सोशल मीडिया की अच्छी बातें, जैसे बेहतर प्रस्तुतीकरण, तेजी और आधुनिक तकनीक को अपनाए, तो उसे कोई पीछे नहीं छोड़ सकता। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की सबसे बड़ी ताकत आज भी भरोसा है और यही भरोसा भविष्य में भी मीडिया को सबसे आगे रखेगा।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि समय के साथ बदलाव जरूरी है, लेकिन पत्रकारिता की आत्मा यानी विश्वसनीयता को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ना चाहिए।

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Infomedia Press: AGM में 4 प्रस्ताव पास, निदेशक पद पर इन अधिकारियों की पुनर्नियुक्ति मंजूर

Infomedia Press Limited की 71वीं सालाना आम बैठक (AGM) 18 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 21 September, 2026
Last Modified:
Monday, 21 September, 2026
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Infomedia Press Limited की 71वीं सालाना आम बैठक (AGM) 18 सितंबर 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित की गई। कंपनी ने बैठक में हुए कामकाज के मतदान के नतीजे और स्क्रूटिनाइजर की संयुक्त रिपोर्ट शेयर बाजारों को सौंप दी है। कंपनी के मुताबिक, बैठक में रखे गए सभी 4 प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए।

कंपनी की ओर से 18 सितंबर 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को यह जानकारी दी गई। 71वीं AGM शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से हुई।

कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 11 सितंबर 2026 कट-ऑफ तारीख थी और उस तारीख तक कंपनी के कुल 16,577 शेयरधारक थे। शेयरधारकों को प्रस्तावों पर रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान ई-वोटिंग के जरिए वोट करने की सुविधा दी गई थी।

पहला प्रस्ताव

पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स और उस पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स व ऑडिटर्स की रिपोर्ट को अपनाने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव साधारण प्रस्ताव (Ordinary Resolution) था और इसे जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में कुल 2,54,88,707 वोट पड़े, जबकि 11,25,657 वोट इसके खिलाफ रहे। कुल पड़े वोटों में 95.7705% वोट पक्ष में और 4.2295% वोट खिलाफ रहे।

दूसरा प्रस्ताव

दूसरे प्रस्ताव में करनवीर सिंह गिल को रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रहे निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने का प्रस्ताव था। यह भी साधारण प्रस्ताव था और इसे जरूरी बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 2,54,88,017 वोट पड़े, जबकि 11,26,247 वोट खिलाफ रहे। यानी कुल वोटों में 95.7683% वोट पक्ष में और 4.2317% वोट खिलाफ रहे।

तीसरा प्रस्ताव

तीसरे प्रस्ताव में बिंदु नवींचंद्र त्रिवेदी को रोटेशन के आधार पर रिटायर हो रही निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव भी जरूरी बहुमत के साथ पास हुआ। इस प्रस्ताव के पक्ष में 2,54,88,017 वोट पड़े, जबकि 11,26,247 वोट इसके खिलाफ रहे। पक्ष में पड़े वोटों का प्रतिशत 95.7683% और खिलाफ पड़े वोटों का प्रतिशत 4.2317% रहा।

चौथा प्रस्ताव

चौथे प्रस्ताव में पुनीत सिंहवी को कंपनी के गैर-कार्यकारी, गैर-स्वतंत्र निदेशक (Non-Executive Non-Independent Director) के तौर पर नियुक्त करने की मंजूरी मांगी गई थी। यह प्रस्ताव भी जरूरी बहुमत के साथ पास हुआ।इस प्रस्ताव के पक्ष में 2,54,88,117 वोट पड़े, जबकि 11,26,247 वोट खिलाफ रहे। पक्ष में पड़े वोटों का प्रतिशत 95.7683% और खिलाफ पड़े वोटों का प्रतिशत 4.2317% रहा।

स्क्रूटिनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 सितंबर 2026 को AGM के बाद ई-वोटिंग के नतीजों को अनब्लॉक किया गया और वोटों का कंपनी के रिकॉर्ड के साथ मिलान किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि प्रस्तावों पर पड़े कुल वोटों में कोई अमान्य वोट नहीं था।

स्क्रूटिनाइजर नीलेश कुमार जैन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नोटिस में दिए गए आइटम नंबर 1 से 4 तक के सभी प्रस्ताव जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए। 

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जागरण प्रकाशन: संजय गुप्ता समेत 4 पूर्णकालिक निदेशकों की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी

जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) की 50वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चार  पूर्ण कालिक निदेशकों (Whole-time Directors) की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 19 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 19 September, 2026
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जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) की 50वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में कंपनी के चार पूर्ण कालिक निदेशकों (Whole-time Directors) की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा महेंद्र मोहन गुप्ता को Non-Executive Director के तौर पर आगे भी बनाए रखने की मंजूरी दी गई है।

कंपनी ने 18 सितंबर 2026 को स्टॉक एक्सचेंजों को दी जानकारी में बताया कि 50वीं AGM शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC)/अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम (OAVM) के जरिए हुई। बैठक में सदस्यों ने इन नियुक्तियों और आगे जारी रखने को मंजूरी दी।

चार पूर्ण कालिक निदेशकों की पांच साल के लिए दोबारा नियुक्ति

बोर्ड की सिफारिश के आधार पर सदस्यों ने चार पूर्ण कालिक निदेशकों को अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त करने की मंजूरी दी है। इनका नया कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा।

धीरेंद्र मोहन गुप्ता को कंपनी के पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर पांच साल के लिए फिर नियुक्त किया गया है। वह 82 साल के हैं और उन्होंने आर्ट्स में स्नातक की डिग्री ली है। कंपनी के मुताबिक, उन्हें प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री में 60 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और कंपनी की शुरुआत से ही इसके साथ निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वह महेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं। उनकी यह नियुक्ति रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन होगी।

सुनील गुप्ता को भी पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर अगले पांच साल के लिए फिर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 64 वर्षीय सुनील गुप्ता ने कॉमर्स में स्नातक और मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह प्रमोटर ग्रुप के सदस्य हैं और 1993 से कंपनी के निदेशक हैं। कंपनी ने बताया कि उनका किसी अन्य निदेशक के साथ कोई संबंध नहीं है। उनकी नियुक्ति भी रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन होगी।

संजय गुप्ता को भी पांच साल के लिए पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर दोबारा नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 63 वर्षीय संजय गुप्ता ने साइंस में स्नातक की डिग्री ली है और उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 40 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और 1993 से कंपनी के निदेशक हैं। वह संदीप गुप्ता के भाई हैं। उनकी नियुक्ति रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन नहीं होगी।

शैलेश गुप्ता को भी पूर्ण कालिक निदेशक के तौर पर अगले पांच साल के लिए दोबारा नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। उनका कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक रहेगा। 57 वर्षीय शैलेश गुप्ता ने कॉमर्स में स्नातक की डिग्री ली है। उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह Promoter Group के सदस्य हैं और 1994 से कंपनी के निदेशक हैं। वह महेंद्र मोहन गुप्ता के बेटे हैं। उनकी नियुक्ति भी रोटेशन के आधार पर रिटायर होने के नियम के अधीन नहीं होगी।

कंपनी ने यह भी बताया कि इन चारों निदेशकों को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) या किसी अन्य प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

महेंद्र मोहन गुप्ता गैर-कार्यकारी निदेशक (Non-Executive Director) के तौर पर बने रहेंगे

AGM में सदस्यों ने महेंद्र मोहन गुप्ता को कंपनी के गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर आगे भी बनाए रखने की मंजूरी दी है। उनका नया कार्यकाल 1 अक्टूबर 2026 से 30 सितंबर 2031 तक पांच साल का होगा। वह रोटेशन के आधार पर रिटायर नहीं होंगे।

महेंद्र मोहन गुप्ता को 1 अक्टूबर 2021 से दो साल के लिए कंपनी का चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) नियुक्त किया गया था। उनका यह कार्यकाल 30 सितंबर 2023 को पूरा हुआ। इसके बाद 1 अक्टूबर 2023 से उन्हें कंपनी का गैर-कार्यकारी अध्यक्ष (Non-Executive Chairman) बनाया गया। अब उनका गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को समाप्त होगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से वह गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर कंपनी में बने रहेंगे।म

महेंद्र मोहन गुप्ता 85 साल के हैं और उन्होंने कॉमर्स में स्नातक की डिग्री ली है। कंपनी के अनुसार, उन्हें प्रिंट मीडिया उद्योग में 65 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह कंपनी के प्रमोटर हैं और कंपनी की शुरुआत से ही इसके साथ निदेशक के तौर पर जुड़े हुए हैं। वह शैलेश गुप्ता के पिता और धीरेंद्र मोहन गुप्ता, देवेंद्र मोहन गुप्ता और शैलेंद्र मोहन गुप्ता के भाई हैं।

कंपनी ने बताया कि महेंद्र मोहन गुप्ता को भी SEBI या किसी अन्य प्राधिकरण के किसी आदेश के तहत निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। 

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गुरमीत राम रहीम से जुड़े विज्ञापन पर ‘द हिंदू’ ने मांगी बिना शर्त माफी

है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 14 September, 2026
Last Modified:
Monday, 14 September, 2026
The Hindu Advertisement

देश के प्रमुख अंग्रेजी अखबार द हिंदू (The Hindu) ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह से जुड़े एक विज्ञापन के प्रकाशन पर अपने पाठकों से बिना शर्त माफी मांगी है। यह विज्ञापन 12 सितंबर को अखबार के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में प्रकाशित हुआ था। विवाद के बाद 13 सितंबर को द हिंदू ने अपने फ्रंट पेज पर ‘Apology’ शीर्षक से माफी प्रकाशित की।

अखबार ने अपने माफीनामे में इस विज्ञापन को “offensive front-page advertisement” और “deeply offensive advertisement” बताया। द हिंदू ने कहा कि उसे इस विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार के निदेशक एन. राम (N. Ram) की ओर से भी इस मामले को लेकर जानकारी साझा की गई है।

यह था पूरा मामला: दरअसल, 12 सितंबर के द हिंदू के दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों के फ्रंट पेज पर डेरा सच्चा सौदा की ओर से एक पूरे पेज का विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। इसका शीर्षक था “What is Dera Sacha Sauda? (Facts vs Fiction)”। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ लगे आरोपों और मामलों को लेकर डेरा की ओर से अपना पक्ष रखा गया था। विज्ञापन में उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर साजिश का दावा भी किया गया था। विज्ञापन में डेरा सच्चा सौदा की ओर से सामाजिक कार्यों को लेकर कई आंकड़े भी दिए गए थे। इनमें नशे से लोगों को बाहर निकालने, पेड़ लगाने, रक्तदान और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से जुड़े दावे शामिल थे।

राम रहीम को लेकर क्या है मामला?: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को वर्ष 2017 में सीबीआई की विशेष अदालत ने दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें 20 साल की सजा सुनाई थी। विज्ञापन प्रकाशित होने के समय वह 21 दिन की फरलो पर जेल से बाहर थे। इसी पृष्ठभूमि में द हिंदू के फ्रंट पेज पर इस विज्ञापन के प्रकाशन को लेकर पत्रकारों और सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने सवाल उठाए। इसके बाद द हिंदू ने अपने पाठकों से इस विज्ञापन को प्रकाशित करने के लिए बिना शर्त माफी मांगी।

द हिंदू ने क्या कहा?: 13 सितंबर को फ्रंट पेज पर प्रकाशित अपने माफीनामे में अखबार ने कहा कि उसे दिल्ली, मोहाली और उत्तर भारत के संस्करणों में “डेरा सच्चा सौदा क्या है? (तथ्य बनाम कल्पना)” शीर्षक से प्रकाशित आपत्तिजनक फ्रंट-पेज विज्ञापन के प्रकाशन पर गहरा खेद है। अखबार ने विज्ञापन में किए गए उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें डेरा सच्चा सौदा प्रमुख और दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ “ड्रग माफिया और डेरा के विरोधी ताकतों” की ओर से साजिश का दावा किया गया था।

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Assetgro Fintech में HMVL की एंट्री हुई मजबूत, OCDs कन्वर्जन से मिली 2.48% हिस्सेदारी

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 09 September, 2026
Last Modified:
Wednesday, 09 September, 2026
HMVL541

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने फिनटेक कंपनी Assetgro Fintech Pvt Ltd (StockGro) में रखे अपने Optionally Convertible Debentures (OCDs) को इक्विटी शेयरों में बदल दिया है। कंपनी ने बताया कि 8 सितंबर 2026 को 8,708 OCDs को 16,02,011 इक्विटी शेयरों में कन्वर्ट किया गया है। इन शेयरों की कुल राशि 85 करोड़ रुपये है।

इस कन्वर्जन के बाद HMVL को StockGro में 2.48 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह हिस्सेदारी OCDs के इक्विटी शेयरों में कन्वर्जन के जरिए हासिल हुई है।

StockGro में नहीं हुआ नया कैश निवेश

कंपनी के मुताबिक, यह लेन-देन OCDs को इक्विटी शेयरों में बदलने के रूप में हुआ है। यानी इस चरण में 85 करोड़ रुपये का कोई नया नकद निवेश करने की बात नहीं कही गई है। HMVL ने पहले StockGro में निवेश के तहत ये OCDs रखे हुए थे, जिन्हें अब शेयरों में बदला गया है।

निवेश का उद्देश्य क्या है?

कंपनी ने बताया है कि इस निवेश का उद्देश्य तेजी से बढ़ रही कंपनी में निवेश के जरिए भविष्य में पूंजी पर रिटर्न हासिल करना है। इसके साथ ही HMVL की ओर से कंपनी के मीडिया एसेट्स का लाभ उठाने की भी बात कही गई है।

StockGro क्या करती है?

Assetgro Fintech Pvt Ltd, जिसे StockGro के नाम से जाना जाता है, फिनटेक सेक्टर में काम करती है। कंपनी के अनुसार, StockGro एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो निवेश सलाह, ज्ञान साझा करने और कम्युनिटी आधारित बातचीत को एक ही इकोसिस्टम में जोड़ता है।

इसके प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर्ड निवेश सलाहकारों और यूजर्स के बीच बातचीत की सुविधा उपलब्ध है। कंपनी ने इसे भारत का पहला ऐसा प्लेटफॉर्म बताया है जो इन अलग-अलग सुविधाओं को एक साथ जोड़ता है।

StockGro का कारोबार बढ़ा

दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, StockGro का टर्नओवर पिछले तीन वित्त वर्षों में बढ़ा है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का टर्नओवर 99 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 125.51 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 में 231.10 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह लेन-देन रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन नहीं है। साथ ही HMVL के प्रमोटर, प्रमोटर ग्रुप या ग्रुप कंपनियों की StockGro में कोई रुचि नहीं है। इस कन्वर्जन के लिए किसी सरकारी या नियामकीय मंजूरी की जरूरत नहीं थी।

 

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BCCL और OpenAI की रणनीतिक साझेदारी, ChatGPT पर दिखेंगी TOI और ET की खबरें

भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 08 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 08 September, 2026
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भारत के बड़े मीडिया समूहों में शामिल Bennett, Coleman & Co Ltd (BCCL) और OpenAI ने रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी का मकसद BCCL के अखबारों और डिजिटल प्रकाशनों की खबरों को ChatGPT के जरिए ज्यादा से ज्यादा पाठकों तक पहुंचाना है। खास बात यह है कि ChatGPT पर दिखाई जाने वाली खबरों के साथ मूल प्रकाशन और खबर की पूरी रिपोर्ट तक पहुंचने के लिए सीधे लिंक भी दिए जाएंगे।

इस साझेदारी के तहत BCCL के चुनिंदा प्रकाशनों, जिनमें The Times of India और The Economic Times शामिल हैं, की सामग्री संबंधित सवालों के जवाब में ChatGPT पर दिखाई जा सकेगी। जहां किसी खबर का संक्षिप्त सार या कुछ हिस्सा दिखाया जाएगा, वहां संबंधित प्रकाशन का नाम भी बताया जाएगा और मूल खबर का सीधा लिंक दिया जाएगा। इससे पाठक पूरी खबर और उसका संदर्भ BCCL के प्लेटफॉर्म पर जाकर देख सकेंगे।

अंग्रेजी के साथ भारतीय भाषाओं की खबरें भी होंगी शामिल

यह साझेदारी सिर्फ लाइव खबरों तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें BCCL के अंग्रेजी के साथ-साथ भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होने वाली अन्य सामग्री भी शामिल होगी। हालांकि, दोनों कंपनियों ने इस समझौते की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है।

BCCL के लिए इस साझेदारी में खबर के मूल स्रोत और उसकी पहचान को बनाए रखने पर खास जोर दिया गया है। BCCL के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर और बोर्ड मेंबर मोहित जैन ने कहा कि इस साझेदारी से पाठकों को BCCL के अलग-अलग प्रकाशनों की पत्रकारिता खोजने में मदद मिलेगी, साथ ही मूल खबर के स्रोत, संदर्भ और पहचान को भी बरकरार रखा जाएगा।

वहीं, OpenAI के मीडिया पार्टनरशिप्स के वाइस प्रेसिडेंट वरुण शेट्टी ने कहा कि साझेदारी से ChatGPT के यूजर्स BCCL के अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं के प्रकाशनों की खबरें स्पष्ट स्रोत जानकारी और मूल खबर के सीधे लिंक के साथ खोज सकेंगे।

सिर्फ खबरों तक पहुंच नहीं, AI के दूसरे इस्तेमाल पर भी काम

BCCL और OpenAI की साझेदारी केवल ChatGPT पर खबरें दिखाने तक सीमित नहीं है। दोनों कंपनियां BCCL के अलग-अलग उत्पादों, पाठक सेवाओं और आंतरिक कामकाज में OpenAI की तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाशेंगी।

इसमें पुराने समाचारों और आर्काइव को खोजने, रिसर्च, डेटा विश्लेषण, अनुवाद, पाठक सेवाओं और कारोबारी कामकाज जैसे क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं शामिल हैं।

न्यूजरूम में AI इस्तेमाल पर संपादकीय नियंत्रण बरकरार रहेगा

BCCL ने साफ किया है कि उसके न्यूजरूम में AI का इस्तेमाल होने की स्थिति में संबंधित प्रकाशनों के संपादकीय नियमों और नीतियों का पालन किया जाएगा। साथ ही हर स्तर पर मानवीय निगरानी भी बनी रहेगी।

BCCL के प्रकाशनों का संपादकीय नियंत्रण पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा। खबर क्या होगी, उसकी जांच कैसे होगी, उसे कैसे संपादित किया जाएगा और कब प्रकाशित किया जाएगा, इसका फैसला संपादक और पत्रकार ही करेंगे। OpenAI को BCCL के कवरेज या संपादकीय रुख तय करने में कोई भूमिका नहीं होगी।

AI के दौर में बदल रहा है खबरों तक पहुंचने का तरीका

यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब जनरेटिव AI लोगों के लिए जानकारी और खबरें खोजने का एक नया माध्यम बनता जा रहा है। ऐसे में मीडिया कंपनियों के सामने खबर के मूल स्रोत, सही श्रेय, मूल रिपोर्ट तक पाठकों की पहुंच और संपादकीय स्वतंत्रता जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

BCCL और OpenAI की यह साझेदारी इसी बदलते माहौल का हिस्सा है। इसमें एक ओर ChatGPT के जरिए BCCL की पत्रकारिता को नए पाठकों तक पहुंचाने पर जोर है, तो दूसरी ओर पाठकों को पूरी खबर और उसका मूल संदर्भ देखने के लिए BCCL की वेबसाइट और प्लेटफॉर्म पर वापस भेजने की व्यवस्था भी रखी गई है।

OpenAI दुनिया भर के प्रकाशकों के साथ ऐसी साझेदारियों के जरिए विश्वसनीय जानकारी तक लोगों की पहुंच बेहतर करने और समाचार व प्रकाशन के कामकाज में AI के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाश रहा है। BCCL के लिए यह साझेदारी पाठकों तक खबरों की पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ प्रकाशन और कारोबारी कामकाज के कई क्षेत्रों में AI के इस्तेमाल का रास्ता भी खोलती है।

 

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डिजिटल के दौर में भी प्रिंट की पकड़ कायम, ऐड स्पेस में सिर्फ 2% की कमी: TAM AdEx

TAM AdEx की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान प्रिंट में विज्ञापन के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सिर्फ 2% कम हुई है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 05 September, 2026
Last Modified:
Saturday, 05 September, 2026
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साल 2026 के शुरुआती सात महीनों में प्रिंट विज्ञापन बाजार लगभग स्थिर रहा है। TAM AdEx की जनवरी-जुलाई 2026 बनाम जनवरी-जुलाई 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान प्रिंट में विज्ञापन के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले सिर्फ 2% कम हुई है। यानी प्रिंट विज्ञापन में इस दौरान कोई बड़ी गिरावट नहीं देखने को मिली।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रिंट विज्ञापन में शिक्षा क्षेत्र सबसे आगे रहा। कुल ऐड स्पेस में शिक्षा क्षेत्र की हिस्सेदारी 20% रही। इसके बाद सेवा क्षेत्र 15% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ऑटो और बैंकिंग व वित्तीय सेवाएं भी प्रिंट में प्रमुख विज्ञापन देने वाले क्षेत्रों में शामिल रहे।

शीर्ष पांच क्षेत्रों ने मिलकर प्रिंट की कुल ऐड स्पेस में 66% से ज्यादा हिस्सेदारी दर्ज की। वहीं, कॉरपोरेट/ब्रैंड छवि शीर्ष 10 क्षेत्रों में शामिल होने वाला एकमात्र नया क्षेत्र रहा। जनवरी-जुलाई 2025 की तुलना में इस साल भी शीर्ष चार क्षेत्रों ने अपनी जगह बरकरार रखी।

कारों का विज्ञापन सबसे ज्यादा, मल्टीपल कोर्सेज में सबसे बड़ी बढ़त

कैटेगरीज की बात करें तो कारें प्रिंट विज्ञापन में सबसे बड़ी श्रेणी बनी हुई हैं। शीर्ष 10 कैटेगरीज ने मिलकर कुल प्रिंट ऐड स्पेस का करीब 48% हिस्सा हासिल किया। इस दौरान चार कैटेगरीज ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया, जबकि खुदरा दुकानें-कपड़े/टेक्सटाइल/फैशन ने शीर्ष 10 कैटेगरीज में जगह बनाई।

शीर्ष 10 कैटेगरीज में शिक्षा से जुड़ी तीन कैटेगरीज और ऑटो से जुड़ी दो कैटेगरीज शामिल रहीं। वहीं, जनवरी-जुलाई 2025 की तुलना में ऐड स्पेस में वास्तविक बढ़ोतरी के मामले में मल्टीपल कोर्सेज श्रेणी सबसे आगे रही। इसके बाद खुदरा दुकानें-ज्वेलर्स और ई-कॉमर्स-अन्य सेवाओं का नंबर रहा।

मारुति सुजुकी लगातार दूसरी बार सबसे बड़ा विज्ञापनदाता

विज्ञापनदाताओं की रैंकिंग में Maruti Suzuki India ने लगातार दूसरे साल शीर्ष स्थान हासिल किया है। जनवरी-जुलाई 2025 के शीर्ष 10 विज्ञापनदाताओं में शामिल सात कंपनियां इस साल भी शीर्ष 10 में बनी रहीं। इस साल SBS Biotech, GCMMF और Renault India ने शीर्ष 10 विज्ञापनदाताओं की सूची में नई जगह बनाई है। 

ब्रैंड की बात करें तो Allen Career Inst जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान प्रिंट में सबसे ज्यादा विज्ञापन देने वाला ब्रैंड रहा। इसके बाद LIC of India दूसरे स्थान पर रहा। पूरी अवधि के दौरान प्रिंट माध्यम में 1.08 लाख से ज्यादा ब्रैंडों ने विज्ञापन दिया। शीर्ष 10 ब्रैंडों में तीन ऑटो क्षेत्र और तीन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहे।

हिंदी और अंग्रेजी प्रकाशनों का दबदबा कायम

प्रिंट विज्ञापन में भाषा के मामले में भी पिछले साल की स्थिति लगभग वैसी ही रही। शीर्ष तीन प्रकाशन भाषाओं की रैंकिंग में साल-दर-साल कोई बदलाव नहीं हुआ। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के प्रकाशनों ने मिलकर जनवरी-जुलाई 2025 और जनवरी-जुलाई 2026, दोनों अवधियों में प्रिंट विज्ञापन की मात्रा का 60% से ज्यादा हिस्सा हासिल किया।

सेल्स प्रमोशन का भी बड़ा हिस्सा

रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी-जुलाई 2026 के दौरान सेल्स प्रमोशन से जुड़े विज्ञापनों की प्रिंट ऐड स्पेस में हिस्सेदारी 28% रही।

सेल्स प्रमोशन वाले विज्ञापनों में एक साथ कई तरह के प्रमोशन (Multiple Promotion) सबसे आगे रहे, जिनकी हिस्सेदारी 45% रही। इसके बाद छूट से जुड़े प्रमोशन (Discount Promotion) का नंबर आया। दोनों प्रमोशन फॉर्मेट्स ने मिलकर सेल्स प्रमोशन से जुड़े विज्ञापनों की कुल जगह का 85% हिस्सा हासिल किया।

कुल मिलाकर, TAM AdEx के आंकड़े बताते हैं कि 2026 के पहले सात महीनों में प्रिंट विज्ञापन में मामूली गिरावट के बावजूद इस माध्यम की स्थिति काफी हद तक स्थिर रही। शिक्षा, सेवा और ऑटो जैसे क्षेत्रों का प्रिंट में दबदबा बना हुआ है, जबकि Maruti Suzuki, Allen Career Inst और LIC जैसे बड़े विज्ञापनदाताओं और ब्रैंडों की मजबूत मौजूदगी कायम है।

 

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DB Corp की AGM में 4 प्रस्ताव पास, सुधीर व पवन अग्रवाल की फिर से नियुक्ति को मंजूरी

दैनिक भास्कर समूह की कंपनी D.B. Corp Limited की 30वीं सालाना आम बैठक यानी AGM में शेयरधारकों ने बैठक में रखे गए सभी चार प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 03 September, 2026
Last Modified:
Thursday, 03 September, 2026
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दैनिक भास्कर समूह की कंपनी D.B. Corp Limited की 30वीं सालाना आम बैठक यानी AGM में शेयरधारकों ने बैठक में रखे गए सभी चार प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने 2 सितंबर 2026 को शेयर बाजारों को इसकी जानकारी दी।

कंपनी के मुताबिक, AGM 2 सितंबर को सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और दोपहर 12:48 बजे तक चली। बैठक में शेयरधारकों ने रिमोट ई-वोटिंग और AGM के दौरान हुई ई-वोटिंग के जरिए मतदान किया।

सभी चार प्रस्तावों को मिली मंजूरी

कंपनी ने बताया कि स्वतंत्र जांचकर्ता की रिपोर्ट के आधार पर AGM में रखे गए चारों प्रस्ताव जरूरी बहुमत से पास हो गए। पहले प्रस्ताव में 31 मार्च 2026 को खत्म हुए वित्त वर्ष के लिए कंपनी के ऑडिट किए गए स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय परिणामों को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव के पक्ष में 15.98 करोड़ वोट पड़े, जबकि केवल 160 वोट इसके खिलाफ रहे। यानी प्रस्ताव को करीब 99.99% वोट के साथ मंजूरी मिली।

पवन अग्रवाल की दोबारा निदेशक के रूप में नियुक्ति

दूसरे प्रस्ताव में पवन अग्रवाल की रोटेशन के आधार पर दोबारा निदेशक के रूप में नियुक्ति को मंजूरी दी गई। उन्हें दोबारा नियुक्त किए जाने के पक्ष में करीब 15.27 करोड़ वोट पड़े, जबकि करीब 9.57 लाख वोट विरोध में रहे। प्रस्ताव को 99.38% वोट मिले।

 कॉस्ट ऑडिटर के पारिश्रमिक को भी मंजूरी

तीसरे प्रस्ताव में कंपनी के कॉस्ट ऑडिटर को दिए जाने वाले पारिश्रमिक को मंजूरी देने की बात थी। इस प्रस्ताव के पक्ष में करीब 16.02 करोड़ वोट पड़े और सिर्फ 721 वोट इसके खिलाफ रहे। प्रस्ताव को करीब 99.9995% वोट के साथ मंजूरी मिली।

सुधीर अग्रवाल की फिर नियुक्ति

AGM का सबसे अहम प्रस्ताव सुधीर अग्रवाल की दोबारा नियुक्ति से जुड़ा था। शेयरधारकों ने उन्हें कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर फिर नियुक्त करने और उनके पारिश्रमिक को मंजूरी दे दी है। सुधीर अग्रवाल की नया कार्यकाल 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2031 तक यानी पांच साल तक रहेगा।

इस प्रस्ताव के पक्ष में करीब 15.28 करोड़ वोट पड़े, जबकि करीब 7.96 लाख वोट इसके खिलाफ रहे। कुल मतदान में से करीब 99.48% वोट प्रस्ताव के पक्ष में रहे।

AGM में कितने शेयरधारक जुड़े?

कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 की रिकॉर्ड डेट पर कुल 42,349 शेयरधारक थे। AGM में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 12 प्रमोटर/प्रमोटर ग्रुप और 66 सार्वजनिक शेयरधारक शामिल हुए। कंपनी ने बताया कि चारों प्रस्ताव शेयरधारकों के जरूरी बहुमत के साथ पास हो गए हैं।  

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टाटा नेतृत्व परिवर्तन से फिनटेक क्रांति तक, BW Businessworld के नए अंक में खास पड़ताल

बिजनेस मैगजीन ‘BW Businessworld’ के नवीनतम अंक में भारतीय कारोबारी जगत को प्रभावित करने वाले दो बड़े बदलावों पर विस्तृत विश्लेषण प्रकाशित किया गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 01 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
BW Magazine

जानी-मानी बिजनेस मैगजीन ‘BW Businessworld’ के नवीनतम अंक में भारतीय कारोबारी जगत को प्रभावित करने वाले दो बड़े बदलावों पर विस्तृत विश्लेषण प्रकाशित किया गया है। इनमें टाटा समूह में जारी नेतृत्व परिवर्तन और फिनटेक सेक्टर का तेजी से वित्तीय बुनियादी ढांचे (Financial Infrastructure) के रूप में उभरना शामिल है।

इस अंक की प्रमुख कवर स्टोरी ‘Back To Tata’ है, जिसमें रतन टाटा के बाद और टाटा संस के अगले चेयरमैन की नियुक्ति से पहले आकार ले रहे संस्थागत बदलावों का विश्लेषण किया गया है। इसके साथ ही BW Businessworld के Festival of Fintech 2026 पर आधारित एक विशेष फिनटेक पैकेज भी प्रकाशित किया गया है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पेमेंट्स, लेंडिंग, वेल्थटेक, इंश्योरटेक और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को विस्तार से समझाया गया है।

अगले चेयरमैन से आगे की सोच पर केंद्रित है ‘Back To Tata’: कवर स्टोरी केवल संभावित चेयरमैन उम्मीदवारों की चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल पर केंद्रित है कि भविष्य का टाटा समूह कैसा होगा और अगले पेशेवर नेता को किस तरह की जिम्मेदारियां विरासत में मिलेंगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘Back To Tata’ किसी पारिवारिक प्रबंधन व्यवस्था की वापसी का संकेत नहीं देती। इसके बजाय यह बताती है कि नोएल टाटा के नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट्स एक बार फिर उस संस्थागत केंद्र के रूप में उभरे हैं, जो समूह के दीर्घकालिक उद्देश्य, जोखिम लेने की क्षमता और पेशेवर प्रबंधन से अपेक्षाओं को स्पष्ट करने की भूमिका निभा रहे हैं।

इस विशेष पैकेज में एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल का भी आंकड़ों के आधार पर संतुलित मूल्यांकन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 के बीच टाटा समूह का राजस्व 2.1 गुना बढ़ा, जबकि कर पश्चात लाभ (PAT) में 5.4 गुना वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 2.6 गुना बढ़ा।

रिपोर्ट में समूह के नए व्यवसायों के प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला गया है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और अग्राटास (Agratas) ने वित्त वर्ष 2026 में संयुक्त रूप से लगभग 2.39 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि इनका कुल संयुक्त घाटा 29,924 करोड़ रुपये रहा।

वहीं, इस बदलाव के दौर में टाटा संस ने 31,961 करोड़ रुपये के कर पश्चात लाभ, 21,841 करोड़ रुपये की शुद्ध नकद राशि (Net Cash) और शून्य उधारी के साथ प्रवेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय क्षमता नहीं, बल्कि पूंजी आवंटन, क्रियान्वयन और संस्थागत समन्वय की है।

इस विषय पर BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ तथा एक्सचेंज4मीडिया समूह के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा ने कहा कि टाटा समूह केवल भारत की सबसे बड़ी कारोबारी संस्थाओं में से एक नहीं है, बल्कि यह उद्यम, पेशेवर प्रबंधन, स्वामित्व और सार्वजनिक उद्देश्य के बीच एक विशिष्ट संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि समूह का अगला अध्याय महत्वाकांक्षा और जवाबदेही के साथ-साथ विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के संतुलन पर आधारित होना चाहिए। कवर पैकेज में डॉ. अनुराग बत्रा के लेख भी शामिल हैं, जिनमें नोएल टाटा की भूमिका को एक ऑपरेटर, निर्माता और टाटा मूल्यों के संरक्षक के रूप में परखा गया है।

वित्तीय सेवाएं बन रही हैं बुनियादी ढांचा: इस अंक का फिनटेक विशेषांक ‘The Infrastructuralisation Of Finance’ शीर्षक से प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तीय सेवाओं को उपभोक्ता केंद्रित सेवाओं से आगे बढ़ाकर आधुनिक अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे में बदल रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, UPI, Aadhaar, Account Aggregators, ONDC और Open Credit Enablement Network (OCEN) जैसे प्लेटफॉर्म और प्रणालियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से, भुगतान, ऋण, बीमा और निवेश जैसी सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ गहराई से जोड़ रही हैं।

विशेष पैकेज में यह भी बताया गया है कि वित्तीय सेवाएं अब धीरे-धीरे उपभोक्ताओं के लिए अदृश्य लेकिन हर जगह मौजूद बुनियादी व्यवस्था बनती जा रही हैं। इसका प्रभाव यात्रा बुकिंग, ई-कॉमर्स, सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म, गिग इकॉनमी और एंटरप्राइज सिस्टम्स तक देखा जा सकता है।

रिपोर्ट में MSMEs, पहली बार ऋण लेने वाले ग्राहकों और वित्तीय रूप से कम सेवाएं प्राप्त करने वाले वर्गों के लिए उभर रहे अवसरों का भी विश्लेषण किया गया है। इसमें यह समझाया गया है कि सहमति आधारित कैश-फ्लो डेटा किस तरह पारंपरिक जमानत और क्रेडिट इतिहास का पूरक बन रहा है।

इस विश्लेषण में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) की प्रबंध निदेशक एवं सीईओ प्रवीणा राय सहित भुगतान, एम्बेडेड फाइनेंस, डिजिटल सार्वजनिक प्रणालियों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कई विशेषज्ञों के विचार शामिल किए गए हैं।

‘India’s Fintech Architects’ को भी मिली जगह: फिनटेक विशेषांक में ‘India’s Fintech Architects’ शीर्षक के तहत उन संगठनों और उद्योग नेताओं को भी स्थान दिया गया है, जिन्हें BW Businessworld Festival of Fintech 2026 में सम्मानित किया गया।

इन पुरस्कारों के माध्यम से लेंडिंग प्लेटफॉर्म, पेमेंट सॉल्यूशंस, वित्तीय समावेशन, ग्राहक अनुभव, फिनटेक उत्पाद, वेल्थटेक, इंश्योरटेक, फिनटेक में एआई के उपयोग, स्टार्टअप्स और नवाचार के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन को मान्यता दी गई। पुरस्कारों के लिए प्राप्त प्रविष्टियों का मूल्यांकन नवाचार, कारोबारी प्रभाव, विस्तार क्षमता, ग्राहक मूल्य, सुशासन, तकनीकी उत्कृष्टता, बाजार में अलग पहचान और व्यापक वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान जैसे मानकों के आधार पर किया गया।

BW Businessworld की ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर नूर फातिमा वारसिया ने कहा कि टाटा समूह और फिनटेक, दोनों ही वर्तमान समय में महत्वपूर्ण संस्थागत बदलावों के दौर से गुजर रहे हैं। एक ओर टाटा समूह अपने अगले चरण के लिए स्वामित्व, उद्देश्य और पेशेवर प्रबंधन के संतुलन को परिभाषित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर फिनटेक क्षेत्र व्यवधान पैदा करने वाले उद्योग से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे और संस्थान निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। BW Businessworld का यह नवीनतम अंक डिजिटल और प्रिंट दोनों फॉर्मेट्स में उपलब्ध है। 

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पाठकों को अब पढ़ने को नहीं मिलेगा ‘सांध्य टाइम्स’, 46 साल का थमा सफर

अंतिम अंक में प्रकाशित संपादकीय ‘अलविदा नहीं, जुड़ाव की नई शुरुआत’ के जरिए अखबार ने पाठकों को भावुक संदेश देते हुए अपनी यात्रा के एक नए पड़ाव की घोषणा की।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 31 August, 2026
Last Modified:
Monday, 31 August, 2026
Sandhya Times

दिल्ली-एनसीआर की शामों को खबरों से जोड़ने वाला हिंदी का चर्चित शाम का अखबार ‘सांध्य टाइम्स’ अब प्रकाशित नहीं होगा। करीब 46 वर्षों तक पाठकों तक दिनभर की ताजा खबरें पहुंचाने वाले इस अखबार ने अपने अंतिम संस्करण के साथ प्रकाशन पर विराम लगा दिया। अंतिम अंक में प्रकाशित संपादकीय ‘अलविदा नहीं, जुड़ाव की नई शुरुआत’ के जरिए अखबार ने पाठकों को भावुक संदेश देते हुए अपनी यात्रा के एक नए पड़ाव की घोषणा की।

संपादकीय में कहा गया है कि पिछले 46 वर्षों से दिल्ली-एनसीआर की हर हलचल, विचार और जनसरोकार के मुद्दों पर अखबार ने अपने पाठकों के साथ एक मजबूत रिश्ता कायम किया। बदलते दौर और सूचना के नए माध्यमों के विस्तार के बीच पत्रकारिता की इस यात्रा को अब एक नए मोड़ पर ले जाने का फैसला किया गया है। हालांकि अखबार ने यह भी स्पष्ट किया कि जनसरोकार, निष्पक्षता और लोगों की आवाज बनने का उसका संकल्प आगे भी बना रहेगा।

करीब 46 वर्षों तक प्रकाशित रहा सांध्य टाइम्स राजधानी में हिंदी शाम के अखबार की एक मजबूत पहचान बनकर उभरा था। उस दौर में जब डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल न्यूज का चलन नहीं था, तब दफ्तरों से लौटते लोगों और बाजारों में मौजूद पाठकों के लिए दिनभर की ताजा खबरों का प्रमुख माध्यम सांध्य टाइम्स ही हुआ करता था। स्थानीय खबरों, नागरिक समस्याओं, अपराध, राजनीति और जनहित के मुद्दों पर इसकी विशेष पकड़ मानी जाती थी।

टाइम्स समूह के इस प्रकाशन ने दिल्ली-एनसीआर की स्थानीय पत्रकारिता को मजबूत पहचान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और लंबे समय तक राजधानी के पाठकों के बीच लोकप्रिय बना रहा।

अंतिम संस्करण के प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर भी पत्रकारों, पूर्व कर्मचारियों और पाठकों ने अपनी यादें साझा कीं। कई लोगों ने इसे हिंदी पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण अध्याय के अंत के रूप में देखा। अखबार के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी अंतिम संस्करण को लेकर पोस्ट साझा की गई, जिस पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। 

अंतिम अंक में प्रकाशित संपादकीय 'अलविदा नहीं, जुड़ाव की नई शुरुआत' में सांध्य टाइम्स ने अपने पाठकों को यह संदेश दिया:

पिछले 46 वर्षों से दिल्ली-एनसीआर की हर धड़कन की खबरों, विचारों और आपसे जुड़े तमाम मुद्दों पर बेखौफ कलम से रोशनी करने वाला आपका अखबार 'सांध्य टाइम्स' अब अपनी इस यात्रा को विराम दे रहा है। चार दशकों से भी लंबे इस अटूट रिश्ते से आपने हमें जो प्यार, विश्वास और अपनापन दिया, उसके लिए हम आपके सदैव आभारी रहेंगे।

पिछले दिनों लगातार आठ सप्ताह तक चले एक जटिल संघर्ष के बावजूद हम डटे रहे। बदलते दौर और सूचना के नए माध्यमों के साथ हमने अपनी पत्रकारिता यात्रा को एक नए मोड़ देने का निर्णय लिया है।

'सांध्य टाइम्स' के पन्ने भले ही अब आपके हाथों में न हों, लेकिन जनसरोकार, निष्पक्षता और आपकी आवाज बनने का हमारा संकल्प कायम रहेगा।

हमारा और आपका यह सफर यहीं समाप्त नहीं होता। आप 'नवभारत टाइम्स' (NBT) के माध्यम से हमारे साथ लगातार जुड़े रहेंगे। आपकी समस्याएं, आपके मुद्दे और आपके शहर की हर खबर को पहले की तरह पूरी मजबूती और प्रामाणिकता के साथ नवभारत टाइम्स से उठाते रहेंगे।

46 वर्षों के इस शानदार सफर में हमारा साथी बनने के लिए आप सभी पाठकों का हृदय से धन्यवाद।

— संपादकीय टीम, सांध्य टाइम्स

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जागरण प्रकाशन को GST से जुड़े मामले में मिला नोटिस, कंपनी ने कहा- मजबूत है केस

English Headline जागरण प्रकाशन को हरियाणा के हिसार के एक्साइज व टैक्सेशन ऑफिसर की ओर से ₹21.73 लाख के कथित GST बकाये को लेकर कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) मिला है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 28 August, 2026
Last Modified:
Friday, 28 August, 2026
JagranPrakashan9856

जागरण प्रकाशन (Jagran Prakashan Limited) को हरियाणा के हिसार के एक्साइज व टैक्सेशन ऑफिसर की ओर से ₹21.73 लाख के कथित GST बकाये को लेकर कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) मिला है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि यह नोटिस 26 अगस्त 2026 को प्राप्त हुआ है।

यह नोटिस Central Goods and Services Tax Act, 2017 की धारा 74 के तहत जारी किया गया है। इसमें कंपनी से पूछा गया है कि कथित GST मांग के साथ धारा 50 के तहत ब्याज और धारा 74 के तहत जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए।

2020-21 की अवधि से जुड़ा है मामला

कंपनी के मुताबिक, यह मामला वित्त वर्ष 2020-21 की अवधि से संबंधित है। नोटिस में मुख्य तौर पर कंपनी की ओर से लिए गए Input Tax Credit (ITC) की पात्रता को लेकर टैक्स भुगतान या स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि, जागरण प्रकाशन ने कहा है कि कानूनी सलाह लेने के बाद उसका मानना है कि यह कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) टिकाऊ नहीं है और मामले में कंपनी का पक्ष मजबूत है।

तय समय में देगी जवाब

कंपनी ने बताया कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर इस नोटिस का उचित जवाब दाखिल करेगी। साथ ही, जरूरत पड़ने पर कंपनी इस मामले के खिलाफ दूसरे कानूनी विकल्पों पर भी विचार करेगी।

कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर असर नहीं

जागरण प्रकाशन ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा स्थिति में इस नोटिस का कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार या अन्य गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी के अनुसार, कानूनी सलाह के आधार पर उसका मानना है कि नोटिस में उठाई गई मांग उचित नहीं है और उसके पास मामले में मजबूत आधार हैं। इसलिए फिलहाल इस नोटिस से किसी वित्तीय प्रभाव की आशंका नहीं है।

कंपनी ने यह जानकारी SEBI Listing Regulations के Regulation 30 के तहत शेयर बाजारों को दी है।

 

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