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डीडी फ्री डिश और D2M के जरिए ब्रॉडकास्ट सिस्टम को मजबूत करना चाहती है सरकार: संजय जाजू
देश का आम बजट एक फरवरी को पेश किया जाना है और इससे पहले अलग-अलग इंडस्ट्री की तरह प्रिंट मीडिया इंडस्ट्री की निगाहें भी सरकार पर टिकी हुई हैं।
Vikas Saxena 1 month ago
सूचना और प्रसारण मंत्रालय इंटरनेट और प्लेटफॉर्म आधारित सिस्टम पर निर्भरता कम करने के लिए नए डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल को आगे बढ़ा रहा है। मंत्रालय का फोकस डीडी फ्री डिश और डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M) ब्रॉडकास्टिंग पर है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कंटेंट पहुंचाया जा सके। यह बात सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू ने BES Expo 2026 में कही।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय जाजू ने कहा कि सैटेलाइट और जमीन आधारित ब्रॉडकास्ट सिस्टम अगर साथ मिलकर काम करें तो कंटेंट की पहुंच और बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही इससे देश में अपना मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सिस्टम तैयार करने में भी मदद मिलेगी जिसे आगे चलकर दुनिया अपना सकती है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ डीडी फ्री डिश है और दूसरी तरफ D2M ब्रॉडकास्टिंग। इन दोनों के जरिए भारत एक मजबूत लोकल मैन्युफैक्चरिंग स्टैक बना सकता है। उन्होंने ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी से जुड़े लोगों से इस दिशा में सहयोग करने की अपील भी की।
संजय जाजू ने बताया कि अब बाजार में बिकने वाले कई टीवी सेट्स में डीडी फ्री डिश का ट्यूनर पहले से ही लगा आ रहा है। इससे लोगों के लिए ब्रॉडकास्ट सर्विस और सरकारी चैनल देखना और भी आसान हो जाएगा। उनका कहना था कि डिजिटल सिस्टम के साथ-साथ ब्रॉडकास्ट डिस्ट्रीब्यूशन को मजबूत करना जरूरी है ताकि ज्यादा भरोसेमंद और व्यापक पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
टेक्नोलॉजी को लेकर उन्होंने कहा कि ब्रॉडकास्ट सेवाओं में स्पेक्ट्रम का सही और बेहतर इस्तेमाल बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ बेहतर क्वालिटी मिलेगी बल्कि सिस्टम ज्यादा मजबूत होगा और जनता को भी ज्यादा फायदा पहुंचेगा।
डिजिटल रेडियो को लेकर संजय जाजू ने कहा कि इस दिशा में रेगुलेटरी सिफारिशें और ट्रायल पहले ही हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि TRAI ने एफएम बैंड में खाली पड़े स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल की सिफारिश की है और अब बड़े शहरों में डिजिटल रेडियो शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।
उन्होंने मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर को एक बड़ा और रोजगार देने वाला क्षेत्र बताया। उनके अनुसार टीवी, डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म, रेडियो, सिनेमा, AVGC, OTT, विज्ञापन और क्रिएटर इकोनॉमी को मिलाकर करीब एक करोड़ लोग सीधे या परोक्ष रूप से इस इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं।
संजय जाजू ने यह भी कहा कि देश में करीब 30 लाख लोग कंटेंट बना रहे हैं जिन्हें क्रिएटर या इंफ्लुएंसर कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हाइपरलोकल डिजिटल आवाजें अब ब्रांड्स तक पहुंचने में अहम भूमिका निभा रही हैं।
भविष्य की मीडिया इंडस्ट्री को लेकर उन्होंने कहा कि अब कंवर्जेंस का दौर है। मीडिया कंपनियां अब अलग-अलग नहीं बल्कि ब्रॉडकास्ट, प्रिंट, ऑनलाइन और डिजिटल वीडियो सभी प्लेटफॉर्म पर एक साथ काम कर रही हैं।
रेगुलेशन और अनुपालन को लेकर संजय जाजू ने कहा कि सरकार का फोकस प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने पर है। उन्होंने ब्रॉडकास्ट सेवा पोर्टल का जिक्र किया जो करीब 950 ब्रॉडकास्टर्स के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम के तौर पर काम कर रहा है। इसका मकसद लाइसेंस और नियमों से जुड़ी परेशानियां कम करना है ताकि सार्वजनिक हित भी सुरक्षित रहे।
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