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CJI एनवी रमना की मीडिया को सलाह, तथ्यों को सामने रखना है जिम्मेदारी
भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने मंगलवार 26 जुलाई को पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की लिखी किताब 'गीता विज्ञान उपनिषद' का विमोचन किया।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 3 years ago
भारत के चीफ जस्टिस एनवी रमना ने मंगलवार 26 जुलाई को पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की लिखी किताब 'गीता विज्ञान उपनिषद' (Geeta Vigyan Upanishad) का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि मीडिया को खुद को ईमानदार पत्रकारिता तक ही सीमित रखना चाहिए। पत्रकारिता को अपने प्रभाव व व्यावसायिक हितों का विस्तार करने के लिए एक साधन के रूप में उपयोग नहीं करना चाहिए।
चीफ जस्टिस रमना ने कहा कि तथ्यों को समाज के सामने पेश करने की जिम्मेदारी मीडिया घरानों की होती है। उनका कहना है कि हमारे देश और भारतीय समाज में लोग इसे ही सच मानते हैं।
उन्होंने कहा कि 'अन्य व्यावसायिक हितों' वाला मीडिया घराना बाहरी दबावों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। उन्होंने कहा कि अक्सर व्यावसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता की भावना पर हावी हो जाते हैं, जिसके चलते लोकतंत्र से समझौता हो जाता है।
'गीता विज्ञान उपनिषद' के विमोचन कार्यक्रम के दौरान चीफ जस्टिस एनवी रमना ने स्वतंत्र पत्रकारिता को लोकतंत्र की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि पत्रकार जनता की आंख और कान होते हैं। तथ्यों को पेश करना मीडिया घरानों की जिम्मेदारी है, विशेष रूप से भारतीय सामाजिक परिदृश्य में, लोग अब भी मानते हैं कि जो कुछ भी छपा है वह सच है। मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि मीडिया घरानों को अपने प्रभाव और व्यावसायिक हितों का विस्तार करने के लिए पत्रकारिता को एक साधन के रूप में उपयोग किए बिना खुद को ईमानदार पत्रकारिता तक ही सीमित रखना चाहिए।
एनवी रमना ने याद करते हुए कहा कि व्यावसायिक हितों के बिना भी मीडिया घराने, आपातकाल के काले दिनों में लोकतंत्र के लिए लड़ने में सक्षम थे।
चीफ जस्टिस ने साथ ही यह भी कहा कि अपनी भाषाओं को वह सम्मान देकर जिसकी वे हकदार हैं और युवाओं को ऐसी भाषाओं में सीखने व सोचने के लिए प्रोत्साहित करके राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना उनके दिल के बेहद करीब है।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते भी चीफ जस्टिस ने इसी तरह की चिंताएं जाहिर करते हुए कहा था कि मीडिया की ओर से 'एजेंडा आधारित बहसें' और 'कंगारू कोर्ट' चलाए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं। न्यायमूर्ति रमना ने मंगलवार को कहा था, 'जब किसी मीडिया हाउस के अन्य व्यावसायिक हित होते हैं, तो वह बाहरी दबावों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। अक्सर, व्यावसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता की भावना पर हावी हो जाते हैं। नतीजतन, लोकतंत्र से समझौता हो जाता है।'
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